रांची: झारखंड की राजधानी रांची में रेलवे यात्रियों को आने वाले समय में बड़ी राहत मिलने वाली है। रांची रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास और आसपास की सड़कों के चौड़ीकरण की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। इस योजना के तहत रेलवे स्टेशन के मुख्य भवन तक पहुंचने वाली सड़क को वर्तमान 14 मीटर से बढ़ाकर 22 मीटर चौड़ा किया जाएगा। इसके साथ ही स्टेशन के उत्तरी और दक्षिणी छोर को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने की तैयारी है। योजना पूरी होने के बाद यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचने में होने वाली परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है।
अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, रांची रेलवे स्टेशन के मुख्य भवन को जोड़ने वाली सड़क के चौड़ीकरण के लिए रेलवे क्वार्टरों को खाली कराने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। सड़क का विस्तार होने से स्टेशन के मुख्य भवन से रेलवे भर्ती बोर्ड कार्यालय तक आवागमन आसान होगा। इसके अलावा आरआरबी कार्यालय भी दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा।
रेलवे स्टेशन के विकास की इस योजना में केवल मुख्य सड़क को चौड़ा करना ही शामिल नहीं है, बल्कि स्टेशन परिसर की नई बिल्डिंग, प्लेटफॉर्म, फुट ओवरब्रिज, लिफ्ट, एस्केलेटर, टिकट मशीन और दिव्यांग यात्रियों की सुविधाओं को भी बेहतर बनाने की तैयारी है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि रांची रेल मंडल के डीआरएम करुणानिधि ने गुरुवार को स्टेशन परिसर और आसपास के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सड़क किनारे अवैध दुकानें, ठेले और अनधिकृत पार्किंग हटाने का निर्देश दिया। उनका कहना था कि अतिक्रमण के कारण यात्रियों को स्टेशन आने-जाने में परेशानी होती है।
रेलवे की इस योजना का उद्देश्य रांची स्टेशन को अधिक सुविधाजनक, व्यवस्थित और आधुनिक बनाना है। यदि निर्धारित समय के अनुसार निर्माण कार्य पूरे होते हैं, तो मार्च 2027 तक स्टेशन पहुंचने के रास्ते में होने वाली कई पुरानी परेशानियां दूर हो सकती हैं।
मुख्य सड़क की चौड़ाई 14 से बढ़कर होगी 22 मीटर
रांची रेलवे स्टेशन के मुख्य भवन तक पहुंचने वाली सड़क अभी लगभग 14 मीटर चौड़ी है। बढ़ते यातायात और यात्रियों की संख्या को देखते हुए इसे पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। स्टेशन के आसपास सुबह और शाम के समय वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है। ट्रेन आने और जाने के समय यात्रियों को छोड़ने तथा लेने के लिए बड़ी संख्या में निजी वाहन, ऑटो और अन्य गाड़ियां स्टेशन पहुंचती हैं।
ऐसे में सड़क की सीमित चौड़ाई के कारण कई बार जाम की स्थिति बन जाती है। खासकर त्योहारों, छुट्टियों और व्यस्त दिनों में स्टेशन के आसपास यातायात का दबाव बढ़ जाता है।
इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए मुख्य सड़क को 22 मीटर चौड़ा करने की योजना बनाई गई है। चौड़ी सड़क बनने के बाद वाहनों की आवाजाही के लिए अधिक जगह उपलब्ध होगी। इससे स्टेशन के मुख्य भवन तक पहुंचने वाले यात्रियों को सुविधा मिल सकती है।
सड़क चौड़ीकरण का लाभ केवल ट्रेन से यात्रा करने वाले लोगों को ही नहीं मिलेगा, बल्कि स्टेशन के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों और कारोबारियों को भी मिल सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस सड़क के चौड़ीकरण के लिए रेलवे क्वार्टरों को खाली कराने की प्रक्रिया की जा रही है। सड़क के विस्तार के लिए आवश्यक जगह उपलब्ध कराना निर्माण कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
तीन प्रमुख सड़कों से जुड़ेगा स्टेशन परिसर
रांची रेलवे स्टेशन तक पहुंचने के लिए कई वैकल्पिक रास्तों को विकसित करने की योजना है। रिपोर्ट के अनुसार, एक सड़क लगभग 15 मीटर चौड़ी होगी, जबकि दूसरी सड़क 22 मीटर चौड़ी होगी।
इन सड़कों के माध्यम से स्टेशन परिसर को आसपास के प्रमुख इलाकों से बेहतर संपर्क दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि यात्रियों को स्टेशन पहुंचने के लिए केवल एक ही रास्ते पर निर्भर नहीं रहना पड़े।
यातायात के लिए वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध होने से मुख्य सड़क पर वाहनों का दबाव कम हो सकता है। यदि किसी एक मार्ग पर जाम लगता है, तो लोग दूसरे मार्ग से स्टेशन पहुंच सकेंगे।
इसके साथ ही चुटिया और रेलवे क्षेत्र के आसपास के इलाकों को जोड़ने वाली सड़क के विकास की भी योजना है। मार्च 2027 तक नया रास्ता खोलने का लक्ष्य बताया गया है।
