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रांची, 8 सितंबर 2026: झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) के तहत मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और अद्यतन बनाने की प्रक्रिया जारी है। इसी क्रम में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने राज्य के सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक कर मतदाता सूची, दावा-आपत्ति, सुनवाई, युवा मतदाता पंजीकरण और निर्वाचन सेवाओं से जुड़े कार्यों की विस्तृत समीक्षा की।
बैठक में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि दावा-आपत्ति की सुनवाई के दौरान अनावश्यक भीड़ नहीं लगनी चाहिए। एक साथ बड़ी संख्या में लोगों को बुलाने के बजाय टोकन सिस्टम लागू कर क्रमवार सुनवाई कराने को कहा गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिले और दस्तावेजों तथा उपलब्ध तथ्यों की जांच के बाद नियमों के अनुसार निर्णय लिया जाए।
इसके साथ ही उन्होंने ऐसे मतदान केंद्रों पर विशेष निगरानी रखने को कहा, जहां शून्य या केवल 1 से 5 Form-6 प्राप्त हुए हैं। इन मतदान केंद्रों की मतदान केंद्रवार समीक्षा कर यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि ऐसे सभी पात्र भारतीय नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल हो, जो 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं।
भारत निर्वाचन आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर भी 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके या आने वाले महीनों में 18 वर्ष के होने वाले पात्र नागरिकों के लिए Form-6 के माध्यम से नए मतदाता पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है।
दावा-आपत्ति की सुनवाई में अब टोकन सिस्टम पर जोर
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने अधिकारियों को सबसे पहले दावा-आपत्ति और सुनवाई की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने का निर्देश दिया।
SIR के दौरान मतदाता सूची से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में दावे और आपत्तियां प्राप्त हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में यदि सभी लोगों को एक साथ सुनवाई के लिए बुलाया जाता है तो निर्वाचन कार्यालयों में भीड़ बढ़ सकती है और लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है।
इसी समस्या को देखते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि टोकन सिस्टम के माध्यम से क्रमवार सुनवाई कराई जाए।
इस व्यवस्था में लोगों को एक निर्धारित क्रम या टोकन नंबर दिया जा सकता है, जिसके आधार पर उनकी सुनवाई होगी। इससे कार्यालयों में अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करने के साथ-साथ प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने का पर्याप्त समय दिया जा सकेगा।
निर्वाचन अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि सुनवाई केवल औपचारिकता न बने। संबंधित व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों, दावों और उपलब्ध तथ्यों की उचित जांच के बाद ही निर्णय लिया जाए।
हर व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मिलेगा मौका
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि दावा-आपत्ति की सुनवाई के दौरान प्रत्येक व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए।
मतदाता सूची से जुड़ा कोई भी निर्णय व्यक्ति के मतदान के अधिकार से संबंधित हो सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी रखना महत्वपूर्ण है।
यदि किसी व्यक्ति ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने, नाम में सुधार, किसी प्रविष्टि पर आपत्ति या किसी अन्य निर्वाचन संबंधी मामले में दावा किया है तो उसके दस्तावेजों और तथ्यों की जांच जरूरी होगी।
इसीलिए अधिकारियों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने का निर्देश दिया गया है।
लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करें अधिकारी
के. रवि कुमार ने जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि दावा-आपत्ति और सुनवाई से संबंधित लंबित मामलों की नियमित समीक्षा की जाए।
जिला स्तर पर यह भी देखा जाए कि प्रतिदिन कितने मामलों का निष्पादन हो रहा है और कितने मामले अभी लंबित हैं।
इससे उन मामलों की पहचान की जा सकेगी, जिनमें किसी कारण से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने समयबद्ध तरीके से मामलों के निपटारे पर जोर दिया, ताकि SIR से संबंधित प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबित न रहे।
शून्य और 1 से 5 Form-6 वाले मतदान केंद्रों पर विशेष नजर
बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्देश उन मतदान केंद्रों के संबंध में दिया गया जहां शून्य या केवल 1 से 5 Form-6 प्राप्त हुए हैं।
