BITMesra #IWWA #WaterManagement #AI #SmartWater #RanchiNews #JharkhandNews #WaterInnovation #IWWAConvention #ArtificialIntelligence #WaterTechnology #WastewaterManagement

रांची: जल संकट, बढ़ती आबादी, तेजी से फैलते शहरी क्षेत्र, जल स्रोतों पर बढ़ता दबाव और बदलते पर्यावरणीय हालात के बीच जल प्रबंधन को अधिक स्मार्ट, वैज्ञानिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में रांची एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बनने जा रहा है। बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT) मेसरा, रांची में जनवरी 2027 में इंडियन वाटर वर्क्स एसोसिएशन (IWWA) का 59वां वार्षिक अधिवेशन आयोजित किया जाएगा। यह अधिवेशन 22 से 24 जनवरी 2027 तक BIT मेसरा परिसर के बीपी बिरला ऑडिटोरियम में प्रस्तावित है। IWWA की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार इस बार अधिवेशन की थीम “Smart Water Solutions through Innovation and AI for a Sustainable Future” रखी गई है।

इस राष्ट्रीय आयोजन में जल आपूर्ति, जल संरक्षण, अपशिष्ट जल प्रबंधन, जल गुणवत्ता, स्मार्ट मीटरिंग, रिसाव की पहचान, डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जल क्षेत्र में नई तकनीकों के उपयोग जैसे विषयों पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे। आयोजन का उद्देश्य केवल तकनीकी प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल क्षेत्र से जुड़े वास्तविक समस्याओं के व्यावहारिक समाधान, शोध, नवाचार और उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देना भी होगा।

IWWA के आधिकारिक विवरण के अनुसार संगठन जल आपूर्ति, औद्योगिक एवं घरेलू उपयोग के पानी, अपशिष्ट जल के उपचार और निपटान से जुड़े विशेषज्ञों का पेशेवर संगठन है। संगठन की स्थापना 1968 में हुई थी और इसका मुख्यालय मुंबई में है।

Table of Contents

22 से 24 जनवरी तक होगा तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन

BIT मेसरा में आयोजित होने वाला यह अधिवेशन तीन दिनों का होगा। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार 22 जनवरी को उद्घाटन सत्र, प्रदर्शनी और विभिन्न विशेष सत्रों का आयोजन प्रस्तावित है। इसके बाद 23 और 24 जनवरी को तकनीकी सत्रों में जल एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान और शोध-पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।

कार्यक्रम की प्रस्तावित रूपरेखा के अनुसार दूसरे दिन तकनीकी सत्रों के साथ यूथ फोरम का आयोजन भी होगा। तीसरे दिन तकनीकी सत्रों के बाद समापन समारोह आयोजित किया जाएगा। इस तरह तीन दिनों तक जल क्षेत्र से जुड़े शोधकर्ताओं, इंजीनियरों, शिक्षाविदों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति से जुड़े लोगों को एक साझा मंच मिलेगा।

IWWA की आधिकारिक वेबसाइट ने BIT मेसरा कैंपस, रांची को 59वें वार्षिक अधिवेशन का आयोजन स्थल बताया है। अधिवेशन का मुख्य स्थल बीपी बिरला ऑडिटोरियम होगा। आयोजन की वेबसाइट के मुताबिक ऑडिटोरियम में करीब 2,500 लोगों के बैठने की क्षमता है।

एक हजार से अधिक विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना

अखबार में प्रकाशित जानकारी के अनुसार अधिवेशन में देश के अलग-अलग हिस्सों से एक हजार से अधिक प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों के शामिल होने की संभावना है। आयोजन से जुड़े विवरण में जल और अपशिष्ट जल क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और पेशेवरों की भागीदारी की बात कही गई है।

इस आयोजन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि जल प्रबंधन अब केवल पानी उपलब्ध कराने तक सीमित विषय नहीं रह गया है। शहरों में बढ़ती आबादी के साथ पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार, जल स्रोतों की निगरानी, पानी की गुणवत्ता, रिसाव से होने वाली बर्बादी, सीवेज का उपचार और पुन: उपयोग जैसी चुनौतियां लगातार सामने आ रही हैं।

