रांची: झारखंड में स्वाइन फ्लू की जांच व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने राज्य के सभी जिलों में जल्द से जल्द स्वाइन फ्लू की जांच शुरू करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि जांच की सुविधा केवल कुछ बड़े अस्पतालों तक सीमित न रहे, बल्कि जिलास्तर पर भी लोगों को समय पर जांच की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए।

बुधवार को अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में उनके कार्यकक्ष में स्वास्थ्य विभाग एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की समीक्षा बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई। बैठक में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इनमें स्वाइन फ्लू की वर्तमान स्थिति, जांच व्यवस्था, आरटी-पीसीआर मशीनों की उपलब्धता, जांच किट, ट्रूनेट मशीन, एचएमआईएस, सीसीटीवी इंस्टॉलेशन, स्वास्थ्य कर्मियों का प्रशिक्षण तथा डॉक्टर एवं पैरामेडिकल कर्मियों की रिस्ट्रक्चरिंग प्रमुख रहे।

बैठक के दौरान अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलों से स्वाइन फ्लू की स्थिति और वहां उपलब्ध जांच सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां अभी जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करते हुए इसे जल्द शुरू किया जाए। इसके साथ ही खराब पड़ी मशीनों की मरम्मत, जांच किट की उपलब्धता और तकनीकी मानव संसाधन की स्थिति की भी समीक्षा की गई।

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रांची, रिम्स और एमजीएम में हो रही स्वाइन फ्लू की जांच

बैठक में जानकारी दी गई कि वर्तमान में रांची सदर अस्पताल, रिम्स और एमजीएम जमशेदपुर में स्वाइन फ्लू की जांच की जा रही है। राज्य के इन प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध जांच सुविधाओं के आधार पर मरीजों की जांच की जा रही है।

अपर मुख्य सचिव ने इस व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कहा कि राज्य के अन्य जिलों में भी जल्द जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि मरीजों को जांच के लिए दूर के बड़े शहरों या संस्थानों पर निर्भर न रहना पड़े।

जिलास्तर पर जांच की सुविधा उपलब्ध होने से संदिग्ध मरीजों की जांच समय पर की जा सकेगी और स्वास्थ्य विभाग को बीमारी की स्थिति की निगरानी करने में भी मदद मिलेगी। इसके लिए आवश्यक मशीनों, जांच किट और प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

आरटी-पीसीआर मशीनों की उपलब्धता की ली जानकारी

स्वाइन फ्लू की जांच व्यवस्था की समीक्षा के दौरान आरटी-पीसीआर मशीनों की उपलब्धता को लेकर भी जिलावार जानकारी ली गई। अधिकारियों से पूछा गया कि किन जिलों में मशीनें उपलब्ध हैं, कितनी मशीनें काम कर रही हैं और कहां मशीनों में तकनीकी खराबी है।

अपर मुख्य सचिव ने खराब मशीनों की तत्काल मरम्मत कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर जांच के लिए मशीन उपलब्ध नहीं है, वहां तत्काल रिक्विजीशन भेजा जाए, ताकि मशीन और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की जा सके।

स्वास्थ्य व्यवस्था में मशीन उपलब्ध होने के साथ उसका सुचारु रूप से संचालन भी जरूरी है। इसलिए बैठक में केवल मशीनों की संख्या पर ही नहीं, बल्कि उनकी कार्यशील स्थिति और जांच के लिए आवश्यक किट की उपलब्धता पर भी ध्यान दिया गया।

उन्होंने अधिकारियों से जांच किट की स्थिति की जानकारी लेते हुए आवश्यकतानुसार समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा, ताकि जांच प्रक्रिया संसाधनों की कमी के कारण प्रभावित न हो।

टेक्नीशियन और पैथोलॉजिस्ट को प्रशिक्षण देने की योजना

स्वाइन फ्लू की जांच को सभी जिलों में शुरू करने के लिए केवल मशीनों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है। इसके लिए प्रशिक्षित टेक्नीशियन और पैथोलॉजिस्ट की भी आवश्यकता होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए बैठक में मानव संसाधन और प्रशिक्षण की स्थिति पर भी चर्चा हुई।

अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि जहां आवश्यकता हो, वहां टेक्नीशियन और पैथोलॉजिस्ट को रिम्स अथवा सदर अस्पताल में प्रशिक्षण दिलाया जाए। इसका उद्देश्य जिलों में जांच सुविधा शुरू होने के बाद तकनीकी स्तर पर किसी प्रकार की परेशानी न हो, यह सुनिश्चित करना है।