Form-6 नए मतदाता के रूप में नाम शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक Form-6 में नए मतदाता के रूप में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन की व्यवस्था है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने ऐसे मतदान केंद्रों की मतदान केंद्रवार समीक्षा करने का निर्देश दिया।
इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या इन क्षेत्रों में वास्तव में नए पात्र मतदाताओं की संख्या बहुत कम है या पात्र नागरिकों की पहचान और पंजीकरण की प्रक्रिया में कोई कमी रह गई है।
1 अक्टूबर तक 18 वर्ष पूरा करने वाले युवाओं पर विशेष ध्यान
बैठक का एक महत्वपूर्ण निर्देश युवा मतदाताओं से संबंधित रहा।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि ऐसे नए और युवा पात्र भारतीय नागरिकों की पहचान की जाए, जिनकी आयु 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष पूरी हो रही है, लेकिन उनका नाम अभी तक मतदाता सूची में दर्ज नहीं है।
भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार वर्ष में चार qualifying dates—1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर—के आधार पर 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पात्र नागरिक मतदाता के रूप में पंजीकरण करा सकते हैं।
इसलिए 1 अक्टूबर 2026 की qualifying date के संदर्भ में पात्र युवाओं की पहचान और उनका पंजीकरण महत्वपूर्ण है।
BLO के माध्यम से पात्र युवाओं की पहचान
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि Booth Level Officer यानी BLO के माध्यम से ऐसे पात्र युवाओं की पहचान की जाए।
BLO मतदान केंद्र स्तर पर मतदाता सूची से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर पात्र नए मतदाताओं की पहचान करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जिन युवाओं की उम्र 1 अक्टूबर तक 18 वर्ष पूरी हो रही है और वे अन्य निर्धारित शर्तें पूरी करते हैं, उनसे आवश्यक प्रक्रिया के तहत Form-6 और संबंधित घोषणा-पत्र प्राप्त किया जाए।
इसके बाद नियमानुसार उनके नाम मतदाता सूची में शामिल करने की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि SIR और मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य यह भी होना चाहिए कि कोई पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे।
मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार है। इसमें पात्र नागरिकों का नाम सही तरीके से शामिल होना जरूरी है।
इसके लिए अधिकारियों को मतदान केंद्र स्तर तक निगरानी रखने और नए पात्र मतदाताओं की पहचान करने को कहा गया है।
खासकर ऐसे क्षेत्रों में जहां Form-6 की संख्या बहुत कम है, वहां अतिरिक्त ध्यान देने का निर्देश दिया गया है।
साहेबगंज में सामने आई अनियमितता की पुनरावृत्ति रोकने पर जोर
बैठक में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने साहेबगंज में सामने आई अनियमितता का भी उल्लेख किया।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसी किसी भी अनियमितता की पुनरावृत्ति दूसरे जिलों में नहीं होनी चाहिए।
इसके लिए आवेदन, दस्तावेज, सत्यापन और निर्वाचन डेटा की प्रभावी निगरानी करने को कहा गया है।
किसी भी स्तर पर यदि नियमों के विपरीत गतिविधि सामने आती है तो उस पर तत्काल निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
इससे यह संकेत मिलता है कि निर्वाचन विभाग SIR से जुड़े डेटा और दस्तावेजों की गुणवत्ता को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहा है।
आवेदन से लेकर डेटा तक निगरानी जरूरी
मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में केवल आवेदन प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है। आवेदन में दिए गए विवरण, दस्तावेज, पात्रता और सत्यापन की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है।
इसीलिए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने आवेदन से लेकर निर्वाचन डेटा तक निगरानी रखने पर जोर दिया।
यदि किसी आवेदन में कोई संदेहास्पद जानकारी मिलती है तो उसकी नियमानुसार जांच की जानी चाहिए।
इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय बनाना है।
19 और 20 नवंबर के ELC कार्यक्रमों की तैयारी अभी से
बैठक में केवल SIR और मतदाता सूची की समीक्षा ही नहीं की गई। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने 19 एवं 20 नवंबर को होने वाले राज्यस्तरीय ELC कार्यक्रमों की तैयारियां भी अभी से शुरू करने का निर्देश दिया।
ELC यानी Electoral Literacy Club का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं में चुनावी साक्षरता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर जागरूकता बढ़ाना है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन कार्यक्रमों की तैयारी अंतिम समय पर शुरू न की जाए, बल्कि पहले से योजना तैयार कर ली जाए।
ELC Coordinator की नियुक्ति का निर्देश
उन्होंने प्रत्येक स्तर पर ELC Coordinator नियुक्त करने और उसकी स्पष्ट जिम्मेदारी तय करने को कहा।
कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी स्पष्ट होने से कार्यक्रमों की तैयारी, स्कूल-कॉलेज से समन्वय, विद्यार्थियों की भागीदारी और जागरूकता गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
