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रांची, झारखंड: स्वस्थ मां और स्वस्थ बच्चे की नींव केवल गर्भावस्था के दौरान नहीं, बल्कि गर्भधारण से काफी पहले रखी जाती है। इसी सोच को झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। झारखंड सरकार और Child in Need Institute (CINI) ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, सरकारी अधिकारियों, चिकित्सकों, शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर Pre-Conception Care यानी गर्भधारण से पहले की स्वास्थ्य देखभाल को राज्य की मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था में शामिल करने की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा की।
रांची के BNR Chanakya में आयोजित राज्य स्तरीय परामर्श बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि गर्भावस्था और प्रसव से जुड़े कई स्वास्थ्य जोखिम गर्भधारण के समय अचानक पैदा नहीं होते, बल्कि उनका आधार किशोरावस्था और प्रजनन आयु से पहले ही तैयार हो जाता है। इसलिए स्वास्थ्य व्यवस्था को केवल गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों तक सीमित रखने के बजाय किशोर-किशोरियों, युवाओं और भविष्य में परिवार शुरू करने वाले दंपतियों तक पहले से पहुंच बनाने की आवश्यकता है।
NFHS-6 के झारखंड संबंधी आंकड़े भी इस चुनौती की गंभीरता को सामने रखते हैं। आधिकारिक NFHS-6 फैक्टशीट के अनुसार राज्य में 15-49 वर्ष की महिलाओं में 29.2 प्रतिशत का BMI सामान्य से कम है, जबकि 16.9 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में हैं। महिलाओं में रक्त शर्करा और उच्च रक्तचाप जैसे जोखिम भी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण चिंता हैं।
ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भधारण से पहले पोषण, एनीमिया, गैर-संचारी रोगों, मानसिक स्वास्थ्य, प्रजनन स्वास्थ्य, परिवार नियोजन और स्वस्थ जीवनशैली पर ध्यान देने से आगे चलकर गर्भावस्था और नवजात स्वास्थ्य से जुड़े कई जोखिमों को कम किया जा सकता है।
गर्भावस्था से पहले शुरू हो स्वास्थ्य की तैयारी
Pre-Conception Care का अर्थ ऐसी स्वास्थ्य, पोषण और व्यवहार संबंधी सेवाओं से है, जो किसी महिला या दंपति को गर्भधारण से पहले उपलब्ध कराई जाती हैं। इसका उद्देश्य केवल गर्भधारण को सुरक्षित बनाना नहीं, बल्कि महिला और पुरुष दोनों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है, ताकि गर्भधारण के समय शरीर और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर स्थिति में हो।
राज्य स्तरीय बैठक में इसी व्यापक दृष्टिकोण पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि अगर किसी महिला में गर्भधारण से पहले ही पोषण की कमी, एनीमिया, कम वजन, अधिक वजन, मधुमेह, उच्च रक्तचाप या अन्य स्वास्थ्य समस्या मौजूद है, तो गर्भावस्था के दौरान जोखिम बढ़ सकता है।
इसी प्रकार किशोरावस्था में पर्याप्त पोषण नहीं मिलना, कम उम्र में विवाह, कम उम्र में गर्भधारण, मानसिक तनाव, अस्वस्थ खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच भी भविष्य की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य स्थिति को प्रभावित कर सकती है।
इसलिए Pre-Conception Care को किसी एक विभाग या कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय स्वास्थ्य, पोषण, परिवार नियोजन, किशोर स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों के साथ जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया गया।
NFHS-6 के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
झारखंड में Pre-Conception Care की जरूरत को समझने के लिए NFHS-6 के आंकड़े महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं। National Family Health Survey-6 का संचालन 2023-24 में किया गया था और इसके लिए International Institute for Population Sciences (IIPS) को नोडल एजेंसी बनाया गया था। केंद्र सरकार ने मई 2026 में NFHS-6 के राष्ट्रीय और राज्य स्तर के फैक्टशीट जारी किए।
