जमशेदपुर में एक बड़ी और सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहाँ आदित्यपुर स्थित ‘111 सेव लाइफ अस्पताल’ के संचालक और दबंग डॉक्टर कहे जाने वाले डॉ. ओपी आनंद पर उनके ही सगे बड़े भाई द्वारा गोली चलाने का मामला सामने आया है। यह पूरी घटना आरआईटी थाना क्षेत्र में सोमवार की रात को घटी।
गोलीबारी की घटना और वर्तमान स्थिति
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, डॉ. ओपी आनंद पर उनके सगे बड़े भाई एवं गायत्री शिक्षा निकेतन के संचालक सत्य प्रकाश सुधांशु ने दो गोलियां चलाईं। इनमें से एक गोली डॉक्टर आनंद की पीठ को खरोंचते हुए निकल गई। घटना के तुरंत बाद घायल अवस्था में डॉ. आनंद को तत्काल टाटा मुख्य अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों ने राहत की सांस लेते हुए उन्हें खतरे से बाहर बताया है।
आरआईटी थाना प्रभारी रविकांत पाराशर ने बताया कि इस घटना की सूचना डॉ. आनंद की पत्नी ने फोन करके पुलिस को दी थी, जिसके बाद पुलिस तुरंत हरकत में आई और मामले की छानबीन शुरू कर दी। हालांकि शुरुआती तौर पर घटना के पीछे संपत्ति के विवाद की बात सामने आ रही है, लेकिन पुलिस गोली चलाने की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए हर पहलू पर गंभीरता से जांच कर रही है। घटना के बाद से आरोपी सत्य प्रकाश सुधांशु का मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिल रहा है और वे फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के साथ-साथ प्रयुक्त हथियार और पूरे घटनाक्रम की बारीकी से पड़ताल कर रही है। जानकारी के अनुसार, डॉ. आनंद के बड़े भाई और उनकी पत्नी के नाम दो लाइसेंसी हथियार हैं, जिनमें से एक का प्रयोग डॉक्टर को गोली मारने में किया गया है।
डॉ. ओपी आनंद और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता का पुराना विवाद
घायल डॉ. ओपी आनंद वही चिकित्सक हैं जिनका विवाद पूर्व में झारखंड के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के साथ काफी चर्चा में रहा था। यह पूरा विवाद मुख्य रूप से कोरोना महामारी (2021) के दौरान अस्पताल प्रबंधन, ऑक्सीजन सप्लाई और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर शुरू हुआ था।
इस विवाद के मुख्य बिंदु
अस्पताल को सील करने और एफआईआर की कार्रवाई: कोरोना काल के दौरान स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने ऑक्सीजन की कमी, अनियमितताओं और दिशा-निर्देशों के उल्लंघन को लेकर डॉ. ओ.पी. आनंद के अस्पताल (111 सेव लाइफ हॉस्पिटल) पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे सील कर दिया था।
डॉ. ओपी आनंद के गंभीर आरोप: अस्पताल पर कार्रवाई के बाद डॉ. आनंद ने एक वीडियो जारी कर तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और विभागीय अधिकारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए थे। डॉ. आनंद ने दावा किया था कि उनसे और उनके अस्पताल से बड़ी रकम की मांग की गई थी।
गिरफ्तारी और कानूनी लड़ाई: डॉ. आनंद द्वारा बन्ना गुप्ता के खिलाफ कई सार्वजनिक और आपत्तिजनक बयान दिए गए। मामला इतना बढ़ा कि बन्ना गुप्ता के समर्थकों और प्रशासन की शिकायत पर डॉ. आनंद के खिलाफ महामारी अधिनियम और अन्य धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट से राहत: जेल जाने के बाद डॉ. आनंद की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ी गई और बाद में सुप्रीम कोर्ट/हाईकोर्ट से मामला खारिज होने के बाद वे जेल से बाहर आए तथा उनके अस्पताल को फिर से खोलने की अनुमति मिली।
राजनीतिक दुश्मनी: यह व्यक्तिगत और प्रशासनिक टकराव बाद में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में बदल गया। इसी रंजिश और मतभेदों के कारण डॉ. ओपी आनंद ने जमशेदपुर पश्चिम विधानसभा सीट से बन्ना गुप्ता के खिलाफ चुनाव लड़ने का भी फैसला किया था।
वर्तमान में पुलिस गोलीबारी के इस नए मामले की हर एंगल से जाँच कर रही है, जिससे इलाके में एक बार फिर सनसनी फैल गई है।
