डिब्बाबंद भोजन और खराब जीवनशैली :
नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली और खान-पान में आए बदलाव का असर अब लोगों की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है। व्यस्त दिनचर्या के कारण लोग घर के पौष्टिक भोजन की जगह डिब्बाबंद, पैकेज्ड और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करने लगे हैं। इसके साथ ही शारीरिक गतिविधि में कमी और बढ़ता मोटापा भी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन कारकों का संबंध आंतों के कैंसर यानी कोलोरेक्टल कैंसर के बढ़ते जोखिम से भी हो सकता है।
कोलोरेक्टल कैंसर बड़ी आंत और मलाशय को प्रभावित करता है। यह दुनिया में पाए जाने वाले प्रमुख कैंसर में शामिल है। इसके खतरे को बढ़ाने वाले कारकों में अस्वास्थ्यकर खान-पान, प्रसंस्कृत मांस का अधिक सेवन, कम शारीरिक गतिविधि, अधिक वजन, धूम्रपान और शराब का सेवन शामिल हैं। हालांकि, किसी एक खाद्य पदार्थ को कैंसर का सीधा कारण मानना सही नहीं है। कैंसर का जोखिम कई कारकों के संयुक्त प्रभाव से बढ़ सकता है।
डिब्बाबंद और प्रोसेस्ड फूड से क्यों बरतें सावधानी?
आजकल बाजार में कई तरह के इंस्टेंट और पैकेज्ड फूड आसानी से उपलब्ध हैं। चिप्स, पैकेज्ड स्नैक्स, इंस्टेंट नूडल्स और अन्य अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ सुविधाजनक जरूर हैं, लेकिन इनका अधिक सेवन संतुलित आहार को प्रभावित कर सकता है। कई प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में नमक, चीनी और वसा की मात्रा अधिक हो सकती है, जबकि प्राकृतिक फाइबर की मात्रा कम होती है।
विशेषज्ञ विशेष रूप से प्रसंस्कृत मांस के अधिक सेवन को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। इसके बजाय डाइट में फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और अन्य फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करना बेहतर विकल्प माना जाता है।
डिब्बाबंद भोजन और खराब जीवनशैली

पेट की परेशानी को नजरअंदाज न करें
पेट फूलना, गैस, कब्ज या अपच जैसी समस्याएं आम हैं और हर बार इनका संबंध कैंसर से नहीं होता। लेकिन अगर पाचन संबंधी परेशानी लंबे समय तक बनी रहती है या बार-बार होती है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
आंतों के कैंसर के संभावित लक्षणों में मल त्याग की आदत में बदलाव, लंबे समय तक कब्ज या दस्त, मल में खून, लगातार पेट दर्द या ऐंठन, बिना वजह वजन कम होना और आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया शामिल हो सकते हैं।
इनमें से कोई लक्षण दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को कैंसर ही है। कई अन्य बीमारियों में भी ऐसे लक्षण हो सकते हैं। फिर भी लगातार बने रहने वाले लक्षणों की जांच कराना जरूरी है।
शारीरिक गतिविधि की कमी भी चिंता का कारण
लंबे समय तक बैठे रहना और नियमित व्यायाम न करना भी स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। अधिक वजन और शारीरिक निष्क्रियता को कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम से जुड़े कारकों में शामिल किया जाता है।
रोजाना पैदल चलना, व्यायाम करना और लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके साथ पर्याप्त नींद और संतुलित आहार पर भी ध्यान देना चाहिए।
आंतों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए डिब्बाबंद और अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन का सेवन कम करना चाहिए। फल और हरी सब्जियों को रोजाना की डाइट में शामिल करें। दाल, साबुत अनाज और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें। नियमित शारीरिक गतिविधि करें और वजन को स्वस्थ सीमा में रखने की कोशिश करें।
इसके अलावा धूम्रपान से बचना और शराब का सेवन न करना या सीमित करना भी स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। यदि मल में खून, लगातार कब्ज या दस्त, पेट दर्द अथवा बिना वजह वजन कम होने जैसी समस्या दिखाई दे तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
जरूरी बात
सिर्फ डिब्बाबंद भोजन खाने से आंतों का कैंसर होना तय नहीं है। कैंसर का जोखिम उम्र, आनुवंशिकता, स्वास्थ्य स्थिति और जीवनशैली समेत कई कारकों पर निर्भर करता है। इसलिए घबराने के बजाय संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरूरी है। लगातार या असामान्य लक्षण होने पर समय पर चिकित्सकीय जांच कराना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