प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता से जांच प्रक्रिया को व्यवस्थित करने और उपलब्ध मशीनों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में इस विषय को स्वाइन फ्लू जांच व्यवस्था को मजबूत करने के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा गया।

ट्रूनेट मशीनों को एचएमआईएस से जोड़ने की समीक्षा

बैठक में ट्रूनेट मशीनों की उपलब्धता और उन्हें एचएमआईएस (HMIS) से जोड़ने की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों से विभिन्न जिलों में उपलब्ध ट्रूनेट मशीनों और उनके उपयोग की स्थिति की जानकारी ली गई।

अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलों को एचएमआईएस को पूरी तरह फंक्शनल करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित डेटा और जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करना और उसका उपयोग करना स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण है।

उन्होंने आवश्यकतानुसार संबंधित कर्मियों को प्रशिक्षण देने की बात भी कही। यदि किसी जिले में एचएमआईएस के संचालन में कर्मचारियों को तकनीकी कठिनाई आ रही है, तो उन्हें उचित प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटल प्रबंधन में एचएमआईएस की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में इसे सभी जिलों में पूरी तरह सक्रिय और उपयोगी बनाने पर बैठक में विशेष जोर दिया गया।

सीसीटीवी इंस्टॉलेशन को लेकर भी दिए गए निर्देश

स्वास्थ्य संस्थानों में निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सीसीटीवी इंस्टॉलेशन की भी समीक्षा की गई। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि संबंधित एजेंसी जल्द ही जिलों में जाकर सीसीटीवी कैमरे लगाने के स्थानों का प्लान तैयार करे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कैमरे ऐसे महत्वपूर्ण स्थानों पर लगाए जाएं, जहां उनकी जरूरत सबसे अधिक है और जिन क्षेत्रों में निगरानी सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके लिए पहले प्रत्येक जिले में स्थानों का उचित प्लान तैयार किया जाएगा और उसके बाद इंस्टॉलेशन का काम आगे बढ़ाया जाएगा।

स्वास्थ्य संस्थानों में सीसीटीवी की व्यवस्था से महत्वपूर्ण स्थानों की निगरानी बेहतर करने में मदद मिल सकती है। बैठक में एजेंसी को इस कार्य को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

डॉक्टर और पैरामेडिकल कर्मियों की रिस्ट्रक्चरिंग पर चर्चा

समीक्षा बैठक में राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध मानव संसाधन की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों की रिस्ट्रक्चरिंग का विषय बैठक के प्रमुख एजेंडों में शामिल रहा।

राज्य में डॉक्टरों की उपलब्धता और विभिन्न अस्पतालों में पदों की आवश्यकता के अनुसार व्यवस्था तैयार करने पर विचार किया गया। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए जल्द ही दक्षिण भारत से करीब एक हजार पीजी डॉक्टर लाने का प्रयास किया जा रहा है।

यह पहल राज्य के अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। डॉक्टरों की कमी के कारण कई स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सेवाओं पर दबाव रहता है। ऐसे में अतिरिक्त चिकित्सकीय मानव संसाधन उपलब्ध कराने की योजना से अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

सिविल सर्जनों के सुझाव के आधार पर तय होंगे पद

बैठक में अस्पतालों में पदों के निर्धारण को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि सभी सिविल सर्जनों से प्राप्त सुझावों के आधार पर अस्पतालों में पदों का संख्या के अनुरूप निर्धारण किया जाएगा।

इसका उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों में वास्तविक आवश्यकता के अनुसार मानव संसाधन उपलब्ध कराना है। अलग-अलग क्षेत्रों और अस्पतालों में मरीजों की संख्या तथा स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत अलग हो सकती है। इसलिए स्थानीय स्तर से प्राप्त सुझावों को ध्यान में रखते हुए पदों का निर्धारण करने पर जोर दिया गया।

रिस्ट्रक्चरिंग के माध्यम से यह प्रयास किया जा रहा है कि उपलब्ध मानव संसाधन का बेहतर उपयोग हो और अस्पतालों में डॉक्टरों तथा पैरामेडिकल कर्मियों की जरूरत के अनुरूप तैनाती की व्यवस्था बनाई जा सके।

प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक सीएचसी अपग्रेड करने का प्रस्ताव

बैठक में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) को अपग्रेड करने के लिए भेजे गए प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई।

अपर मुख्य सचिव ने प्रस्तावों पर चर्चा करते हुए निर्देश दिया कि अपग्रेड किए जाने वाले स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास किया जाए। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

