

रांची। जिंदगी जिंदाबाद डेस्क
झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह से सक्रिय हो चुका है और पूरे राज्य में फैल गया है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में 2 और 3 जुलाई को एक कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) बनने की प्रबल संभावना है। इसके प्रभाव से राज्य के कई हिस्सों में मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।5 और 6 जुलाई को भारी बारिश की चेतावनीमौसम विभाग ने आगामी 5 और 6 जुलाई को राज्य के आठ जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।5 जुलाई: रांची, खूंटी, लोहरदगा, गुमला, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और सिमडेगा में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। अन्य इलाकों में बादल छाए रहेंगे और तेज हवाओं के साथ वज्रपात की आशंका है।6 जुलाई: रांची समेत राज्य के कई अन्य इलाकों में भी भारी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।अगले दो-तीन दिनों का मौसम2 जुलाई: लातेहार, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। बाकी जिलों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश की संभावना है।3 और 4 जुलाई: इन दो दिनों में भी राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है।तापमान का हालपिछले 24 घंटों में रांची के तापमान में 3.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि मेदिनीनगर में तापमान 1.2 डिग्री सेल्सियस गिरा है। हालांकि, मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों में तापमान में फिर से 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।बारिश के आंकड़े: रामगढ़ में सबसे ज्यादा बारिशहाल ही में हुई बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो रामगढ़ में सबसे अधिक 60.5 मिमी बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा:बहरागोड़ा: 84.8 मिमी (पिछले 24 घंटे में)कोडरमा: 20 मिमीजमशेदपुर: 4 मिमीचाईबासा व लोहरदगा: 2-2 मिमीगुमला व सरायकेला: 1-1 मिमीमानसून की स्थिति: रांची में 13% कम बारिशराज्य में मानसून भले ही पहुंच गया हो, लेकिन अभी भी उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई है। 1 जून से 1 जुलाई तक झारखंड में कुल 99.8 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य वर्षापात (197.8 मिमी) से लगभग 50 प्रतिशत कम है।अगर जिलों की बात करें तो:रांची में सामान्य से 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।दुमका में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है।राज्य में सबसे खराब स्थिति गढ़वा और साहिबगंज जिलों की है, जहाँ सूखे जैसे हालात बने हुए हैं।