रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा यानी JSSC CGL में कथित गड़बड़ी और अनियमितता की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। जांच के दौरान एक और सफल अभ्यर्थी कुंदन कुमार की गिरफ्तारी से मामले में नया मोड़ सामने आया है। जांच एजेंसी के अनुसार, कुंदन कुमार पर स्वयं परीक्षा में गलत तरीके से सफलता हासिल करने के साथ-साथ 20 से अधिक अन्य अभ्यर्थियों को भी गलत तरीके से सफल कराने में मदद करने का आरोप है।
कटिंग के मुताबिक, गिरफ्तार कुंदन कुमार पलामू जिले के नौडीहा बाजार थाना क्षेत्र के नामुदाग निवासी रामलाल राम का पुत्र है। आरोप है कि उसने परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी आईसीएन के मिथिलेश सिंह के साथ मिलकर अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से परीक्षा में सफल कराने में भूमिका निभाई। शिकायत में कुंदन कुमार के अलावा उसके भाई विकास कुमार, रवि, धर्मेंद्र समेत कुछ अन्य लोगों के नामों का भी उल्लेख किया गया है।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, कुंदन कुमार JSSC CGL परीक्षा में सफल होने के बाद गुमला जिले के सिसई में प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के पद पर कार्यरत था। CID ने पूछताछ और जांच के बाद उसे गिरफ्तार किया।
परीक्षा में सफलता से नौकरी तक पहुंचा मामला
JSSC CGL जैसी प्रतियोगी परीक्षा हजारों युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाने का महत्वपूर्ण माध्यम होती है। ऐसे में यदि किसी परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक, पैसे के लेन-देन या किसी तरह की सेटिंग के जरिए अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप सामने आते हैं, तो इसका असर केवल कुछ अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहता।
इसका सीधा असर उन उम्मीदवारों पर भी पड़ता है जिन्होंने पूरी ईमानदारी से परीक्षा की तैयारी की और परीक्षा में शामिल हुए। यही वजह है कि JSSC CGL से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच को गंभीरता से देखा जा रहा है।
CID की जांच में अब उन अभ्यर्थियों की भूमिका भी जांची जा रही है, जिन्होंने परीक्षा में सफलता हासिल की और बाद में सरकारी पदों पर नियुक्त हुए। कुंदन कुमार की गिरफ्तारी इसी दिशा में हुई कार्रवाई का हिस्सा बताई जा रही है।
प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, कुंदन कुमार ने JSSC CGL परीक्षा पास करने के बाद गुमला जिले के सिसई में प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के रूप में कार्यभार संभाला था। जांच एजेंसी ने उसे पूछताछ के लिए बुलाया था। पूछताछ के दौरान उसका मोबाइल फोन भी जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद उसकी गिरफ्तारी की गई और उसे न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
20 से अधिक अभ्यर्थियों को सफल कराने का आरोप
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कुंदन कुमार पर लगाया गया वह आरोप है, जिसमें कहा गया है कि उसने केवल अपने लिए ही कथित तौर पर अनुचित मदद नहीं ली, बल्कि 20 से अधिक अन्य लोगों को भी JSSC की परीक्षा में गलत तरीके से सफल कराने में भूमिका निभाई।
यानी जांच एजेंसी अब कुंदन की भूमिका को सिर्फ एक सफल अभ्यर्थी तक सीमित मानकर नहीं देख रही है। जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे, किन अभ्यर्थियों के साथ उसकी बातचीत हुई और कथित तौर पर किस माध्यम से परीक्षा से जुड़ी जानकारी या सहायता उपलब्ध कराई गई।

यदि जांच में यह आरोप प्रमाणित होते हैं कि किसी व्यक्ति ने पैसे या किसी अन्य माध्यम के जरिए कई अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ दिलाया, तो मामला केवल परीक्षा में धोखाधड़ी का नहीं रह जाता, बल्कि इसके पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क की पहचान करना भी जरूरी हो जाता है।
इसी कारण CID द्वारा गिरफ्तार किए गए सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ को जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
परीक्षा एजेंसी से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में
इस पूरे मामले में परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी और उसके कर्मचारियों की भूमिका भी जांच का अहम हिस्सा बनी हुई है।
कटिंग में स्पष्ट रूप से आईसीएन के मिथिलेश सिंह का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि कुंदन कुमार ने मिथिलेश सिंह के साथ मिलकर परीक्षा में गलत तरीके से अभ्यर्थियों को सफलता दिलाने की व्यवस्था में भूमिका निभाई।
जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि परीक्षा से संबंधित संवेदनशील जानकारी तक किसकी पहुंच थी और वह जानकारी कथित तौर पर बाहर कैसे पहुंची।
परीक्षा संचालन में कई स्तरों पर तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्था शामिल होती है। ऐसे में किसी भी कथित पेपर लीक या अनुचित लाभ की जांच में केवल अभ्यर्थियों की भूमिका ही नहीं, बल्कि परीक्षा से जुड़े लोगों, एजेंसियों, बिचौलियों और अन्य संपर्कों की भूमिका भी देखी जाती है।
हाल की जांच में परीक्षा संचालन से जुड़े कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। अगस्त 2026 में CID ने दिल्ली से परीक्षा संचालन से जुड़े सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार को गिरफ्तार किया था। दोनों के खिलाफ भी इसी मामले में कार्रवाई की गई थी।
शिकायत में कुंदन के भाई और अन्य लोगों के नाम
अखबार की कटिंग में दी गई जानकारी के अनुसार, शिकायत में कुंदन कुमार के भाई विकास कुमार, रवि और धर्मेंद्र सहित कुछ अन्य लोगों के नामों का भी उल्लेख किया गया है।
इससे जांच का दायरा और बढ़ सकता है। हालांकि किसी शिकायत में नाम आने मात्र से किसी व्यक्ति की भूमिका या अपराध सिद्ध नहीं हो जाता। संबंधित व्यक्ति की भूमिका जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
जांच एजेंसी के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि जिन लोगों के नाम शिकायत में आए हैं, उनका कुंदन कुमार से किस प्रकार का संपर्क था और क्या उनका कथित परीक्षा अनियमितता से कोई संबंध था।
तीन सितंबर की रिपोर्ट के बाद फिर चर्चा में आया नाम
आपकी दी गई अखबार की कटिंग में यह भी उल्लेख है कि प्रभात खबर ने तीन सितंबर को कुंदन कुमार की कथित गड़बड़ियों से संबंधित रिपोर्ट प्रकाशित की थी।
यानी गिरफ्तारी से पहले ही जांच से जुड़े तथ्यों में कुंदन कुमार का नाम सामने आ चुका था। बाद में CID की कार्रवाई के साथ यह मामला और गंभीर हो गया।
जांच एजेंसी के लिए किसी आरोपी या संदिग्ध का पहले से उपलब्ध रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, आर्थिक लेन-देन और अन्य लोगों के साथ संपर्क की जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है। इसी आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि किसी व्यक्ति की भूमिका व्यक्तिगत थी या वह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था।
JSSC CGL मामला: कैसे बढ़ी जांच की कड़ी?
JSSC CGL परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच काफी समय से चल रही है। CID ने इस मामले में 1 जनवरी 2025 को CID थाना कांड संख्या 01/2025 दर्ज कर जांच शुरू की थी।
जांच आगे बढ़ने के साथ अलग-अलग स्तरों पर लोगों की भूमिका सामने आती गई। इनमें कथित तौर पर सफल अभ्यर्थी, परीक्षा संचालन से जुड़े लोग और अन्य संदिग्ध शामिल हैं।
अगस्त के अंतिम सप्ताह में जांच तेजी से आगे बढ़ी। पहले परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद परीक्षा में सफल कुछ अभ्यर्थियों को भी गिरफ्तार किया गया।
30 अगस्त को गिरिडीह जिले के बेंगाबाद निवासी समीर कुमार की गिरफ्तारी की खबर सामने आई थी। उससे पहले दीपक कुमार, उमेश कुमार राय, विजय कुमार तिवारी और आनंद कुमार सिंह समेत कई सफल अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी हो चुकी थी।
अब कुंदन कुमार की गिरफ्तारी ने जांच के दायरे को और आगे बढ़ा दिया है।
150 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ की जानकारी
अगस्त के अंत में प्रकाशित रिपोर्टों में CID की विशेष जांच टीम द्वारा 150 से अधिक संदिग्धों और अभ्यर्थियों से पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई थी। साथ ही परीक्षा से जुड़े वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही थी।
यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि परीक्षा में कथित अनियमितता के मामलों में आर्थिक लेन-देन से कई महत्वपूर्ण कड़ियां सामने आ सकती हैं।
यदि किसी अभ्यर्थी ने कथित तौर पर किसी बिचौलिए या नेटवर्क को पैसे दिए हों, तो बैंक ट्रांजेक्शन, डिजिटल भुगतान, फोन कॉल, मैसेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
