Ranchi University में Ph.D का रास्ता साफ, Ph.D Regulation-2026 लागू: जानिए योग्यता, गाइड सीमा और नए नियमRanchi University में Ph.D का रास्ता साफ, Ph.D Regulation-2026 लागू: जानिए योग्यता, गाइड सीमा और नए नियम

रांची। जिंदगी जिंदाबाद

Ranchi University में उच्च शिक्षा और Research की दिशा में कदम बढ़ाने वाले छात्रों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर है। विवि प्रशासन ने लंबे इंतजार के बाद Ph.D Regulation-2026 यानी कि रेगुलेशन एंड स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर फॉर द मिनिमम स्टैंडर्ड एंड प्रोसीजर फॉर अवार्ड ऑफ पीएचडी डिग्री-2026 की औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस नए रेगुलेशन को आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है।

इस निर्णय के साथ ही रांची विवि में पिछले काफी समय से अटकी पीएचडी नामांकन प्रक्रिया का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। कुलपति प्रो. सरोज शर्मा के निर्देशन और सोशल साइंस डीन सह रिसर्च डायरेक्टर डॉ. परवेज हसन की देखरेख में बनी उच्चस्तरीय समिति ने यूजीसी (UGC) रेगुलेशन 2022 के मानकों को ध्यान में रखते हुए महज आठ दिनों के भीतर इस नए मसौदे को तैयार कर लागू किया है।

एक नजर में नए Ranchi University Ph.D Regulation-2026 के मुख्य प्रावधान:

  • गाइड और शोधार्थियों की सीमा तय:नए नियमों के तहत अब प्राध्यापकों की श्रेणी के अनुसार शोधार्थियों (Ph.D. Scholars) की संख्या निश्चित कर दी गई है। इसके अंतर्गत विवि में एक प्रोफेसर अधिकतम 8, एसोसिएट प्रोफेसर6 और असिस्टेंट प्रोफेसर अधिकतम 4 अभ्यर्थियों को एक समय में पीएचडी करा सकेंगे।
  • शैक्षणिक योग्यता एवं छूट:पीएचडी में नामांकन व रजिस्ट्रेशन के लिए अभ्यर्थियों का संबंधित विषय में स्नातकोत्तर (Post Graduation) कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। वहीं, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के अभ्यर्थियों को प्राप्तांक में 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी (यानी उनके लिए 50% अंक अनिवार्य होंगे)।
  • थिसिस जमा करने की समय-सीमा:शोधार्थियों के लिए थिसिस (Thesis) जमा करने की न्यूनतम अवधि 3 वर्ष और अधिकतम अवधि 6 वर्ष निर्धारित की गई है। यदि कोई अभ्यर्थी तय समय पर काम पूरा नहीं कर पाता है, तो उसे विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 2 वर्ष का अतिरिक्त विस्तार (Extension) मिल सकता है। महिला शोधार्थियों के लिए थिसिस जमा करने की समय-सीमा में विशेष छूट का प्रावधान रखा गया है।
  • प्रवेश परीक्षा (Entrance Exam) आयोजित करने की छूट:पीएचडी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए विश्वविद्यालय के पास अपनी स्वतंत्र प्रवेश परीक्षा आयोजित कराने का अधिकार रहेगा।
  • डिस्टेंस और ऑनलाइन मोड अमान्य:नए नियम के अनुसार अब दूरस्थ शिक्षा (Distance Education) या ऑनलाइन मोड से की जाने वाली पीएचडी डिग्री पूरी तरह अमान्य होगी। केवल रेगुलर (नियमित) मोड में की गई पीएचडी ही मान्य मानी जाएगी।
  • सेवानिवृत्ति (Retirement) से जुड़े कड़े नियम:शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने से केवल 3 वर्ष पूर्व उन्हें नया गाइड बनने की अनुमति नहीं होगी। यदि शोध कार्य के दौरान ही कोई गाइड सेवानिवृत्त हो जाता है, तो ऐसी स्थिति में नियमानुसार अभ्यर्थी को सह-गाइड (Co-guide) आवंटित किया जाएगा या फिर गाइड बदलने की छूट दी जाएगी।

Ranchi University 13 सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी के मंथन से बना ड्राफ्ट

गौरतलब है कि पूर्व में सर्वसम्मति और राजभवन के निर्देशों के अनुरूप नया रेगुलेशन स्वीकृत न होने के कारण रांची विवि की पीएचडी प्रवेश परीक्षा पर रोक लगा दी गई थी। पिछली बार जिन अभ्यर्थियों ने आवेदन दिया था, उन्हें अपने 2000 रुपये के आवेदन शुल्क की वापसी के लिए प्रक्रिया से गुजरना पड़ा था। इसके बाद राजभवन ने विवि को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि यूजीसी रेगुलेशन 2022 के तहत ही नया ड्राफ्ट तैयार किया जाए।

इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए Ranchi University ने 13 सदस्यीय एक विशेष कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के शिक्षाविदों को शामिल किया गया, जिनमें:

  • सेंट्रल यूनिवर्सिटी राजस्थान के निदेशक प्रो. बीसी महापात्रा
  • हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि के प्रो. सीमा धवन
  • रांची विवि के डीएसडब्ल्यू डॉ. सुदेश कुमार साहू, रिसर्च डायरेक्टर डॉ. परवेज हसन, रजिस्ट्रार डॉ. राजकुमार शर्मा
  • एनआईईपीए (NIEPA) नई दिल्ली के निदेशक प्रो. पीके मिश्रा (अध्यक्ष)
  • गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विवि नई दिल्ली के प्रो. गुलशन धमीजा
  • विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष व प्राध्यापक जैसे डॉ. एमएसएन जुबेरी, डॉ. निरंजन, डॉ. राजकुमार सिंह, डॉ. ज्योति प्रकाश, डॉ. सुमीत कुमार डे, डॉ. तारकेश्वर सिंह मुंडा आदि शामिल रहे।

इस नए रेगुलेशन के लागू होने से रांची विश्वविद्यालय में शोध की गुणवत्ता में सुधार आएगा और अभ्यर्थियों को पारदर्शी व मानकीकृत माहौल में पीएचडी करने का अवसर मिलेगा।

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