रांची। जिंदगी जिंदाबाद
सावन के पावन महीने में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का विशेष फल माना जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, जब ब्रह्मा जी और विष्णु जी के बीच वर्चस्व की प्रतिस्पर्धा हुई, तब महादेव एक अनंत प्रकाश स्तंभ के रूप में प्रकट हुए, जिसे ‘ज्योतिर्लिंग’ कहा गया। आदि शंकराचार्य जी द्वारा रचित ‘द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम्’ में वर्णित इन 12 ज्योतिर्लिंगों का सावन के परिप्रेक्ष्य में विस्तृत विवरण इस प्रकार है:
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (गिर सोमनाथ, गुजरात):

सौराष्ट्र के वेरावल में स्थित सोमनाथ को पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, चंद्रदेव (सोम) को जब राजा दक्ष से क्षय रोग का श्राप मिला, तब उन्होंने यहाँ कठिन तपस्या कर शिव जी की कृपा से अपना प्रकाश पुनः प्राप्त किया। सावन के महीने में यहाँ अरब सागर की लहरों के बीच भव्य महाआरती होती है। निकटतम रेलवे स्टेशन वेरावल मात्र 5 किमी दूर है।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश):

आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर नल्लामाला पहाड़ियों पर स्थित इस धाम को “दक्षिण की काशी” कहा जाता है। शिव पुराण के अनुसार, जब भगवान कार्तिकेय रुष्ट होकर क्रौंच पर्वत चले गए, तब माता पार्वती (‘मल्लिका’) और भगवान शिव (‘अर्जुन’) उन्हें मनाने हेतु यहाँ ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए। सावन में हरे-भरे जंगलों के बीच इसकी प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक छटा देखने योग्य होती है। निकटतम बड़ा स्टेशन हैदराबाद और मार्कापुर रोड है।
https://www.srisailadevasthanam.org/en-in/about/the-temple/mallikarjuna-swamy
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (उज्जैन, मध्य प्रदेश):

क्षिप्रा नदी के तट पर बसा महाकालेश्वर मंदिर एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। भक्त श्रीकर की अनन्य भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी यहाँ महाकाल वन में प्रकट हुए थे। सावन के दौरान यहाँ होने वाली तड़के की ‘भस्म आरती’ और सावन की हर सवारी का विशेष आकर्षण रहता है। निकटतम हवाई अड्डा इंदौर (55 किमी) और रेलवे स्टेशन उज्जैन जंक्शन है।
https://www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in/
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (खंडवा, मध्य प्रदेश):

नर्मदा नदी के बीच मांधाता नामक ॐ (ओम्) के आकार के द्वीप पर स्थित इस ज्योतिर्लिंग का नाम ओंकारेश्वर है। देवताओं और दानवों के युद्ध में देवताओं की प्रार्थना पर शिव जी ने यहाँ प्रकट होकर असुरों का संहार किया था। सावन में श्रद्धालु नर्मदा नदी में स्नान के बाद 5 किमी लंबी द्वीप परिक्रमा अवश्य करते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन व हवाई अड्डा इंदौर (77 किमी) है।
बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग (देवघर, झारखंड):

‘बाबा धाम’ या वैद्यनाथ के नाम से प्रसिद्ध यह ज्योतिर्लिंग लंकापति रावण द्वारा शिवजी को लंका ले जाते समय स्थापित हुआ था। सावन के महीने में यहाँ विश्व का सबसे विशाल कांवड़ मेला लगता है, जहाँ लाखों भक्त बिहार के सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगाजल लेकर 108 किमी नंगे पैर पैदल यात्रा कर बाबा का जलाभिषेक करते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन जसीडीह जंक्शन (15 किमी) है।
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग (पुणे, महाराष्ट्र):

