नई दिल्ली: जिंदगी जिंदाबाद
दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुक्रवार को हजारों सामान्य वर्ग के प्रदर्शनकारियों ने UGC के इक्विटी नियमों के खिलाफ और जाति आधारित आरक्षण में सुधार की मांग की। 45 दिनों तक चले कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के बाद शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर शक्ति प्रदर्शन का गवाह बना।
राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर शुक्रवार को ‘रिजर्वेशन रिफॉर्म आंदोलन’ के बैनर तले विशाल विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। NEET अभ्यर्थी हर्ष दुबे के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों ने आरक्षण व्यवस्था में सुधार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के इक्विटी नियमों के खिलाफ अपनी मांगें रखीं। इस प्रदर्शन में राजस्थान की जनरल सेना, चाणक्य सेना, करणी सेना और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अजीत भारती सहित कई प्रमुख लोग और संगठन शामिल हुए।

जंतर-मंतर पर उमड़े जनरल कोटे के हजारों लोग, ये है मुख्य मांग
- आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग: प्रदर्शनकारियों ने जातिगत आरक्षण के स्थान पर आर्थिक स्थिति को आधार बनाने की मांग की, ताकि इसका लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके।
- SC/ST एक्ट और UGC नियमों का विरोध: प्रदर्शन में UGC के (अब स्थगित) इक्विटी नियमों के खिलाफ नारेबाजी की गई, साथ ही SC/ST एक्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई।
- धार्मिक पाठ और नारेबाजी: प्रदर्शन स्थल पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और ‘सियावर रामचंद्र की जय’ के नारे लगाए।
- सुरक्षा के कड़े इंतजाम: स्थिति को देखते हुए दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और ITBP के जवानों को तैनात किया गया था। जंतर-मंतर के आसपास व्यापक बैरिकेडिंग की गई थी।
प्रदर्शन स्थल और अनुमति को लेकर गतिरोध
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और आयोजकों के बीच अनुमति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं रही। आयोजक हर्ष दुबे का आरोप था कि बाहर से आ रहे लोगों को रोका गया और पुलिस प्रशासन ने काफी बातचीत के बाद प्रदर्शन को रामलीला मैदान स्थानांतरित करने को कहा। हालांकि, आयोजक इस बात पर अड़े रहे कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन नहीं सौंप दिया जाता, तब तक वे डटे रहेंगे।
ऑनलाइन अभियान से सड़कों तक पहुंचा आंदोलन
यह प्रदर्शन पिछले कई सप्ताह से चलाए जा रहे ऑनलाइन अभियान का ही परिणाम है, जो अब नागपुर, लखनऊ, जयपुर और विशाखापत्तनम जैसे शहरों से होता हुआ सड़कों पर उतर चुका है। इससे पूर्व, राजपूत करणी सेना ने UGC नियमों के विरोध में राजस्थान में 800 किलोमीटर की यात्रा निकालकर जयपुर में प्रदर्शन किया था।
राजनीतिक व सामाजिक प्रतिक्रिया:
इस मुद्दे पर लेखक आनंद रंगनाथन ने सोशल मीडिया के जरिए प्रदर्शन की अनुमति को लेकर सवाल उठाए। वहीं, इन्फोसिस के पूर्व CFO मोहनदास पई ने भी केंद्रीय गृह मंत्री को टैग करते हुए कानून का पालन करने वाले नागरिकों के साथ निष्पक्ष व्यवहार करने की बात कही।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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