रांची: झारखंड के युवाओं और चयनित अभ्यर्थियों के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा (CGL)-2023 को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट के इस महत्वपूर्ण निर्णय से राज्य के 2,000 से अधिक सफल और चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य पर मंडरा रहा खतरा टल गया है।
न्यायालय के इस आदेश को नौकरी की आस लगाए बैठे युवाओं के लिए एक बड़ा कानूनी न्याय और त्योहार के माहौल में बड़ी सौगात के रूप में देखा जा रहा है।
क्या था पूरा मामला?
विदित हो कि झारखंड सरकार द्वारा JSSC-CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों के आरोपों के मद्देनजर विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत आयोजित इस पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द करने की अधिसूचना जारी की गई थी। सरकार के इस एकतरफा फैसले के खिलाफ कई चयनित अभ्यर्थियों—जिनमें रमेश उरांव, आकाश गौरव, और निरोज खेस समेत अन्य प्रार्थी शामिल हैं—ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व महाधिवक्ता राजीव रंजन तथा अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने मजबूती से पक्ष रखा। वहीं, दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी दलीलें पेश कीं। दोनों पक्षों की ओर से लंबी और विस्तृत बहस पूरी होने के बाद, जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
अदालत का फैसला और कानूनी पहलू
मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने के लिए जारी की गई अधिसूचना को विधि सम्मत नहीं पाया और उसे निरस्त कर दिया। अदालत के इस रुख से स्पष्ट हो गया है कि बिना पुख्ता और ठोस कानूनी आधार के पहले से पूरी हो चुकी चयन प्रक्रियाओं और सफल अभ्यर्थियों के करियर को इस तरह से दांव पर नहीं लगाया जा सकता।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब उन 2,300 के करीब चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है, जो परीक्षा परिणाम आने के बाद अपनी तैनाती का इंतजार कर रहे थे। इस फैसले से न केवल सफल अभ्यर्थियों में खुशी की लहर दौड़ गई है, बल्कि राज्यभर के नौकरीपेशा और प्रतियोगी छात्रों के बीच यह चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।
अभ्यर्थियों में जश्न का माहौल
फैसला आने के बाद रांची समेत पूरे झारखंड के छात्र-छात्राओं और सफल अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने कड़ी मेहनत के बाद इस मुकाम को हासिल किया था और परीक्षा रद्द होने से उनका मनोबल टूट रहा था, लेकिन न्यायपालिका ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सत्य और मेहनत की हमेशा जीत होती है।
