जनगणना में अपनी मूल सांस्कृतिक पहचान दर्ज कराने का आह्वान
रांची: झारखण्ड की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और जनजातीय अस्मिता को सहेजने तथा उसे पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘बृहद झारखण्ड कला संस्कृति मंच‘ के बैनर तले आज, 12 अक्टूबर 2026 को रांची प्रेस क्लब में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस प्रेस वार्ता का मुख्य उद्देश्य आगामी ‘डहरे सोहराई‘ महोत्सव के भव्य आयोजन की रूपरेखा, तिथियों के निर्धारण और जनजातीय जनगणना से जुड़े दूरगामी विषयों पर जन-जागरूकता फैलाना था।
प्रेस वार्ता के दौरान मंच के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से घोषणा की कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी ‘डहरे सोहराई’ का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आयोजन 4 नवंबर 2026 को अत्यंत धूमधाम और गरिमा के साथ किया जाएगा। यह विशाल सांस्कृतिक शोभायात्रा रांची के ऐतिहासिक मोराबादी मैदान से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख केंद्र अल्बर्ट एक्का चौक तक निकाली जाएगी। इस दौरान कुड़मी समाज के हजारों लोग अपने-अपने क्षेत्रों से आकर अपनी पारंपरिक वेशभूषा, सांस्कृतिक परिधानों और मांदर, ढाक, नगाड़ा तथा शहनाई जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के साथ सड़क पर उतरेंगे और एकता तथा सांस्कृतिक धरोहर का प्रदर्शन करेंगे।
रांची जिले के 14 ब्लॉकों से जुटे प्रतिनिधि
इस प्रेस वार्ता की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें रांची जिले के कुल 18 ब्लॉकों में से 14 ब्लॉकों के कुड़मी जनसमुदाय के संयोजकों और प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी 14 ब्लॉकों के संयोजकों ने एक स्वर में डहरे सोहराई यात्रा को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया। बैठकों के दौर के बाद यह तय किया गया कि गांव-गांव और पंचायत स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाकर समाज के प्रत्येक परिवार तक इस आयोजन का आमंत्रण पहुंचाया जाएगा, ताकि 4 नवंबर को मोराबादी मैदान में जनसैलाब उमड़ सके।
सोहराई पर्व: पूर्वजों, प्रकृति और औजारों के प्रति कृतज्ञता
पत्रकारों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने सोहराई पर्व के गहरे सांस्कृतिक और व्यावहारिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सोहराई केवल एक त्यौहार नहीं है, बल्कि यह कुड़मी जनजाति की जीवंत जीवनशैली, श्रम-संस्कृति और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक है। यह पर्व विशेष रूप से अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने, कृषि कार्यों में प्रयुक्त होने वाले औजारों और पशुधन (सहयोगियों) के प्रति आभार प्रकट करने के लिए मनाया जाता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषक जीवन में जिन संसाधनों और सहयोगियों की मुख्य भूमिका होती है, उन्हें पूजना और उनका आदर करना ही सोहराई का मूल दर्शन है। डहरे सोहराई इसी भावना को सड़कों पर लाकर समाज में अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश देती है।
वर्ष 2026 की विशेष थीम: जनगणना और सांस्कृतिक पहचान
इस वर्ष का ‘डहरे सोहराई’ आयोजन केवल एक सांस्कृतिक उत्सव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह कुड़मी समुदाय के अस्तित्व और उनकी वैधानिक पहचान के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होने वाला है। इस बार का कार्यक्रम विशेष रूप से आगामी जनगणना को केंद्र में रखकर आयोजित किया जा रहा है।
प्रेस वार्ता में मंच के पदाधिकारियों ने स्पष्ट रूप से इस वर्ष की मुख्य थीम को सार्वजनिक किया:
“जनगणना में अपनी संख्याबल और मूल पहचान को सही ढंग से दर्ज कराएं — जनजाति: कुड़मी, भाषा: कुड़माली और धर्म: रूढ़िवादी/प्रकृतिवादी परंपरा।”
संयोजकों ने कहा कि कुड़मी समाज की एक बड़ी आबादी होने के बावजूद, अपनी पहचान को सही कॉलम में दर्ज न कराने के कारण समाज को अपनी वास्तविक संख्या और अधिकारों से वंचित रहना पड़ता है। इसलिए, इस डहरे सोहराई यात्रा के माध्यम से पूरे राज्य में यह संदेश फैलाया जाएगा कि प्रत्येक कुड़मी परिवार जनगणना के दौरान अपनी सही पहचान, भाषा और परंपरा को ही दर्ज कराए, ताकि आंकड़े समाज के वास्तविक स्वरूप को दर्शा सकें।
प्रमुख आयोजकों की गरिमामयी उपस्थिति
आयोजन समिति ने बताया कि इस पूरे कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए मुख्य संयोजक पप्पू कुड़मी, ऋषि महतो, मणिलाल महतो, बीरबल महतो, बेबी महतो, ज्योति, संतोष कुमार, मिथिलेश महतो, अजय कुमार, एवं मुकेश कुमार सहित कई प्रमुख समाजसेवी और युवा प्रतिनिधि रांची प्रेस क्लब की बैठक में उपस्थित थे। सभी संयोजकों ने जिला, अनुमंडल और प्रखंड स्तर पर कमेटियों का गठन कर तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
प्रेस वार्ता के अंत में आयोजकों ने झारखंड के तमाम कुड़मी जनसमुदाय और संस्कृति-प्रेमियों से अपील की कि वे 4 नवंबर 2026 को अधिक से अधिक संख्या में मोराबादी मैदान पहुंचे और अपनी पारंपरिक समृद्ध विरासत का गौरवपूर्ण प्रदर्शन करें।
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