झारखंड की फैक्टशीट के अनुसार 15-49 वर्ष की महिलाओं में 29.2 प्रतिशत का BMI 18.5 से कम है। यानी बड़ी संख्या में महिलाएं कम वजन की समस्या से जूझ रही हैं। दूसरी तरफ 16.9 प्रतिशत महिलाएं overweight या obese हैं। इससे राज्य के सामने एक साथ दो तरह की पोषण संबंधी चुनौतियां मौजूद हैं—एक तरफ कुपोषण और कम वजन, दूसरी तरफ बढ़ता overweight और obesity।
इसी तरह महिलाओं में blood sugar और blood pressure से जुड़े जोखिम भी दर्ज किए गए हैं। NFHS-6 के अनुसार 15 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं में 15 प्रतिशत का blood sugar level 140 mg/dl से अधिक या वे इसे नियंत्रित करने की दवा ले रही थीं। वहीं elevated blood pressure या इसे नियंत्रित करने की दवा लेने वाली महिलाओं का आंकड़ा 13 प्रतिशत था।
ये आंकड़े इस बात की ओर संकेत करते हैं कि प्रजनन आयु की महिलाओं के स्वास्थ्य पर गर्भधारण से पहले ध्यान देना जरूरी है।
कम उम्र में विवाह और किशोर गर्भधारण भी बड़ी चुनौती
राज्य में Pre-Conception Care की जरूरत केवल पोषण या गैर-संचारी रोगों तक सीमित नहीं है। कम उम्र में विवाह और किशोरावस्था में गर्भधारण भी इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 20-24 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 28 प्रतिशत महिलाओं का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले हो गया था। वहीं करीब 11.7 प्रतिशत किशोरियां या तो गर्भवती थीं या मां बन चुकी थीं।
कम उम्र में विवाह और गर्भधारण का असर केवल मां और बच्चे के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता। इससे किशोरियों की शिक्षा, आर्थिक अवसर, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।
ऐसे में किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रमों के माध्यम से लड़कियों और लड़कों दोनों को स्वास्थ्य, पोषण, प्रजनन स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, मानसिक स्वास्थ्य और जिम्मेदार जीवनशैली के बारे में सही जानकारी देना Pre-Conception Care का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने दिया स्पष्ट संदेश
कार्यक्रम में झारखंड के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने Pre-Conception Care के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि स्वस्थ मां और स्वस्थ बच्चे की नींव गर्भावस्था के दौरान नहीं, बल्कि उससे पहले रखी जाती है।
उन्होंने किशोरावस्था से ही पोषण, एनीमिया की रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य, प्रजनन स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवनशैली को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।
उनके अनुसार आज के किशोर ही भविष्य के माता-पिता हैं। इसलिए अगर किशोरावस्था से ही स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है।
यह दृष्टिकोण खास तौर पर झारखंड जैसे राज्य में महत्वपूर्ण है, जहां ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, पोषण और सामाजिक परिस्थितियां कई परिवारों के स्वास्थ्य परिणामों को प्रभावित करती हैं।
शशि प्रकाश झा ने स्क्रीनिंग और फॉलो-अप पर दिया जोर
कार्यक्रम का उद्घाटन शशि प्रकाश झा (IAS), मिशन निदेशक, NHM झारखंड और अन्य गणमान्य अतिथियों एवं मुख्य वक्ताओं ने किया।
मिशन निदेशक ने स्पष्ट किया कि केवल लोगों को जागरूक करना पर्याप्त नहीं है। स्वास्थ्य जोखिमों की समय रहते पहचान, उचित स्क्रीनिंग, उपचार, लगातार परामर्श और फॉलो-अप को स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा बनाना जरूरी है।
इसका मतलब है कि अगर किसी किशोरी या महिला में एनीमिया, कम वजन, उच्च रक्तचाप, ब्लड शुगर या अन्य स्वास्थ्य समस्या की पहचान होती है, तो केवल जांच करके छोड़ देने के बजाय उसे उचित उपचार और आगे की स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना जरूरी होगा।
