*हर पंचायत में ममता वाहन उपलब्ध कराने का निर्देश*

*ममता वाहन ऐप के संचालन को लेकर ऑनलाइन ओरिएंटेशन का आयोजन*
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राज्य में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए ‘ममता वाहन’ सेवा को पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसी कड़ी में आज नामकुम स्थित एनएचएम कार्यालय से एक राज्य स्तरीय ऑनलाइन ओरिएंटेशन का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखण्ड के अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा द्वारा जारी निर्देशों के आलोक में ‘ममता वाहन ऐप’ के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत रूपरेखा साझा की गई। ऑनलाइन बैठक में राज्य के सभी जिलों से सिविल सर्जन, जिला आरसीएच पदाधिकारी, जिला व प्रखंड प्रोग्राम प्रबंधन इकाई के सदस्य और चिकित्सा पदाधिकारी प्रभारी मुख्य रूप से शामिल हुए।
इस नई व्यवस्था के तहत राज्य की प्रत्येक पंचायत में कम से कम एक ममता वाहन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की यह पहल निजी टैक्सी सेवाओं (जैसे ओला और उबर) की तर्ज पर काम करेगी, जहाँ ग्रामीण क्षेत्र के लाभार्थी मोबाइल ऐप के जरिए आसानी से वाहनों की ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे। इसके साथ ही सेवाओं को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए भुगतान की प्रक्रिया भी ऑनलाइन माध्यम से ही संपन्न होगी।
ओरिएंटेशन के दौरान मातृत्व कोषांग की राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. पुष्पा ने ऐप के तकनीकी और व्यावहारिक संचालन से जुड़ी आवश्यक जानकारियां दीं। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि राज्य स्तर से लेकर ब्लॉक स्तर तक इस ऐप को सुचारू रूप से लागू करने के लिए फील्ड स्तर पर सभी तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएं। आईईसी के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ राहुल किशोर सिंह ने बताया कि इस डिजिटल व्यवस्था के लागू होने से आपातकालीन स्थिति में वाहनों की रियल-टाइम ट्रैकिंग आसान होगी और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को समय पर सुरक्षित प्रसव हेतु चिकित्सकीय सहायता पहुँचाई जा सकेगी।