इसी तरह यदि किसी व्यक्ति ने कई अभ्यर्थियों से पैसा लेकर उन्हें कथित रूप से परीक्षा में सफलता दिलाने की कोशिश की, तो उन सभी के बीच हुए संपर्कों को जोड़कर नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा सकती है।
अब तक कई सफल अभ्यर्थी जांच के घेरे में
JSSC CGL मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह देखने को मिला है कि अब कार्रवाई केवल कथित पेपर लीक या परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों तक सीमित नहीं है।
जांच एजेंसी सफल अभ्यर्थियों की भूमिका भी देख रही है।
कुंदन कुमार की गिरफ्तारी इसी बात को स्पष्ट करती है कि यदि कोई उम्मीदवार कथित तौर पर अनुचित माध्यम से परीक्षा में सफल होकर सरकारी पद तक पहुंचा है, तो जांच एजेंसी उसकी भूमिका की भी जांच कर सकती है।
हाल की रिपोर्टों के अनुसार, कुंदन कुमार सहित इस मामले में गिरफ्तारियों की संख्या लगातार बढ़ी है। दैनिक जागरण की 6 सितंबर की रिपोर्ट में CID द्वारा कुल 27 आरोपितों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है।
हालांकि अलग-अलग समय की रिपोर्टों में गिरफ्तारी की संख्या अलग हो सकती है, क्योंकि जांच के दौरान नई गिरफ्तारियां लगातार होती रही हैं। इसलिए अंतिम संख्या संबंधित एजेंसी के आधिकारिक अपडेट से ही सुनिश्चित मानी जानी चाहिए।
सरकारी नौकरी तक पहुंची कथित परीक्षा गड़बड़ी
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि कथित तौर पर परीक्षा में अनुचित लाभ लेने वाले कुछ उम्मीदवार परीक्षा पास करने के बाद सरकारी पदों पर नियुक्त भी हो चुके थे।
कुंदन कुमार के मामले में रिपोर्ट के अनुसार वह JSSC CGL पास करने के बाद प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के पद पर कार्यरत था।
इससे यह सवाल उठता है कि यदि किसी उम्मीदवार ने वास्तव में अनुचित माध्यम से परीक्षा पास की थी, तो उसके चयन और नियुक्ति की प्रक्रिया की दोबारा जांच कैसे होगी।
ऐसे मामलों में जांच एजेंसी के निष्कर्ष के बाद संबंधित विभागों के सामने भी कार्रवाई का सवाल आ सकता है। हालांकि किसी उम्मीदवार की नियुक्ति रद्द करने या उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई जैसे निर्णय संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के आधार पर ही लिए जाएंगे।
ईमानदारी से परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों पर सबसे बड़ा असर
किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की विश्वसनीयता का सबसे महत्वपूर्ण आधार समान अवसर है।
हजारों अभ्यर्थी महीनों और कई बार वर्षों तक तैयारी करते हैं। वे कोचिंग, किताबों, ऑनलाइन कक्षाओं और टेस्ट सीरीज पर पैसा खर्च करते हैं। कई उम्मीदवार नौकरी की उम्मीद में अपनी पढ़ाई और निजी जीवन तक को परीक्षा की तैयारी के लिए समर्पित कर देते हैं।
ऐसे में यदि किसी परीक्षा में कुछ लोगों को कथित तौर पर प्रश्न या उत्तर पहले से उपलब्ध कराकर फायदा पहुंचाया जाता है, तो उसका सबसे बड़ा नुकसान उन अभ्यर्थियों को होता है जिन्होंने पूरी ईमानदारी से परीक्षा दी।
यही कारण है कि परीक्षा में कथित अनियमितता की जांच केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जांच से यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि परीक्षा प्रक्रिया में कमजोरी कहां रही और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए क्या सुधार जरूरी हैं।
जांच में डिजिटल साक्ष्य की भूमिका
आज के समय में किसी भी बड़े परीक्षा घोटाले की जांच केवल कागजों और बयान तक सीमित नहीं रहती।
मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, चैट, बैंक ट्रांजेक्शन, ऑनलाइन भुगतान और डिजिटल फाइलें जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकती हैं।
कुंदन कुमार के मामले में भी रिपोर्ट के अनुसार पूछताछ के दौरान उसका मोबाइल फोन जब्त किया गया था।
मोबाइल की जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि संबंधित व्यक्ति किन लोगों के संपर्क में था और परीक्षा के आसपास के समय में किन नंबरों या लोगों से उसकी बातचीत हुई।
इसी तरह आर्थिक लेन-देन की जांच से कथित तौर पर पैसे के लेन-देन की कड़ियों का पता लगाने की कोशिश की जा सकती है।
हालांकि किसी फोन नंबर या लेन-देन का किसी व्यक्ति से जुड़ा होना अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करता। जांच में उसके संदर्भ और अन्य साक्ष्यों को भी देखना जरूरी होता है।
परीक्षा संचालन एजेंसी की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?