राज्यस्तरीय कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने के लिए जिला स्तर से लेकर स्कूल और कॉलेज स्तर तक समन्वित योजना तैयार करने पर जोर दिया गया।
स्कूल-कॉलेजों में ECINET का प्रचार
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्कूल और कॉलेज स्तर पर ECINET के व्यापक प्रचार-प्रसार का निर्देश दिया।
ECINET निर्वाचन आयोग का एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से मतदाताओं और निर्वाचन से जुड़े विभिन्न पक्षों के लिए कई सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
निर्वाचन आयोग के अनुसार ECINET में voter registration, electoral roll search, application tracking, निर्वाचन अधिकारियों से संपर्क, Book-a-Call with BLO, e-EPIC और grievance redressal जैसी सेवाओं को एकीकृत किया गया है।
इसलिए स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों और युवा मतदाताओं को इन डिजिटल सुविधाओं की जानकारी देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
युवाओं को डिजिटल मतदाता सेवाओं की जानकारी
आज बड़ी संख्या में युवा डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में मतदाता पंजीकरण और निर्वाचन सेवाओं को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने का उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाना है।
स्कूल-कॉलेजों में ECINET की जानकारी देने से युवा यह जान सकेंगे कि—
- मतदाता पंजीकरण कैसे किया जा सकता है।
- अपना नाम मतदाता सूची में कैसे देखा जा सकता है।
- आवेदन की स्थिति कैसे ट्रैक की जा सकती है।
- निर्वाचन संबंधी शिकायत कैसे दर्ज की जा सकती है।
- BLO से संपर्क कैसे किया जा सकता है।
- उपलब्ध डिजिटल निर्वाचन सेवाओं का उपयोग कैसे किया जा सकता है।
ECI के नागरिक सेवा पोर्टल पर नए मतदाता पंजीकरण के लिए Form-6 की सुविधा भी उपलब्ध है।
NVSP की शिकायतों का तेजी से होगा निपटारा
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने NVSP पर प्राप्त शिकायतों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन का निर्देश दिया।
मतदाता सेवाओं से संबंधित शिकायतें और आवेदन यदि लंबे समय तक लंबित रहते हैं तो इससे नागरिकों को परेशानी हो सकती है।

इसलिए जिला स्तर पर ऐसे मामलों की नियमित मॉनिटरिंग करने और यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि कोई भी मामला अनावश्यक रूप से लंबित न रहे।
निर्वाचन आयोग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार मतदाता सेवाओं के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से नए पंजीकरण, आवेदन की स्थिति और अन्य निर्वाचन सेवाओं का उपयोग किया जा सकता है।
ECINET के ‘Book a Call’ फीचर पर भी जोर
बैठक में ECINET के ‘Book a Call’ फीचर को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिया गया।
यदि किसी मतदाता को मतदाता सूची या निर्वाचन सेवा से जुड़ी समस्या है तो वह उपलब्ध डिजिटल माध्यम से BLO से संपर्क करने के लिए Book-a-Call सुविधा का इस्तेमाल कर सकता है।
भारत निर्वाचन आयोग ने पहले भी Book-a-Call with BLO सुविधा के माध्यम से नागरिकों को अपने संबंधित BLO से संपर्क करने की सुविधा की जानकारी दी है। आयोग ने निर्वाचन अधिकारियों को ऐसे अनुरोधों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करने को कहा था।
इसलिए झारखंड में भी इस सुविधा के माध्यम से आने वाली शिकायतों और समस्याओं पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
शिकायतों को सिर्फ दर्ज नहीं, समाधान भी जरूरी
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने अधिकारियों को केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं रहने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि शिकायतों का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन होना चाहिए।
इसका अर्थ है कि शिकायत की वास्तविक समस्या को समझकर निर्धारित नियमों के अनुसार समाधान किया जाए और मामले को बिना वजह लंबित न रखा जाए।
जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को इन मामलों की नियमित समीक्षा करने को कहा गया है।
SIR की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
बैठक में बार-बार पारदर्शिता और समयबद्धता पर जोर दिया गया।
SIR जैसे बड़े पुनरीक्षण अभियान में बड़ी मात्रा में मतदाता डेटा, आवेदन और दस्तावेजों से जुड़े कार्य होते हैं। इसलिए पूरी प्रक्रिया में नियमों का पालन और रिकॉर्ड का सही रखरखाव महत्वपूर्ण है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने अधिकारियों से भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप काम करने को कहा।
इसका उद्देश्य मतदाता सूची में पात्र नागरिकों का समावेश सुनिश्चित करने के साथ-साथ गलत या अपात्र प्रविष्टियों को लेकर भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करना है।
Form-6 क्या है और किसके लिए जरूरी है?
