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रांची। राजधानी रांची में फुटपाथ और सड़क किनारे दुकान लगाकर रोजी-रोटी कमाने वाले दुकानदारों को व्यवस्थित करने की दिशा में नगर निगम ने तैयारी शुरू कर दी है। शहर के सभी 53 वार्डों में फुटपाथ दुकानदारों का सर्वे कराया जाएगा। सर्वे के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि अलग-अलग वार्डों और इलाकों में कितने फुटपाथ दुकानदार कारोबार कर रहे हैं, उनकी दुकान किस प्रकार की है और उन्हें किस क्षेत्र में स्थायी या व्यवस्थित जगह उपलब्ध कराने की जरूरत है।

नगर निगम की योजना है कि सर्वे से सामने आने वाले आंकड़ों के आधार पर अलग-अलग इलाकों में जरूरत के हिसाब से वेंडिंग मार्केट विकसित किए जाएं। इसके लिए सरकारी अथवा नगर निगम की उपलब्ध जमीन की तलाश की जाएगी। जमीन चिह्नित होने के बाद संबंधित इलाके में दुकानदारों की संख्या और जरूरत के अनुसार वेंडिंग मार्केट विकसित करने की योजना तैयार की जाएगी।

नगर निगम का मानना है कि फुटपाथ दुकानदारों को एक निश्चित और व्यवस्थित स्थान मिलने से एक तरफ उनके कारोबार को स्थिरता मिलेगी, वहीं दूसरी ओर शहर के फुटपाथ भी खाली हो सकेंगे। इससे पैदल चलने वाले लोगों और वाहन चालकों को होने वाली परेशानी कम करने में मदद मिल सकती है।


Table of Contents

53 वार्डों में शुरू होगा सर्वे

नगर निगम के स्तर से सभी 53 वार्डों में फुटपाथ दुकानदारों का सर्वे कराने की तैयारी है। इस सर्वे का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य शहर में वास्तव में कितने लोग फुटपाथ या सड़क किनारे दुकान लगाकर अपनी आजीविका चला रहे हैं, इसका वास्तविक आंकड़ा तैयार करना है।

अभी अलग-अलग इलाकों में बड़ी संख्या में लोग फुटपाथ, सड़क के किनारे, बाजारों के आसपास और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर दुकान लगाकर कारोबार करते हैं। इनमें फल-सब्जी विक्रेता, खाने-पीने की सामग्री बेचने वाले, छोटे दुकानदार और अन्य तरह के स्ट्रीट वेंडर शामिल हो सकते हैं।

सर्वे के बाद नगर निगम के पास वार्डवार दुकानदारों का आंकड़ा उपलब्ध होगा। इससे यह समझने में भी मदद मिलेगी कि किस वार्ड या क्षेत्र में फुटपाथ दुकानदारों की संख्या अधिक है और किस इलाके में उनके लिए अलग बाजार की जरूरत सबसे ज्यादा है।


दुकानदारों की संख्या के साथ कारोबार की भी जानकारी

सिर्फ दुकानदारों की गिनती करना ही सर्वे का उद्देश्य नहीं है। सर्वे के दौरान दुकानदारों की संख्या, दुकान की जगह और कारोबार से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जाएगी।

नगर निगम के लिए यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सभी इलाकों में दुकानदारों की जरूरत एक जैसी नहीं होती। किसी इलाके में फल-सब्जी बेचने वालों की संख्या अधिक हो सकती है, तो किसी दूसरे इलाके में कपड़े, खाद्य सामग्री या अन्य छोटे कारोबार करने वाले दुकानदार ज्यादा हो सकते हैं।

यदि नगर निगम के पास वार्डवार और कारोबारवार जानकारी उपलब्ध होगी, तो उसी के अनुसार वेंडिंग मार्केट की योजना तैयार की जा सकती है।

उदाहरण के लिए जिस इलाके में फुटपाथ दुकानदारों की संख्या अधिक होगी, वहां बड़े वेंडिंग जोन की जरूरत हो सकती है। वहीं कम दुकानदारों वाले इलाके में छोटी व्यवस्था की जा सकती है।


जरूरत के हिसाब से अलग-अलग इलाकों में बनेगा वेंडिंग मार्केट

नगर निगम की योजना के अनुसार सर्वे के बाद दुकानदारों की संख्या और स्थानीय जरूरत के आधार पर अलग-अलग इलाकों में वेंडिंग मार्केट विकसित करने की तैयारी है।

