• शिक्षकों, शोधार्थियों और छात्रों ने नम आँखों से दी विदाई, वक्ताओं ने व्यक्तित्व और कृतित्व को किया याद

रांची : रांची विश्वविद्यालय के नागपुरी विभाग में आज जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय की ओर से प्रख्यात साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डॉ. वासंती की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संकाय के अंतर्गत आने वाले नौ विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रीझु नायक एवं डॉ. मनोज कच्छप ने संयुक्त रूप से किया।
सभा को संबोधित करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश नन्द तिवारी ने कहा कि डॉ. वासंती का योगदान केवल शैक्षणिक क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने नागपुरी भाषा और झारखंडी अस्मिता को नई पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जाना एक अपूरणीय क्षति है।
डॉ. कुमारी शशि ने भावुक स्वर में कहा कि वासंती दीदी जैसी निडर और प्रतिबद्ध महिला न तो टीआरएल संकाय में कभी हुई हैं और न ही भविष्य में होना आसान है। उन्होंने अपने जीवन से साहस और समर्पण की मिसाल पेश की।
डॉ. बीरेन्द्र कुमार सोय ने उन्हें स्मरण करते हुए कहा कि वासंती मैम उनके लिए मां के समान थीं, जिनसे उन्हें स्नेह और मार्गदर्शन दोनों मिला।
डॉ. बन्दे खलखो ने कहा कि डॉ. वासंती ने अपने कार्यों से यह सिद्ध किया कि सच्चा शिक्षक केवल पढ़ाता नहीं, बल्कि समाज को दिशा देता है।
रांची विश्वविद्यालय के एनएसएस कोऑर्डिनेटर डॉ. किशोर सुरिन ने कहा कि उनके व्यक्तित्व में नेतृत्व, अनुशासन और संवेदनशीलता का अद्भुत समन्वय था, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
डॉ. किरण कुल्लू ने उन्हें एक ऐसी शिक्षिका बताया, जिन्होंने विद्यार्थियों को केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की समझ भी दी।
प्रेम मुर्मू ने कहा कि डॉ. वासंती का निधन झारखंडी समाज के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
डॉ. अर्चना कुमारी ने कहा कि उनका जीवन संघर्ष, साधना और सृजन का अद्वितीय संगम था, जिससे हर कोई प्रेरणा ले सकता है।
डॉ. दमयंती सिंकू ने कहा कि वासंती दीदी सबकी थीं, लेकिन उनके लिए वह एक मां जैसी थीं, जिनका स्नेह हमेशा याद रहेगा।
डॉ. दिनेश कुमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि दीदी ने कई पीढ़ियों को गढ़ा और टीआरएल संकाय को अपने परिश्रम से सींचा। उनका व्यक्तित्व नारियल की तरह था, बाहरी कठोरता के भीतर अपार कोमलता और संवेदनशीलता छिपी थी।
डॉ. करम सिंह मुंडा ने कहा कि डॉ. वासंती ने अपनी विद्वता और सरलता से सभी के दिलों में विशेष स्थान बनाया।
डॉ. सरस्वती गागराई ने उन्हें मां समान बताते हुए कहा कि उनका स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद हमेशा स्मरणीय रहेगा।
इस श्रद्धांजलि सभा में टीआरएल संकाय के डॉ. बीरेन्द्र कुमार महतो, डॉ. राकेश महतो, डॉ. मनोज कच्छप, डॉ. अनुराधा मुण्डू, डॉ. योगेश कुमार महतो, कंचन मुंडा, डॉ. अल्बिना जोजो, डॉ. जयमुनी बड़ायुद, शकुंतला बेसरा, डॉ. कृति मिंज, बी. पन्ना, अबनेजर टेटे, जय प्रकाश उरांव, गुरूचरण पूर्ति, सोनू सपवार, अनुप गाड़ी, संजय गाड़ी, पूनम भगत, धर्मेन्द्र गोप, बसंती मुंडा, नागेन्द्र मुंडा सहित अनेक शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
अंत में सभी उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। सभा का समापन गहन शोक और श्रद्धा के वातावरण में हुआ।

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