रेलवे स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थान के लिए बेहतर सड़क संपर्क बहुत जरूरी है। स्टेशन तक पहुंचने में यदि यात्रियों का अधिक समय जाम में बीतता है, तो उन्हें ट्रेन छूटने का खतरा भी रहता है। इसलिए सड़क चौड़ीकरण और वैकल्पिक रास्तों का निर्माण यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
पुरानी रेलवे कॉलोनी और दक्षिणी छोर को भी मिलेगा बेहतर सड़क संपर्क
रांची रेलवे स्टेशन के विकास की योजना में पुरानी रेलवे कॉलोनी और दक्षिणी छोर को जोड़ना भी शामिल है। वर्तमान में स्टेशन के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचने के लिए यात्रियों और स्थानीय लोगों को कई बार घुमावदार रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ता है।
नई सड़क व्यवस्था बनने के बाद स्टेशन के उत्तरी और दक्षिणी हिस्से के बीच संपर्क बेहतर होगा। इससे रेलवे स्टेशन के आसपास रहने वाले लोगों को भी आवागमन में सुविधा मिल सकती है।
अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी छोर की पुरानी रेलवे कॉलोनी से होते हुए पेट्रोल डिपो तक 22 मीटर चौड़ी सड़क बनाई जाएगी। यह सड़क स्टेशन तक पहुंचेगी और आगे रेलवे ओवरब्रिज से जुड़ने की योजना है।
इस कनेक्टिविटी से दक्षिणी छोर पर विकसित की जा रही नई स्टेशन बिल्डिंग तक पहुंचना भी आसान हो सकता है।
रांची स्टेशन के दोनों छोरों को जोड़ने का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि स्टेशन का पुनर्विकास केवल एक नया भवन बनाने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य शहर के दोनों ओर से यात्रियों को बेहतर प्रवेश और निकास की सुविधा देना है।
यदि उत्तरी और दक्षिणी छोर पर सड़क संपर्क मजबूत होता है, तो स्टेशन के एक ही प्रवेश द्वार पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे यात्रियों की भीड़ और वाहनों के दबाव को अलग-अलग दिशाओं में बांटने में मदद मिलेगी।
रेलवे क्वार्टर खाली कराने की प्रक्रिया तेज
मुख्य सड़क को चौड़ा करने के लिए रेलवे की जमीन पर मौजूद कुछ पुराने क्वार्टरों को खाली कराने की आवश्यकता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए रेलवे क्वार्टरों को खाली कराने की प्रक्रिया चल रही है।
रेलवे स्टेशन के आसपास पुराने भवन और क्वार्टर होने के कारण सड़क विस्तार के लिए उपलब्ध जगह सीमित है। ऐसे में निर्माण कार्य शुरू करने से पहले जमीन को खाली कराना जरूरी है।
रेलवे प्रशासन के सामने यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी है कि संबंधित कर्मचारियों और परिवारों को नियमों के अनुसार आवश्यक सूचना और प्रक्रिया की जानकारी दी जाए।
स्टेशन पुनर्विकास की एक अन्य रिपोर्ट में भी 50 से अधिक पुराने रेलवे क्वार्टरों और कार्यालयों को हटाने की योजना का उल्लेख किया गया था। इससे स्पष्ट होता है कि स्टेशन के आसपास उपलब्ध जमीन का उपयोग नए निर्माण और यात्री सुविधाओं के विस्तार के लिए किया जा रहा है। Prabhat Khabar
पुराने क्वार्टरों और कार्यालयों को हटाने के बाद संबंधित स्थान पर सड़क, पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास का रास्ता साफ हो सकता है।
हालांकि, ऐसे कार्यों में समय और समन्वय दोनों की जरूरत होती है। रेलवे प्रशासन को निर्माण एजेंसियों के साथ-साथ संबंधित विभागों के साथ भी तालमेल बनाए रखना होगा।
मार्च 2027 तक खुलेगा नया रास्ता
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण समय-सीमा मार्च 2027 बताई गई है। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च तक स्टेशन पहुंचने के लिए नया रास्ता खोलने का लक्ष्य रखा गया है।
इस रास्ते के तैयार होने से यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचने के लिए बेहतर विकल्प मिल सकते हैं। खासकर दक्षिणी छोर से आने वाले लोगों को इसका फायदा हो सकता है।
नए रास्ते का उपयोग केवल निजी वाहनों के लिए ही नहीं, बल्कि स्टेशन आने-जाने वाले अन्य वाहनों के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
रांची रेलवे स्टेशन शहर के प्रमुख परिवहन केंद्रों में से एक है। यहां से झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों के लिए ट्रेनें चलती हैं।
इस कारण स्टेशन तक पहुंचने वाले मार्गों पर लगातार यातायात का दबाव रहता है।
यदि नया रास्ता निर्धारित समय पर शुरू होता है, तो स्टेशन के आसपास की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
दक्षिणी छोर की नई बिल्डिंग से बढ़ेंगी सुविधाएं
रांची रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास में दक्षिणी छोर पर बनाई जा रही नई बिल्डिंग भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