सीएचसी स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने से ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को उपचार के लिए बड़े शहरों या जिला मुख्यालयों पर निर्भरता कम हो सकती है। इसलिए प्रस्तावित अपग्रेडेशन में आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं और संसाधनों को प्राथमिकता देने की बात कही गई।

125 स्थानों पर एचपीएलसी मशीन उपलब्ध कराने की तैयारी

बैठक में राज्य में 125 स्थानों पर एचपीएलसी मशीन उपलब्ध कराने की योजना की भी जानकारी दी गई। स्वास्थ्य सेवाओं में जांच सुविधाओं का विस्तार करने के उद्देश्य से इन मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई।

राज्य के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों और संस्थानों तक जांच सुविधाओं को पहुंचाने के प्रयास के तहत यह पहल महत्वपूर्ण है। अधिक स्थानों पर जांच मशीन उपलब्ध होने से लोगों को आवश्यक जांच के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर हो सकेगी।

अपर मुख्य सचिव ने इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने को लेकर अधिकारियों के साथ चर्चा की और आवश्यक तैयारियों पर जोर दिया।

सहियाओं को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण

बैठक में ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सहियाओं के प्रशिक्षण से जुड़ी योजना पर भी चर्चा हुई। प्रस्ताव है कि चयनित सहियाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें ब्लड कलेक्शन और ड्रेसिंग जैसे कार्य करने के योग्य बनाया जाए।

इसके लिए प्रत्येक सब सेंटर पर बेहतर शैक्षणिक योग्यता वाली दो सहियाओं का चयन करने और उन्हें करीब छह माह का प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव है।

इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर उपलब्ध स्वास्थ्य मानव संसाधन की क्षमता को बढ़ाना है। प्रशिक्षित सहियाओं के माध्यम से प्राथमिक स्तर पर कुछ आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर तरीके से उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इसलिए सहियाओं के प्रशिक्षण को स्वास्थ्य व्यवस्था के विस्तार और मानव संसाधन विकास से जोड़कर देखा जा रहा है।

एमपीडब्ल्यू को भी दिया जाएगा प्रशिक्षण

सहियाओं के साथ-साथ एमपीडब्ल्यू (MPW) को भी प्रशिक्षण देने की योजना पर बैठक में चर्चा हुई। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य उपलब्ध कर्मचारियों की क्षमता को बढ़ाकर उन्हें जरूरत के अनुसार अतिरिक्त स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तैयार करना है।

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य में करीब 80 कॉलेज ऐसे हैं, जहां इस प्रकार का प्रशिक्षण कराया जा सकता है। इससे प्रशिक्षण के लिए उपलब्ध संस्थानों का उपयोग किया जा सकेगा और बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मियों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षित किया जा सकता है।

सहियाओं और एमपीडब्ल्यू के प्रशिक्षण से स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं में कार्य करने वाले मानव संसाधन की क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे स्वास्थ्य विभाग को ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत करने में सहायता मिल सकती है।

प्रशिक्षण को स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने का माध्यम बनाने पर जोर

बैठक में स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण को केवल औपचारिक प्रक्रिया के रूप में नहीं बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की क्षमता बढ़ाने के माध्यम के रूप में देखा गया। स्वाइन फ्लू जैसी जांच व्यवस्था के लिए टेक्नीशियन और पैथोलॉजिस्ट के प्रशिक्षण से लेकर सहिया और एमपीडब्ल्यू के कौशल विकास तक विभिन्न स्तरों पर प्रशिक्षण की जरूरत पर चर्चा हुई।

एक ओर जहां विशेषज्ञ स्तर पर जांच सुविधाओं को मजबूत करने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर प्राथमिक और सामुदायिक स्तर पर कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता बढ़ाने की योजना पर भी विचार किया गया।

इससे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में मानव संसाधन के विभिन्न स्तरों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में मदद मिल सकती है।

डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने पर भी फोकस

समीक्षा बैठक में एचएमआईएस और ट्रूनेट मशीनों के अलावा स्वास्थ्य संस्थानों में तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिखाई दिया। स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और डेटा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल सिस्टम का पूरी तरह उपयोग जरूरी माना गया।

अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलों को एचएमआईएस को फंक्शनल करने और आवश्यकता के अनुसार कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया। इससे स्वास्थ्य विभाग को विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रबंधित करने में मदद मिल सकती है।

