रांची। जिंदगी जिंदाबाद
JPSC: झारखंड लोक सेवा आयोग कार्यालय में CID की छापेमारी के बीच द्वितीय झारखंड सिविल सेवा परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों की परतें एक बार फिर खुलने लगी हैं। CBI ने भी अपनी री-इन्वेस्टिगेशन में उन्हीं तथ्यों को सही पाया है, जिनका उल्लेख राज्य निगरानी ब्यूरो (विजिलेंस) अपनी पूर्व जांच में कर चुका था।
इसके बावजूद, इस मामले में चयनित कई अभियुक्त आज भी बिना किसी रुकावट के नौकरी कर रहे हैं। इस बीच CBI ने मामले की दोबारा जांच शुरू कर अपनी पूर्व जांच रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी है, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
JPSC: प्रमुख बिंदु
- कोडिंग-डिकोडिंग में गंभीर खामियां: रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा की कोडिंग-डिकोडिंग प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही और खामियां थीं। ग्राफ वाले प्रश्नों में रोल नंबर और नाम वाला कॉलम सही तरीके से कोड नहीं किया गया था, जिससे कोडेड उत्तर पुस्तिकाओं की पहचान आसानी से की जा सकती थी।
- कॉपियों पर विशेष निशान: सेटिंग करने वाले अभ्यर्थियों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं पर विशेष चिह्न बनाकर पहचान सुनिश्चित की थी। आरोप है कि कई अभ्यर्थियों ने कॉपियों में ‘ॐ साईं नाथ’ जैसे शब्द लिखकर अपनी पहचान गुप्त रूप से दर्ज कराई।
- 52 संदिग्ध चार्जशीट से बाहर: पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में सोहन सिंह खांका सहित 52 संदिग्ध अभ्यर्थियों को ‘चार्जशीट नहीं किये गये आरोपी’ (आइटम-12) की श्रेणी में रखा गया है। यानी संदेह के बावजूद उनके खिलाफ अभियोग नहीं चलाया जा सका।
- नेताओं के रिश्तेदारों के नाम: CBI की रिपोर्ट में कई नेताओं के रिश्तेदारों के नाम भी सामने आए हैं, जिनका इस कथित गड़बड़ी से संबंध बताया गया है। हालांकि, आरोप लगाया जा रहा है कि रिपोर्ट में अधिकारियों व नेताओं के रिश्तेदारों से जुड़ी जानकारी को दबा दिया गया।
राज्य विजिलेंस दर्ज कर चुका है 5 चार्जशीट
CBI जांच से पहले राज्य निगरानी ब्यूरो (विजिलेंस) ने मामले में पाँच अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की थी:
- पहली चार्जशीट: एलिस ऊषा रानी सिंह के विरुद्ध।
- दूसरी चार्जशीट: दिलीप कुमार प्रसाद, गोपाल प्रसाद सिंह, सोहन राम, बतेश्वर पंडित और अल्बर्ट टोप्पो के विरुद्ध।
- तीसरी चार्जशीट: शांति देवी, सरस्वती गागराई, अनिल बीरेंद्र कुल्लू और आरती बेहरा के विरुद्ध।
- चौथी चार्जशीट: एनसीएफ के धीरज कुमार के विरुद्ध।
- पांचवीं चार्जशीट: परमानंद सिंह, नंद लाल और अरविंद कुमार सिंह के विरुद्ध।
CBI द्वारा दोबारा जांच शुरू करने और कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल करने के बाद भी कार्रवाई अब तक अधूरी नजर आ रही है, जबकि मामले से जुड़े कई आरोपी वर्तमान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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