रांची, 1 सितंबर 2026: झारखंड की प्राकृतिक खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध नेतरहाट अब अपनी एक और खास पहचान को लेकर चर्चा में है। यहां की पहाड़ियों में पैदा होने वाली प्रीमियम गुणवत्ता की नाशपाती अब स्थानीय हाट-बाजारों तक सीमित नहीं रह गई है। नेतरहाट की नाशपाती अब संगठित और बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने लगी है। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी यानी JSLPS के SETU सेल की पहल से इस स्थानीय उत्पाद को नए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस पूरी पहल में महिला-नेतृत्व वाले किसान उत्पादक संगठनों यानी FPOs को महत्वपूर्ण भूमिका दी जा रही है।

इस पहल का उद्देश्य केवल किसानों की उपज को किसी दूसरे बाजार तक पहुंचाना नहीं है, बल्कि उत्पादन से लेकर बिक्री तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है। इसके तहत नाशपाती के सामूहिक संग्रहण, वैज्ञानिक ग्रेडिंग एवं छंटाई, गुणवत्ता जांच, आधुनिक पैकेजिंग और व्यवस्थित लॉजिस्टिक्स जैसी व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर मिल रहे हैं।

JSLPS के SETU सेल की पहल के तहत अब तक करीब 5 मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाली नेतरहाट की नाशपाती संगठित खरीदारों तक पहुंचाई जा चुकी है। वहीं लगभग 10 मीट्रिक टन नाशपाती की एक और बड़ी खेप असम के गुवाहाटी भेजने के लिए तैयार की जा रही है। इससे यह साफ है कि नेतरहाट की नाशपाती अब स्थानीय बाजार से आगे निकलकर दूसरे राज्यों के बाजारों तक अपनी पहुंच बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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स्थानीय हाट से संगठित बाजार तक पहुंची नेतरहाट की नाशपाती

नेतरहाट झारखंड के उन क्षेत्रों में शामिल है, जहां की प्राकृतिक और जलवायु परिस्थितियां इसे कृषि एवं बागवानी के लिए विशेष बनाती हैं। यहां की ठंडी जलवायु नाशपाती की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है। लंबे समय से स्थानीय किसान इस क्षेत्र में नाशपाती की खेती करते आ रहे हैं और यह यहां के प्रमुख बागवानी उत्पादों में शामिल है।

हालांकि, लंबे समय तक किसानों की उपज मुख्य रूप से स्थानीय हाट और पारंपरिक बाजारों पर निर्भर रही। स्थानीय बाजार किसानों को उनकी उपज बेचने का अवसर तो देता है, लेकिन बड़े और प्रीमियम बाजारों तक सीधी पहुंच सीमित होने के कारण किसानों के सामने कई चुनौतियां रहती हैं।

अब JSLPS के SETU सेल की पहल इस व्यवस्था को बदलने की दिशा में काम कर रही है। किसानों की उपज को संगठित खरीदारों से जोड़कर उन्हें बड़े बाजारों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इससे नेतरहाट की नाशपाती के लिए बाजार का दायरा बढ़ने लगा है।

यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जब कोई स्थानीय कृषि उत्पाद संगठित बाजार में प्रवेश करता है तो किसानों को केवल नए खरीदार ही नहीं मिलते, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग और आपूर्ति की व्यवस्था को बेहतर करने का अवसर भी मिलता है।

महिला किसानों को मिल रहा बाजार का बेहतर अवसर

इस पहल की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है महिला-नेतृत्व वाले किसान उत्पादक संगठनों की भागीदारी।

ग्रामीण झारखंड में महिलाएं खेती और कृषि से जुड़ी गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। खेतों में काम करने से लेकर फल की देखभाल, तुड़ाई और अन्य गतिविधियों में उनकी भागीदारी रहती है। इसके बावजूद बाजार में अपनी उपज को उचित मूल्य पर बेचने और बड़े खरीदारों तक पहुंच बनाने के अवसर कई बार सीमित रहते हैं।

FPO के माध्यम से किसानों को सामूहिक रूप से बाजार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। एक किसान के पास सीमित मात्रा में नाशपाती हो सकती है, लेकिन कई किसानों की उपज को एक साथ जोड़कर बड़ी मात्रा में उत्पाद तैयार किया जा सकता है। इससे बड़े खरीदारों की जरूरत पूरी करना आसान हो जाता है।