इसके लिए सबसे पहले सरकारी अथवा नगर निगम के पास उपलब्ध जमीन की तलाश की जाएगी। जमीन चिह्नित होने के बाद यह देखा जाएगा कि संबंधित क्षेत्र के कितने दुकानदारों को वहां व्यवस्थित किया जा सकता है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल दुकानदारों को सड़क से हटाना नहीं बल्कि उन्हें एक निश्चित स्थान उपलब्ध कराना भी है।

वेंडिंग मार्केट विकसित होने के बाद दुकानदारों को बार-बार जगह बदलने की समस्या से राहत मिल सकती है। दूसरी ओर नगर निगम के लिए शहर के फुटपाथ और सड़क किनारे की व्यवस्था को नियंत्रित करना आसान होगा।


फुटपाथ खाली होंगे तो पैदल चलने वालों को राहत

रांची के कई व्यस्त इलाकों में फुटपाथ पर दुकानें लगने के कारण पैदल चलने वाले लोगों को सड़क का सहारा लेना पड़ता है। कई जगह फुटपाथ का बड़ा हिस्सा दुकानों या सामान से घिर जाता है।

इस स्थिति में पैदल यात्रियों को परेशानी होती है और सड़क पर चलने वाले वाहनों के साथ उनका टकराव का जोखिम भी बढ़ जाता है। खासकर मुख्य बाजार और व्यस्त सड़कों पर फुटपाथ पर दुकानें लगने से पैदल चलने वालों के लिए जगह कम हो जाती है।

नगर निगम की प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यदि दुकानदारों को निर्धारित वेंडिंग जोन में स्थान मिलता है तो फुटपाथ खाली करने में मदद मिल सकती है।

इससे फुटपाथ का इस्तेमाल अपने मूल उद्देश्य यानी पैदल आवागमन के लिए किया जा सकेगा।


सड़क पर जाम की समस्या भी कम होने की उम्मीद

फुटपाथ पर दुकानों का असर केवल पैदल यात्रियों तक सीमित नहीं रहता। कई जगह दुकानों के कारण ग्राहक सड़क के किनारे वाहन खड़े कर देते हैं। सामान खरीदने वालों की भीड़ और सड़क किनारे वाहनों की पार्किंग से यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है।

ऐसे स्थानों पर छोटी-छोटी दुकानों की वजह से सड़क का उपयोगी हिस्सा भी कम हो जाता है। इससे ट्रैफिक धीमा पड़ सकता है और जाम की स्थिति बन सकती है।

नगर निगम की योजना है कि फुटपाथ दुकानदारों को व्यवस्थित स्थान मिलने से ऐसी समस्याओं को कम किया जा सके। यदि दुकानें सड़क से हटकर निर्धारित स्थान पर होंगी तो सड़क और फुटपाथ दोनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।


बार-बार हटाए जाने की समस्या से दुकानदारों को राहत

फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले दुकानदारों के सामने सबसे बड़ी समस्याओं में से एक जगह की अनिश्चितता है। जब किसी सड़क, फुटपाथ या बाजार क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होती है तो कई बार छोटे दुकानदारों को वहां से हटना पड़ता है।

ऐसे में उनका कारोबार प्रभावित होता है और उन्हें दूसरी जगह तलाशनी पड़ती है।

वेंडिंग मार्केट की व्यवस्था का एक उद्देश्य इस समस्या को कम करना भी है। यदि सर्वे के बाद पात्र दुकानदारों को निर्धारित जगह मिलती है तो उनके लिए कारोबार करने का एक निश्चित स्थान उपलब्ध हो सकता है।

इससे दुकानदारों को बार-बार हटाए जाने की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।


मेयर ने बताया फुटपाथ दुकानदारों को व्यवस्थित करना प्राथमिकता

नगर निगम की ओर से दिए गए बयान में मेयर रोशनी खलखो ने कहा कि फुटपाथ दुकानदारों को व्यवस्थित करना निगम की पहली प्राथमिकताओं में शामिल है। हर वार्ड में कैंप लगाकर दुकानदारों की संख्या की जानकारी जुटाई जाएगी।

उनके अनुसार जब दुकानदारों की वास्तविक संख्या सामने आ जाएगी तो उनके लिए विकास योजना को जमीन पर उतारने में सुविधा होगी।

इसका अर्थ है कि निगम पहले शहर में मौजूद फुटपाथ दुकानदारों का वास्तविक आंकड़ा तैयार करना चाहता है और उसके बाद उसी आधार पर आगे की योजना को लागू करने की दिशा में बढ़ेगा।


पहले आंकड़ा, फिर तैयार होगी योजना

नगर निगम की इस पूरी योजना में सर्वे को पहला महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