ऐसे में तकनीक के इस्तेमाल से जल व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा जरूरी हो गई है। अधिवेशन में इन्हीं मुद्दों को तकनीकी और व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया जाएगा।

15 अक्टूबर तक शोध-पत्र और पोस्टर के लिए आमंत्रण

आयोजन समिति की ओर से जल और अपशिष्ट जल क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर तकनीकी शोध-पत्र और पोस्टर प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रण जारी किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार शोध-पत्र और पोस्टर के लिए 15 अक्टूबर 2026 तक आवेदन/प्रस्तुति भेजने की समयसीमा रखी गई है।

इसका उद्देश्य देशभर में जल क्षेत्र पर काम कर रहे शोधकर्ताओं, इंजीनियरों और विशेषज्ञों को अपने अध्ययन, प्रयोग और व्यावहारिक अनुभव साझा करने का अवसर देना है। आयोजन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार तकनीकी सत्रों में ऐसे शोध और केस स्टडी को महत्व दिया जाएगा जो वास्तविक जल एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन की समस्याओं से जुड़े हों और जिनसे व्यावहारिक समाधान सामने आ सकें।

इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मंच तैयार होगा। वे जल क्षेत्र में किए गए अपने शोध को विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं और तकनीकी समुदाय से प्रतिक्रिया प्राप्त कर सकते हैं।

अधिवेशन की मुख्य थीम होगी AI आधारित स्मार्ट जल व्यवस्था

इस बार IWWA अधिवेशन की केंद्रीय थीम “Smart Water Solutions through Innovation and AI for a Sustainable Future” है। इसका सीधा अर्थ है कि भविष्य की जल व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक की भूमिका को गंभीरता से समझा जाएगा।

आज AI का इस्तेमाल केवल कंप्यूटर, मोबाइल या सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य, कृषि, परिवहन, उद्योग और ऊर्जा के साथ-साथ जल क्षेत्र में भी डेटा आधारित तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है।

जल आपूर्ति व्यवस्था में बड़ी मात्रा में डेटा उपलब्ध होता है। उदाहरण के लिए किसी शहर में प्रतिदिन कितना पानी भेजा गया, कितना पानी उपभोक्ताओं तक पहुंचा, किन इलाकों में दबाव कम रहा, कहां पाइपलाइन में लीकेज हुआ, किस क्षेत्र में पानी की मांग अधिक है और किस समय खपत बढ़ती है—इन सभी जानकारियों का विश्लेषण किया जा सकता है।

AI और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकें इस डेटा का विश्लेषण करके संभावित समस्याओं की पहचान करने और निर्णय लेने में सहायता कर सकती हैं। इसी तरह सेंसर और IoT उपकरणों से पानी की व्यवस्था की रियल टाइम निगरानी भी संभव है।

स्मार्ट मीटरिंग और पानी की खपत पर भी होगी चर्चा

जल प्रबंधन में स्मार्ट मीटरिंग एक महत्वपूर्ण विषय है। पारंपरिक मीटर के मुकाबले स्मार्ट मीटर से पानी की खपत की जानकारी अधिक व्यवस्थित तरीके से रिकॉर्ड की जा सकती है।

यदि किसी इलाके में अचानक पानी की खपत असामान्य रूप से बढ़ जाती है, तो डेटा के आधार पर इसकी जांच की जा सकती है। इसी तरह किसी पाइपलाइन नेटवर्क में पानी की आपूर्ति और वास्तविक खपत के बीच बड़ा अंतर मिलने पर संभावित रिसाव या अन्य समस्या की पहचान की जा सकती है।

अधिवेशन में ऐसे तकनीकी समाधानों पर चर्चा का उद्देश्य यह समझना होगा कि आधुनिक तकनीक को जल आपूर्ति प्रणाली में किस तरह लागू किया जाए, ताकि पानी की बर्बादी कम हो और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके।

पाइपलाइन लीकेज की पहचान में AI और सेंसर की भूमिका

शहरी जल व्यवस्था में पाइपलाइन लीकेज एक बड़ी चुनौती है। कई बार पाइपलाइन जमीन के नीचे होती है और रिसाव दिखाई नहीं देता। जब तक समस्या सामने आती है, तब तक काफी मात्रा में पानी बर्बाद हो सकता है।

