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रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़ी भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच के बीच केस डायरी में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने की बात सामने आई है। दैनिक भास्कर की 9 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, CID की केस डायरी में पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते को लेकर आरोप दर्ज हैं कि इस्तीफा देने के बाद वह सरकारी लैपटॉप और एक गोपनीय पेन ड्राइव अपने साथ ले गए थे। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि बाद में लैपटॉप की जांच के दौरान केवल डेटा डिलीट किए जाने की बात नहीं, बल्कि फाइलों को करप्ट करने और हार्ड डिस्क को नुकसान पहुंचाने तक के प्रयास के आरोप सामने आए।

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि JPSC भर्ती प्रक्रिया में परीक्षा से संबंधित डिजिटल सामग्री, प्रश्नपत्र, प्रशासनिक दस्तावेज और अन्य संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा सीधे तौर पर परीक्षा की विश्वसनीयता से जुड़ी होती है। CID की जांच में सामने आए कथित डिजिटल साक्ष्यों और केस डायरी के विवरण ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर पहले से उठ रहे सवालों को और गंभीर बना दिया है।

हाल के दिनों में JPSC से जुड़े मामले में पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते की जमानत याचिका खारिज होने की खबर भी सामने आई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन पर परीक्षा एजेंसी को काम दिए जाने में अनियमितता समेत कई आरोपों की जांच चल रही है। हालांकि किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।


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इस्तीफे के बाद सरकारी लैपटॉप ले जाने का आरोप

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, CID की केस डायरी में पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते के इस्तीफे के बाद की गतिविधियों का भी उल्लेख है। रिपोर्ट में आरोप है कि पद छोड़ने के दौरान वह सरकारी लैपटॉप और गोपनीय पेन ड्राइव अपने साथ ले गए थे।

किसी संवैधानिक संस्था और विशेष रूप से भर्ती परीक्षा से जुड़े पदाधिकारी के पास मौजूद सरकारी डिजिटल उपकरणों में महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं परीक्षा संबंधी जानकारी हो सकती है। ऐसे में पद छोड़ने के बाद सरकारी उपकरण अपने पास रखना जांच का महत्वपूर्ण विषय बन जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, बाद में जब लैपटॉप को मरम्मत के लिए भेजा गया और उसकी फॉरेंसिक जांच हुई, तब कथित तौर पर यह सामने आया कि सिस्टम से केवल सामान्य तरीके से डेटा हटाया नहीं गया था, बल्कि फाइलों को करप्ट करने और हार्ड डिस्क को नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी की गई थी।

यही बिंदु जांच एजेंसी के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि डिजिटल साक्ष्य किसी भी भर्ती परीक्षा में हुई कथित अनियमितता की कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


केवल डेटा डिलीट नहीं, हार्ड डिस्क से छेड़छाड़ की बात

रिपोर्ट में बताया गया है कि लैपटॉप की जांच के दौरान जांचकर्ताओं को ऐसे संकेत मिले जिनसे कथित तौर पर यह पता चला कि उसमें मौजूद डिजिटल सामग्री को सामान्य तरीके से हटाने के बजाय उसे नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया था।

यदि किसी कंप्यूटर या लैपटॉप में मौजूद फाइलों को केवल डिलीट किया जाता है, तो कई परिस्थितियों में डिजिटल फॉरेंसिक तकनीक के माध्यम से उन्हें दोबारा प्राप्त करने की संभावना रहती है। लेकिन किसी हार्ड डिस्क या स्टोरेज डिवाइस को भौतिक या तकनीकी रूप से नुकसान पहुंचाने का प्रयास जांच को प्रभावित कर सकता है।

इसी वजह से केस डायरी में दर्ज इस कथित गतिविधि को जांच की दृष्टि से गंभीर माना जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, CID की जांच में यह भी सामने आया कि फाइलों को करप्ट करने और हार्ड डिस्क को खुरचने तक का प्रयास किया गया था। जांच एजेंसी इस पूरे घटनाक्रम को किस तरह देख रही है और इसका भर्ती परीक्षा से जुड़े अन्य घटनाक्रमों से क्या संबंध है, यह आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में स्पष्ट हो सकता है।


JPSC भर्ती परीक्षा की जांच में पहले से कई सवाल

JPSC भर्ती परीक्षा से जुड़े मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई पहले से जारी है। हाल के दिनों में जांच के दौरान परीक्षा एजेंसी और अन्य संबंधित संस्थानों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच किए जाने की खबर सामने आई है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, JSSC से जुड़े पेपर लीक मामले में भी CID ने परीक्षा एजेंसी और संबंधित कंपनियों के कार्यालयों में दस्तावेजों की जांच की तथा कॉल डिटेल समेत अन्य सूचनाओं का विश्लेषण किया है।