महिला-नेतृत्व वाले FPOs को बाजार व्यवस्था से जोड़ने से महिलाओं की भूमिका केवल कृषि उत्पादन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे संग्रहण, बाजार संपर्क, व्यापार और मूल्य श्रृंखला से भी जुड़ सकती हैं।

इस तरह यह पहल किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

5 मीट्रिक टन नाशपाती की हो चुकी है आपूर्ति

JSLPS के SETU सेल की पहल के तहत अब तक लगभग 5 मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाली नाशपाती संगठित खरीदारों तक पहुंचाई जा चुकी है।

किसी स्थानीय उत्पाद को संगठित बाजार तक पहुंचाना केवल परिवहन की प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए उपज की गुणवत्ता बनाए रखना, बाजार की मांग को समझना, उत्पाद की ग्रेडिंग करना, उचित पैकेजिंग करना और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करना जरूरी होता है।

नेतरहाट की नाशपाती के मामले में इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए वैल्यू चेन को व्यवस्थित किया जा रहा है। इससे किसानों को बाजार तक पहुंचने में सहायता मिल रही है और खरीदारों को भी निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार उत्पाद उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

5 मीट्रिक टन की आपूर्ति इस दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत मानी जा सकती है। इससे आगे और बड़े बाजारों में उत्पाद की मांग विकसित होने की संभावना बनती है।

गुवाहाटी भेजी जा रही 10 मीट्रिक टन की अगली खेप

नेतरहाट की नाशपाती के बाजार विस्तार की दिशा में अगला बड़ा कदम करीब 10 मीट्रिक टन नाशपाती की खेप गुवाहाटी भेजना है।

असम का गुवाहाटी पूर्वोत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण बाजार केंद्र है। झारखंड के एक पहाड़ी क्षेत्र में उत्पादित नाशपाती का गुवाहाटी जैसे बाजार तक पहुंचना किसानों के लिए नए व्यापारिक अवसर पैदा कर सकता है।

यदि इस तरह की आपूर्ति लगातार बड़े बाजारों तक पहुंचती है और किसानों को बेहतर मूल्य मिलता है, तो इससे स्थानीय स्तर पर नाशपाती की खेती को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

गुवाहाटी भेजी जाने वाली यह खेप यह भी दर्शाती है कि नेतरहाट की नाशपाती अब केवल स्थानीय उपभोक्ताओं के लिए उत्पादित फल नहीं रह गई है, बल्कि इसे व्यापक घरेलू बाजार में पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है।

पूरी वैल्यू चेन मजबूत करने पर जोर

JSLPS की पहल की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें केवल बाजार उपलब्ध कराने के बजाय पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

किसान खेत में नाशपाती का उत्पादन करता है, लेकिन उसके बाद भी फल को बाजार तक पहुंचाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। यदि इन प्रक्रियाओं में उचित व्यवस्था नहीं हो तो अच्छी गुणवत्ता वाला फल भी बाजार में अपेक्षित मूल्य हासिल नहीं कर पाता।

इसीलिए इस पहल के तहत नाशपाती की पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है।

इसमें मुख्य रूप से:

  • सामूहिक संग्रहण
  • वैज्ञानिक ग्रेडिंग
  • गुणवत्ता के आधार पर छंटाई
  • गुणवत्ता जांच
  • आधुनिक पैकेजिंग
  • व्यवस्थित लॉजिस्टिक्स
  • संस्थागत खरीदारों से संपर्क

जैसी व्यवस्थाओं को शामिल किया गया है।

इससे खेत से बाजार तक नाशपाती के सफर को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल रही है।

सामूहिक संग्रहण से बड़े खरीदारों तक पहुंच आसान

छोटे किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि उनके पास एक साथ इतनी मात्रा में उपज नहीं होती, जितनी बड़े खरीदारों को चाहिए होती है।

FPO मॉडल इस समस्या का समाधान करने में मदद करता है। कई किसानों की उपज को एक साथ एकत्र करके पर्याप्त मात्रा तैयार की जा सकती है।

सामूहिक संग्रहण से खरीदारों के लिए भी प्रक्रिया आसान हो जाती है। उन्हें अलग-अलग किसानों से संपर्क करने के बजाय एक संगठित समूह से उत्पाद प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