Form-6 नए मतदाता के रूप में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन पत्र है। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक दस्तावेज में इसे “Application Form for New Voters” बताया गया है।
यदि कोई पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में पहली बार अपना नाम दर्ज कराना चाहता है तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत Form-6 का इस्तेमाल किया जाता है।
आयोग की जानकारी के अनुसार आवेदन संबंधित ERO/AERO को दिया जा सकता है, BLO के माध्यम से जमा किया जा सकता है या उपलब्ध ऑनलाइन माध्यम से भी आवेदन किया जा सकता है। आवश्यक दस्तावेजों की प्रतियां भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार देनी होती हैं।
युवाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह निर्देश?
18 वर्ष की आयु पूरी करना किसी भी भारतीय नागरिक के लिए लोकतांत्रिक भागीदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण पड़ाव है।
18 वर्ष की उम्र पूरी करने के बाद पात्र नागरिक मतदाता के रूप में पंजीकरण करा सकता है, बशर्ते वह अन्य निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करता हो।
इसलिए 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं की पहचान और उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ना निर्वाचन विभाग के लिए महत्वपूर्ण कार्य है।
खासकर कॉलेज और उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों में इस संबंध में जागरूकता बढ़ाने से नए मतदाताओं की भागीदारी मजबूत हो सकती है।
ELC के माध्यम से लोकतांत्रिक जागरूकता बढ़ाने की कोशिश
Electoral Literacy Clubs स्कूल और कॉलेज स्तर पर युवाओं को चुनावी प्रक्रिया के बारे में जानकारी देने का महत्वपूर्ण माध्यम हो सकते हैं।
ELC गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को मतदान का महत्व, मतदाता पंजीकरण, चुनावी प्रक्रिया, लोकतांत्रिक अधिकार और जिम्मेदार नागरिकता जैसे विषयों की जानकारी दी जा सकती है।
19 और 20 नवंबर के राज्यस्तरीय कार्यक्रमों को लेकर पहले से तैयारी शुरू करने का निर्देश इसी दिशा में महत्वपूर्ण है।
स्कूल-कॉलेजों में बनेगा जागरूकता का माहौल
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्कूल और कॉलेज स्तर पर ELC गतिविधियों की रूपरेखा तैयार करने को कहा है।
इसके तहत विद्यार्थियों और युवा मतदाताओं तक डिजिटल निर्वाचन सेवाओं की जानकारी पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
ECINET जैसे प्लेटफॉर्म के प्रचार से युवाओं को यह समझने में मदद मिल सकती है कि वे अपने मतदाता संबंधी कार्यों के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं।
अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी
बैठक में स्पष्ट जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया गया।
ELC Coordinator की नियुक्ति इसी उद्देश्य से की जानी है। इसके साथ ही जिला स्तर पर SIR, दावा-आपत्ति, Form-6, शिकायत और डिजिटल सेवाओं की निगरानी के लिए संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने दायित्वों के अनुसार काम करना होगा।
जिम्मेदारी स्पष्ट होने से काम की प्रगति को भी बेहतर तरीके से मॉनिटर किया जा सकेगा।
मतदाता सूची में शुद्धता और समावेशन दोनों जरूरी
मतदाता सूची की गुणवत्ता के लिए दो पहलू महत्वपूर्ण हैं—पात्र लोगों का नाम शामिल होना और सूची में गलत प्रविष्टियों पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई होना।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के निर्देशों में पात्र युवाओं को जोड़ने के साथ-साथ आवेदन और दस्तावेजों की निगरानी पर भी जोर दिया गया है।
इससे स्पष्ट है कि विभाग SIR के दौरान मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
डिजिटल तकनीक से निर्वाचन सेवाओं को आसान बनाने पर जोर
ECINET को लेकर निर्वाचन आयोग की व्यापक पहल का उद्देश्य अलग-अलग निर्वाचन सेवाओं को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है।
ECI के अनुसार ECINET में नागरिकों के साथ-साथ निर्वाचन अधिकारियों के लिए भी अलग-अलग सेवाएं और मॉड्यूल उपलब्ध हैं। इसमें voter registration, electoral roll, application tracking और grievance redressal जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
इससे निर्वाचन प्रक्रिया में डिजिटल ट्रैकिंग और सेवा वितरण को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
अधिकारियों को समयबद्ध काम पूरा करने का निर्देश
बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी कार्यों को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि SIR, दावा-आपत्ति, सुनवाई, युवा मतदाता पंजीकरण, ELC गतिविधियों और मतदाता सेवाओं से संबंधित मामलों की लगातार निगरानी की जाए।
इसका उद्देश्य यह है कि प्रक्रिया के किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो।
बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद?
