कोलकाता के ऐतिहासिक और क्षमता से ठसाठस भरे युवा भारती क्रीड़ांगन (सॉल्ट लेक स्टेडियम) में Durand Cup 2026 का फाइनल मुकाबला महज एक मैच नहीं, बल्कि भारतीय फुटबॉल के दो सबसे बड़े दिग्गजों के बीच वर्चस्व की महाजंग बन गया। मैदान पर उतरते ही East Bengal की लाल-पीली सेना ने आक्रामकता की ऐसी लहर उठाई, जिसने Mohun Bagan के रक्षात्मक ढांचे की धज्जियां उड़ा दीं। पूरे 90 मिनट के इस रोमांचक और हाई-वोल्टेज डर्बी मुकाबले में East Bengal ने Mohun Bagan को 4-1 के भारी अंतर से रौंदते हुए न केवल इतिहास रचा, बल्कि 22 वर्षों के लंबे और सब्र भरे इंतजार के बाद प्रतिष्ठित Durand Cup की ट्रॉफी अपने नाम कर ली।
मैच का पहला हाफ पूरी तरह से East Bengal के नाम रहा। किक-ऑफ की सीटी बजते ही लाल-पीले खिलाड़ियों ने आक्रामक रणनीति अपनाई और Mohun Bagan की रक्षापंक्ति पर लगातार हमले बोलना शुरू कर दिया। मुकाबला शुरू होने के महज 22 मिनट के भीतर ही स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शक सन्न रह गए, जब East Bengal ने 3-0 की विशाल बढ़त बना ली। इस शुरुआती तूफानी प्रदर्शन के केंद्र में रहे युवा सनसनी एडमंड और बिपिन सिंह। एडमंड ने East Bengal के रक्षकों को छकाते हुए दो दर्शनीय गोल दागे, जबकि बिपिन सिंह ने सटीक फिनिशिंग के साथ गेंद को जाली में पहुंचाकर विपक्षी टीम को गहरे संकट में डाल दिया।
तीन गोल से पिछड़ने के बाद Mohun Bagan की टीम दबाव में आ गई। हालांकि, फॉरवर्ड मनवीर सिंह ने अपने व्यक्तिगत कौशल और जुझारूपन का परिचय देते हुए एक बेहतरीन गोल दागा और Mohun Bagan के समर्थकों में वापसी की एक छोटी सी उम्मीद जगाई। लेकिन East Bengal की आक्रामकता यहीं नहीं रुकी। पहले हाफ का समय समाप्त होने से ठीक पहले, एडमंड ने एक बार फिर Mohun Bagan के बिखरे हुए डिफेंस में सेंध लगाई और गेंद को गोलपोस्ट का रास्ता दिखाकर अपनी शानदार हैट्रिक पूरी कर ली। हाफ-टाइम तक स्कोर 4-1 हो चुका था, जिसने मैच का रुख काफी हद तक तय कर दिया था।
तकनीकी और रणनीतिक दृष्टिकोण से East Bengal के मुख्य कोच एंटोनियो लोपेज हाबास का यह मास्टरस्ट्रोक था। हाबास, जो कभी खुद Mohun Bagan के कोच रह चुके हैं, ने अपनी पुरानी टीम की हर कमजोरी का बखूबी फायदा उठाया। मध्यपंक्ति (मिडफील्ड) में मोहम्मद राशिद का प्रदर्शन अविश्वसनीय रहा। राशिद ने पूरे मैच के दौरान खेल की गति को अपने नियंत्रण में रखा और Mohun Bagan के मुख्य प्लेमेकर्स को खुलकर खेलने का कोई मौका नहीं दिया। दूसरी ओर, Mohun Bagan की रक्षापंक्ति में तालमेल और संचार की भारी कमी साफ दिखाई दे रही थी, जिसका East Bengal के फॉरवर्ड्स ने पूरा लाभ उठाया।
यह जीत East Bengal के लिए इसलिए भी विशेष और मीठी रही, क्योंकि इसी टूर्नामेंट के ग्रुप चरण में उन्हें Mohun Bagan के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी थी। फाइनल के इस बड़े मंच पर अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी को इतनी करारी शिकस्त देकर टीम ने उस हार का हिसाब चुकता कर लिया।
जैसे ही रेफरी ने अंतिम सीटी बजाई, पूरा सॉल्ट लेक स्टेडियम लाल और पीले रंगों के जश्न में डूब गया। खिलाड़ी मैदान पर खुशी से झूम उठे और स्टैंड्स में मौजूद लाखों प्रशंसक भावुक होकर 22 साल बाद मिली इस ऐतिहासिक ट्रॉफी का स्वागत करने लगे। जहां East Bengal के लिए यह रात उत्सव और गर्व का प्रतीक बनी, वहीं 4-1 की इस भारी हार ने Mohun Bagan के रक्षात्मक ढाँचे और टीम संयोजन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए।https://zindagijindabaad.com/53-lakh-devotees-babadham-final-monday/https://ranchiuniversity.ac.in/