बिना वास्तविक आंकड़ों के यदि किसी इलाके में वेंडिंग मार्केट बनाया जाता है तो हो सकता है कि वहां दुकानदारों की संख्या के हिसाब से पर्याप्त जगह उपलब्ध न हो। दूसरी ओर कहीं जरूरत से अधिक जगह उपलब्ध हो सकती है।

इसलिए पहले यह पता लगाना जरूरी है कि किस क्षेत्र में कितने दुकानदार हैं।

सर्वे के बाद निगम के पास जब आंकड़ा होगा तो उसके आधार पर यह तय किया जा सकेगा कि किस क्षेत्र में कितनी जगह की जरूरत है और कितने दुकानदारों को एक बाजार में व्यवस्थित किया जा सकता है।


वार्डवार सर्वे से सामने आएगी वास्तविक तस्वीर

53 वार्डों में सर्वे होने के बाद रांची शहर में फुटपाथ कारोबार की वास्तविक स्थिति की एक व्यापक तस्वीर सामने आ सकती है।

किस वार्ड में कितने दुकानदार हैं, किस इलाके में दुकानों की संख्या ज्यादा है, किस तरह के दुकानदार मौजूद हैं और किन इलाकों में वेंडिंग जोन की आवश्यकता है—इन सभी सवालों के जवाब सर्वे से मिलने की उम्मीद है।

यह जानकारी भविष्य में नगर निगम की योजना बनाने में भी उपयोगी हो सकती है।

अगर किसी वार्ड में दुकानदारों की संख्या लगातार बढ़ रही है तो वहां पहले से पर्याप्त जगह की योजना बनाई जा सकती है। इसी तरह भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में यातायात और पैदल आवागमन को ध्यान में रखकर वेंडिंग जोन निर्धारित किए जा सकते हैं।


दुकानदारों के लिए भी व्यवस्थित बाजार जरूरी

फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले छोटे कारोबारी शहर की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कई लोग कम पूंजी के साथ सड़क किनारे दुकान लगाकर अपना परिवार चलाते हैं।

इन दुकानदारों के लिए बड़ी दुकान या महंगा व्यावसायिक स्थान लेना आसान नहीं होता। इसलिए फुटपाथ और छोटे बाजार उनके लिए आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

ऐसे में नगर निगम की चुनौती यह है कि शहर की यातायात और सार्वजनिक स्थानों की व्यवस्था बनाए रखते हुए इन दुकानदारों की आजीविका को भी ध्यान में रखा जाए।

वेंडिंग मार्केट इसी संतुलन की दिशा में एक व्यवस्था हो सकती है।


शहर की सुंदरता और व्यवस्था में भी आएगा बदलाव

फुटपाथ और सड़क किनारे व्यवस्थित तरीके से दुकानें नहीं होने पर किसी भी शहर का सार्वजनिक स्थान अव्यवस्थित दिखाई दे सकता है।

एक ही सड़क पर अलग-अलग जगहों पर दुकानें लगने, सामान रखने और ग्राहकों की भीड़ के कारण सड़क की व्यवस्था प्रभावित होती है।

यदि दुकानदारों को निर्धारित स्थान उपलब्ध कराया जाता है तो बाजार क्षेत्र अधिक व्यवस्थित दिखाई दे सकते हैं। फुटपाथ खाली रहने से शहर की पैदल यातायात व्यवस्था भी बेहतर हो सकती है।

इससे रांची के प्रमुख बाजारों और व्यस्त क्षेत्रों में सार्वजनिक स्थानों का बेहतर उपयोग संभव हो सकता है।


सिर्फ दुकान हटाना समाधान नहीं

फुटपाथ अतिक्रमण की समस्या पर अक्सर दुकानदारों को हटाने की कार्रवाई की जाती है। लेकिन छोटे दुकानदारों के लिए केवल हटाना स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता।

यदि उन्हें कोई वैकल्पिक स्थान उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो वे दोबारा किसी दूसरे फुटपाथ या सड़क किनारे दुकान लगाने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

इसी कारण वेंडिंग मार्केट की योजना महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर दुकानदारों को व्यवस्थित और कारोबार के लिए उपयोगी स्थान मिलता है तो सड़क और फुटपाथ खाली कराने की कार्रवाई के साथ आजीविका का विकल्प भी उपलब्ध कराया जा सकता है।


जमीन की तलाश होगी बड़ी चुनौती

वेंडिंग मार्केट विकसित करने के लिए सबसे पहले उपयुक्त जमीन की जरूरत होगी। नगर निगम सरकारी अथवा अपनी उपलब्ध जमीन की तलाश करेगा।

जमीन चुनते समय केवल खाली स्थान देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह भी देखना होगा कि वहां ग्राहक आसानी से पहुंच सकें, सड़क और यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और दुकानदारों के लिए जगह व्यावहारिक हो।