नेतरहाट की नाशपाती के मामले में भी सामूहिक संग्रहण को वैल्यू चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। इससे किसानों की व्यक्तिगत उपज को बड़े बाजार की मांग से जोड़ने में मदद मिल रही है।

वैज्ञानिक ग्रेडिंग से गुणवत्ता को मिलेगी मजबूती

बड़े और संगठित बाजारों में उत्पाद की गुणवत्ता का विशेष महत्व होता है। हर फल एक जैसा नहीं होता। आकार, गुणवत्ता और अन्य विशेषताओं के आधार पर उत्पाद की अलग-अलग श्रेणियां हो सकती हैं।

ऐसे में वैज्ञानिक ग्रेडिंग और छंटाई जरूरी हो जाती है।

ग्रेडिंग से नाशपाती को निर्धारित मानकों के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में व्यवस्थित किया जा सकता है। इससे खरीदारों को अपनी आवश्यकता के अनुसार उत्पाद मिल सकता है।

वहीं छंटाई के जरिए खराब या कम गुणवत्ता वाले फलों को अलग किया जा सकता है। इससे बेहतर गुणवत्ता वाले फलों की बाजार पहचान मजबूत हो सकती है।

नेतरहाट की नाशपाती को प्रीमियम बाजार तक पहुंचाने के लिए यह प्रक्रिया काफी महत्वपूर्ण है।

गुणवत्ता जांच से बढ़ेगा भरोसा

किसी भी संगठित बाजार में खरीदार केवल मात्रा नहीं देखता, बल्कि गुणवत्ता पर भी ध्यान देता है। इसलिए उत्पाद की गुणवत्ता की जांच आवश्यक होती है।

JSLPS की पहल में नाशपाती की गुणवत्ता जांच पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य बाजार में गुणवत्तापूर्ण उत्पाद पहुंचाना है।

यदि किसानों की उपज लगातार निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बाजार तक पहुंचती है तो खरीदारों का भरोसा बढ़ सकता है। इससे भविष्य में उसी उत्पाद की मांग को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

नेतरहाट की नाशपाती के लिए भी गुणवत्ता बनाए रखना बाजार विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

आधुनिक पैकेजिंग से नाशपाती को मिलेगा बेहतर स्वरूप

नाशपाती जैसे ताजे फल के लिए पैकेजिंग बेहद महत्वपूर्ण है। फल को खेत से बाजार तक लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। ऐसे में यदि पैकेजिंग सही नहीं हो तो परिवहन के दौरान फल को नुकसान पहुंच सकता है।

JSLPS की पहल के तहत आधुनिक पैकेजिंग पर जोर दिया जा रहा है।

उचित पैकेजिंग से नाशपाती को सुरक्षित तरीके से बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। साथ ही बड़े रिटेल बाजारों के लिए उत्पाद को बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है।

इससे नेतरहाट की नाशपाती को स्थानीय उत्पाद से एक व्यवस्थित बाजार उत्पाद में बदलने में सहायता मिल सकती है।

लॉजिस्टिक्स की भूमिका भी अहम

किसान की उपज को बाजार तक पहुंचाने में लॉजिस्टिक्स एक महत्वपूर्ण कड़ी है। खासकर पहाड़ी क्षेत्र से दूसरे राज्यों के बाजार तक ताजा फल भेजने के लिए परिवहन व्यवस्था को बेहतर रखना जरूरी होता है।

नेतरहाट से नाशपाती को पहले संग्रहण और पैकेजिंग व्यवस्था तक पहुंचाना, फिर वहां से बड़े बाजारों तक भेजना एक पूरी प्रक्रिया है।

यदि यह प्रक्रिया समयबद्ध और व्यवस्थित हो तो फल की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

SETU सेल की पहल में लॉजिस्टिक्स को भी पूरी वैल्यू चेन का हिस्सा बनाया गया है। इससे नाशपाती को बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

Agri Arjuna के माध्यम से संगठित रिटेल चेन तक पहुंच

नेतरहाट की नाशपाती को संगठित बाजार से जोड़ने में Agri Arjuna की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है।

Agri Arjuna के माध्यम से नेतरहाट की नाशपाती अब संगठित रिटेल चेन तक पहुंच रही है। इस संगठित रिटेल व्यवस्था में रिलायंस भी शामिल है।