सेंसर, डिजिटल मॉनिटरिंग और डेटा एनालिटिक्स की मदद से पाइपलाइन में दबाव और प्रवाह में होने वाले बदलावों का अध्ययन किया जा सकता है। AI आधारित सिस्टम असामान्य पैटर्न की पहचान करके संभावित लीकेज वाले क्षेत्रों की ओर संकेत कर सकते हैं।

इस तरह तकनीक का इस्तेमाल केवल समस्या आने के बाद मरम्मत करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संभावित समस्या की शुरुआती पहचान में भी किया जा सकता है।

इसी तरह डिजिटल ट्विन जैसी तकनीक पर भी जल प्रबंधन के संदर्भ में चर्चा हो रही है। डिजिटल ट्विन किसी वास्तविक सिस्टम का डिजिटल मॉडल होता है। इसके माध्यम से जल आपूर्ति नेटवर्क में अलग-अलग परिस्थितियों का मॉडल तैयार कर यह समझने का प्रयास किया जा सकता है कि किसी बदलाव का पूरे सिस्टम पर क्या असर पड़ेगा।

शहरी और ग्रामीण जल आपूर्ति पर अलग-अलग चुनौतियां

भारत में जल प्रबंधन की चुनौती शहरों और गांवों में अलग-अलग प्रकार की है। बड़े शहरों में पाइपलाइन नेटवर्क बहुत विस्तृत होता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगहों पर जल स्रोत, पाइपलाइन और उपचार सुविधाओं की उपलब्धता अलग-अलग होती है।

राष्ट्रीय अधिवेशन में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लिए तकनीकी समाधानों पर चर्चा प्रस्तावित है। आयोजन से जुड़े विवरण में ग्रामीण और शहरी जल आपूर्ति प्रणालियों के लिए स्मार्ट तकनीक, रियल टाइम मॉनिटरिंग और निर्णय सहायता प्रणाली जैसे विषय शामिल हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में दूरदराज के इलाकों तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। वहां पानी की गुणवत्ता की निगरानी, स्रोतों का संरक्षण, उपचार तकनीक और स्थानीय स्तर पर जल व्यवस्था के संचालन जैसे विषयों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

पानी की गुणवत्ता और प्रदूषकों की निगरानी पर भी फोकस

जल की उपलब्धता के साथ उसकी गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। किसी क्षेत्र में पर्याप्त पानी होने के बावजूद यदि उसमें हानिकारक तत्व मौजूद हैं तो वह स्वास्थ्य के लिए समस्या बन सकता है।

अधिवेशन में पानी में मौजूद विभिन्न प्रदूषकों और उनके उपचार से संबंधित तकनीकों पर भी चर्चा होगी। आयोजन की तकनीकी जानकारी में आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे प्रदूषकों, जल उपचार, झिल्ली आधारित तकनीक और अन्य उन्नत उपचार प्रणालियों से जुड़े विषयों को शामिल किया गया है।

विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों में जहां भूजल में प्राकृतिक रूप से कुछ तत्वों की मात्रा अधिक हो सकती है, वहां जल उपचार की उपयुक्त तकनीक महत्वपूर्ण हो जाती है। वैज्ञानिक शोध और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर समाधान विकसित करना इस क्षेत्र की प्रमुख जरूरतों में शामिल है।

अपशिष्ट जल को संसाधन में बदलने पर जोर

जल प्रबंधन की चर्चा केवल पीने के पानी तक सीमित नहीं है। शहरों और उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट जल का उपचार और उसका दोबारा उपयोग भी जल सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

यदि उपचारित अपशिष्ट जल का उपयोग निर्धारित मानकों के अनुरूप गैर-पेय कार्यों में किया जाए तो ताजे पानी के स्रोतों पर दबाव कम किया जा सकता है। उद्योग, निर्माण, बागवानी और कुछ अन्य क्षेत्रों में उपचारित पानी के पुन: उपयोग की संभावनाओं पर लगातार काम हो रहा है।

IWWA अधिवेशन में अपशिष्ट जल उपचार और पुन: उपयोग से जुड़े विषयों को भी तकनीकी सत्रों में स्थान दिया गया है। आयोजन के वैज्ञानिक विषयों में RO, UF, NF, MBR, MBBR, SBR, advanced oxidation, ozonation, UV और hybrid treatment systems जैसी तकनीकों से जुड़े क्षेत्र शामिल हैं।