यदि वेंडिंग मार्केट बहुत दूर बना दिया गया और ग्राहकों की पहुंच वहां नहीं हुई तो दुकानदारों के कारोबार पर असर पड़ सकता है।

इसलिए बाजार के लिए जमीन का चयन योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।


वेंडिंग मार्केट में मूलभूत सुविधाएं भी जरूरी

यदि नगर निगम फुटपाथ दुकानदारों को व्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराने की योजना को लागू करता है तो केवल दुकान लगाने की जगह देना पर्याप्त नहीं होगा।

वेंडिंग मार्केट में जरूरत के अनुसार पेयजल, शौचालय, कचरा प्रबंधन, रोशनी, सफाई और आने-जाने की व्यवस्था जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।

इन सुविधाओं से न केवल दुकानदारों को बल्कि ग्राहकों को भी सुविधा मिलेगी।

साफ-सुथरा और व्यवस्थित बाजार होने पर ग्राहक भी वहां खरीदारी करने के लिए आसानी से पहुंच सकते हैं।


दुकानदारों की पहचान और व्यवस्था जरूरी

सर्वे के दौरान दुकानदारों की जानकारी एकत्र होने के बाद आगे की प्रक्रिया में उनकी पहचान और उपलब्ध स्थान के अनुसार व्यवस्था करना महत्वपूर्ण होगा।

किस दुकानदार को किस वेंडिंग जोन में जगह दी जाएगी, कितनी जगह उपलब्ध होगी और बाजार की क्षमता कितनी होगी—इन विषयों पर स्पष्ट व्यवस्था जरूरी होगी।

इससे भविष्य में नए अतिक्रमण को रोकने में भी मदद मिल सकती है।

यदि निर्धारित वेंडिंग जोन के बाहर फिर से दुकानें लगने लगती हैं तो समस्या दोबारा पैदा हो सकती है। इसलिए सर्वे के बाद नियमित निगरानी भी जरूरी होगी।


यातायात व्यवस्था के साथ करना होगा समन्वय

वेंडिंग मार्केट की योजना बनाते समय यातायात व्यवस्था को भी ध्यान में रखना होगा। रांची के कई बाजार पहले से ही भीड़भाड़ वाले हैं।

यदि एक ही स्थान पर बड़ी संख्या में दुकानदारों को व्यवस्थित किया जाता है तो वहां ग्राहकों की संख्या भी बढ़ सकती है। ऐसे में पार्किंग और यातायात प्रबंधन की व्यवस्था भी जरूरी होगी।

नगर निगम को ट्रैफिक पुलिस और संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर ऐसे स्थानों का चयन करना होगा जहां बाजार विकसित होने के बाद भी यातायात सुचारु रह सके।


छोटे कारोबार को मिल सकता है स्थायित्व

फुटपाथ दुकानदारों के लिए निर्धारित स्थान मिलने का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि उनका कारोबार अधिक स्थिर हो।

अभी कई दुकानदारों को जगह बदलनी पड़ती है। कभी सड़क निर्माण, कभी अतिक्रमण हटाओ अभियान और कभी यातायात व्यवस्था के कारण उन्हें अपना स्थान छोड़ना पड़ता है।

अगर वेंडिंग मार्केट में व्यवस्थित जगह मिलती है तो वे उसी स्थान पर नियमित रूप से कारोबार कर सकते हैं।

इससे ग्राहक भी उन्हें एक निश्चित स्थान पर आसानी से खोज सकते हैं।


सर्वे के बाद सामने आएगी जरूरत

नगर निगम के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि सर्वे से सामने आने वाले आंकड़ों का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए।

यदि किसी क्षेत्र में दुकानदारों की संख्या बहुत अधिक है तो वहां पर्याप्त क्षमता वाले बाजार की आवश्यकता होगी। वहीं किसी दूसरे क्षेत्र में कम संख्या होने पर अलग तरह की व्यवस्था की जा सकती है।

इसलिए “जरूरत के हिसाब से वेंडिंग मार्केट” की योजना को सर्वे के आंकड़ों से जोड़ना महत्वपूर्ण होगा।


फुटपाथ पर पैदल चलने की सुविधा बहाल करने की कोशिश

शहर में फुटपाथ का मुख्य उद्देश्य पैदल चलने वालों को सुरक्षित और सुविधाजनक रास्ता उपलब्ध कराना है। जब फुटपाथ पर स्थायी या अस्थायी दुकानें लग जाती हैं तो पैदल चलने वालों को सड़क पर उतरना पड़ता है।