रेलवे की योजना के तहत स्टेशन के दोनों ओर आधुनिक भवन तैयार किए जा रहे हैं। इन भवनों में यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रवेश, निकास, टिकटिंग, प्रतीक्षालय और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है।
दक्षिणी छोर पर विकसित हो रही बिल्डिंग से आसपास के इलाकों के यात्रियों को स्टेशन पहुंचने के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।
इससे मुख्य प्रवेश द्वार पर यात्रियों की भीड़ कम करने में मदद मिल सकती है।
नई बिल्डिंग में यात्रियों के लिए पिक एंड ड्रॉप की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। इसका मतलब है कि निजी वाहन या कैब से आने वाले यात्रियों को निर्धारित स्थान पर उतारने और लेने की व्यवस्था होगी।
इससे स्टेशन के प्रवेश द्वार के सामने अनावश्यक रूप से वाहनों के रुकने की समस्या कम हो सकती है।
इसके साथ ही बिल्डिंग में टिकट काउंटर और स्वचालित टिकट मशीनें भी यात्रियों के लिए उपयोगी होंगी।
नई बिल्डिंग में होंगे 12 टिकट काउंटर
अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, नई स्टेशन बिल्डिंग में 12 टिकट काउंटर बनाने की योजना है।
रेलवे स्टेशन पर टिकट खरीदने के लिए यात्रियों को कई बार लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है। खासकर सुबह और शाम के व्यस्त समय में टिकट काउंटर पर भीड़ बढ़ जाती है।
नई बिल्डिंग में 12 टिकट काउंटर उपलब्ध होने से यात्रियों को टिकट लेने के लिए अधिक विकल्प मिलेंगे।
एक तरफ से प्रवेश और दूसरी तरफ से निकास की व्यवस्था होने से यात्रियों की आवाजाही को व्यवस्थित किया जा सकेगा।
यदि प्रवेश और निकास के रास्ते अलग-अलग रहते हैं, तो एक ही स्थान पर भीड़ जमा होने की संभावना कम हो सकती है।
इस व्यवस्था का लाभ बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और सामान लेकर यात्रा करने वाले यात्रियों को भी मिल सकता है।
हालांकि, टिकट काउंटरों की वास्तविक संख्या और उनके संचालन से संबंधित अंतिम जानकारी रेलवे की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार ही लागू होगी।
दो स्वचालित सीढ़ियों की मिलेगी सुविधा
नई स्टेशन बिल्डिंग में यात्रियों के लिए दो स्वचालित सीढ़ियों की सुविधा का भी उल्लेख किया गया है।
स्वचालित सीढ़ियां यानी एस्केलेटर उन यात्रियों के लिए काफी उपयोगी होती हैं, जिन्हें भारी सामान लेकर सीढ़ियां चढ़ने या उतरने में परेशानी होती है।
रेलवे स्टेशन पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्री सामान लेकर पहुंचते हैं। कई यात्रियों को प्लेटफॉर्म बदलने के लिए एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक जाना पड़ता है।
ऐसी स्थिति में एस्केलेटर से उनका समय और मेहनत दोनों बच सकते हैं।
बुजुर्ग यात्रियों, छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों और शारीरिक रूप से कमजोर लोगों के लिए भी यह सुविधा मददगार साबित हो सकती है।
हालांकि, जिन यात्रियों को एस्केलेटर इस्तेमाल करने में परेशानी होती है, उनके लिए सामान्य सीढ़ियों और लिफ्ट जैसी वैकल्पिक सुविधाएं भी महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए रेलवे स्टेशन के डिजाइन में सभी प्रकार के यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए बनेगा फुट ओवरब्रिज
नई बिल्डिंग से प्लेटफॉर्म तक यात्रियों को आसानी से पहुंचाने के लिए फुट ओवरब्रिज की व्यवस्था की जा रही है।
फुट ओवरब्रिज रेलवे स्टेशन की एक महत्वपूर्ण सुविधा है। इसके माध्यम से यात्री बिना रेलवे ट्रैक पार किए एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक पहुंच सकते हैं।
रांची रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म बदलने के लिए यात्रियों को कई बार काफी दूरी तय करनी पड़ती है। खासकर जब ट्रेन दूसरे प्लेटफॉर्म पर खड़ी हो, तब बुजुर्गों और सामान लेकर चलने वाले यात्रियों को परेशानी होती है।
नई बिल्डिंग को प्लेटफॉर्म से जोड़ने वाले फुट ओवरब्रिज के निर्माण से यह परेशानी कम हो सकती है।
रिपोर्ट में पुराने भवन के निर्माण और रेलवे ओवरब्रिज के दोनों ओर संपर्क बनाए रखने की योजना का भी उल्लेख किया गया है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद यात्रियों को प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए अधिक व्यवस्थित रास्ता मिल सकता है।
छह मीटर चौड़ा नया ब्रिज होगा महत्वपूर्ण
स्टेशन के दोनों हिस्सों के बीच संपर्क बेहतर बनाने के लिए नए ब्रिज का निर्माण भी योजना का हिस्सा है।
अखबार की रिपोर्ट में बताया गया है कि नए स्टेशन भवन को जोड़ने के लिए लगभग छह मीटर चौड़ा ब्रिज तैयार किया जाएगा।
यह ब्रिज यात्रियों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण होगा। इससे एक तरफ से दूसरी तरफ जाने में सुविधा मिलेगी।
