डीएसीपी, 2009 बैच की विसंगतियां और विभागीय परीक्षा से छूट के मुद्दे उठे

झारखंड स्टेट हेल्थ सर्विसेज एसोसिएशन (झासा) के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री अजय कुमार सिंह से मुलाकात कर चार सूत्री मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार और बिहार के तर्ज पर डायनेमिक एसीपी लागू करने, 2009 बैच के चिकित्सकों की सेवा संपुष्टि में जनजातीय भाषा की अनिवार्यता से उत्पन्न विसंगतियों को दूर करने, 50 वर्ष से अधिक आयु के चिकित्सकों को विभागीय परीक्षा से मुक्त करने तथा श्रावणी मेला के दौरान देवघर एवं दुमका में प्रतिनियुक्ति से संबंधित मांगें रखीं।
झासा ने कहा कि बिहार में चिकित्सकों को 20 वर्षों में चार डायनेमिक एसीपी मिल जाता है, जबकि झारखंड में यही लाभ 25 वर्षों में मिल रहा है। साथ ही, दंत चिकित्सकों को वर्तमान में 20 वर्षों में केवल तीन एसीपी मिलने की व्यवस्था है, जिसे बढ़ाने की मांग की गई। विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए अब तक सेवा नियमावली नहीं बनने का मुद्दा भी उठाया गया।
2009 बैच के चिकित्सकों के मामले में प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि 2011 में बनी नियमावली को पूर्व प्रभाव से लागू करने के कारण सीनियरिटी और पदोन्नति प्रभावित हो रही है। उन्होंने जनजातीय भाषा परीक्षा की अनिवार्यता हटाने और सेवा संपुष्टि में राहत देने की मांग की।
अपर मुख्य सचिव श्री अजय कुमार सिंह ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यानपूर्वक सुनते हुए कहा कि मांगें विचारणीय हैं, लेकिन झासा को यह भी समझना होगा कि सुदूरवर्ती क्षेत्रों में चिकित्सकों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के नहीं पहुंचने से आम जनता को इलाज में कठिनाई होती है, इसलिए इस पहलू पर भी गंभीरता से विचार आवश्यक है।
उन्होंने प्रतिनिधिमंडल से इस विषय पर पुनर्विचार कर अगले सप्ताह फिर बैठक करने को कहा। साथ ही, 2009 बैच से जुड़े मामले में असंतोष होने पर न्यायालय का विकल्प भी खुला होने की बात कही।
मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल में झासा अध्यक्ष डॉ. विमलेश सिंह, सचिव डॉ. मृत्युंजय सिंह, संयोजक डॉ. शरद, संयुक्त सचिव डॉ. अजीत, कोषाध्यक्ष डॉ. स्टीफन, डॉ. समीर कुजूर, डॉ. विकास, डॉ. प्रदीप कुमार और महिला विंग की उपाध्यक्ष डॉ. नुसरत यामिनी सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।