यही व्यवस्था Pre-Conception Care को व्यवहारिक रूप से प्रभावी बना सकती है।
CINI ने साझा किया समुदाय आधारित मॉडल
कार्यक्रम की पृष्ठभूमि मेघेंद्र बनर्जी, Chief of Programs, CINI ने प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के बेहतर परिणामों के लिए Pre-Conception Care पर अभी तक जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और कार्यान्वयन व्यवस्था की कमी है।
उन्होंने स्वास्थ्य, पोषण, परिवार नियोजन, शिक्षा और बाल संरक्षण से जुड़े अलग-अलग कार्यक्रमों में Pre-Conception Care को एकीकृत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इसके बाद स्रीपर्णा घोष मुखर्जी, Program Head, Health & Nutrition, CINI ने विभिन्न राज्यों में CINI द्वारा लागू किए जा रहे समुदाय-आधारित Pre-Conception Care मॉडल की जानकारी साझा की। उन्होंने झारखंड में शुरुआती स्तर पर प्राप्त अनुभवों और सीख को भी सामने रखा।
इस मॉडल का मूल उद्देश्य समुदाय के स्तर पर उन लोगों तक पहुंच बनाना है, जिन्हें भविष्य में गर्भधारण की संभावना है और जिनके स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान पहले से की जा सकती है।
सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में एकीकरण पर चर्चा
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण चर्चा यह रही कि Pre-Conception Care को अलग से एक नई व्यवस्था बनाने के बजाय मौजूदा स्वास्थ्य कार्यक्रमों में किस प्रकार जोड़ा जा सकता है।
झारखंड में पहले से ही मातृ स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, किशोर स्वास्थ्य, पोषण और गैर-संचारी रोगों से संबंधित विभिन्न कार्यक्रम संचालित हैं। ऐसे में इन कार्यक्रमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर Pre-Conception Care को मजबूत किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए किशोर स्वास्थ्य सेवाओं में पोषण और एनीमिया की जांच को मजबूत करना, परिवार नियोजन पर परामर्श देना, महिलाओं में गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग करना और जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य केंद्रों से जोड़ना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।
इसी तरह समुदाय स्तर पर काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को भी Pre-Conception Care से जुड़े प्रमुख संदेशों और सेवाओं के बारे में प्रशिक्षित किया जा सकता है।
स्वास्थ्य व्यवस्था के दृष्टिकोण पर विशेषज्ञों का मंथन
राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के दृष्टिकोण पर आयोजित मुख्य सत्र में कई वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।
इस सत्र में डॉ. सिद्धार्थ सन्याल, Director-in-Chief, National Health Mission, Jharkhand; डॉ. समीर नारायण चौधरी, Founder, CINI; डॉ. प्रभात कुमार, Director Health Services, Jharkhand; तथा दीपक कुमार साहू, Under Secretary, JHALSA, Jharkhand सहित अन्य वरिष्ठ व्यक्तियों ने अपने विचार रखे।
चर्चा का केंद्र यह रहा कि Pre-Conception Care को स्वास्थ्य प्रणाली में किस स्तर पर शामिल किया जा सकता है और इसके लिए किन संस्थागत व्यवस्थाओं की आवश्यकता होगी।
विशेषज्ञों ने यह भी देखा कि राज्य में पहले से उपलब्ध मानव संसाधन, स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक कार्यक्रमों और डिजिटल प्रणालियों का इस्तेमाल इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए किस तरह किया जा सकता है।
वैश्विक और राष्ट्रीय शोध साक्ष्यों पर चर्चा
कार्यक्रम में वैश्विक और राष्ट्रीय शोध साक्ष्यों पर भी विस्तृत संवाद हुआ। इस सत्र का संचालन डॉ. कनिनिका मित्रा, UNICEF ने किया।
सत्र में डॉ. सोमशेखर निंबालकर, AIIMS Deoghar; डॉ. के. अपर्णा शर्मा, AIIMS New Delhi; डॉ. जॉय भदुड़ी, IAP Jharkhand; और अरविंद मसाली, Jhpiego ने हिस्सा लिया।