किसी स्थानीय किसान उत्पाद का संगठित रिटेल चेन तक पहुंचना बाजार विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। इससे उत्पाद को बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है।

संगठित रिटेल बाजार में प्रवेश के लिए उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग और नियमित आपूर्ति महत्वपूर्ण होती है। इसलिए इस तरह के बाजार से जुड़ने के साथ किसानों और FPOs के लिए वैल्यू चेन को मजबूत करना भी आवश्यक हो जाता है।

Tincture Agri के जरिए प्रीमियम घरेलू बाजार

नेतरहाट की नाशपाती को बड़े बाजार तक पहुंचाने के लिए Tincture Agri के माध्यम से भी काम किया जा रहा है।

Tincture Agri के जरिए अतिरिक्त खेपों को प्रीमियम घरेलू बाजारों तक भेजा जा रहा है।

प्रीमियम बाजारों में गुणवत्तापूर्ण उत्पाद की मांग अधिक हो सकती है। ऐसे बाजारों तक पहुंचने से किसानों की उच्च गुणवत्ता वाली उपज को बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

इस प्रकार नेतरहाट की नाशपाती के लिए एक तरफ संगठित रिटेल चेन तैयार हो रही है और दूसरी ओर प्रीमियम घरेलू बाजारों तक भी पहुंच बनाई जा रही है।

ठंडी जलवायु नेतरहाट को बनाती है खास

नेतरहाट की पहचान केवल पर्यटन स्थल के रूप में नहीं है। इसकी प्राकृतिक परिस्थितियां कृषि और बागवानी के लिए भी विशेष महत्व रखती हैं।

क्षेत्र की ठंडी जलवायु नाशपाती की खेती के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। इसी कारण नेतरहाट झारखंड के प्रमुख नाशपाती उत्पादक इलाकों में शामिल है।

अब जब यहां की नाशपाती को बड़े बाजारों से जोड़ा जा रहा है, तो क्षेत्र की प्राकृतिक विशेषता को आर्थिक अवसर में बदलने की संभावनाएं बढ़ रही हैं।

किसानों को यदि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए उचित बाजार और बेहतर मूल्य मिलता है तो नाशपाती की खेती उनके लिए अधिक आकर्षक कृषि गतिविधि बन सकती है।

पारंपरिक बाजारों पर निर्भरता कम करने की कोशिश

किसानों की आय में बाजार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि किसान केवल स्थानीय बाजार पर निर्भर रहता है तो उसकी उपज की कीमत स्थानीय मांग और सीमित खरीदारों से प्रभावित हो सकती है।

संगठित बाजार किसानों को नए खरीदारों तक पहुंच प्रदान कर सकता है।

नेतरहाट की नाशपाती को संगठित मूल्य श्रृंखला से जोड़ने का उद्देश्य भी किसानों को पारंपरिक बाजारों पर निर्भरता से आगे बढ़ाना है।

इससे किसानों के पास अपनी उपज के लिए अधिक बाजार विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं। बड़े खरीदारों तक पहुंच होने से उत्पाद की मांग और कीमत को लेकर नई संभावनाएं बन सकती हैं।

महिला FPOs की भूमिका बढ़ने से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

महिला-नेतृत्व वाले FPOs को संगठित बाजार से जोड़ना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

महिलाएं यदि कृषि उत्पाद के उत्पादन के साथ-साथ उसके बाजार और व्यापार से भी जुड़ती हैं, तो उनकी आर्थिक भूमिका मजबूत हो सकती है।

FPO के माध्यम से सामूहिक रूप से नाशपाती बेचने से महिलाओं को बाजार की प्रक्रिया समझने, खरीदारों से संपर्क करने और उत्पाद की गुणवत्ता के बारे में जानकारी हासिल करने का अवसर मिल सकता है।

इससे भविष्य में अन्य कृषि और बागवानी उत्पादों को भी इसी तरह संगठित बाजारों से जोड़ने की संभावना बन सकती है।

किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद

किसानों के लिए किसी भी कृषि उत्पाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उसका उचित बाजार मूल्य है।

किसान पूरे मौसम में फसल तैयार करने में मेहनत करता है। यदि बाजार में उसे उचित कीमत नहीं मिलती तो उत्पादन की लागत और मेहनत के अनुरूप आय प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है।

