वाराणसी। जिंदगी जिंदाबाद
Banaras में अस्सी घाट पर गंगा आरती का देखें वीडियो
वाराणसी:
धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी Banaras में प्रतिदिन होने वाली विश्वप्रसिद्ध ‘गंगा आरती’ केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अद्भुत शांति और दिव्य ऊर्जा का अनुभव है। वर्षभर बिना रुके आयोजित होने वाली यह आरती गर्मियों और सर्दियों के तय समय के अनुसार प्रतिदिन की जाती है। यदि आप भी काशी यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो जानिए यहाँ के 5 प्रमुख घाटों पर होने वाली आरती की विशेषताएँ और इसमें शामिल होने के आध्यात्मिक तरीके।

Banaras के 5 प्रमुख घाटों पर गंगा आरती का अनूठा रूप
Banaras के अलग-अलग घाटों पर गंगा आरती का स्वरूप, समय
| घाट का नाम | विशेषता एवं पहचान | पुजारी व दीप | गर्मियों का समय | सर्दियों का समय | अवधि |
| दशाश्वमेध घाट | सबसे लोकप्रिय व भव्य आरती, काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप | 7 पुरोहित (100 बत्तियों वाले 7 बड़े दीप) | शाम 6:45 बजे | शाम 5:45 बजे | 45 मिनट |
| राजेंद्र प्रसाद घाट | प्रथम राष्ट्रपति के नाम पर, शांत व विशाल परिसर | 5 पुरोहित (20 बत्तियों वाले 5 मध्यम दीप) | शाम 6:30 बजे | शाम 5:30 बजे | 40 मिनट |
| अस्सी घाट | अस्सी और गंगा का संगम, अत्यंत स्वच्छ व शांत वातावरण | 3 पुजारी (5 बत्तियों वाले 3 छोटे दीप) | शाम 6:00 बजे | शाम 5:00 बजे | 30 मिनट |
| पंचगंगा घाट | 5 पवित्र नदियों का संगम स्थल (संगम और सामंजस्य) | 2 पुजारी (10 बत्तियों वाले 2 छोटे दीप) | शाम 6:15 बजे | शाम 5:15 बजे | 20 मिनट |
| मणिकर्णिका घाट | जीवन-मृत्यु का प्रतीक, प्राचीनतम व अति-पवित्र घाट | 1 पुजारी (100 बत्तियों वाला 1 बड़ा दीप) | शाम 7:00 बजे | शाम 6:00 बजे | 15 मिनट |
Banaras में विशेष अवसरों पर और भी भव्य हो जाता है नज़ारा
वैसे तो आरती सालभर प्रतिदिन होती है, लेकिन कुछ प्रमुख पर्वों पर इसका स्वरूप अत्यंत भव्य और उत्सवपूर्ण हो जाता है:
- गंगा दशहरा (मई/जून): माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण के दिन विशेष दीपों, फूलों और संगीत से आरती की जाती है।
- देव दीपावली (नवंबर/दिसंबर): कार्तिक पूर्णिमा पर घाट लाखों दीयों, मोमबत्तियों और आतिशबाजी से जगमगा उठते हैं।
- मकर संक्रांति (14/15 जनवरी): सूर्य के उत्तरायण होने पर पतंगों, तिल-गुड़ और विशेष पूजा के साथ आरती मनाई जाती है।
Banaras में नौका विहार और आध्यात्मिक ऊर्जा
गंगा आरती का दिव्य अनुभव लेने के लिए नाव से आरती देखना सबसे लोकप्रिय विकल्प माना जाता है। जल की ओर से आरती देखने पर एक अद्भुत नज़ारा दिखाई देता है।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण:
विशेषज्ञों और श्रद्धालुओं के अनुसार, गंगा आरती में प्रयुक्त अग्नि, जल और वायु तत्व शरीर के ऊर्जा केंद्रों (चक्रों) को सक्रिय करते हैं और आभा मंडल (Aura) को संरेखित करते हैं। यह नाव यात्रा आंतरिक ज्ञान, चेतना के विस्तार और उच्चतर स्व से जुड़ने में मदद करती है।
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