रांची।
झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं-13वीं कंबाइंड सिविल सर्विसेज (विज्ञापन संख्या 01/2024) के तहत नियुक्त हुए अभ्यर्थियों/अधिकारियों को बड़ी राहत दी है। जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने राज्य सरकार द्वारा 18 अगस्त 2026 को जारी उस विवादित अधिसूचना पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी है, जिसके जरिए पूरी नियुक्ति प्रक्रिया और नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया था।
मामला क्या है?
दीपमाला एवं अन्य याचिकाकर्ताओं (W.P.(S) No. 6451/2026) ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सरकार की अधिसूचना संख्या 06/LO.S.A.-01-07/5404 of 2026 को रद्द करने की मांग की थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने अदालत को बताया कि:
- याचिकाकर्ता विज्ञापन संख्या 01/2024 के तहत विधिवत रूप से नियुक्त किए गए थे।
- 18 अगस्त 2026 को अचानक अधिसूचना जारी कर पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी गई और उन्हें सेवामुक्त (Disengaged) कर दिया गया।
- यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) का पूरी तरह से उल्लंघन करके की गई है तथा बिना किसी कारण/सुनवाई का मौका दिए अभ्यर्थियों को हटा दिया गया।
राज्य सरकार और विपक्षी पक्षों का तर्क
राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता (Sr. AAG) अच्युत केशव ने बताया कि नियुक्ति प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली/गड़बड़ी की शिकायतें मिलने के बाद सीआईडी (CID) द्वारा जांच शुरू की गई है और कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं। इसी आधार पर सरकार ने पूरी नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने का निर्णय लिया था। वहीं, मध्यस्थता आवेदनों (Intervention Applications) के वकीलों ने भी याचिका का विरोध किया।
अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ और आदेश
न्यायाधीश दीपक रोशन ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निम्नलिखित मुख्य निर्देश दिए:
- प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन: प्रथम दृष्टया (prima facie) अदालत का मानना है कि किसी भी नियमित नियुक्ति को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना समाप्त नहीं किया जा सकता।
- अधिसूचना पर रोक: कोर्ट ने 18 अगस्त 2026 की अधिसूचना के क्रियान्वयन, निष्पादन और संचालन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।
- काम जारी रखने का निर्देश: वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता को संबंधित विभाग को यह सूचित करने का निर्देश दिया गया है कि याचिकाकर्ताओं और प्रभावित अन्य समान कर्मियों को याचिका के अंतिम निपटारे तक उनका कार्य जारी रखने की अनुमति दी जाए।
- अंडरटेकिंग देने की शर्त: सभी याचिकाकर्ताओं को एक शपथ पत्र/अंडरटेकिंग (Affidavit/Undertaking) दाखिल करना होगा कि संबंधित आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा आने वाला अंतिम फैसला उन पर लागू होगा।
- अगली सुनवाई: राज्य सरकार को सीआईडी जांच की विस्तृत रिपोर्ट के साथ काउंटर-एफिडेविट (जवाब-दावा) दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को दोपहर 2:30 बजे तय की गई है।




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