संगठित बाजारों से जुड़ने के बाद किसानों को बड़े खरीदारों तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है। इससे उनकी उपज के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त करने की संभावना बढ़ रही है।

नेतरहाट की नाशपाती के मामले में भी यही लक्ष्य है कि किसानों को पारंपरिक बाजारों की सीमाओं से बाहर निकालकर ऐसी मूल्य श्रृंखला से जोड़ा जाए जहां गुणवत्तापूर्ण उत्पाद को बेहतर बाजार मिल सके।

स्थानीय उत्पाद से ब्रांड बनने की दिशा

किसी भी कृषि उत्पाद को बड़े बाजार में स्थापित करने के लिए केवल उत्पादन पर्याप्त नहीं होता। उसके साथ उसकी पहचान और ब्रांड वैल्यू भी विकसित करनी होती है।

नेतरहाट की नाशपाती की अपनी भौगोलिक और जलवायु विशेषता है। यदि इसे लगातार गुणवत्ता के साथ बड़े बाजारों तक पहुंचाया जाता है तो भविष्य में इसकी एक अलग बाजार पहचान विकसित हो सकती है।

“नेतरहाट की नाशपाती” को झारखंड के विशिष्ट बागवानी उत्पाद के रूप में स्थापित करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण आधार तैयार कर सकती है।

झारखंड के दूसरे उत्पादों के लिए भी बन सकता है मॉडल

नेतरहाट की नाशपाती की बाजार यात्रा झारखंड के दूसरे स्थानीय कृषि और बागवानी उत्पादों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।

राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में कई ऐसे उत्पाद हैं जिनकी गुणवत्ता और स्थानीय पहचान मजबूत है, लेकिन बाजार तक उनकी पहुंच सीमित है।

यदि किसानों को FPO के माध्यम से संगठित किया जाए और उत्पादों के लिए ग्रेडिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता जांच, ब्रांडिंग और लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था विकसित की जाए तो ऐसे उत्पादों को भी बड़े बाजारों से जोड़ा जा सकता है।

इससे ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है और किसानों की आय के नए स्रोत तैयार हो सकते हैं।

खेत से उपभोक्ता तक बदल रही पूरी व्यवस्था

नेतरहाट की नाशपाती की पूरी बाजार यात्रा को देखें तो यह केवल किसान से व्यापारी तक की पारंपरिक व्यवस्था नहीं रह गई है।

अब एक व्यवस्थित श्रृंखला विकसित की जा रही है—

किसान → महिला FPO → सामूहिक संग्रहण → वैज्ञानिक ग्रेडिंग → गुणवत्ता जांच → आधुनिक पैकेजिंग → लॉजिस्टिक्स → संगठित खरीदार → रिटेल बाजार → उपभोक्ता

इस पूरी व्यवस्था में हर चरण का अपना महत्व है।

यदि किसी एक चरण में कमी रहती है तो पूरी मूल्य श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। इसलिए SETU सेल की पहल में पूरी वैल्यू चेन को एक साथ मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन पर जोर

संगठित बाजार से जुड़ने के बाद किसानों को केवल उत्पादन करने के बजाय बाजार की मांग को भी समझना पड़ता है।

किस गुणवत्ता की नाशपाती चाहिए, किस आकार के फल की मांग है, किस प्रकार की पैकेजिंग आवश्यक है और कितनी मात्रा में उत्पाद उपलब्ध कराया जा सकता है—इन सभी पहलुओं की जानकारी किसानों के लिए उपयोगी हो सकती है।

FPO के माध्यम से किसानों को सामूहिक रूप से बाजार से जोड़ने का एक फायदा यह भी हो सकता है कि बाजार की आवश्यकताओं को किसानों तक व्यवस्थित रूप से पहुंचाया जा सके।

इससे उत्पादन और बाजार के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है।

नाशपाती की बढ़ती बाजार पहुंच से क्या बदल सकता है?