वहीं JPSC से संबंधित मामले में जांच का केंद्र परीक्षा प्रक्रिया, एजेंसी चयन, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और कथित अनियमितताओं से जुड़े पहलुओं पर रहा है।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री तक किसी अनधिकृत व्यक्ति की पहुंच हुई या डिजिटल रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की गई, तो उसका उद्देश्य क्या था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।


सीआईडी की जांच में डिजिटल साक्ष्यों की अहम भूमिका

आज के समय में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की अधिकांश प्रशासनिक प्रक्रिया डिजिटल माध्यमों से जुड़ी होती है। परीक्षा एजेंसी का चयन, अभ्यर्थियों का डेटा, प्रश्नपत्र से संबंधित रिकॉर्ड, ई-मेल, कार्यालयी पत्राचार, डिजिटल फाइलें और अन्य सूचनाएं कंप्यूटर सिस्टम में सुरक्षित रहती हैं।

ऐसे में यदि किसी सिस्टम में डेटा डिलीट, फाइल करप्ट या स्टोरेज डिवाइस से छेड़छाड़ की जाती है, तो डिजिटल फॉरेंसिक जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

JPSC मामले में भी लैपटॉप और पेन ड्राइव से संबंधित कथित घटनाक्रम इसी वजह से जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

जांच एजेंसी के लिए यह पता लगाना आवश्यक होगा कि संबंधित डिवाइस में पहले कौन-सा डेटा मौजूद था, उसे कब और किस तरीके से बदला या हटाया गया और क्या उस डेटा का संबंध भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया से था।

हालांकि इन सवालों का अंतिम उत्तर जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही सामने आएगा।


रेट कार्ड और पदों के लिए कथित रकम का भी जिक्र

अखबार की रिपोर्ट में CID की केस डायरी के हवाले से भर्ती प्रक्रिया में कथित रेट कार्ड का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें कुछ पदों के लिए कथित रूप से अलग-अलग रकम का जिक्र किया गया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि प्री-टेस्ट के लिए करीब 5 लाख रुपये और फाइनल सेलेक्शन के लिए 25 लाख रुपये तक की कथित रकम की बात सामने आई है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केस डायरी के अनुसार कथित तौर पर अभय तिवारी नामक आरोपी के बारे में आरोप है कि वह भोले-भाले अभ्यर्थियों को अपनी जाल में फंसाता था।

इन आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि अभी बाकी है। इसलिए इन्हें जांच एजेंसी के केस डायरी में दर्ज आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।


अभ्यर्थियों से कथित तौर पर मांगे जाते थे दस्तावेज

रिपोर्ट के अनुसार, कथित रेट कार्ड से जुड़ी गतिविधियों में अभ्यर्थियों से उनके मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र, ब्लैंक चेक, सादे स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर और अन्य कागजात लिए जाने की बात भी केस डायरी में बताई गई है।

अगर जांच में ये आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह भर्ती परीक्षा के नाम पर अभ्यर्थियों को आर्थिक और मानसिक रूप से शोषित करने की गंभीर स्थिति होगी।

सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे वसूलता है या परीक्षा प्रक्रिया में अनुचित तरीके से हस्तक्षेप करता है, तो इससे केवल कुछ अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित नहीं होता, बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा होता है।


सीक्रेट सेल और रिजल्ट में कथित बदलाव का आरोप

रिपोर्ट में JPSC के कथित सीक्रेट सेल से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। केस डायरी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि कथित तौर पर रिजल्ट में बदलाव किए जाने और ओएमआर शीट से संबंधित गड़बड़ी के आरोपों की जांच की जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों के परिणाम में कथित तौर पर बदलाव किए जाने की बात सामने आई है। साथ ही यह भी आरोप है कि परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड तक पहुंच और उत्तर पुस्तिकाओं से संबंधित प्रक्रिया का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया गया।

यह आरोप बेहद गंभीर हैं क्योंकि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की निष्पक्षता का सबसे महत्वपूर्ण आधार यही है कि परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं और परिणामों में किसी प्रकार की अनधिकृत छेड़छाड़ न हो।

यदि किसी परीक्षा में उत्तर पुस्तिका या परिणाम से छेड़छाड़ प्रमाणित होती है तो इससे परीक्षा में शामिल सभी अभ्यर्थियों के अधिकार और पूरी चयन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।