इन तकनीकों का उद्देश्य अलग-अलग प्रकार के पानी को उसकी गुणवत्ता और उपयोग के अनुसार उपचारित करना है।

स्मार्ट जल प्रबंधन में IoT का बढ़ता महत्व

Internet of Things यानी IoT भी स्मार्ट जल प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। IoT के माध्यम से सेंसर और उपकरण इंटरनेट या नेटवर्क के जरिए डेटा साझा कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए जल टंकी का स्तर, पाइपलाइन का दबाव, पानी का प्रवाह और कुछ गुणवत्ता मानकों की जानकारी सेंसर से प्राप्त की जा सकती है। इस डेटा को एक केंद्रीय सिस्टम पर देखा जा सकता है।

यदि किसी स्थान पर पानी का दबाव अचानक कम होता है या प्रवाह में असामान्य परिवर्तन आता है तो सिस्टम संबंधित अधिकारियों को संकेत दे सकता है। इससे निगरानी व्यवस्था अधिक व्यवस्थित हो सकती है।

राष्ट्रीय अधिवेशन में IoT आधारित जल प्रबंधन, स्मार्ट मीटरिंग और रियल टाइम निर्णय सहायता प्रणाली जैसे विषयों पर विशेषज्ञों के विचार सामने आने की उम्मीद है।

जल संरक्षण के साथ जल सुरक्षा पर भी चर्चा

जल संरक्षण का अर्थ केवल पानी बचाना नहीं है। सुरक्षित और विश्वसनीय जल आपूर्ति भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।

किसी शहर में जल स्रोत उपलब्ध होने के बावजूद यदि पाइपलाइन नेटवर्क पुराना है, रिसाव अधिक है या पानी की गुणवत्ता की निगरानी पर्याप्त नहीं है तो पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

इसलिए भविष्य की जल व्यवस्था में स्रोत से लेकर उपभोक्ता तक पूरे सिस्टम की निगरानी आवश्यक मानी जा रही है। AI, IoT, सेंसर, डिजिटल मॉडल और डेटा एनालिटिक्स इस पूरी श्रृंखला को समझने और बेहतर बनाने में उपयोगी हो सकते हैं।

BIT मेसरा में होने वाला अधिवेशन इन्हीं तकनीकी संभावनाओं को जल क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों के साथ जोड़ने का अवसर देगा।

जलवायु परिवर्तन का जल संसाधनों पर असर भी महत्वपूर्ण विषय

जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन का असर भी चर्चा का महत्वपूर्ण विषय है। वर्षा के पैटर्न में बदलाव, अत्यधिक बारिश, लंबे सूखे की स्थिति, तापमान में वृद्धि और भूजल पर दबाव जैसी परिस्थितियां जल प्रबंधन को जटिल बना सकती हैं।

किसी क्षेत्र में कम समय में बहुत अधिक बारिश होने से बाढ़ की स्थिति बन सकती है, जबकि दूसरी अवधि में पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का संरक्षण, भूजल रिचार्ज और जल उपयोग की बेहतर योजना महत्वपूर्ण हो जाती है।

तकनीक इन सभी क्षेत्रों में डेटा उपलब्ध कराने और भविष्य की जरूरतों का आकलन करने में मदद कर सकती है।

नगर निकायों के लिए भी उपयोगी हो सकता है अधिवेशन

शहरों में जल आपूर्ति और सीवेज व्यवस्था का बड़ा हिस्सा नगर निकायों और संबंधित एजेंसियों के जिम्मे होता है। बढ़ती आबादी के साथ इन संस्थाओं पर दबाव भी बढ़ता है।

एक ओर लोगों को नियमित जल आपूर्ति करनी होती है, वहीं दूसरी ओर पाइपलाइन की मरम्मत, रिसाव, पंपिंग, जल उपचार, बिलिंग और सीवेज प्रबंधन जैसी जिम्मेदारियां भी निभानी होती हैं।

स्मार्ट जल प्रबंधन तकनीक इन प्रक्रियाओं को डेटा आधारित बनाने की दिशा में काम कर सकती है। इससे अधिकारियों को किसी इलाके की समस्या को समझने, प्राथमिकता तय करने और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में सहायता मिल सकती है।