नगर निगम की प्रस्तावित योजना में यदि दुकानदारों को वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाता है तो फुटपाथ को पैदल यात्रियों के लिए खाली करने में मदद मिल सकती है।

यह व्यवस्था शहर में पैदल आवागमन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।


योजना के सफल होने के लिए निगरानी जरूरी

वेंडिंग मार्केट तैयार होने के बाद भी नगर निगम के सामने निगरानी की चुनौती रहेगी। निर्धारित जगह के बाहर फिर से दुकानें लगने लगीं तो फुटपाथ और सड़क की समस्या वापस आ सकती है।

इसलिए सर्वे, बाजार निर्माण और दुकानदारों को जगह देने के बाद नियमित निरीक्षण की व्यवस्था भी जरूरी होगी।

साथ ही नए दुकानदारों के लिए भी स्पष्ट नियम होने चाहिए, ताकि भविष्य में अनियंत्रित तरीके से फुटपाथ पर दुकानें न बढ़ें।


दुकानदारों और शहर दोनों के हित में हो सकती है योजना

रांची जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में सार्वजनिक स्थानों का व्यवस्थित उपयोग जरूरी है। एक तरफ बड़ी संख्या में लोग छोटे कारोबार से अपनी आजीविका चला रहे हैं, दूसरी तरफ शहर में यातायात, पैदल आवागमन और अतिक्रमण की समस्या भी बनी रहती है।

ऐसे में फुटपाथ दुकानदारों के लिए व्यवस्थित वेंडिंग मार्केट विकसित करना दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश हो सकती है।

दुकानदारों को कारोबार के लिए स्थान मिलेगा और नगर निगम को सड़क तथा फुटपाथ की व्यवस्था बेहतर करने में मदद मिलेगी।


आगे की प्रक्रिया पर रहेगी नजर

अब सबसे पहले 53 वार्डों में सर्वे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगा। सर्वे से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर वार्डवार जरूरत का आकलन किया जाएगा। इसके बाद उपलब्ध सरकारी और नगर निगम की जमीन की पहचान की जाएगी।

जमीन और जरूरत के आधार पर वेंडिंग मार्केट के लिए योजना तैयार की जाएगी।

योजना लागू होने के बाद यह देखना भी जरूरी होगा कि जिन दुकानदारों को जगह दी गई है, उन्हें वास्तव में कारोबार करने में सुविधा मिल रही है या नहीं।


निष्कर्ष

रांची नगर निगम द्वारा शहर के सभी 53 वार्डों में फुटपाथ दुकानदारों का सर्वे कराने की तैयारी को शहर की बाजार और यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

सर्वे के माध्यम से निगम यह जानने की कोशिश करेगा कि शहर में वास्तविक रूप से कितने फुटपाथ दुकानदार हैं और अलग-अलग इलाकों में उनकी जरूरत क्या है। इसके बाद उपलब्ध सरकारी अथवा नगर निगम की जमीन की तलाश कर जरूरत के अनुसार वेंडिंग मार्केट विकसित करने की योजना है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य सिर्फ फुटपाथ से दुकानदारों को हटाना नहीं, बल्कि उन्हें कारोबार के लिए निश्चित स्थान उपलब्ध कराना भी है। यदि योजना सही तरीके से लागू होती है तो दुकानदारों को बार-बार हटाए जाने की समस्या से राहत मिल सकती है और दूसरी तरफ फुटपाथ को पैदल चलने वालों के लिए खाली कराने में मदद मिल सकती है।

फुटपाथ खाली होने से पैदल यात्रियों की परेशानी कम होने, सड़क किनारे भीड़ घटने और कुछ इलाकों में जाम की समस्या नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।

हालांकि योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सर्वे कितना व्यापक और सही होता है, दुकानदारों को किस आधार पर जगह दी जाती है, वेंडिंग मार्केट के लिए जमीन का चयन कितना व्यावहारिक होता है और बाद में निगम द्वारा निगरानी कितनी प्रभावी तरीके से की जाती है।

मेयर रोशनी खलखो के अनुसार फुटपाथ दुकानदारों को व्यवस्थित करना निगम की प्राथमिकता है। हर वार्ड में दुकानदारों की संख्या सामने आने के बाद उनके लिए विकास योजना तैयार करने में सुविधा होगी।

इस तरह 53 वार्डों का प्रस्तावित सर्वे रांची में फुटपाथ कारोबार को व्यवस्थित करने की दिशा में पहला बड़ा कदम हो सकता है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि सर्वे कब पूरा होता है और उसके बाद वेंडिंग मार्केट की योजना को किस तरह जमीन पर उतारा जाता है।

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