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रांची: झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में सरकार ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न डिजिटल एवं तकनीकी व्यवस्थाओं को लेकर महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ मिशन सहित स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी कई तकनीकी व्यवस्थाओं की वर्तमान स्थिति, उनकी प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में आईसीयू, एचएमआईएस, सीसीटीवी, डैशबोर्ड और एचआरआईएस जैसी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को केवल कागजी योजना तक सीमित न रखा जाए, बल्कि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में इसका वास्तविक लाभ मरीजों तक पहुंचना चाहिए।
बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, संयुक्त सचिव दिनेश कुमार यादव सहित सी-डैक, बीएसएनएल, भारतीय स्टेट बैंक और संबंधित विभागों के पदाधिकारी मौजूद रहे। समीक्षा बैठक में तकनीक के इस्तेमाल के जरिए मरीजों को बेहतर और तेज स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।
डिजिटल हेल्थ मिशन को मजबूत करने पर जोर
झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ मिशन को महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाना है। बैठक में अधिकारियों ने डिजिटल सिस्टम की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी और इसमें आने वाली तकनीकी चुनौतियों पर भी चर्चा की।
अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए संबंधित विभाग और तकनीकी संस्थाएं आपसी समन्वय से काम करें। उन्होंने स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध डिजिटल सुविधाओं की नियमित निगरानी और समय-समय पर समीक्षा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इस पहल के तहत अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को आसान बनाने के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक कामकाज को भी डिजिटल माध्यम से अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी है।
15 दिनों के भीतर ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और डिजिटल पेमेंट
समीक्षा बैठक में मरीजों की सुविधा से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण निर्देश ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और डिजिटल पेमेंट को लेकर दिया गया। अपर मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन दोनों सुविधाओं को 15 दिनों के भीतर शुरू किया जाए।

ऑनलाइन अपॉइंटमेंट शुरू होने के बाद मरीजों को अस्पताल में डॉक्टर से परामर्श के लिए पहले से समय लेने की सुविधा मिल सकेगी। इससे अस्पतालों में अनावश्यक भीड़ को कम करने और मरीजों के समय की बचत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
वहीं डिजिटल पेमेंट की सुविधा से अस्पताल में विभिन्न प्रकार के भुगतान को ऑनलाइन माध्यम से करने का विकल्प उपलब्ध होगा। इससे भुगतान प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी बनाया जा सकेगा।
अपर मुख्य सचिव ने इस व्यवस्था को समयबद्ध तरीके से लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को केवल सिस्टम तैयार करने के बजाय यह सुनिश्चित करने को कहा कि मरीजों के लिए इसका इस्तेमाल आसान हो।
सी-डैक के HMS सिस्टम की भी समीक्षा
बैठक में सी-डैक द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम (HMS) की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अपर मुख्य सचिव ने सिस्टम को आवश्यकतानुसार अपडेट करने का निर्देश दिया।
उन्होंने रिम्स, रांची जाकर डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करने की बात भी कही। इससे अस्पताल में डिजिटल सिस्टम किस तरह काम कर रहा है, मरीजों और कर्मचारियों को किन सुविधाओं का लाभ मिल रहा है तथा किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है, इसका आकलन किया जा सकेगा।
HMS जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य अस्पताल की विभिन्न प्रक्रियाओं को एक व्यवस्थित तकनीकी व्यवस्था से जोड़ना है। इसमें मरीजों से जुड़ी जानकारी, अस्पताल की सेवाएं और अन्य प्रबंधन संबंधी कार्यों को डिजिटल तरीके से संचालित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
सभी स्वास्थ्य संस्थानों में Wi-Fi सुविधा बढ़ाने की तैयारी
स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी को भी महत्वपूर्ण आधार माना गया है। इसी को देखते हुए बैठक में बीएसएनएल को राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, अनुमंडल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में Wi-Fi सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
स्वास्थ्य संस्थानों में बेहतर इंटरनेट उपलब्ध होने से डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को संचालित करने में सुविधा होगी। ऑनलाइन सिस्टम, डिजिटल रिकॉर्ड, टेलीमेडिसिन, डिजिटल रिपोर्टिंग और अन्य तकनीकी सेवाओं के लिए मजबूत इंटरनेट नेटवर्क आवश्यक है।
बैठक में बताया गया कि राज्य के 188 सीएचसी में Wi-Fi सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। अधिकारियों को शेष स्वास्थ्य केंद्रों में भी सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से काम करने को कहा गया।
PHC में इंटरनेट स्पीड 2 Mbps से बढ़ाकर 20 Mbps करने का लक्ष्य
ग्रामीण और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किया गया है। PHC स्तर पर इंटरनेट की गति को 2 Mbps से बढ़ाकर 20 Mbps करने की योजना है।
