
जेपीएससी परीक्षा घोटाला
झारखंड संयुक्त सैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 (विज्ञापन संख्या-01/2026) की प्रारंभिक परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली(जेपीएससी परीक्षा घोटाला), कदाचार और सुनियोजित सेटिंग का मामला सामने आया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) लगातार शिकंजा कस रहा है और अब तक कुल 11 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। यह पूरी कार्रवाई साइबर/सीआईडी थाना कांड संख्या-16/2026 के अंतर्गत तेजी से आगे बढ़ रही है।
मुख्य आरोपी सुमन सौरभ की गिरफ्तारी और चौंकाने वाले खुलासे
जांच के दौरान सीआईडी ने सुमन सौरभ नामक अभ्यर्थी को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि उसने परीक्षा पास करने के लिए अनुचित साधनों और तरीकों का सहारा लिया था।
जांच में कई गंभीर और हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं:
- कम उत्तर हल करने के बावजूद पास: सुमन सौरभ ने परीक्षा में केवल 48 प्रश्नों के ही उत्तर दिए थे, इसके बावजूद वह प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित कर दिया गया।
- कार्बन कॉपी गायब: हैरान करने वाली बात यह रही कि जांच के दौरान उसके पास से ओएमआर शीट (OMR Sheet) की कार्बन कॉपी भी बरामद नहीं हुई, जो परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है।
- गर्लफ्रेंड और सहयोगियों के नाम का खुलासा: सीआईडी की पूछताछ में सुमन सौरभ की संलिप्तता और उसकी प्रेमिका के साथ-साथ अन्य सहयोगियों की भूमिका को लेकर भी कई अहम खुलासे हुए हैं, जिसके आधार पर कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
टीडीपीएल (TDPL) कार्यालय से डिजिटल साक्ष्य और सॉल्वर गैंग की संलिप्तता
परीक्षा संचालन एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) के कार्यालय से जब्त किए गए कंप्यूटरों और डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं।
- पहले से स्टोर थे प्रश्न-उत्तर: टीडीपीएल के कंप्यूटर की जांच में पता चला कि परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र और उनके उत्तर सिस्टम में स्टोर किए गए थे। इसके अलावा कई ओएमआर शीट भी संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुई हैं।
- सुनियोजित साजिश: इन तकनीकी साक्ष्यों से साफ संकेत मिलता है कि परीक्षा में पूरी योजना के तहत सेटिंग और धांधली की गई थी, जिसमें तकनीकी संस्था की अंदरूनी मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।
गिरफ्तारियों और पूछताछ का दायरा बढ़ा
सीआईडी मुख्यालय में इस मामले को लेकर लगातार पूछताछ का सिलसिला जारी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कई बड़े चेहरों और अधिकारियों से गहन पूछताछ की जा रही है:
- प्रमुख गिरफ्तारियां एवं पूछताछ: इस प्रकरण में टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर मनोज तिवारी, सत्यनारायण तिवारी, टेक्निकल प्रोग्रामर मो. उस्मान, मो. एबाद, एरियल मोटली वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार सहित कई अन्य लोग सीआईडी की जांच के दायरे में हैं।
- पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते से तीसरी बार पूछताछ: आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। टीडीपीएल के कंप्यूटरों से मिले डिजिटल साक्ष्यों और कई छात्रों से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों के आधार पर शुक्रवार को उनसे तीसरी बार लंबी पूछताछ की गई। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में उनकी संलिप्तता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, और उनके विदेश यात्रा से जुड़े दस्तावेजों व पासपोर्ट की भी जांच की जा रही है।
आयोग की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव: ‘मेंबर-इन-चार्ज’ व्यवस्था समाप्त
इस पूरे घोटाले के सामने आने के बाद राज्य के इस प्रमुख चयन आयोग की कार्यप्रणाली में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। आयोग के भीतर वर्षों से चली आ रही ‘मेंबर-इन-चार्ज’ (सदस्य-प्रभारी) व्यवस्था को लगभग पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।
- केंद्रीकृत निर्णय प्रक्रिया: इस बदलाव के बाद अब किसी भी नई भर्ती या परीक्षा संचालन के लिए किसी एक व्यक्तिगत सदस्य को प्रभारी नहीं बनाया जाएगा।
- पारदर्शिता की ओर कदम: भविष्य की परीक्षाओं में धांधली रोकने और कार्यप्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए अब अधिकांश निर्णय सीधे आयोग स्तर पर केंद्रीकृत (Centralized) तरीके से लिए जा रहे हैं, ताकि उत्तरदायित्व तय किया जा सके और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
सीआईडी इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचने के लिए लगातार अन्य संदिग्धों से पूछताछ कर रही है आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
जेपीएससी परीक्षा घोटाला
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