विशेषज्ञों ने Pre-Conception Care से जुड़े वैज्ञानिक शोध, चिकित्सकीय जरूरतों और समुदाय स्तर पर सामने आने वाले अनुभवों पर चर्चा की।
इस दौरान यह समझने का प्रयास किया गया कि अलग-अलग स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान गर्भधारण से पहले कैसे की जा सकती है और किस तरह महिलाओं एवं दंपतियों को सही समय पर आवश्यक सेवाओं से जोड़ा जा सकता है।
नीति स्तर पर भी हुई महत्वपूर्ण चर्चा
कार्यक्रम के अंतिम चरण में नीति संवाद आयोजित किया गया। इसका संचालन डॉ. टीला खान, Public Health Researcher, CINI ने किया।
इस सत्र में राज्य के विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जुड़े नोडल अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इनमें डॉ. पुष्पा, Maternal Health & Family Planning; डॉ. विजय किशोर रजक, Child & Adolescent Health; डॉ. साई राम चल्ला, ICMR-National Institute of Nutrition; तथा डॉ. बिजित बिस्वास, Community Medicine, AIIMS Deoghar शामिल रहे।
नीति संवाद में मुख्य सवाल यह रहा कि Pre-Conception Care को मौजूदा स्वास्थ्य सेवाओं में किस तरह व्यवस्थित रूप से शामिल किया जाए।
इसके अलावा पोषण संबंधी उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों और राज्य की स्थानीय परिस्थितियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी चर्चा हुई।
किशोर स्वास्थ्य को बनाया जा सकता है प्रवेश बिंदु
Pre-Conception Care को प्रभावी बनाने के लिए किशोरावस्था एक महत्वपूर्ण चरण हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार किशोरावस्था में ही स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार विकसित होते हैं।
इस उम्र में संतुलित आहार, शारीरिक गतिविधि, एनीमिया की रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य, नशीले पदार्थों से दूरी और प्रजनन स्वास्थ्य की सही जानकारी भविष्य के स्वास्थ्य परिणामों को प्रभावित कर सकती है।
इसलिए स्कूल, कॉलेज, किशोर स्वास्थ्य केंद्र और समुदाय आधारित कार्यक्रम Pre-Conception Care के लिए महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं।
लड़कियों के साथ-साथ लड़कों को भी इस प्रक्रिया में शामिल करना आवश्यक है। परिवार शुरू करने से पहले केवल महिला का स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि पुरुष का स्वास्थ्य, जीवनशैली और जिम्मेदार व्यवहार भी महत्वपूर्ण होता है।
पोषण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत
झारखंड में Pre-Conception Care के संदर्भ में पोषण सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है।
NFHS-6 के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में 29.2 प्रतिशत महिलाएं कम BMI की श्रेणी में हैं। वहीं 16.9 प्रतिशत महिलाएं overweight या obese हैं।
इससे स्पष्ट होता है कि राज्य को पोषण के दोनों पहलुओं पर एक साथ काम करना होगा। केवल कम वजन या कुपोषण को खत्म करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि असंतुलित खान-पान, मोटापा और उससे जुड़े metabolic risks को भी संबोधित करना होगा।
Pre-Conception Care के तहत महिलाओं और दंपतियों को संतुलित आहार, पर्याप्त सूक्ष्म पोषक तत्व, एनीमिया की रोकथाम और स्वस्थ वजन बनाए रखने के संबंध में परामर्श दिया जा सकता है।
एनीमिया और गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग जरूरी
गर्भधारण से पहले एनीमिया की पहचान और उपचार महत्वपूर्ण हो सकता है। इसी तरह मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं की समय रहते पहचान भी जरूरी है।
NFHS-6 में झारखंड की महिलाओं में blood sugar और blood pressure से जुड़े जोखिम दर्ज किए गए हैं।
ऐसे में Pre-Conception Care को NCD screening और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ने से संभावित जोखिमों की पहले पहचान की जा सकती है।