इसका सीधा फायदा उन स्वास्थ्य केंद्रों को मिलेगा जहां डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को कमजोर इंटरनेट के कारण संचालित करने में परेशानी होती है। तेज इंटरनेट उपलब्ध होने से ऑनलाइन सिस्टम, वीडियो आधारित सेवाओं, डिजिटल रिपोर्ट और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं को अधिक आसानी से संचालित किया जा सकेगा।
बैठक में बताया गया कि रामगढ़ में 7 सितंबर तक सभी PHC में 20 Mbps Wi-Fi सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
बिजली की समस्या वाले केंद्रों पर 48 घंटे का बैकअप
ग्रामीण और दूरदराज के स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली की समस्या भी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में बाधा बन सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए बिजली की समस्या वाले स्वास्थ्य केंद्रों में 48 घंटे का बैकअप उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

इससे बिजली बाधित होने की स्थिति में भी आवश्यक डिजिटल सेवाओं को लंबे समय तक संचालित किया जा सकेगा। स्वास्थ्य केंद्रों में डिजिटल सिस्टम लगातार चलाने के लिए बिजली और इंटरनेट दोनों की उपलब्धता जरूरी है।
सरकार की इस तैयारी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी सुविधा स्थापित होने के बाद बिजली या इंटरनेट की समस्या के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।
टेली-ईसीजी मशीन से गांवों तक आधुनिक जांच सुविधा
बैठक में टेली-ईसीजी मशीन का प्रदर्शन भी किया गया। यह मशीन छोटी और एआई आधारित बताई गई है। इसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर स्थापित करने का प्रस्ताव है।
इस तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह होगा कि मरीज की ईसीजी जांच के बाद रिपोर्ट को तुरंत उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। विशेष रूप से आपातकालीन स्थिति में समय काफी महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में गोल्डन ऑवर के दौरान तत्काल ECG रिपोर्ट उपलब्ध होने से मरीज के उपचार संबंधी निर्णय लेने में चिकित्सकों को मदद मिल सकती है।
टेली-ईसीजी व्यवस्था के माध्यम से रिपोर्ट मोबाइल पर भी देखी जा सकेगी। इससे स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से सलाह लेने की प्रक्रिया भी आसान हो सकती है।
यदि यह व्यवस्था बड़े स्तर पर लागू होती है तो ग्रामीण क्षेत्रों में हृदय संबंधी जांच की पहुंच को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
HRIS पोर्टल की प्रगति की भी हुई समीक्षा
बैठक में 104 पोर्टल के माध्यम से संचालित ह्यूमन रिसोर्स इंफॉर्मेशन सिस्टम (HRIS) की भी समीक्षा की गई। 104 परियोजना के निदेशक की ओर से HRIS के विभिन्न मॉड्यूल, उनकी कार्यप्रणाली, वर्तमान प्रगति और आगामी कार्ययोजना के बारे में प्रस्तुतीकरण दिया गया।
HRIS स्वास्थ्य विभाग में मानव संसाधन प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी, उपस्थिति और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने का उद्देश्य व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।
अपर मुख्य सचिव ने HRIS की जल्द समीक्षा कर आवश्यक सुधार करने का निर्देश दिया। उन्होंने संबंधित विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए सिस्टम को प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया।
संविदाकर्मियों के मानदेय को ऑनलाइन उपस्थिति से जोड़ने की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एनएचएम के संविदाकर्मियों के मानदेय भुगतान को भी HRIS से जोड़ने की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया गया है।
निर्देश के अनुसार संविदाकर्मियों के मानदेय भुगतान को HRIS पोर्टल पर दर्ज और सत्यापित मासिक उपस्थिति से जोड़ा जाएगा। इसके लिए संबंधित प्रक्रिया को जल्द पूरा करने और निर्धारित समय-सीमा में व्यवस्था लागू करने को कहा गया है।
इस व्यवस्था से कर्मचारियों की उपस्थिति और मानदेय भुगतान के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से प्रशासनिक प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में भी सहायता मिल सकती है।
HMIS, CCTV और डैशबोर्ड की भी समीक्षा
बैठक में HMIS, CCTV और डैशबोर्ड जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं की स्थिति पर भी चर्चा की गई। अस्पतालों में डिजिटल निगरानी और डेटा आधारित प्रबंधन को मजबूत करने के लिए इन व्यवस्थाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
HMIS के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित आंकड़ों को व्यवस्थित तरीके से दर्ज और मॉनिटर किया जा सकता है। वहीं CCTV व्यवस्था अस्पतालों में सुरक्षा और निगरानी से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है।
डैशबोर्ड के माध्यम से अलग-अलग स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवस्थाओं की स्थिति की निगरानी को आसान बनाया जा सकता है। इससे अधिकारियों को किसी समस्या की पहचान करने और उसके समाधान के लिए समय पर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।
रिम्स में डिजिटल व्यवस्था का होगा निरीक्षण
अपर मुख्य सचिव ने स्वयं रिम्स, रांची जाकर डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था की प्रगति देखने की बात कही। रिम्स राज्य का प्रमुख चिकित्सा संस्थान है और यहां डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति का आकलन दूसरे संस्थानों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
रिम्स में डिजिटल सिस्टम की समीक्षा के दौरान ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, डिजिटल पेमेंट, हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं के संचालन को देखा जा सकता है। इसके आधार पर जरूरी सुधारों को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।
डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था से मरीजों को क्या फायदा होगा?