रेलवे स्टेशन पर फुट ओवरब्रिज का महत्व तब और बढ़ जाता है, जब एक साथ कई ट्रेनों का आगमन और प्रस्थान होता है।
ऐसे समय में प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की भीड़ बढ़ जाती है। यदि यात्रियों के आने-जाने के लिए पर्याप्त रास्ते उपलब्ध हों, तो भीड़ को नियंत्रित करना आसान हो सकता है।
ब्रिज की चौड़ाई और डिजाइन इस तरह होना जरूरी है कि सामान्य समय के साथ-साथ व्यस्त समय में भी यात्रियों की आवाजाही प्रभावित न हो।
रेलवे को निर्माण के दौरान सुरक्षा, रेल परिचालन और यात्रियों की सुविधा का विशेष ध्यान रखना होगा।
यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
रांची रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास का सबसे बड़ा उद्देश्य यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। नई बिल्डिंग में केवल टिकट काउंटर और प्रवेश-निकास की व्यवस्था ही नहीं होगी, बल्कि यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई अन्य सुविधाओं का भी विकास किया जा रहा है।
स्टेशन पर आने वाले यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी भीड़, प्लेटफॉर्म तक पहुंचने, टिकट लेने और सामान के साथ आवाजाही करने में होती है। नई व्यवस्था में इन समस्याओं को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
नई बिल्डिंग में पिक एंड ड्रॉप की सुविधा उपलब्ध होने से निजी वाहन और कैब से आने वाले यात्रियों को निर्धारित स्थान पर उतरने और चढ़ने का अवसर मिलेगा।
इसके अलावा टिकट काउंटरों और स्वचालित टिकट मशीनों की उपलब्धता से यात्रियों को टिकट लेने में आसानी होगी।
रेलवे स्टेशन पर प्रतीक्षालय और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था भी जरूरी है। लंबी दूरी की ट्रेन से यात्रा करने वाले यात्रियों को कई बार ट्रेन आने से पहले काफी समय तक स्टेशन पर इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में बैठने और आराम करने की सुविधाएं उनके लिए महत्वपूर्ण होती हैं।
आधुनिक स्टेशन भवन में साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय और उचित रोशनी जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
दिव्यांग और बुजुर्ग यात्रियों के लिए होगी बेहतर व्यवस्था
रेलवे स्टेशन के विकास में दिव्यांग और बुजुर्ग यात्रियों की सुविधा को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किसी भी बड़े स्टेशन पर ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि दिव्यांग यात्रियों को प्लेटफॉर्म तक पहुंचने या टिकट लेने के लिए दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े।
रांची रेलवे स्टेशन की नई बिल्डिंग में दिव्यांग यात्रियों के लिए आवागमन की सुविधा विकसित करने की योजना है। इसके अंतर्गत लिफ्ट, रैंप और अन्य सुविधाओं का महत्व बढ़ जाता है।
दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए ब्रेल संकेतक और दिशा बताने वाले बोर्ड भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।
अखबार की रिपोर्ट में बताया गया है कि नई बिल्डिंग में दिव्यांग और दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए आवागमन की सुविधाएं बेहतर बनाई जाएंगी। साथ ही ब्रेल संकेतकों और मार्गदर्शन से जुड़े डिस्प्ले बोर्ड लगाने की योजना भी शामिल है।
ऐसी सुविधाओं से उन यात्रियों को विशेष मदद मिलेगी, जिन्हें सामान्य सीढ़ियों और भीड़भाड़ वाले रास्तों पर चलने में परेशानी होती है।
रेलवे स्टेशन को वास्तव में आधुनिक बनाने के लिए केवल सुंदर भवन बनाना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि वहां हर आयु वर्ग और हर तरह की शारीरिक क्षमता वाले यात्रियों के लिए सुविधाजनक व्यवस्था हो।
प्लेटफॉर्म पर भीड़ कम करने के लिए बनेगा होल्डिंग एरिया
रेलवे स्टेशन पर ट्रेन आने से पहले यात्रियों की भीड़ प्लेटफॉर्म पर जमा हो जाती है। कई बार एक ही प्लेटफॉर्म पर दो ट्रेनों के यात्रियों की आवाजाही के कारण परेशानी बढ़ जाती है।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए होल्डिंग एरिया का निर्माण महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
5 नवंबर 2026 को प्रकाशित दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, रांची रेलवे स्टेशन पर लगभग 2,000 यात्रियों के बैठने और इंतजार करने की क्षमता वाला होल्डिंग एरिया तैयार करने की योजना है। डीआरएम ने इसे दो महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया था। Jagran
इस व्यवस्था के तहत ट्रेन के प्रस्थान से पहले यात्रियों को निर्धारित स्थान पर इंतजार करने की सुविधा मिल सकती है।