किसी प्रतियोगी परीक्षा के आयोजन में परीक्षा संचालन एजेंसी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों तक पहुंच, डिजिटल सिस्टम, डेटा प्रबंधन और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं में कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था रहती है।
ऐसे में यदि किसी परीक्षा का प्रश्नपत्र कथित तौर पर लीक होने की बात सामने आती है, तो जांचकर्ताओं के लिए यह पता लगाना जरूरी होता है कि संवेदनशील सामग्री तक पहुंच किस स्तर पर हुई।
JSSC CGL मामले में परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी और उनसे पूछताछ इसी पहलू को महत्वपूर्ण बनाती है। अगस्त में दो परीक्षा संचालन से जुड़े आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांचकर्ताओं द्वारा एजेंसी से जुड़े लोगों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
क्या सभी संदिग्ध अभ्यर्थियों पर कार्रवाई होगी?
यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि जांच के दायरे में आए सभी अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई होगी या नहीं।
इसका उत्तर जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।
किसी सूची में नाम होना, किसी व्यक्ति से पूछताछ होना या किसी दूसरे आरोपी द्वारा उसका नाम लेना अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करता। CID को प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका के संबंध में पर्याप्त साक्ष्य जुटाने होंगे।
यदि किसी अभ्यर्थी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ सकती है। वहीं जिन लोगों के खिलाफ आरोप प्रमाणित नहीं होते, उनके मामले में स्थिति अलग होगी।
इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं होगा।
कुंदन की गिरफ्तारी से आगे क्या?
कुंदन कुमार की गिरफ्तारी के बाद जांच में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे।
सबसे पहला सवाल होगा कि कथित तौर पर उसने किसके माध्यम से परीक्षा में अनुचित लाभ हासिल किया।
दूसरा सवाल यह होगा कि 20 से अधिक अभ्यर्थियों को कथित रूप से सफल कराने में उसकी क्या भूमिका थी।
तीसरा सवाल यह होगा कि इन अभ्यर्थियों से उसका संपर्क कैसे हुआ और उनके बीच किसी प्रकार का आर्थिक लेन-देन हुआ या नहीं।
चौथा सवाल परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों के साथ उसके संबंधों से जुड़ा होगा।
इसके अलावा जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि कथित नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे और क्या इसी तरीके से अन्य अभ्यर्थियों को भी लाभ पहुंचाया गया।
जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा
JSSC CGL मामले की घटनाक्रम को देखें तो जांच का दायरा लगातार बढ़ता दिखाई देता है।
शुरुआत में मामला कथित पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितता से जुड़ा था। बाद में परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों, बिचौलियों और सफल अभ्यर्थियों की भूमिका की जांच सामने आई।
अब कुंदन कुमार की गिरफ्तारी के साथ यह आरोप सामने आया है कि वह खुद लाभ लेने के साथ-साथ 20 से अधिक अन्य लोगों को कथित रूप से परीक्षा में गलत तरीके से सफल कराने की कोशिश में शामिल था।
यही वजह है कि इस गिरफ्तारी को जांच की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
125 से अधिक अभ्यर्थियों की भूमिका भी जांच में
7 सितंबर 2026 की कुछ रिपोर्टों में CID जांच के हवाले से बताया गया है कि 125 से अधिक अभ्यर्थी जांच के दायरे में आए हैं। एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इनमें से कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले नेपाल ले जाकर कथित रूप से प्रश्नों के उत्तर याद कराने की जांच की जा रही है।
