राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आज गढ़वा स्थित बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षान्त समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय के लिए उसका पहला दीक्षान्त समारोह विशेष महत्व रखता है। यह केवल विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान करने का अवसर नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की अब तक की यात्रा एवं भविष्य की दिशा पर विचार करने का भी अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि दीक्षान्त का अर्थ केवल शिक्षा पूरी होना नहीं है, बल्कि अर्जित ज्ञान को जीवन में उपयोगी बनाना भी है। शिक्षा की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब वह व्यक्ति के व्यक्तित्व, व्यवहार एवं कार्यों में दिखाई दे तथा उससे समाज को लाभ मिले।

राज्यपाल ने कहा कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक, जैव-प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विज्ञान एवं अन्य क्षेत्रों में हो रही वैज्ञानिक प्रगति हमारे जीवन और कार्य करने के तरीकों को तेजी से बदल रही है। ऐसे समय में युवाओं को नई चीजें सीखने, प्रयोग करने तथा चुनौतियों का सामना करने का साहस रखना चाहिए। अपनी प्रतिभा एवं ज्ञान का उपयोग समाज के लिए उपयोगी बनाने का निरंतर प्रयास करना आवश्यक है।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने आचरण, उपलब्धियों एवं समाज के प्रति जिम्मेदार भूमिका के माध्यम से बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय की पहचान स्थापित करें। उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की वास्तविक प्रतिष्ठा केवल उसके भवनों से नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की उपलब्धियों, शोध एवं नवाचार तथा समाज के प्रति उसके योगदान से बनती है।

राज्यपाल ने गढ़वा की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र की प्रकृति, संस्कृति, लोकजीवन एवं आस्था की समृद्ध परंपरा इसकी विशिष्ट पहचान है। श्री बंशीधर नगर (नगरऊँटारी) स्थित श्री बंशीधर मंदिर हमारी आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने श्री बंशीधर मंदिर को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए राज्य की प्रगति तथा राज्यवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि ऐसी सांस्कृतिक एवं आस्थापूर्ण भूमि पर स्थापित विश्वविद्यालय नई पीढ़ी के भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय से क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने तथा शिक्षा, शोध, नवाचार, कौशल विकास, उद्यमिता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने की अपेक्षा की।

राज्यपाल ने निजी विश्वविद्यालयों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि निजी विश्वविद्यालयों के लिए विश्वसनीयता एवं शैक्षणिक गुणवत्ता अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) तथा राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नियमों, मानकों एवं दिशा-निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय अकादमिक उत्कृष्टता, पारदर्शिता एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करे तथा विद्यार्थियों को मूल्यपरक एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान करते हुए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करे।

राज्यपाल ने कहा कि गाँवों एवं छोटे शहरों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है कि प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उचित अवसर, मार्गदर्शन एवं संसाधन उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। शिक्षा के साथ अवसर एवं ज्ञान के साथ आत्मविश्वास प्रदान करना विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी हो सकती है।

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