इससे प्लेटफॉर्म पर अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। खासकर त्योहारों और छुट्टियों के दौरान जब बड़ी संख्या में यात्री अपने घर जाने के लिए स्टेशन पहुंचते हैं, तब ऐसी सुविधा काफी उपयोगी हो सकती है।
होल्डिंग एरिया में बैठने, प्रतीक्षा करने और ट्रेन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने की उचित व्यवस्था होना जरूरी है।
यदि यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर जाने से पहले व्यवस्थित तरीके से इंतजार करने की सुविधा मिलती है, तो स्टेशन परिसर में सुरक्षा और यातायात प्रबंधन भी बेहतर हो सकता है।
स्टेशन के आसपास अवैध दुकानों और ठेलों पर होगी कार्रवाई
रांची रेलवे स्टेशन के आसपास अतिक्रमण की समस्या भी लंबे समय से यातायात व्यवस्था को प्रभावित करती रही है।
स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वार के पास कई बार अस्थायी दुकानें, ठेले और अनधिकृत पार्किंग के कारण रास्ता संकरा हो जाता है।
इससे यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचने में परेशानी होती है। विशेष रूप से ट्रेन के आने और जाने के समय वाहनों की संख्या बढ़ने पर स्थिति और गंभीर हो जाती है।
अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, डीआरएम करुणानिधि ने गुरुवार को स्टेशन परिसर का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने रेलवे सुरक्षा बल और संबंधित अधिकारियों को अनधिकृत रूप से दुकान लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि अवैध दुकानों और ठेलों के कारण स्टेशन आने-जाने का रास्ता बाधित होता है।
स्टेशन परिसर में दुकानों और पार्किंग की व्यवस्था निर्धारित स्थानों पर होनी चाहिए, ताकि यात्रियों की आवाजाही प्रभावित न हो।
रेलवे प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने के निर्देश का उद्देश्य स्टेशन के आसपास उपलब्ध रास्तों को खुला रखना और यातायात को व्यवस्थित बनाना है।
अतिक्रमण करने वालों को नोटिस देने का निर्देश
सड़क चौड़ीकरण और स्टेशन के पुनर्विकास के दौरान अतिक्रमण हटाना भी एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि रेलवे की जमीन पर कुछ स्थानों पर निजी आवास और दुकानें बनाई गई हैं। डीआरएम ने ऐसे मामलों में संबंधित लोगों को नोटिस देने का निर्देश दिया है।
रेलवे प्रशासन का मानना है कि सड़क चौड़ीकरण और अन्य निर्माण कार्यों में किसी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए।
इसके लिए रेलवे की जमीन पर अनधिकृत निर्माण की पहचान करना और नियमानुसार कार्रवाई करना आवश्यक है।
हालांकि, अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में संबंधित लोगों को नियमों के अनुसार नोटिस और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।
रेलवे की जमीन पर अवैध निर्माण होने से केवल निर्माण कार्य ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि भविष्य में स्टेशन के आसपास यातायात और सुरक्षा संबंधी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।
इसलिए स्टेशन पुनर्विकास के साथ जमीन का व्यवस्थित उपयोग भी महत्वपूर्ण है।
रेलवे ओवरब्रिज से बढ़ेगी उत्तर और दक्षिण छोर के बीच कनेक्टिविटी
रांची रेलवे स्टेशन के उत्तर और दक्षिण छोर को जोड़ने के लिए रोड ओवरब्रिज का निर्माण भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अभी स्टेशन के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचने के लिए यात्रियों और स्थानीय लोगों को उपलब्ध मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ता है। दोनों छोरों के बीच बेहतर सड़क संपर्क होने से आवागमन की सुविधा बढ़ सकती है।
5 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर और दक्षिण गेट को जोड़ने वाले रोड ओवरब्रिज का निर्माण मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तैयार होने से दोनों छोरों के बीच सड़क संपर्क बेहतर होगा। Jagran
इस ब्रिज के माध्यम से स्टेशन के आसपास यातायात को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिल सकती है।
उत्तर और दक्षिण छोर के बीच बेहतर कनेक्टिविटी से यात्रियों को स्टेशन के अलग-अलग प्रवेश द्वारों तक पहुंचने में आसानी होगी।
इससे स्टेशन के आसपास रहने वाले लोगों को भी लाभ मिल सकता है।
दक्षिणी छोर पर प्लेटफॉर्म नंबर छह से शुरू होगा परिचालन
रांची रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास के दौरान दक्षिणी छोर पर प्लेटफॉर्म नंबर छह का निर्माण भी महत्वपूर्ण है।
दैनिक जागरण की 5 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, प्लेटफॉर्म नंबर छह का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका था। प्लेटफॉर्म पर शेड निर्माण का काम भी करीब 80 प्रतिशत पूरा होने की जानकारी दी गई थी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, प्लेटफॉर्म का शेष काम पूरा होने के बाद यहां से ट्रेनों का परिचालन शुरू किया जाएगा। इसके बाद स्टेशन के उत्तरी हिस्से में आगे का काम किया जाएगा। Jagran