इसके साथ ही सीसीटीवी इंस्टॉलेशन के माध्यम से स्वास्थ्य संस्थानों में निगरानी व्यवस्था को बेहतर करने पर भी जोर दिया गया।

जिलों की स्वास्थ्य व्यवस्था की सीधे हुई समीक्षा

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में सभी जिलों के सिविल सर्जन शामिल हुए। इससे राज्य स्तर पर स्वास्थ्य विभाग को जिलों की स्थिति की जानकारी सीधे प्राप्त करने का अवसर मिला।

अपर मुख्य सचिव ने अलग-अलग विषयों पर जिलों से जानकारी लेकर उन क्षेत्रों की पहचान करने का प्रयास किया, जहां तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। स्वाइन फ्लू जांच, मशीनों की स्थिति, जांच किट, एचएमआईएस और मानव संसाधन जैसे विषयों पर जिलास्तर की जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

इस तरह की समीक्षा बैठक का उद्देश्य राज्य और जिला स्तर के स्वास्थ्य तंत्र के बीच समन्वय को मजबूत करना भी है।

स्वाइन फ्लू जांच व्यवस्था पर तत्काल कार्रवाई का संदेश

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्देश स्वाइन फ्लू की जांच को राज्य के सभी जिलों तक पहुंचाने को लेकर रहा। फिलहाल रांची सदर अस्पताल, रिम्स और एमजीएम जमशेदपुर में जांच की सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी दी गई थी। अब अन्य जिलों में भी जल्द जांच शुरू करने की दिशा में काम करने का निर्देश दिया गया है।

मशीन की उपलब्धता नहीं होने पर रिक्विजीशन भेजने, खराब मशीनों की मरम्मत कराने, जांच किट की उपलब्धता सुनिश्चित करने और जरूरत पड़ने पर टेक्नीशियन तथा पैथोलॉजिस्ट को प्रशिक्षण दिलाने के निर्देश से स्वास्थ्य विभाग की तैयारी को एक साथ कई स्तरों पर आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है।

इससे जिलास्तर पर जांच सुविधा को मजबूत करने के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था को भी बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

बैठक में कई अधिकारी रहे मौजूद

स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम की इस समीक्षा बैठक में विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा, अपर सचिव श्री शशि प्रकाश सिंह और संयुक्त सचिव श्री ललित मोहन शुक्ला सहित विभाग के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

इसके अलावा राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़े। अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों की स्वास्थ्य व्यवस्था, स्वाइन फ्लू जांच और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी साझा की।

बैठक में हुई चर्चा से स्पष्ट है कि स्वास्थ्य विभाग एक ओर मौजूदा स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए जांच व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है, वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों, पैरामेडिकल कर्मियों, सहियाओं और एमपीडब्ल्यू की क्षमता बढ़ाने तथा अस्पतालों की आधारभूत व्यवस्था को बेहतर करने की दिशा में भी योजनाएं तैयार कर रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं को जिला स्तर तक मजबूत करने की दिशा में पहल

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में सामने आए निर्णयों को राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को जिला और स्थानीय स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है। स्वाइन फ्लू की जांच का विस्तार, आरटी-पीसीआर मशीनों की उपलब्धता, ट्रूनेट मशीनों को एचएमआईएस से जोड़ना, सीसीटीवी निगरानी, डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने का प्रयास, सीएचसी अपग्रेडेशन और स्वास्थ्य कर्मियों का प्रशिक्षण—ये सभी पहल स्वास्थ्य व्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विभाग ने केवल मशीन या उपकरण उपलब्ध कराने पर ही जोर नहीं दिया है, बल्कि उनके संचालन के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने की जरूरत को भी ध्यान में रखा है। इसी वजह से टेक्नीशियन, पैथोलॉजिस्ट, सहिया और एमपीडब्ल्यू के प्रशिक्षण पर अलग-अलग स्तर पर चर्चा की गई।

राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे, तकनीक और मानव संसाधन तीनों का संतुलित विकास जरूरी है। बुधवार की समीक्षा बैठक में इन्हीं तीनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।

आने वाले समय में इन निर्देशों के आधार पर जिलों में स्वाइन फ्लू जांच सुविधाओं का विस्तार, स्वास्थ्य संस्थानों में डिजिटल और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना तथा डॉक्टर एवं पैरामेडिकल कर्मियों की उपलब्धता बढ़ाना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। इसके साथ ही सहिया और एमपीडब्ल्यू के प्रशिक्षण के माध्यम से स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाने का भी प्रयास किया जाएगा।

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