प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट की सुरक्षा पर भी सवाल

केस डायरी में कथित तौर पर परीक्षा से जुड़े प्रश्नपत्रों और ओएमआर शीट की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर जानकारी होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, परीक्षा के बाद मूल उत्तर पुस्तिकाओं को आयोग से सुरक्षित तरीके से ले जाने और उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने की प्रक्रिया से जुड़े सवाल भी जांच का हिस्सा हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका सबसे संवेदनशील दस्तावेजों में होते हैं। इनमें किसी भी तरह की अनधिकृत पहुंच या बदलाव पूरी परीक्षा की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।

इसलिए जांच एजेंसी द्वारा यह पता लगाने की कोशिश की जा रही होगी कि परीक्षा प्रक्रिया के किस चरण में कथित गड़बड़ी हुई और किन स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ी।


फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर और असिस्टेंट कंजरवेटर परीक्षा का भी संदर्भ

रिपोर्ट में फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO) और असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (ACF) जैसी भर्ती परीक्षाओं से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया गया है।

मीडिया रिपोर्टों में JPSC से संबंधित मामले में परीक्षा के प्रश्नपत्र और स्ट्रॉन्गरूम की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। एक रिपोर्ट में BJP ने इसी घटनाक्रम को लेकर “पेपर लूट” का आरोप लगाया और कहा कि स्ट्रॉन्गरूम में रखे प्रश्नपत्रों के साथ छेड़छाड़ की गई। यह राजनीतिक आरोप है और इसे अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

इस तरह JPSC भर्ती प्रक्रिया को लेकर सामने आ रही अलग-अलग जानकारियां जांच की गंभीरता को दर्शाती हैं।


अदालत के आदेश में भी हुआ संशोधन

इस पूरे मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम अदालत के आदेश से जुड़ा है। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, अभय तिवारी के पिता को JPSC की परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थी के रूप में बताए जाने संबंधी तथ्य को अदालत के आदेश में संशोधित किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, रांची स्थित CID थाना कांड संख्या 16/2026 से संबंधित 5 सितंबर 2026 के पूर्व आदेश को अदालत ने संशोधित करते हुए नया आदेश जारी किया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि पूर्व आदेश में जिस तथ्य का उल्लेख हुआ था, उसमें संशोधन आवश्यक था। रिपोर्ट के अनुसार, सुखदेव तिवारी का नाम केवल अभियुक्त अभय कुमार तिवारी के पिता के रूप में पहचान दर्ज करने के संदर्भ में आया था, न कि इस अर्थ में कि वह संबंधित JPSC परीक्षा के अभ्यर्थी थे।

यह संशोधन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी आपराधिक मामले में आरोपी और उसके परिजनों के संबंध में दर्ज तथ्य का सही होना जरूरी है। अदालत द्वारा रिकॉर्ड में आवश्यक सुधार किया जाना इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।


अभय तिवारी मामले में जांच का दायरा बढ़ा

JPSC-JSSC से जुड़े कथित परीक्षा घोटाले की जांच में अभय तिवारी का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। हालिया मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अभय तिवारी की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और मामले में जांच एजेंसी द्वारा कई गंभीर आरोपों की जांच की जा रही है।

एक अन्य रिपोर्ट में JSSC परीक्षा से जुड़े मामले में ऐसे अभ्यर्थी की गिरफ्तारी का भी उल्लेख किया गया है जिसने कथित तौर पर पैसे देकर परीक्षा पास की थी। रिपोर्ट में नेपाल ले जाकर अभ्यर्थियों को प्रश्न और उत्तर याद करवाने जैसे गंभीर आरोपों का भी जिक्र है।

हालांकि JPSC और JSSC से जुड़े अलग-अलग मामलों को एक ही मामला मानना उचित नहीं होगा। दोनों मामलों की जांच और आरोप अलग हो सकते हैं। लेकिन इन घटनाक्रमों ने झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर व्यापक बहस जरूर पैदा की है।


पूर्व JPSC अध्यक्ष की जमानत याचिका भी खारिज

पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते से जुड़े मामले में अदालत द्वारा जमानत नहीं दिए जाने की खबर भी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उन पर परीक्षा एजेंसी को काम दिलाने में अनियमितता और अन्य कथित गड़बड़ियों की जांच चल रही है।

एक अन्य रिपोर्ट में पूर्व JPSC अध्यक्ष और एक पूर्व कंप्यूटर ऑपरेटर की जमानत याचिका खारिज किए जाने की जानकारी दी गई है।

जमानत का खारिज होना किसी आरोपी को दोषी साबित नहीं करता। अंतिम रूप से दोष या निर्दोषता का निर्णय अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।


भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल

सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में शामिल होने वाले लाखों युवाओं के लिए परीक्षा की निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा होती है। उम्मीदवार महीनों और कई बार वर्षों तक तैयारी करते हैं। ऐसे में अगर प्रश्नपत्र, उत्तर पुस्तिका, रिजल्ट या चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितता सामने आती है तो इसका सीधा असर उम्मीदवारों के विश्वास पर पड़ता है।

JPSC से जुड़े मामले में सामने आ रहे आरोप इसी वजह से गंभीर हैं।

सरकारी भर्ती प्रक्रिया में तीन प्रमुख चीजें बेहद महत्वपूर्ण होती हैं—

पहला, परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र और अन्य गोपनीय सामग्री की सुरक्षा।
दूसरा, परीक्षा के दौरान पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था।
तीसरा, परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिका, मूल्यांकन और रिजल्ट की सुरक्षित एवं निष्पक्ष प्रक्रिया।

इनमें से किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की आशंका पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।


डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत

JPSC मामले में सरकारी लैपटॉप, पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क और डिजिटल फाइलों से संबंधित आरोप सामने आने के बाद सरकारी संस्थानों में डिजिटल डेटा सुरक्षा पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

आज सरकारी संस्थाओं का अधिकांश काम कंप्यूटर और डिजिटल सिस्टम पर निर्भर है। ऐसे में अधिकारियों के पद छोड़ने या स्थानांतरण के समय उनके पास मौजूद सरकारी उपकरणों, पासवर्ड, डेटा और डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित तरीके से वापस लेने की स्पष्ट प्रक्रिया जरूरी है।

सरकारी लैपटॉप या स्टोरेज डिवाइस में यदि संवेदनशील जानकारी मौजूद है तो उसे सुरक्षित रखना संस्थागत जिम्मेदारी का हिस्सा है।

JPSC जैसे संवैधानिक संस्थान में परीक्षा से जुड़ा डिजिटल डेटा और भी अधिक संवेदनशील होता है।


जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी पूरी तस्वीर

फिलहाल केस डायरी और मीडिया रिपोर्टों में सामने आए आरोपों के आधार पर मामले में कई सवाल उठ रहे हैं। लेकिन इन आरोपों की अंतिम सच्चाई जांच पूरी होने, साक्ष्य अदालत के सामने पेश होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।

CID की जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित अनियमितताओं के पीछे कौन लोग थे, किस स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ और भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश किस प्रकार की गई।

डिजिटल साक्ष्य, दस्तावेज, कॉल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों के बयान जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


युवाओं के भविष्य से जुड़ा है मामला

JPSC की परीक्षाओं में झारखंड के हजारों युवा सरकारी सेवा में जाने के लिए शामिल होते हैं। इसलिए भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि राज्य के युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है।

यदि परीक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की गड़बड़ी प्रमाणित होती है, तो इससे योग्य और मेहनती उम्मीदवारों को नुकसान हो सकता है।

इसी कारण भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, मजबूत डिजिटल सुरक्षा, प्रश्नपत्र की सुरक्षित व्यवस्था, स्वतंत्र निगरानी और स्पष्ट जवाबदेही बेहद जरूरी है।


निष्कर्ष

JPSC भर्ती परीक्षा से जुड़ी जांच में सरकारी लैपटॉप, गोपनीय पेन ड्राइव और हार्ड डिस्क से कथित छेड़छाड़ का मामला सामने आने से जांच का दायरा और गंभीर नजर आ रहा है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में CID केस डायरी के हवाले से पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते के इस्तीफे के बाद सरकारी लैपटॉप और पेन ड्राइव अपने साथ ले जाने तथा बाद में डिजिटल डेटा से कथित छेड़छाड़ के आरोपों का उल्लेख किया गया है।

इसके साथ ही केस डायरी में कथित रेट कार्ड, अभ्यर्थियों से पैसे लेने, परीक्षा प्रक्रिया और रिजल्ट से संबंधित कथित अनियमितताओं की भी चर्चा है। हालांकि इन सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

मामले में अदालत द्वारा एक पूर्व आदेश में तथ्यात्मक सुधार किया जाना भी सामने आया है। वहीं पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते की जमानत याचिका खारिज होने की हालिया खबर से भी मामले की कानूनी गंभीरता सामने आती है।

अब जांच की दिशा इस बात पर रहेगी कि डिजिटल साक्ष्यों, दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध प्रमाणों से कथित अनियमितताओं की पूरी कड़ी किस तरह सामने आती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यही होगी कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो और यदि किसी स्तर पर दोष साबित होता है तो कानूनी प्रक्रिया के तहत जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही योग्य और मेहनती अभ्यर्थियों के हितों तथा सरकारी भर्ती व्यवस्था में जनता के भरोसे को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।

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