नए प्लेटफॉर्म से ट्रेनों का परिचालन शुरू होने पर दक्षिणी छोर के यात्रियों को विशेष सुविधा मिल सकती है।
उन्हें हर बार मुख्य प्रवेश द्वार से होकर स्टेशन पहुंचने की आवश्यकता नहीं होगी।
इससे स्टेशन के उत्तरी हिस्से पर यात्रियों का दबाव कम करने में भी सहायता मिल सकती है।
नया प्लेटफॉर्म तैयार होने के बाद उसे फुट ओवरब्रिज से जोड़ना भी जरूरी होगा, ताकि यात्री आसानी से दूसरे प्लेटफॉर्म तक पहुंच सकें।
दक्षिणी गेट पर टिकट मशीनों से रोजाना हो रही बिक्री
स्टेशन के दक्षिणी गेट पर यात्रियों की सुविधा के लिए ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन यानी एटीवीएम लगाई गई हैं।
5 नवंबर 2026 की रिपोर्ट में डीआरएम के हवाले से बताया गया कि दक्षिणी गेट पर लगी चार एटीवीएम से रोजाना लगभग 1,600 टिकटों की बिक्री हो रही थी। टिकट बिक्री में प्रतिदिन करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज किए जाने की जानकारी भी दी गई।
इसके अलावा यात्रियों के लिए एक टिकट काउंटर भी शुरू किया गया था। Jagran
एटीवीएम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यात्रियों को सामान्य टिकट खरीदने के लिए हर बार लंबी कतार में खड़ा नहीं होना पड़ता।
स्वचालित मशीन के माध्यम से टिकट लेने की प्रक्रिया आसान और तेज हो सकती है।
हालांकि, मशीन के इस्तेमाल की जानकारी नहीं रखने वाले यात्रियों के लिए टिकट काउंटर की सुविधा भी जरूरी है।
इस तरह मशीन और सामान्य काउंटर दोनों उपलब्ध होने से अलग-अलग प्रकार के यात्रियों को सुविधा मिल सकती है।
उत्तर गेट पर भी बढ़ेंगी टिकटिंग सुविधाएं
दक्षिणी गेट की तरह उत्तरी गेट पर भी यात्रियों के लिए टिकटिंग सुविधाओं का विस्तार करने की योजना है।
रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्थ गेट पर एस्केलेटर के पास तीन टिकट काउंटर बनाए जाएंगे। इनके साथ ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन भी लगाई जाएगी।
इसका फायदा यह होगा कि स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के पास ही यात्रियों को टिकट खरीदने की सुविधा मिल सकेगी।
उन्हें टिकट लेने के लिए दूर स्थित काउंटर तक जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
व्यस्त समय में टिकटिंग सुविधाओं का विस्तार काफी महत्वपूर्ण है। यदि स्टेशन पर कई प्रवेश द्वारों पर टिकट लेने की व्यवस्था उपलब्ध हो, तो यात्रियों की भीड़ को अलग-अलग स्थानों पर बांटा जा सकता है।
इससे टिकट काउंटरों के सामने लंबी कतारें कम करने में मदद मिल सकती है।
रांची स्टेशन के पुनर्विकास पर 447 करोड़ रुपये की परियोजना
रांची रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास एक बड़ी रेलवे परियोजना का हिस्सा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, स्टेशन के पुनर्विकास की लगभग 447 करोड़ रुपये की परियोजना का शिलान्यास जुलाई 2022 में किया गया था।
इस योजना में स्टेशन के उत्तर और दक्षिण दोनों ओर तीन मंजिला भवन, आधुनिक यात्री सुविधाएं, पार्किंग, लिफ्ट, एस्केलेटर और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास का प्रावधान है। The Times of India
इस परियोजना का उद्देश्य रांची रेलवे स्टेशन को आधुनिक परिवहन केंद्र के रूप में विकसित करना है।
आज रेलवे स्टेशन केवल ट्रेन पकड़ने और उतरने की जगह नहीं रह गए हैं। बड़े स्टेशनों पर यात्रियों के लिए भोजन, विश्राम, टिकटिंग, पार्किंग और अन्य सुविधाओं का भी विकास किया जा रहा है।
रांची जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में स्टेशन का आधुनिक होना जरूरी है, क्योंकि यहां यात्रियों की संख्या और यातायात की जरूरतें लगातार बदल रही हैं।
परियोजना के तहत स्टेशन की दोनों ओर की बिल्डिंग को बेहतर तरीके से जोड़ने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
नई बिल्डिंग में पार्किंग और पिक एंड ड्रॉप की सुविधा
रेलवे स्टेशन पर पार्किंग की समस्या भी यात्रियों के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। ट्रेन से किसी को छोड़ने या लेने आने वाले लोगों को कई बार वाहन खड़ा करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती।
स्टेशन के आसपास वाहन सड़क किनारे खड़े होने लगते हैं, जिससे जाम की स्थिति पैदा होती है।
रांची स्टेशन के पुनर्विकास में पार्किंग और पिक एंड ड्रॉप व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
नई व्यवस्था के तहत निर्धारित स्थान पर वाहनों को रोकने और यात्रियों को उतारने की सुविधा विकसित की जाएगी।
