Hiroshima Day: तबाही के 81 साल बाद भी हरे हैं ज़ख्म, शांति सभा में उठी परमाणु-मुक्त दुनिया की बुलंद आवाजHiroshima Day: तबाही के 81 साल बाद भी हरे हैं ज़ख्म, शांति सभा में उठी परमाणु-मुक्त दुनिया की बुलंद आवाज


रांची। जिंदगी जिंदाबाद


Hiroshima Day: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के हिरोशिमा शहर पर गिराए गए दुनिया के पहले परमाणु बम की आज दुखद बरसी है। 6 अगस्त 1945 की उस खौफनाक सुबह को याद करते हुए आज पूरा जापान और विश्व समुदाय स्तब्ध है। इस ऐतिहासिक और दर्दनाक घटना की याद में आज सुबह हिरोशिमा के ‘पीस मेमोरियल पार्क’ में एक विशेष शांति प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया।

ठीक सुबह 8:15 बजे—जिस वक्त 1945 में अमेरिकी बी-29 बमवर्षक विमान ‘एनोला गे’ से ‘लिटिल बॉय’ नाम का परमाणु बम गिराया गया था—पूरा परिसर मौन में डूब गया। पार्क में मौजूद हजारों लोगों, परमाणु हमले के बचे हुए प्रत्यक्षदर्शियों (हिबाकुशा), युवाओं और वैश्विक नेताओं ने सिर झुकाकर मारे गए निर्दोष लोगों को भावभरी श्रद्धांजलि दी और दो मिनट का मौन रखा।

6 अगस्त 1945: जब एक पल में राख हो गया पूरा शहर

सन 1945 में हुई इस अमानवीय त्रासदी में हिरोशिमा शहर पूरी तरह से तबाह हो गया था। बम विस्फोट के साथ निकली भयानक गर्मी और रेडिएशन (विकिरण) के कारण पलक झपकते ही हजारों लोग जिंदा जल गए। वर्ष 1945 के अंत तक इस हमले में करीब 1 लाख 40 हजार लोग मारे गए थे।

इस तबाही का असर केवल उस एक दिन तक सीमित नहीं रहा। परमाणु विकिरण की चपेट में आने के कारण आने वाली कई पीढ़ियां कैंसर, शारीरिक विकलांगता और अन्य गंभीर बीमारियों का शिकार हुईं। इस त्रासदी ने न केवल एक हंसते-खेलते शहर को मलबे और राख में बदल दिया, बल्कि भावी पीढ़ियों के जीवन में भी न मिटने वाले दर्द की लकीरें खींच दीं।

Hiroshima Day: परमाणु हथियारों को खत्म करने की पुरजोर अपील

Hiroshima Day: आज आयोजित इस स्मृति कार्यक्रम के दौरान जापानी प्रधानमंत्री, स्थानीय जन प्रतिनिधियों और दुनिया भर के राजनयिकों ने विश्व शांति का संदेश दिया। वैश्विक पटल पर बढ़ते तनाव, युद्धों और परमाणु धमकियों के बीच इस मंच से एक बार फिर परमाणु हथियारों को पूरी तरह समाप्त करने की अपील की गई।

कार्यक्रम में उपस्थित नेताओं और शांति कार्यकर्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि हिरोशिमा का इतिहास पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है। यदि समय रहते परमाणु हथियारों की अंधी दौड़ पर रोक नहीं लगाई गई, तो मानव सभ्यता का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। हिरोशिमा के मेयर ने अपने ‘शांति घोषणापत्र’ में विश्व शक्तियों से आग्रह किया कि वे युद्ध की नीति को छोड़कर कूटनीति और संवाद के रास्ते पर आएं तथा परमाणु अप्रसार की दिशा में ठोस कदम उठाएं।

Hiroshima Day: द्वितीय विश्व युद्ध का अंत और मानवता के लिए सबक

हिरोशिमा पर 6 अगस्त को हुए इस हमले के ठीक तीन दिन बाद, यानी 9 अगस्त 1945 को, अमेरिका ने जापान के एक अन्य शहर ‘नागासाकी’ पर दूसरा परमाणु बम (‘फैट मैन’) गिराया था। नागासाकी में भी लगभग 70 हजार से अधिक लोग मारे गए थे। इन दो भीषण हमलों के अभूतपूर्व विनाश से टूटकर अंततः 15 अगस्त 1945 को जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया और इसके साथ ही द्वितीय विश्व युद्ध का अंत हो गया।

द्वितीय विश्व युद्ध भले ही इस त्रासदी के साथ समाप्त हो गया हो, लेकिन इसने दुनिया को एक ऐसा सबक दिया जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। हिरोशिमा और नागासाकी की घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि युद्ध कभी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता।

Hiroshima Day: भविष्य की पीढ़ी को शांति का संदेश

आज हिरोशिमा का पीस मेमोरियल पार्क और वहां की ‘पीस फ्लेम’ (शांति की लौ)—जो तब तक जलती रहेगी जब तक दुनिया से आखिरी परमाणु हथियार खत्म न हो जाए—पूरी दुनिया को यह सीख देती है कि शांति का कोई विकल्प नहीं है। आज के कार्यक्रम में युवाओं और स्कूली बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और यह प्रतिज्ञा ली कि वे आने वाली पीढ़ियों को हिरोशिमा का सच बताएंगे ताकि फिर कभी किसी शहर को ऐसा दिन न देखना पड़े।

CM हेमंत सोरेन ने अग्निशमन के Mini Water Tender with Mist Technology के 58 वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया

https://zindagijindabaad.com/cm-mini-water-tender-with-mist-tech-flag-off/

https://www.pib.gov.in/

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