स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण का सबसे बड़ा उद्देश्य मरीजों की सुविधा बढ़ाना है। यदि ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, डिजिटल पेमेंट और डिजिटल हेल्थ सिस्टम प्रभावी तरीके से लागू होते हैं तो मरीजों को अस्पताल की कई प्रक्रियाओं के लिए बार-बार लाइन में लगने की आवश्यकता कम हो सकती है।
इसके अलावा डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार से अस्पताल प्रबंधन को भी मरीजों से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से संभालने में मदद मिल सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में तेज इंटरनेट और टेली-ईसीजी जैसी तकनीक उपलब्ध होने से विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर बनाने की संभावना है। खासकर ऐसे क्षेत्रों में जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों या अत्याधुनिक जांच सुविधाओं की उपलब्धता सीमित है, वहां तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सरकार का फोकस आधुनिक और तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर
समीक्षा बैठक से स्पष्ट है कि झारखंड सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ मिशन, HMIS, HRIS, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, डिजिटल पेमेंट, Wi-Fi नेटवर्क और टेली-ईसीजी जैसी व्यवस्थाओं को एक साथ मजबूत करने की तैयारी की जा रही है।
अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि तकनीकी व्यवस्थाओं में केवल सुविधाएं जोड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी संचालन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके लिए संबंधित विभागों, तकनीकी संस्थाओं और सेवा प्रदाताओं के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
बैठक में सी-डैक, बीएसएनएल, भारतीय स्टेट बैंक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी इसी समन्वित प्रयास की ओर संकेत करती है।
समय-सीमा में काम पूरा करने पर जोर
समीक्षा बैठक में कई व्यवस्थाओं के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और डिजिटल पेमेंट सुविधा को 15 दिनों के भीतर शुरू करने का निर्देश दिया गया है। वहीं रामगढ़ के PHC में 20 Mbps Wi-Fi सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 7 सितंबर तक का लक्ष्य रखा गया है।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर काम पूरा करने के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जाए। डिजिटल सिस्टम को लागू करने के बाद उसकी निगरानी और समय-समय पर समीक्षा भी जरूरी होगी।
आगे क्या होगा?
आने वाले समय में झारखंड के स्वास्थ्य संस्थानों में डिजिटल सेवाओं का दायरा और बढ़ने की संभावना है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और डिजिटल पेमेंट से लेकर HRIS आधारित मानव संसाधन प्रबंधन और टेली-ईसीजी जैसी तकनीकों तक, स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं।
यदि इन योजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के अनुसार प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो अस्पतालों की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के साथ मरीजों के अनुभव को भी बेहतर बनाया जा सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी का विस्तार और CHC स्तर पर टेली-ईसीजी जैसी सुविधाओं की उपलब्धता स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बेहतर करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। वहीं HRIS के जरिए कर्मचारियों की उपस्थिति और मानदेय भुगतान जैसी प्रक्रियाओं को डिजिटल करने से प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष
झारखंड में डिजिटल हेल्थ मिशन को मजबूत करने के लिए सरकार ने स्वास्थ्य विभाग की डिजिटल और तकनीकी व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा की है। बैठक में ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, डिजिटल पेमेंट, Wi-Fi कनेक्टिविटी, टेली-ईसीजी, HMIS, HRIS, CCTV और डैशबोर्ड जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और डिजिटल पेमेंट सुविधा 15 दिनों के भीतर शुरू करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही राज्य के स्वास्थ्य केंद्रों में बेहतर इंटरनेट और तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी है।
टेली-ईसीजी जैसी एआई आधारित तकनीक को CHC स्तर तक पहुंचाने का प्रस्ताव ग्रामीण मरीजों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। वहीं HRIS के माध्यम से संविदाकर्मियों के मानदेय को सत्यापित मासिक उपस्थिति से जोड़ने की तैयारी स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक डिजिटल और व्यवस्थित बनाने की दिशा में अहम कदम है।
कुल मिलाकर, झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में यह समीक्षा बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब इन निर्देशों को जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, यही इस डिजिटल हेल्थ मिशन की सफलता का सबसे बड़ा आधार होगा।