इससे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने वाहनों की अनावश्यक भीड़ कम हो सकती है।
पार्किंग की उचित व्यवस्था होने से यात्रियों के साथ-साथ कैब चालकों और निजी वाहन से आने वाले लोगों को भी सुविधा मिलेगी।
स्टेशन के आसपास यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए पार्किंग क्षेत्र का सही प्रबंधन आवश्यक होगा।
निर्माण कार्य के दौरान यात्रियों को हो सकती है परेशानी
रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास का काम पूरा होने तक यात्रियों को कुछ असुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है।
किसी भी बड़े रेलवे स्टेशन पर निर्माण कार्य होने के दौरान प्रवेश और निकास के रास्तों में बदलाव करना पड़ता है। कई बार यात्रियों को दूसरे रास्तों से प्लेटफॉर्म तक पहुंचना पड़ता है।
रांची रेलवे स्टेशन पर भी नई बिल्डिंग और सड़क निर्माण के कारण कुछ मार्गों पर अस्थायी बदलाव किए जा सकते हैं।
ऐसी स्थिति में यात्रियों को ट्रेन पकड़ने के लिए पहले से अधिक समय लेकर घर से निकलना चाहिए।
विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और भारी सामान के साथ यात्रा करने वाले लोगों को स्टेशन पहुंचने के रास्ते की जानकारी पहले से रखनी चाहिए।
रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि निर्माण कार्य के दौरान यात्रियों को सही दिशा बताने वाले संकेतक लगाए जाएं।
इसके अलावा स्टेशन पर पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती भी जरूरी होगी, ताकि यात्रियों को प्लेटफॉर्म और टिकट काउंटर तक पहुंचने में परेशानी न हो।
डीआरएम ने अधिकारियों को समय पर काम पूरा करने का दिया निर्देश
रांची रेल मंडल के डीआरएम करुणानिधि सिंह स्टेशन पुनर्विकास कार्यों की प्रगति पर लगातार नजर रख रहे हैं।
स्टेशन निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की स्थिति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की।
निर्माण एजेंसियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
दैनिक जागरण की 5 नवंबर की रिपोर्ट में भी डीआरएम ने अधूरे कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि निर्माण कार्यों को अनावश्यक रूप से लंबा नहीं खींचा जाना चाहिए। Jagran
रेलवे स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर निर्माण कार्यों में देरी होने से हजारों यात्रियों को प्रभावित होना पड़ सकता है।
इसलिए रेलवे प्रशासन के लिए जरूरी है कि निर्माण एजेंसी नियमित रूप से कार्य की प्रगति की जानकारी दे और निर्धारित समय पर काम पूरा करे।
रांची शहर के विकास में भी महत्वपूर्ण होगी यह परियोजना
रांची रेलवे स्टेशन केवल रेल यात्रियों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह शहर के आर्थिक और सामाजिक जीवन का भी एक प्रमुख हिस्सा है।
स्टेशन के आसपास होटल, दुकानें, छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठान और परिवहन से जुड़े कई व्यवसाय संचालित होते हैं।
हर दिन बड़ी संख्या में लोग ट्रेन से रांची पहुंचते हैं और यहां से दूसरे शहरों के लिए रवाना होते हैं।
ऐसे में स्टेशन की बेहतर व्यवस्था का असर शहर के दूसरे क्षेत्रों पर भी पड़ता है।
यदि सड़क चौड़ी होती है और स्टेशन के दोनों छोरों के बीच संपर्क बेहतर होता है, तो आसपास के इलाकों में यातायात का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा स्टेशन के आधुनिक होने से रांची आने वाले पर्यटकों और दूसरे राज्यों के यात्रियों को भी बेहतर अनुभव मिल सकता है।
झारखंड में पर्यटन की दृष्टि से कई महत्वपूर्ण स्थान हैं। रांची आने वाले पर्यटक अक्सर यहां से राज्य के अलग-अलग पर्यटन स्थलों की यात्रा करते हैं।
ऐसे में रेलवे स्टेशन पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होना पर्यटन गतिविधियों को भी प्रोत्साहित कर सकता है।
स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों पर भी पड़ेगा असर
स्टेशन के आसपास सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का प्रभाव स्थानीय व्यापारियों पर भी पड़ सकता है।
रेलवे स्टेशन के आसपास कई छोटी दुकानें, खाने-पीने के ठेले और अन्य व्यवसाय संचालित होते हैं। इन दुकानों पर यात्रियों और स्थानीय लोगों की निर्भरता रहती है।
लेकिन यदि दुकानें निर्धारित स्थान के बजाय सड़क किनारे या प्रवेश द्वार के पास लगाई जाती हैं, तो इससे यातायात प्रभावित हो सकता है।
रेलवे प्रशासन की ओर से अनधिकृत दुकानों को हटाने का निर्देश इसी समस्या को देखते हुए दिया गया है।
हालांकि, स्टेशन पर व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उचित स्थान उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
यदि दुकानों और स्टॉल के लिए निर्धारित स्थान बनाए जाते हैं, तो यात्रियों को खाने-पीने और जरूरी सामान खरीदने की सुविधा मिल सकती है।
इससे स्थानीय व्यापारियों को भी नियमों के अनुसार अपना कारोबार करने का अवसर मिलेगा।
नई बिल्डिंग में व्यावसायिक सुविधाओं के विकास से स्टेशन परिसर को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है।
यात्रियों की सुरक्षा भी होगी महत्वपूर्ण
स्टेशन के पुनर्विकास के दौरान यात्री सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
रेलवे स्टेशन पर हर समय यात्रियों की आवाजाही रहती है। ऐसे में निर्माण कार्य वाले क्षेत्रों को सुरक्षित रखना जरूरी होता है।
निर्माण स्थल के आसपास बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और वैकल्पिक रास्तों की जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए।
फुट ओवरब्रिज, लिफ्ट और एस्केलेटर का निर्माण भी सुरक्षा मानकों के अनुसार किया जाना चाहिए।
इसके अलावा प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त रोशनी, सीसीटीवी निगरानी और रेलवे सुरक्षा बल की मौजूदगी यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है।
रात के समय यात्रा करने वाले लोगों को स्टेशन पर सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए।
महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी स्टेशन पर उचित सहायता व्यवस्था जरूरी है।
आधुनिक रेलवे स्टेशन का उद्देश्य केवल सुविधाएं बढ़ाना नहीं, बल्कि यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना भी है।
मार्च 2027 तक किन कामों पर रहेगी सबसे अधिक नजर?
रांची रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास से जुड़े कई काम अलग-अलग चरणों में चल रहे हैं। आने वाले महीनों में यात्रियों की नजर मुख्य रूप से इन परियोजनाओं पर रहेगी।
- मुख्य सड़क को 14 मीटर से बढ़ाकर 22 मीटर करना।
- पुरानी रेलवे कॉलोनी और दक्षिणी छोर को जोड़ने वाली सड़क तैयार करना।
- उत्तर और दक्षिण गेट के बीच बेहतर सड़क संपर्क विकसित करना।
- रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण पूरा करना।
- नई स्टेशन बिल्डिंग में यात्री सुविधाओं का विस्तार करना।
- प्लेटफॉर्म नंबर छह और फुट ओवरब्रिज के काम को पूरा करना।
- टिकट काउंटर और स्वचालित टिकट मशीनों की सुविधा बढ़ाना।
- स्टेशन परिसर से अवैध अतिक्रमण हटाना।
- यात्रियों के लिए होल्डिंग एरिया तैयार करना।
- दिव्यांग यात्रियों के लिए सुगम आवागमन की व्यवस्था करना।
इनमें से अलग-अलग कार्यों की समय-सीमा अलग है। इसलिए सभी काम मार्च 2027 तक पूरे होने का दावा नहीं किया जा सकता। सड़क संपर्क और रोड ओवरब्रिज के लिए मार्च का लक्ष्य बताया गया है।
निष्कर्ष: रांची स्टेशन की बदलेगी तस्वीर, यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत
रांची रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास की योजना शहर के परिवहन ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्य सड़क को 22 मीटर चौड़ा करने, पुरानी रेलवे कॉलोनी को स्टेशन से जोड़ने और उत्तर-दक्षिण छोर के बीच बेहतर संपर्क विकसित करने से यात्रियों की पुरानी समस्याओं को दूर करने में मदद मिल सकती है।
नई बिल्डिंग में टिकट काउंटर, स्वचालित टिकट मशीन, एस्केलेटर, लिफ्ट, फुट ओवरब्रिज और दिव्यांग यात्रियों के लिए सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इसके अलावा पार्किंग, पिक एंड ड्रॉप और होल्डिंग एरिया से स्टेशन परिसर की व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है।
रेलवे प्रशासन की ओर से निर्माण कार्यों को निर्धारित समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। मार्च 2027 तक सड़क संपर्क और रोड ओवरब्रिज से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य पूरे करने का लक्ष्य यात्रियों के लिए विशेष महत्व रखता है।
हालांकि, परियोजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्माण कार्य कितनी तेजी और गुणवत्ता के साथ पूरा होता है। साथ ही निर्माण के दौरान यात्रियों को होने वाली परेशानी को कम करना भी जरूरी होगा।
यदि सभी योजनाएं सही तरीके से लागू होती हैं, तो आने वाले समय में रांची रेलवे स्टेशन तक पहुंचना पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकता है। स्टेशन के दोनों छोरों से यात्रियों को बेहतर प्रवेश और निकास की सुविधा मिलेगी और शहर के यातायात पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
रांची के लोगों को अब इस बात का इंतजार है कि रेलवे की ओर से घोषित समय-सीमा के अनुसार सड़क, ब्रिज और अन्य सुविधाओं का निर्माण कब तक पूरा होता है।