यदि किसी महिला में पहले से कोई बीमारी है, तो गर्भधारण से पहले चिकित्सकीय परामर्श के माध्यम से उसके उपचार और नियंत्रण की दिशा में काम किया जा सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य को भी मिलना चाहिए स्थान
Pre-Conception Care केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। मानसिक स्वास्थ्य भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।
किशोरावस्था और युवा अवस्था में तनाव, चिंता, पारिवारिक दबाव, शिक्षा या रोजगार से जुड़ी समस्याएं और सामाजिक परिस्थितियां मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं।
गर्भधारण से पहले मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं की पहचान और परामर्श से महिलाओं और दंपतियों को बेहतर तैयारी में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य को मातृ स्वास्थ्य से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए।
परिवार नियोजन और सूचित निर्णय भी जरूरी
Pre-Conception Care का एक महत्वपूर्ण हिस्सा परिवार नियोजन और reproductive decision-making भी है।
दंपतियों को यह जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए कि वे कब और कितने अंतराल के बाद गर्भधारण करना चाहते हैं, परिवार नियोजन के कौन-कौन से विकल्प उपलब्ध हैं और किसी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में गर्भधारण से पहले किस तरह की चिकित्सकीय सलाह ली जानी चाहिए।
इससे अनियोजित गर्भधारण और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।
यहां जागरूकता के साथ-साथ गोपनीय, सम्मानजनक और आसानी से उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की भी आवश्यकता होगी।
गांव और समुदाय तक पहुंच बनाने पर जोर
झारखंड की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। ऐसे में Pre-Conception Care को केवल जिला अस्पताल या बड़े स्वास्थ्य संस्थानों तक सीमित रखने से इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा।
समुदाय स्तर पर कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों, किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रमों और स्थानीय संस्थाओं के माध्यम से लोगों तक पहुंच बनाने की आवश्यकता होगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता, पोषण परामर्श, एनीमिया जांच, NCD screening और परिवार नियोजन सेवाओं को आपस में जोड़कर एक व्यापक मॉडल विकसित किया जा सकता है।
समय रहते स्क्रीनिंग ही सबसे बड़ा कदम
मिशन निदेशक के वक्तव्य में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई कि केवल awareness पर्याप्त नहीं है। समय रहते screening, treatment, counselling और follow-up को मजबूत करना होगा।
यानी Pre-Conception Care का मॉडल केवल सूचना देने वाला कार्यक्रम नहीं होना चाहिए। इसमें जोखिम की पहचान से लेकर उपचार और follow-up तक पूरी श्रृंखला होनी चाहिए।
अगर किसी व्यक्ति की जांच में समस्या मिलती है तो उसे संबंधित स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचाने और उपचार पूरा होने तक निगरानी रखने की व्यवस्था भी आवश्यक होगी।
सरकार, विशेषज्ञों और सिविल सोसाइटी की साझेदारी
राज्य स्तरीय बैठक की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि इसमें सरकारी विभागों के साथ-साथ चिकित्सक, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, पेशेवर संगठन, CSR साझेदार, कानूनी विशेषज्ञ और जमीनी स्तर पर काम करने वाले प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
इससे यह संकेत मिलता है कि Pre-Conception Care को केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी मानने के बजाय बहु-क्षेत्रीय पहल के रूप में देखा जा रहा है।
स्वास्थ्य और पोषण के साथ शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, परिवार नियोजन और सामाजिक संस्थाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
नीति से लेकर जमीनी क्रियान्वयन तक चुनौती
