झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान की स्थायी वित्त एवं लेखा समिति की 14वीं बैठक मंगलवार को संपन्न हुई। बैठक में रिम्स के निदेशक सह सदस्य सचिव डॉ. राजकुमार, अपर निदेशक प्रशासन श्री कृष्ण प्रसाद बाघमरे, विभाग के संयुक्त सचिव श्री छवि रंजन, एसटी-एससी सदस्य श्री जगन्नाथ प्रसाद, चिकित्सक डॉ. अशोक प्रसाद सहित विभागीय अधिकारी और रिम्स के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

बैठक में कुल 15 एजेंडों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें वित्तीय पारदर्शिता, अधोसंरचना विकास, चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार और प्रशासनिक सुधार प्रमुख मुद्दे रहे। समिति ने रिम्स द्वारा पूर्व में वैसी निविदा जिन पर एसएफसी की स्वीकृति अनिवार्य है वैसी बिना स्वीकृत योजनाओं से संबंधी निविदाओं की उच्च स्तरीय जांच कराने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इसके लिए एक विशेष जांच कमेटी गठित की जाएगी, जो पूरे मामले की समीक्षा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
समिति ने चिकित्सा उपकरणों की खरीद पर जब कॉस्ट डिटेल्स मांगा, तो रिम्स प्रबंधन द्वारा इसे उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई गई। इस पर अपर मुख्य सचिव ने कड़ी आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि कास्ट डिटेल के बिना किसी भी प्रकार की खरीद प्रक्रिया शुरू करना नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब समिति को पूरी जानकारी नहीं दी गई, तो किस आधार पर बिना स्वीकृति के 1 करोड़ से उपर की योजनाओं का टेंडर जारी किया गया और खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि नियमानुसार समिति की स्वीकृति प्राप्त कर ही टेंडर जारी किया जाएगा और इस पूरे मामले को अगली गवर्निंग बॉडी की बैठक में रखा जाएगा।
बैठक में रिम्स के समग्र विकास को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए। संस्थान में बनने वाले सभी नए हॉस्टलों को 12 मंजिला बनाने का निर्णय लिया गया, जिससे अधिक छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों को आवासीय सुविधा मिल सके। अंडर ग्रेजुएट हॉस्टल के नवीनीकरण का निर्णय लिया गया, जबकि स्नातकोत्तर हॉस्टल को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर संचालित करने की संभावनाओं पर विचार करने का निर्देश दिया गया।
समिति ने रिम्स को अगले तीन महीनों के भीतर पूर्णतः कैशलेस और पेपरलेस प्रणाली अपनाने का लक्ष्य दिया, ताकि मरीजों को पारदर्शी और सुगम सेवा मिल सके। इसके लिए एक प्रभावी आईटी सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए गए।
चिकित्सा सेवाओं के आधुनिकीकरण के तहत रोबोटिक सर्जरी को भी पीपीपी मोड पर शुरू करने की संभावनाओं का अध्ययन करने को कहा गया। वहीं, जेनेटिक बीमारियों के इलाज को बढ़ावा देने के लिए ‘मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाश् और आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजनान्तर्गत वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के लिए जसास और रिम्स के बीच समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया।
इसके अलावा, रिम्स में बनने वाली सभी नई इमारतों के लिए रिवाइज्ड डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया। कर्मचारियों, डॉक्टरों और शिक्षकों की विभिन्न मांगों से संबंधित प्रस्ताव विभाग को भेजने का निर्देश दिया गया, जिस पर विभागीय स्तर पर जांच और निर्णय लिया जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से रिम्स में रिटायर्ड एसपी या लेफ्टिनेंट करनल स्तर के सिक्योरिटी ऑफिसर तथा रिटायर्ड इंस्पेक्टर या जेसीओ स्तर के असिस्टेंट सिक्योरिटी ऑफिसर की नियुक्ति का भी निर्णय लिया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed