रांची: जिदंगी जिंदाबाद डेस्क

झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य के सहायक अध्यापकों (पारा शिक्षकों) के पक्ष में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि नियमित नियुक्ति प्राप्त करने से पहले संविदा या पारा शिक्षक के रूप में दी गई सेवा अवधि को भी पेंशन निर्धारण के लिए योग्य माना जाएगा।

जस्टिस दीपक रोशन की एकलपीठ ने पांच सेवानिवृत्त इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ताओं को आठ सप्ताह के भीतर पेंशन और अन्य सभी सेवानिवृत्ति लाभों का भुगतान सुनिश्चित करे। इसके साथ ही, सेवानिवृत्ति की तारीख से लेकर वास्तविक भुगतान होने तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।

“पेंशन कोई खैरात नहीं, कर्मचारी का कानूनी अधिकार है”
सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए बेहद कड़ी टिप्पणियां कीं:

दोहरा मापदंड गलत: अदालत ने कहा कि सरकार एक आदर्श नियोक्ता है, इसलिए वह अपने ही कर्मियों के साथ दोहरा रवैया नहीं अपना सकती।

आरक्षण ही आधार: जब सरकार ने खुद नियमित शिक्षक बहाली में 50 फीसदी पद पारा शिक्षकों के लिए आरक्षित रखे थे, तो उनके अनुभव और पुरानी सेवा को पेंशन के समय कैसे नकारा जा सकता है?

अधिकारों की सुरक्षा: कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि पेंशन कोई अनुग्रह, दया या दान नहीं है, बल्कि यह कर्मचारी का एक वैधानिक और कानूनी अधिकार है।

क्या था पूरा विवाद?
यह मामला माणिक चंद्र मंडल, उत्पल कुमार मुखर्जी, अब्दुल हमीद अंसारी, शिव नारायण गुप्ता और मोतीलाल टुडू सहित पांच शिक्षकों से जुड़ा था। ये सभी शुरुआत में पारा शिक्षक के रूप में सेवा दे रहे थे और बाद में सरकारी प्रक्रिया के तहत नियमित शिक्षक बने थे। नियमित सेवा में आने के बाद इन्होंने 9 वर्ष से अधिक समय तक काम किया और रिटायर हो गए। लेकिन नियमों का हवाला देकर इन्हें पेंशन से वंचित किया जा रहा था क्योंकि नियमित कर्मचारी के रूप में इनकी सेवा 10 वर्ष से कुछ कम थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि संविदा के रूप में दी गई उनकी 8 से 12 साल की निरंतर सेवा को भी इसमें जोड़ा जाना चाहिए, जिसे अदालत ने सही पाया।

5,000 से अधिक शिक्षकों को मिलेगा सीधा लाभ
हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक रुख से झारखंड के करीब 5,000 से अधिक उन शिक्षकों को सीधा फायदा पहुंचने की उम्मीद है, जो पारा शिक्षक से नियमित हुए हैं या प्रक्रिया में हैं। वर्तमान में चल रही सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा और भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले हजारों शिक्षकों के लिए अब पेंशन पाने का कानूनी रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

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