बैठक में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के साथ अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, उप निर्वाचन पदाधिकारी धीरज कुमार ठाकुर, अवर निर्वाचन पदाधिकारी सुनील कुमार सिंह उपस्थित रहे।
इसके अलावा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी और उप निर्वाचन पदाधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
सभी अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में दिए गए निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करने को कहा गया।
आगे क्या करना होगा?
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के निर्देशों के बाद जिला स्तर पर कई महत्वपूर्ण कार्यों को गति देने की आवश्यकता होगी।
सबसे पहले दावा-आपत्ति के मामलों की सुनवाई के लिए व्यवस्थित टोकन सिस्टम लागू करना होगा। इसके बाद लंबित मामलों की समीक्षा कर समयबद्ध निष्पादन करना होगा।
दूसरी ओर, शून्य और 1 से 5 Form-6 वाले मतदान केंद्रों की समीक्षा कर वहां नए पात्र मतदाताओं की पहचान करनी होगी।
1 अक्टूबर तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पात्र युवाओं का Form-6 और आवश्यक घोषणा-पत्र प्राप्त कर नियमानुसार पंजीकरण सुनिश्चित करना होगा।
साथ ही 19 और 20 नवंबर के ELC कार्यक्रमों की तैयारी, ELC Coordinator की नियुक्ति और स्कूल-कॉलेज स्तर पर ECINET के प्रचार की प्रक्रिया भी आगे बढ़ानी होगी।
निष्कर्ष
झारखंड में SIR और मतदाता सूची से जुड़े कार्यों को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख है दावा-आपत्ति की सुनवाई के दौरान टोकन सिस्टम लागू करना, ताकि निर्वाचन कार्यालयों में अनावश्यक भीड़ न लगे और प्रत्येक व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिल सके।
इसके साथ ही शून्य और 1 से 5 Form-6 वाले मतदान केंद्रों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। इन क्षेत्रों में BLO के माध्यम से ऐसे पात्र युवाओं की पहचान की जाएगी, जो 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं और अभी तक मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित नहीं रहना चाहिए। वहीं साहेबगंज में सामने आई अनियमितता की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवेदन, दस्तावेज, सत्यापन और निर्वाचन डेटा की प्रभावी निगरानी करने का निर्देश दिया गया है।
19 और 20 नवंबर के राज्यस्तरीय ELC कार्यक्रमों की तैयारी भी अभी से शुरू करने को कहा गया है। इसके लिए ELC Coordinator नियुक्त करने और स्कूल-कॉलेजों में ECINET का व्यापक प्रचार करने का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा NVSP और ECINET के ‘Book a Call’ के माध्यम से मिलने वाली शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करने को कहा गया है। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर नए मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची खोज और अन्य सेवाएं उपलब्ध हैं।
कुल मिलाकर, निर्वाचन विभाग का फोकस एक ऐसी मतदाता सूची तैयार करने पर है जिसमें पात्र नागरिकों का समावेश, डेटा की शुद्धता, पारदर्शी सुनवाई, समयबद्ध शिकायत निवारण और युवा मतदाताओं की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
🔗 Official Voter Registration Link
Election Commission Voter Services Portal – Form 6 / New Voter Registration
🔗 Official Form-6
ECI Form-6 – New Voter Registration