IWWA अधिवेशन में ऐसे तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर विशेषज्ञ अनुभव साझा कर सकते हैं।

जल और अपशिष्ट प्रबंधन के साथ ठोस कचरा भी चर्चा में

आयोजन के तकनीकी विषयों में केवल पानी ही नहीं, बल्कि नगरपालिका ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े विषय भी शामिल हैं।

शहरों में ठोस कचरे और तरल अपशिष्ट का सही प्रबंधन सीधे तौर पर जल स्रोतों की सुरक्षा से जुड़ा है। यदि कचरा और अनुपचारित सीवेज जल स्रोतों में पहुंचता है तो नदियों, तालाबों और भूजल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

इसलिए जल प्रबंधन को व्यापक पर्यावरणीय प्रबंधन से अलग करके नहीं देखा जा सकता। इसी कारण अधिवेशन में जल, अपशिष्ट जल और ठोस कचरे के एकीकृत प्रबंधन पर भी चर्चा की संभावना है।

शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए बनेगा बड़ा मंच

राष्ट्रीय अधिवेशन का एक महत्वपूर्ण पहलू युवाओं और शोधार्थियों की भागीदारी भी है। तकनीकी सत्रों और यूथ फोरम के माध्यम से छात्रों को विशेषज्ञों के साथ संवाद करने का अवसर मिल सकता है।

जल क्षेत्र अब सिविल इंजीनियरिंग या पर्यावरण इंजीनियरिंग तक सीमित नहीं है। इसमें कंप्यूटर साइंस, AI, डेटा साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, केमिकल इंजीनियरिंग और पब्लिक पॉलिसी जैसे कई क्षेत्रों की भूमिका है।

उदाहरण के लिए AI विशेषज्ञ जल आपूर्ति के डेटा का विश्लेषण कर सकते हैं, इलेक्ट्रॉनिक्स विशेषज्ञ सेंसर विकसित कर सकते हैं, सिविल इंजीनियर पाइपलाइन नेटवर्क का डिजाइन और संचालन समझ सकते हैं तथा पर्यावरण विशेषज्ञ जल गुणवत्ता और उपचार की समस्याओं पर काम कर सकते हैं।

इस प्रकार जल प्रबंधन एक बहु-विषयक क्षेत्र बन चुका है।

प्रदर्शनी में आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन

अधिवेशन के साथ एक तकनीकी प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। आयोजन से जुड़े विवरण में जल और अपशिष्ट जल क्षेत्र से संबंधित तकनीक, उपकरण और समाधान प्रदर्शित करने के लिए प्रदर्शनी स्टॉल की व्यवस्था का उल्लेख है।

प्रदर्शनी में कंपनियां और संस्थान जल उपचार, स्मार्ट मीटरिंग, सेंसर, पंपिंग सिस्टम, पाइपलाइन तकनीक, जल गुणवत्ता निगरानी और अपशिष्ट जल उपचार से संबंधित समाधान प्रस्तुत कर सकते हैं।

इससे सम्मेलन में आने वाले विशेषज्ञों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं मिलेगी, बल्कि वे तकनीकों और उपकरणों को प्रत्यक्ष रूप से समझ भी सकेंगे।

BIT Mesra के लिए भी महत्वपूर्ण आयोजन

BIT मेसरा देश के पुराने तकनीकी संस्थानों में शामिल है। संस्थान की स्थापना 1955 में हुई थी और वर्तमान में यहां इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रबंधन और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में शिक्षा एवं शोध गतिविधियां संचालित होती हैं। संस्थान अपने आधिकारिक परिचय में शोध, नवाचार, तकनीकी सेवाओं और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर जोर देता है।

ऐसे संस्थान में जल प्रबंधन जैसे बहु-विषयक क्षेत्र का राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित होना अकादमिक और तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को देशभर से आने वाले विशेषज्ञों के साथ संवाद का अवसर मिल सकता है।

BIT मेसरा में पहले भी AI, मशीन लर्निंग और उभरती तकनीकों से जुड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। संस्थान की वर्तमान गतिविधियों में AI, डेटा साइंस और कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस से जुड़े सम्मेलन और कार्यशालाएं भी शामिल हैं।