महाराष्ट्र के सह्याद्री पर्वत क्षेत्र में भीमा नदी के उद्गम पर स्थित यह छठा ज्योतिर्लिंग है। राक्षसी कुंभकर्ण के पुत्र भीमा के अत्याचारों से संसार को मुक्त कराने हेतु शिव जी ने उसका भस्म किया और देवताओं के अनुरोध पर यहाँ ज्योतिर्लिंग रूप में वास किया। सावन में घने जंगलों और झरनों के बीच मराठा शैली में बने इस काले पत्थरों के मंदिर की सुंदरता देखते ही बनती है। निकटतम मुख्य शहर पुणे (110 किमी) है।
रामनाथस्वामी / रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग (रामेश्वरम, तमिलनाडु):

पांबन द्वीप पर स्थित यह धाम दक्षिण भारत का सबसे पवित्र तीर्थ है। रावण वध के पश्चात ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति पाने हेतु भगवान राम ने माता सीता द्वारा निर्मित बालू के शिवलिंग की स्थापना की थी, जबकि दूसरा शिवलिंग हनुमान जी काशी से लाए थे। सावन में यहाँ के 22 पवित्र कुंडों (तीर्थम) में स्नान कर ज्योतिर्लिंग के दर्शन का विशेष विधान है। निकटतम हवाई अड्डा मदुरै (163 किमी) है।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (द्वारका, गुजरात):

द्वारका के समीप स्थित नागेश्वर मंदिर को ‘विष निवारक’ ज्योतिर्लिंग माना जाता है। मान्यता है कि शिव भक्त सुप्रिय को दारुका राक्षसी के चंगुल से छुड़ाने के लिए महादेव यहाँ प्रकट हुए थे। सावन के महीने में यहाँ स्थित भगवान शिव की 85 फीट ऊँची ध्यानमग्न प्रतिमा के दर्शन हेतु दूर-दूर से श्रद्धालु पहुँचते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन द्वारका है।
काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग (वाराणसी, उत्तर प्रदेश):

मोक्षदायिनी नगरी काशी में गंगा तट पर स्थित यह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में मुख्य माना जाता है। मान्यता है कि काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी है। सावन के सोमवारों में यहाँ बाबा विश्वनाथ के विशेष अलौकिक श्रृंगार होते हैं और लाखों कांवड़िये गंगाजल अर्पित करते हैं। यहाँ पहुँचने के लिए वाराणसी जंक्शन और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन सबसे उपयुक्त हैं।
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (नासिक, महाराष्ट्र):

गोदावरी नदी के तट पर स्थित इस ज्योतिर्लिंग की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि एक ही अरघा में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों के प्रतिनिधि तीन छोटे लिंग विद्यमान हैं। महर्षि गौतम और अहिल्या की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी ने यहाँ प्रकट होकर अपनी जटाओं से गोदावरी (दक्षिण गंगा) को प्रवाहित किया था। सावन में यहाँ प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरम पर होता है। नासिक सीबीएस बस स्टैंड से यह 28 किमी दूर है।
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड):

हिमालय की गोद में 12,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित केदारनाथ सबसे ऊँचा ज्योतिर्लिंग है। नर और नारायण ऋषि तथा महाभारत युद्ध के पश्चात पांडवों की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी बैल के रूप में यहाँ अंतर्ध्यान हुए थे। सावन के दौरान चारों तरफ फैली हरी-भरी वादियों और बर्फ से ढकी चोटियों के बीच यहाँ श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। गौरीकुंड तक सड़क मार्ग के बाद 16 किमी का पैदल ट्रैक करके यहाँ पहुँचा जाता है।
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घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग (छत्रपति संभाजीनगर, महाराष्ट्र):

एलोरा गुफाओं के पास वेरुल गाँव में स्थित घृष्णेश्वर को 12वां अंतिम ज्योतिर्लिंग माना जाता है। शिवभक्त घुश्मा के मृत पुत्र को पुनः जीवित कर महादेव यहाँ प्रकट हुए थे। महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा पुनर्निर्मित यह लाल पत्थरों का मंदिर अपनी बारीक नक्काशी के लिए जाना जाता है। सावन के महीने में यहाँ भक्तों की भारी भीड़ जुटती है। औरंगाबाद (30 किमी) से टैक्सी द्वारा यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है।
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