जेयूटी के दो शिक्षक टॉप 2 प्रतिशत वैज्ञानिक:
उपशीर्षक: बीआईटी सिंदरी और राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय, पलामू के शिक्षकों को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान; ऊर्जा, यांत्रिकी और पदार्थ विज्ञान में शोध का मिला सम्मान
रांची: झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (JUT) से संबद्ध इंजीनियरिंग संस्थानों के दो शिक्षकों ने वैश्विक स्तर पर राज्य का नाम रोशन किया है। बीआईटी सिंदरी और राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय, पलामू से जुड़े शिक्षकों को दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल किया गया है। यह उपलब्धि झारखंड में उच्च शिक्षा और इंजीनियरिंग क्षेत्र में हो रहे शोध कार्यों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वैज्ञानिकों की इस सूची में शोधकर्ताओं का चयन उनके शोध प्रकाशनों, शोध के प्रभाव और वैज्ञानिक योगदान के आधार पर किया जाता है। जेयूटी से जुड़े शिक्षकों की उपलब्धि से राज्य के इंजीनियरिंग संस्थानों में शोध गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
बीआईटी सिंदरी के शिक्षक को ऊर्जा क्षेत्र में पहचान
बीआईटी सिंदरी के इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े सहायक प्राध्यापक कौशिक पाल का नाम दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिकों की सूची में शामिल किया गया है। उनका शोध क्षेत्र ऊर्जा से संबंधित है।
बताया गया है कि उनके शोध कार्य को अलग-अलग वर्षों और शोध प्रभाव की श्रेणियों में स्थान मिला है। ऊर्जा के क्षेत्र में उनका शोध आधुनिक तकनीक और ऊर्जा से जुड़ी चुनौतियों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ऊर्जा क्षेत्र में लगातार बढ़ती जरूरतों के बीच ऐसे शोध कार्यों का महत्व और बढ़ गया है। उनके शोध की अंतरराष्ट्रीय पहचान से बीआईटी सिंदरी में चल रही शोध गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
पलामू इंजीनियरिंग कॉलेज के शिक्षक भी सूची में
राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय, पलामू में कार्यरत सहायक प्राध्यापक योगेश कुमार प्रजापति को भी दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल किया गया है। उन्हें मैकेनिकल इंजीनियरिंग और परिवहन से संबंधित शोध के लिए पहचान मिली है।
उनके शोध कार्यों को विभिन्न वर्षों में दीर्घकालिक शोध प्रभाव और वार्षिक शोध प्रभाव की श्रेणियों में स्थान मिला है। इससे पलामू जैसे अपेक्षाकृत नए इंजीनियरिंग संस्थान के लिए भी यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है।
शोध प्रभाव के आधार पर मिलती है पहचान
वैज्ञानिकों की वैश्विक सूची में शोधकर्ताओं के योगदान को अलग-अलग मानकों के आधार पर देखा जाता है। इनमें शोध पत्रों की संख्या, शोध कार्यों का प्रभाव और अन्य वैज्ञानिकों द्वारा उनके शोध का उपयोग जैसे पहलू महत्वपूर्ण होते हैं।
खबर के अनुसार, स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर से संबंधित वैज्ञानिकों की सूची में शोधकर्ताओं का आकलन विभिन्न उद्धरण-आधारित संकेतकों के माध्यम से किया गया। इसमें किसी वैज्ञानिक के पूरे शोध करियर के प्रभाव के साथ-साथ एक विशेष वर्ष में किए गए शोध के प्रभाव को भी देखा जाता है।
इस उपलब्धि से यह संकेत मिलता है कि जेयूटी से जुड़े शिक्षकों के शोध कार्यों का प्रभाव संस्थान और राज्य की सीमाओं से आगे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रहा है।
विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं को मिलेगा प्रोत्साहन:जेयूटी के दो शिक्षक टॉप 2 प्रतिशत वैज्ञानिक
शिक्षकों की इस उपलब्धि का सीधा फायदा विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं को भी मिल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी संस्थान के शिक्षक अंतरराष्ट्रीय शोध में पहचान बनाते हैं, तो वहां शोध संस्कृति को मजबूत करने में मदद मिलती है।
छात्रों को वैज्ञानिक जिज्ञासा, नवाचार और अंतरविषयक शोध की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा मिल सकती है। इससे झारखंड के इंजीनियरिंग संस्थानों में नई तकनीकों और प्रयोगात्मक शोध को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
जेयूटी से जुड़े शिक्षकों की यह उपलब्धि राज्य के तकनीकी शिक्षा संस्थानों के लिए भी उत्साहजनक है। आने वाले समय में यदि संस्थानों में शोध के लिए बेहतर संसाधन और अवसर उपलब्ध होते हैं, तो और अधिक शिक्षक तथा शोधकर्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
जेयूटी के दो शिक्षक टॉप 2 प्रतिशत वैज्ञानिक: दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल, वैश्विक स्तर पर बढ़ा झारखंड का मान
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