===========================

*★ स्वदेशी वस्तुओं को निरंतर प्रमोट कर रही राज्य सरकार*

*★ झारखंड की समृद्ध कला-संस्कृति  विरासत को संरक्षित करना प्राथमिकता*

*★ प्रतिभा की कमी नहीं, इस राज्य के बच्चे एवं युवा हमें कर रहे गौरवान्वित*

          *श्री हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखण्ड।* 

===========================

राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार एवं मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन आज ऑड्रे हाउस परिसर, रांची में आयोजित तीन दिवसीय “सांसद सांस्कृतिक महोत्सव-सह-स्वदेशी मेला-2026” के उद्घाटन समारोह में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए स्वदेशी उत्पादों के महत्व पर प्रकाश डाला। माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश में अनेक विविधताएं हैं। देश के भीतर कई विभिन्न समाज एवं वर्ग के लोग रहते हैं जिनकी अलग-अलग खूबी और पहचान है। यही खूबी और पहचान देश का एक मजबूत स्तंभ भी है। माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वदेशी का मतलब स्वयं उत्पादित वस्तुएं होती है। देश के भीतर उत्पादित वस्तुओं को अधिक से अधिक बढ़ावा मिले यह हम सभी की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार निरंतर इस दिशा में बेहतर कार्य कर रही है। माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी स्वदेशी को अपनाया तथा स्वदेशी अपनाने के प्रति देशवासियों को प्रेरित किया। माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वदेशी मेला न केवल स्थानीय कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों को एक सशक्त मंच प्रदान करता है बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने का भी सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य निरंतर कार्य कर रही है। माननीय मुख्यमंत्री ने इस आयोजन के लिए केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ को अपनी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दी।

*स्वदेशी वस्तुओं को निरंतर प्रमोट कर रही राज्य सरकार*

 मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा आज सरकार द्वारा गांव तथा शहरों में कई कार्यक्रमों अथवा आयोजनों के माध्यम से स्वदेशी उत्पादों को प्रमोट किया जा रहा है। आज इस ऐतिहासिक ऑड्रे हाउस परिसर में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य भी स्वदेशी वस्तुओं के साथ-साथ राज्य की कला-संस्कृति को बढ़ावा देना है। माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड प्रदेश खनिज संपदाओं से पहचाना जाता है। ईश्वर ने इस राज्य में जमीन के अंदर के साथ-साथ जमीन के ऊपर भी काफी आकर्षक और खूबसूरत संपदाएं दी है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज स्वदेशी खान-पान के साथ जिस प्रकार जीवनयापन करना सिखा था वह काफी प्रभावित करने वाली चीजें हैं। उन्होंने कहा कि कहीं न कहीं आज के वर्तमान दौर में मनुष्य कई ऐसी चीजों से प्रभावित हैं जिससे शरीर के आंतरिक तथा वाह्य वस्थाओं में भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

*झारखंड में प्रतिभा की कमी नही*

 मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड के लोगों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। हमारे राज्य के युवा शिक्षा, संस्कृति तथा खेलकूद सहित विभिन्न क्षेत्रों में बहुत आगे हैं। हमारे बच्चे सीमित संसाधनों के बीच हर मंच पर राज्य का गौरव बढ़ा रहे हैं। इस राज्य की कला-संस्कृति की देश-दुनिया में अलग पहचान है। यहां के कलाकार कोई परिचय के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इस राज्य के सरकारी स्कूलों में अध्यनरत बच्चे नेशनल लेवल पर आयोजित प्रतियोगिता-परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर अपने प्रतिभा को लोहा मनवा रहे हैं, यह हम सभी के लिए गर्व का विषय है।

 *प्रदर्शनी एवं स्टॉल का अवलोकन*

इस अवसर पर राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने स्वदेशी मेले में लगे विभिन्न प्रदर्शनी एवं स्टॉल का अवलोकन किया तथा कारीगरों से बातचीत कर उनके कार्य की सराहना की। मेले में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए शिल्पकारों द्वारा लगाए गए स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे, जहां हस्तनिर्मित वस्त्र, आभूषण, घरेलू सजावटी सामग्री एवं मिट्टी तथा बांस इत्यादि से उत्पादित स्वदेशी वस्तुएं प्रदर्शित किए गए हैं। माननीय राज्यपाल एवं माननीय मुख्यमंत्री के आगमन पर लोक कलाकारों द्वारा पारंपरिक नृत्य एवं गीतों के साथ हार्दिक स्वागत किया गया।

*इनकी रही उपस्थिति..*

इस अवसर पर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ, सांसद राज्यसभा श्री आदित्य साहू, सांसद राज्यसभा श्री दीपक प्रकाश, विधायक श्री नवीन जायसवाल, महापौर रांची श्रीमती रोशनी खलखो, उप महापौर रांची श्री नीरज कुमार, पूर्व राज्यसभा सांसद श्री अजय मारू सहित अन्य गणमान्य, प्रबुद्धजन, विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोक कलाकार सहित अन्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

===========================

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

कालाजार के लक्षणों की पहचान है बचाव की पहली सीढ़ी: झारखंड सरकार कालाजार उन्मूलन की दिशा में तेज़ी से अग्रसर• साहेबगंज, गोड्डा, दुमका एवं पाकुड़ जिले के भी.बी.डी. अधिकारियों का कालाजार से सम्बंधित डॉसियर निर्माण पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित• राज्य सरकार वर्ष 2023 में कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल कर लिया है और इसे बनाए रखने कि दिशा में बहु-आयामी प्रयास किए जा रहे हैं।रांची, दिनांक: 28 अप्रैल 2026- झारखंड सरकार कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। राज्य में इस बीमारी के मामलों में लगातार कमी दर्ज की जा रही है, जो स्वास्थ्य विभाग की सुदृढ़ रणनीति, समयबद्ध हस्तक्षेप और व्यापक जन-जागरूकता अभियानों का परिणाम है।इसी क्रम में कालाजार प्रभावित चार जिलों, साहेबगंज, गोड्डा, दुमका एवं पाकुड़ के भी.बी.डी. अधिकारियों एवं संबंधित कर्मियों के लिए राष्ट्रीय सरकार दिशानिर्देश अनुसार डॉसियर निर्माण पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 27 एवं 28 अप्रैल 2026 को गोड्डा जिले में आयोजित किया गया, जिसमें जिला एवं प्रखंड स्तर के अधिकारियों जैसे DVBDO, VBDC, FLA, DEO, MOIC, MTS, KTS एवं SI ने भाग लिया।प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वर्ष 2018 से 2025 तक के कालाजार से संबंधित आंकड़ों का समेकन, विश्लेषण एवं प्रस्तुतीकरण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। इसमें डेटा संग्रहण, डॉसियर की संरचना, उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण, डिजिटल रिपोर्टिंग तथा निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया।कालाजार (विसरल लीशमैनियासिस) एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य संक्रामक बीमारी है, जो सैंडफ्लाई (बालू मक्खी) के काटने से फैलती है। इसके प्रमुख लक्षणों में लंबे समय तक रहने वाला बुखार, अत्यधिक कमजोरी, वजन में कमी, भूख न लगना, पेट (तिल्ली/यकृत) का बढ़ना तथा खून की कमी (एनीमिया) शामिल हैं। समय पर जांच और उपचार न होने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए शुरुआती लक्षण दिखते ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराना अत्यंत आवश्यक है।इस अवसर पर राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, भी.बी.डी. झारखंड डॉ. बिरेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2017-18 की तुलना में वर्तमान में कालाजार के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल कर लिया है और इसे बनाए रखने कि दिशा में बहु-आयामी प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में कालाजार नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें सक्रिय सर्वेक्षण, समय पर जांच एवं निःशुल्क उपचार, सैंडफ्लाई नियंत्रण हेतु नियमित इनडोर रेजिडुअल स्प्रे (IRS) तथा व्यापक जन-जागरूकता अभियान शामिल हैं। इन प्रयासों के कारण राज्य में कालाजार के मामलों में निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है। डॉ. कुमार ने कहा, “कालाजार उन्मूलन के लिए सटीक एवं प्रमाण-आधारित डाटा अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से राज्य में डॉसियर तैयार करने की प्रक्रिया को सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि भारत सरकार के समक्ष झारखंड की प्रगति को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।”उन्होंने यह भी बताया कि, “यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल डॉसियर निर्माण की प्रक्रिया को मजबूत करेगा, बल्कि जिलों में कार्यरत अधिकारियों की क्षमता वृद्धि में भी सहायक होगा। इससे राज्य स्तर पर एक सुसंगत एवं विश्वसनीय रिपोर्ट तैयार की जा सकेगी।”यह कार्यक्रम राज्य सरकार द्वारा किया गया था और इसे पिरामल स्वास्थ्य द्वारा सहयोग किया गया। इस अवसर पर राज्य एवं जिलों के भी.बी.डी. अधिकारी, कंसल्टेंट्स के साथ ही सहयोगी संस्थाओं यथा- विश्व स्वास्थ्य संगठन के राज्य समन्वयक डॉ. अभिषेक पॉल, जोनल समन्वयक डॉ. हसीब, पिरामल स्वास्थ्य, ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे ।