प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वित्तीय अपराधों के खिलाफ अपनी कड़ी कार्रवाई जारी रखते हुए झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। यह पूरी कार्रवाई झारखंड के सराइकेला-खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र में स्थित कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े लगभग 290 करोड़ रुपये के बड़े बैंक ऋण घोटाले के मामले में की गई है। शुक्रवार को हुई इस कार्रवाई ने वित्तीय जगत में हड़कंप मचा दिया है।
कोहिनूर ग्रुप के CA और करीबियों पर गाज
खबरों के मुताबिक, जांच एजेंसी की टीम ने पश्चिम बंगाल के हावड़ा, हुगली (उत्तरपाड़ा), लेक टाउन और आसनसोल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एक साथ छापेमारी की। इन स्थानों पर कोहिनूर ग्रुप के चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) और उनके प्रमुख सहयोगियों के कार्यालयों और आवासों को निशाना बनाया गया। ईडी को लंबे समय से इस घोटाले में इन व्यक्तियों की संलिप्तता का संदेह था, और यह कार्रवाई पुख्ता सबूत मिलने के बाद की गई।
कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त
इस विस्तृत छापेमारी के दौरान, ईडी की टीम ने कई महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज, हार्ड डिस्क और विभिन्न डिजिटल उपकरणों को जब्त किया है। इन जब्त सामग्रियों के प्रारंभिक विश्लेषण से घोटाले के तौर-तरीकों और इसमें शामिल लोगों के बीच के संबंधों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना है। ईडी के सूत्रों के अनुसार, इन डिजिटल उपकरणों में घोटाले से जुड़ी कई ऐसी गुप्त जानकारियां मौजूद हो सकती हैं जो इस मामले को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
क्या है पूरा घोटाला मामला?
घोटाले का यह पूरा मामला सराइकेला के कूड़ीडीह गांव में स्थित कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा हुआ है। जमशेदपुर से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित इस कंपनी ने बैंकों से करीब 290 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। कंपनी ने यह ऋण 66 मेगावाट क्षमता का एक थर्मल पावर प्लांट लगाने के नाम पर लिया था।
कंपनी प्रबंधन पर आरोप है कि उन्होंने बैंकों से प्राप्त इस विशाल राशि का उपयोग पावर प्लांट लगाने में नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने इस पैसे को एक सुयोजित साजिश के तहत पूरी राशि को ग्रुप की 100 से अधिक शेल (फर्जी) कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया। इस तरह, ऋण के रूप में मिले पैसे का अवैध रूप से डायवर्सन किया गया और उसे व्यक्तिगत लाभ के लिए उपयोग किया गया।
शेल कंपनियों के जरिए बेनामी संपत्तियों का खुलासा
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि प्रमोटरों ने इन शेल कंपनियों के जरिए मिले पैसे से अपनी निजी संपत्तियां खरीदीं और व्यक्तिगत शौक पूरे किए। ईडी की जांच में यह बात सामने आई है कि प्रमोटर विजय बोथरा, प्रशांत बोथरा और उनके परिजनों ने धोखाधड़ी के जरिए मिले पैसों से कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में कई कीमती संपत्तियां खरीदीं।
दिलचस्प बात यह है कि इन बेनामी संपत्तियों से प्रमोटरों को हर महीने करीब 26 लाख रुपये का किराया भी मिल रहा था। यह पूरी प्रक्रिया अवैध थी और यह दिखाता है कि कैसे सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया गया और उसे निजी लाभ में बदला गया।
ईडी की अगली कार्रवाई
जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों के विश्लेषण के बाद, ईडी जल्द ही इस मामले में शामिल मुख्य अभियुक्तों और उनके सहयोगियों को पूछताछ के लिए समन कर सकती है। इस घोटाले में शामिल शेल कंपनियों और बेनामी संपत्तियों की पहचान की प्रक्रिया तेज कर दी गई है और उम्मीद है कि जल्द ही और भी बड़े खुलासे होंगे।
ईडी की इस बड़ी कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि वह वित्तीय अपराधों और बैंकों को चूना लगाने वालों के खिलाफ कोई कसर नहीं छोड़ेगी। यह कार्रवाई झारखंड और देश के अन्य हिस्सों में सक्रिय वित्तीय अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है।
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