Pre-Conception Care को राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में शामिल करने की राह में कई चुनौतियां भी होंगी।
सबसे पहले स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने होंगे। इसके बाद स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण, screening protocols, referral mechanism, counselling व्यवस्था और data monitoring जैसी व्यवस्थाएं विकसित करनी होंगी।
इसके साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी समान रूप से सेवाएं मिलें।
अगर नीति तैयार होने के बाद उसका जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ तो इसका उद्देश्य पूरा नहीं होगा। इसलिए monitoring और evaluation भी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
CINI और झारखंड सरकार की पहल से नई दिशा की उम्मीद
CINI और झारखंड सरकार द्वारा आयोजित इस परामर्श बैठक को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल Pre-Conception Care के महत्व पर चर्चा करना नहीं था, बल्कि राज्य में इसे लागू करने की संभावनाओं पर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के बीच सहमति और समन्वय विकसित करना भी था।
CINI की ओर से विभिन्न राज्यों में लागू समुदाय आधारित मॉडल और झारखंड से प्राप्त शुरुआती अनुभवों को साझा किया गया। इससे राज्य के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप मॉडल तैयार करने में मदद मिल सकती है।
आगे क्या हो सकता है रोडमैप?
बैठक में सामने आए विचारों के आधार पर भविष्य में कई स्तरों पर काम किया जा सकता है। सबसे पहले राज्य के लिए Pre-Conception Care से जुड़े स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए जा सकते हैं।
इसके बाद किशोर स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, पोषण और मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों में इसके प्रमुख घटकों को शामिल किया जा सकता है।
स्वास्थ्य केंद्रों पर counselling और screening को मजबूत किया जा सकता है। जरूरत के अनुसार महिलाओं और दंपतियों को specialist services से जोड़ा जा सकता है।
इसके साथ डिजिटल माध्यमों से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने की संभावनाओं पर भी काम किया जा सकता है।
स्वस्थ मां और स्वस्थ बच्चे की तैयारी गर्भधारण से पहले
पूरी चर्चा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही रहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को केवल गर्भावस्था के बाद या गर्भावस्था के दौरान शुरू नहीं किया जा सकता।
एक स्वस्थ गर्भावस्था की तैयारी उससे पहले शुरू होनी चाहिए। महिला का पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, प्रजनन स्वास्थ्य, वजन, रक्तचाप, blood sugar, एनीमिया, जीवनशैली और परिवार नियोजन से जुड़े निर्णय—इन सभी का प्रभाव भविष्य की गर्भावस्था पर पड़ सकता है।
इसीलिए Pre-Conception Care को स्वास्थ्य व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाने की जरूरत है।
बैठक का समापन, सुझावों का संकलन
राज्य स्तरीय परामर्श बैठक का समापन CINI Jharkhand टीम के समापन संबोधन के साथ हुआ। इस दौरान बैठक में सामने आए प्रमुख विचारों, सीख और सुझावों को संकलित किया गया।
इन सुझावों का उद्देश्य झारखंड में Pre-Conception Care को आगे बढ़ाने के लिए संभावित दिशा तैयार करना है।
यदि इस पहल को स्पष्ट नीति, पर्याप्त स्वास्थ्य संसाधन, प्रशिक्षित मानवबल और मजबूत monitoring के साथ लागू किया जाता है, तो यह झारखंड में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की रणनीति को और व्यापक बना सकती है।
साफ संदेश यह है कि स्वस्थ बच्चे के जन्म की तैयारी बच्चे के जन्म से पहले नहीं, बल्कि माता-पिता के स्वास्थ्य से शुरू होती है। झारखंड में Pre-Conception Care को स्वास्थ्य व्यवस्था में शामिल करने की यह पहल इसी सोच को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।