यह जानकारी मामले को और व्यापक बनाती है। हालांकि इन सभी दावों को जांच के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। जांच अभी जारी है और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।
परीक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत
JSSC CGL मामले से परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल उठते हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन इसके साथ साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा का महत्व भी बढ़ गया है।
परीक्षा प्रक्रिया में प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने और परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन तक हर स्तर पर सुरक्षा जरूरी है।
किसी भी स्तर पर यदि अंदरूनी जानकारी बाहर निकलती है, तो पूरी परीक्षा की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
इसलिए ऐसे मामलों की जांच के साथ-साथ भविष्य की परीक्षाओं में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना भी जरूरी है।
अभ्यर्थियों के भविष्य का सवाल भी महत्वपूर्ण
इस मामले में एक बड़ा सवाल उन अभ्यर्थियों के भविष्य से भी जुड़ा है, जिन्होंने परीक्षा में ईमानदारी से सफलता हासिल की होगी।
यदि किसी परीक्षा में कथित गड़बड़ी सामने आती है तो जांच का असर कई उम्मीदवारों पर पड़ सकता है। इसलिए किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वास्तविक दोषियों और निर्दोष अभ्यर्थियों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाए।
जांच एजेंसी और संबंधित आयोग के सामने यही चुनौती होगी कि मामले की तह तक जाकर प्रत्येक अभ्यर्थी की भूमिका का निष्पक्ष आकलन किया जाए।
अदालत में तय होगी आरोपों की अंतिम स्थिति
कुंदन कुमार की गिरफ्तारी जांच की प्रक्रिया का हिस्सा है। गिरफ्तारी का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने उसे दोषी ठहरा दिया है।
उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों की कानूनी जांच होगी। जांच एजेंसी अपने साक्ष्य अदालत के सामने रखेगी और इसके बाद न्यायिक प्रक्रिया के तहत आरोपों की पुष्टि या खंडन होगा।
इसी तरह शिकायत में नाम आने वाले अन्य लोगों की भूमिका भी जांच और न्यायिक प्रक्रिया में तय होगी।
इसलिए इस पूरे मामले में आरोप, जांच और दोषसिद्धि—तीनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
निष्कर्ष
JSSC CGL परीक्षा से जुड़ी कथित गड़बड़ी का मामला अब लगातार नए मोड़ ले रहा है। कुंदन कुमार की गिरफ्तारी ने जांच के उस पहलू को सामने ला दिया है, जिसमें आरोप है कि परीक्षा में गलत तरीके से सफलता हासिल करने के अलावा 20 से अधिक अन्य अभ्यर्थियों को भी कथित तौर पर सफल कराने में उसकी भूमिका थी।
कुंदन कुमार खुद JSSC CGL पास करने के बाद सरकारी पद पर कार्यरत था। ऐसे में उसकी गिरफ्तारी यह सवाल भी उठाती है कि यदि किसी अभ्यर्थी ने अनुचित तरीके से परीक्षा में सफलता हासिल की, तो उस सफलता के आधार पर हुई नियुक्ति की जांच किस स्तर तक जाएगी।
मामले में परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों, सफल अभ्यर्थियों और कथित नेटवर्क की भूमिका की जांच पहले से चल रही है। अगस्त में परीक्षा संचालन से जुड़े दो लोगों और कई सफल अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी के बाद अब कुंदन कुमार की गिरफ्तारी जांच की अगली महत्वपूर्ण कड़ी बन गई है।
सबसे अहम बात यह है कि इस मामले में अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही साफ होगी। फिलहाल CID कथित पेपर लीक, अनुचित लाभ, अभ्यर्थियों के बीच संपर्क और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती है। इसलिए इस मामले में जांच जितनी निष्पक्ष और तथ्य आधारित होगी, उतना ही उन अभ्यर्थियों को भरोसा मिलेगा जिन्होंने पूरी मेहनत और ईमानदारी से परीक्षा दी है।