IWWA का जल क्षेत्र में व्यापक नेटवर्क

Indian Water Works Association यानी IWWA की स्थापना 1968 में हुई थी। संगठन जल आपूर्ति और अपशिष्ट जल उपचार एवं निपटान से जुड़े पेशेवरों को एक मंच प्रदान करता है। IWWA की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार संगठन के देशभर में विभिन्न केंद्र हैं और हजारों सदस्य इससे जुड़े हैं।

इसका वार्षिक अधिवेशन देश में जल क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी मंच माना जाता है। प्रत्येक वर्ष अलग-अलग स्थानों पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में जल क्षेत्र की नई तकनीकों, शोध और व्यावहारिक अनुभवों पर चर्चा की जाती है।

2026 में IWWA का 58वां वार्षिक अधिवेशन छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित हुआ था। इसके बाद 59वें अधिवेशन के लिए रांची और BIT मेसरा को आयोजन स्थल बनाया गया है।

रांची को मिली राष्ट्रीय स्तर के आयोजन की मेजबानी

59वें IWWA अधिवेशन का रांची में आयोजन झारखंड के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर है। जल और अपशिष्ट जल प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों के एक साथ आने से राज्य में चल रहे और प्रस्तावित जल क्षेत्र के कार्यों पर भी तकनीकी चर्चा का अवसर मिल सकता है।

झारखंड में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जल प्रबंधन की अपनी चुनौतियां हैं। राज्य के कई हिस्सों में भूगोल, वन क्षेत्र, खनन गतिविधियां, औद्योगिक क्षेत्र और ग्रामीण बस्तियों की अलग-अलग परिस्थितियों के कारण जल प्रबंधन के लिए स्थानीय जरूरतों के अनुसार समाधान जरूरी होते हैं।

रांची में राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों की मौजूदगी से इन स्थानीय परिस्थितियों पर भी चर्चा का अवसर बन सकता है।

भविष्य की जल व्यवस्था कैसी होगी, इस पर मंथन

अधिवेशन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि इसमें भविष्य की जल व्यवस्था को लेकर चर्चा होगी। आज की जल व्यवस्था में जहां पारंपरिक इंजीनियरिंग की भूमिका महत्वपूर्ण है, वहीं आने वाले समय में डिजिटल तकनीक का महत्व और बढ़ सकता है।

स्मार्ट मीटर, सेंसर, IoT, AI, डिजिटल ट्विन, रियल टाइम डेटा, स्वचालित निगरानी और निर्णय सहायता प्रणाली जैसे उपकरण जल प्रबंधन को अधिक डेटा आधारित बनाने की दिशा में उपयोगी हो सकते हैं।

लेकिन केवल तकनीक उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं होगा। तकनीक का सही चयन, उसका रखरखाव, प्रशिक्षित मानव संसाधन, डेटा की सुरक्षा, लागत और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उसका इस्तेमाल भी जरूरी होगा।

इसीलिए अधिवेशन में शोध और तकनीक के साथ व्यावहारिक अनुभव और केस स्टडी पर भी जोर दिया जा रहा है। आयोजन की जानकारी में वास्तविक क्षेत्रीय समस्याओं और व्यावहारिक समाधान से जुड़े शोध-पत्रों को महत्व देने की बात कही गई है।

तकनीक के साथ मानव संसाधन और प्रशिक्षण भी जरूरी

जल क्षेत्र में नई तकनीक लागू करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत होगी। यदि किसी जल आपूर्ति संस्था में स्मार्ट सेंसर या AI आधारित निगरानी प्रणाली लगा दी जाए, लेकिन उसे संचालित और समझने वाला प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध न हो, तो तकनीक का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा।

इसलिए जल क्षेत्र में क्षमता निर्माण और कौशल विकास भी महत्वपूर्ण है। आयोजन के प्रस्तावित कार्यक्रम में प्रशिक्षण, कौशल विकास और जल उपयोगिता से जुड़े पेशेवरों के लिए ज्ञान-विनिमय की दिशा भी दिखाई देती है।

युवा इंजीनियरों और छात्रों के लिए यह समझना भी जरूरी होगा कि भविष्य की जल व्यवस्था में पारंपरिक इंजीनियरिंग के साथ डेटा और डिजिटल तकनीक का ज्ञान क्यों महत्वपूर्ण हो रहा है।