नेतरहाट की नाशपाती की बाजार पहुंच बढ़ने से आने वाले समय में कई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।

पहली संभावना है कि किसानों को अपनी उपज के लिए अधिक बाजार उपलब्ध हों। दूसरी संभावना यह है कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए किसानों को अधिक प्रोत्साहन मिले। तीसरी संभावना यह है कि महिला FPOs की आर्थिक गतिविधियों का विस्तार हो।

इसके अलावा पैकेजिंग, ग्रेडिंग, परिवहन और संग्रहण जैसी गतिविधियों से जुड़े स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

यदि बाजार का विस्तार लगातार जारी रहता है तो नेतरहाट की नाशपाती क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

गुवाहाटी की खेप से बढ़ेगा अंतरराज्यीय बाजार

लगभग 10 मीट्रिक टन नाशपाती की गुवाहाटी भेजे जाने की तैयारी इस पहल का महत्वपूर्ण चरण है।

एक राज्य से दूसरे राज्य तक कृषि उत्पाद की आपूर्ति किसानों को अंतरराज्यीय बाजार से जोड़ने की दिशा में कदम है।

यदि गुवाहाटी में इस उत्पाद को बाजार और उपभोक्ताओं की अच्छी प्रतिक्रिया मिलती है तो भविष्य में दूसरे बाजारों के लिए भी रास्ते खुल सकते हैं।

इससे नेतरहाट की नाशपाती की पहचान झारखंड से बाहर भी मजबूत हो सकती है।

JSLPS की पहल से बदल रहा बाजार का नजरिया

JSLPS की SETU पहल ने यह दिखाने की कोशिश की है कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है।

किसान जितनी मेहनत से उत्पाद तैयार करता है, उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका उसके उत्पाद को सही बाजार तक पहुंचाने की होती है।

बाजार से जुड़ाव, खरीदारों तक पहुंच, गुणवत्ता, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे पहलुओं को एक साथ मजबूत करने पर ही कृषि उत्पाद को बेहतर बाजार मिल सकता है।

नेतरहाट की नाशपाती के मामले में इसी दिशा में प्रयास किया जा रहा है।

निष्कर्ष: नेतरहाट की नाशपाती को मिल रही नई पहचान

नेतरहाट की पहाड़ियों में पैदा होने वाली नाशपाती अब स्थानीय हाट-बाजारों से निकलकर संगठित और बड़े बाजारों की ओर बढ़ रही है। JSLPS के SETU सेल की पहल से महिला-नेतृत्व वाले FPOs को संस्थागत खरीदारों से जोड़ने का काम किया जा रहा है।

करीब 5 मीट्रिक टन नाशपाती की आपूर्ति पहले ही संगठित खरीदारों तक पहुंचाई जा चुकी है, जबकि करीब 10 मीट्रिक टन की अगली खेप गुवाहाटी भेजने के लिए तैयार की जा रही है।

Agri Arjuna के माध्यम से नाशपाती संगठित रिटेल चेन, जिसमें रिलायंस भी शामिल है, तक पहुंच रही है। वहीं Tincture Agri के जरिए अतिरिक्त खेपों को प्रीमियम घरेलू बाजारों में भेजा जा रहा है।

इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल बाजार उपलब्ध कराने के बजाय पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। सामूहिक संग्रहण, वैज्ञानिक ग्रेडिंग, छंटाई, गुणवत्ता जांच, आधुनिक पैकेजिंग और व्यवस्थित लॉजिस्टिक्स के जरिए नेतरहाट की नाशपाती को बड़े बाजारों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

महिला किसानों और उनके FPOs की भागीदारी इस पहल को और महत्वपूर्ण बनाती है। इससे महिलाओं को कृषि उत्पादन के साथ-साथ बाजार और व्यापार व्यवस्था से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

नेतरहाट की ठंडी जलवायु पहले से ही नाशपाती की खेती के लिए अनुकूल है। अब यदि बाजार की मजबूत व्यवस्था, बेहतर मूल्य, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और नियमित आपूर्ति का यह मॉडल आगे बढ़ता है, तो नेतरहाट की नाशपाती झारखंड के प्रमुख बागवानी उत्पादों में अपनी अलग पहचान बना सकती है।

यह पहल न केवल नेतरहाट के किसानों के लिए नए बाजार खोल रही है, बल्कि यह भी दिखा रही है कि स्थानीय कृषि उत्पादों को सही मूल्य श्रृंखला से जोड़कर उन्हें राज्य और राज्य के बाहर के बड़े बाजारों तक पहुंचाया जा सकता है।

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