शोध-पत्रों से सामने आएंगे स्थानीय और राष्ट्रीय समाधान

15 अक्टूबर तक शोध-पत्र आमंत्रित किए जाने का उद्देश्य अलग-अलग संस्थानों और विशेषज्ञों से नए विचार प्राप्त करना है। देश के अलग-अलग हिस्सों में जल से जुड़ी समस्याएं अलग हो सकती हैं।

कहीं भूजल की समस्या है, कहीं बाढ़ और जल निकासी की, कहीं पानी की गुणवत्ता की और कहीं पाइपलाइन नेटवर्क में रिसाव की। इसलिए एक ही तकनीक हर क्षेत्र के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती।

शोध-पत्र और केस स्टडी के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में अपनाए गए समाधान सामने आ सकते हैं। इससे विशेषज्ञों के बीच अनुभव साझा करने और भविष्य के लिए बेहतर मॉडल विकसित करने में मदद मिल सकती है।

राष्ट्रीय अधिवेशन से उम्मीदें

BIT मेसरा में होने वाला 59वां IWWA वार्षिक अधिवेशन जल प्रबंधन को पारंपरिक व्यवस्था से आगे ले जाकर तकनीक, शोध और नवाचार के साथ जोड़ने का मंच बनेगा। 22 से 24 जनवरी 2027 तक प्रस्तावित इस आयोजन में जल आपूर्ति से लेकर अपशिष्ट जल उपचार, जल गुणवत्ता, स्मार्ट मीटरिंग, लीकेज नियंत्रण, AI, IoT, डिजिटल तकनीक और जल सुरक्षा तक कई विषयों पर चर्चा होगी।

विशेषज्ञों के बीच होने वाला यह मंथन आने वाले समय में जल क्षेत्र के लिए नई तकनीकों, शोध सहयोग और व्यावहारिक समाधानों की दिशा तय करने में उपयोगी हो सकता है। खासकर ऐसे समय में जब जल संसाधनों पर आबादी, शहरीकरण, औद्योगिक गतिविधियों और बदलते मौसम का दबाव बढ़ रहा है, स्मार्ट और टिकाऊ जल प्रबंधन की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

रांची में आयोजित होने वाला यह राष्ट्रीय कार्यक्रम झारखंड को देश के जल तकनीक और नवाचार के मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराएगा। BIT मेसरा के अकादमिक वातावरण, IWWA के विशेषज्ञ नेटवर्क और देशभर से आने वाले जल क्षेत्र के पेशेवरों की भागीदारी से यह आयोजन शोध, उद्योग और प्रशासन के बीच संवाद का अवसर प्रदान करेगा।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस अधिवेशन की चर्चा केवल “पानी बचाने” तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह सवाल भी सामने होगा कि भविष्य में पानी को कैसे मापा जाए, उसकी गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित की जाए, रिसाव को समय रहते कैसे पहचाना जाए, अपशिष्ट जल को दोबारा उपयोग योग्य कैसे बनाया जाए और AI जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से पूरी जल व्यवस्था को अधिक कुशल और टिकाऊ कैसे बनाया जाए।

IWWA की आधिकारिक जानकारी के अनुसार अधिवेशन की मुख्य थीम इसी दिशा को स्पष्ट करती है—नवाचार और AI के माध्यम से स्मार्ट जल समाधान तथा टिकाऊ भविष्य की ओर बढ़ना।

इस राष्ट्रीय आयोजन की तैयारियों के बीच 15 अक्टूबर 2026 तक शोध-पत्र और पोस्टर आमंत्रित किए जाने से देशभर के शोधकर्ताओं और जल विशेषज्ञों को अपने कार्य प्रस्तुत करने का अवसर मिल रहा है। जनवरी 2027 में जब विशेषज्ञ BIT मेसरा परिसर में जुटेंगे, तब जल प्रबंधन की मौजूदा चुनौतियों के साथ-साथ भविष्य की तकनीकी संभावनाओं पर भी विस्तार से विचार-विमर्श होगा।

यानी रांची में होने वाला यह अधिवेशन पानी की समस्या पर सिर्फ चर्चा का मंच नहीं, बल्कि जल प्रबंधन को AI, नवाचार और आधुनिक इंजीनियरिंग से जोड़कर भविष्य की जरूरतों के अनुरूप समाधान तलाशने का राष्ट्रीय मंच बनने जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *