[राम, रावण, धूम-राक्षस, रक्त-बीज, कील, कवच, अर्गला, आचमन आदि शब्दों के अर्थ]


दशहरा क्या है? विजयादशमी क्या है?? इन प्रश्नों पर विचार करें; उससे पूर्व एक प्रश्न समुपस्थित है कि जागरण क्या है और यह जागरण हो किसका? आइए! देखते हैं:–

माता का ‘जगराता’ (जागरण की रात्रि का अपभ्रंश) कर हम माता को जगाते हैं अथवा स्वयं को? ईश्वरीय शक्ति नहीं सोई है; अपितु हमारी शक्ति प्रसुप्त है और जागरण उसी का है। यह ध्यान रहे कि ‘माता’ हमारे अंदर अवस्थित आदि-शक्ति है। इस तरह, जो हम सबके अंदर है, उस शक्ति का अर्थात् आभ्यन्तरिक शक्ति का जागरण करना ही ‘नवरात्र’ का अभीष्ट है।

जब हम विजयादशमी मनाते हैं, तो यह स्मरण रहे कि यह दुर्गोत्सव हमारे अपने ही ‘दुर्ग’ पर विजय का उत्सव है। अगर जीत गए, तो स्वयं को ही साधकर ‘सिद्ध’ होने की जीत है। वस्तुत:, स्वयं का ही जागरण हो गया, तभी विजयादशमी की सार्थकता है। इसी तरह, जिस पराम्बा, चिन्मात्र, अप्रमेय, निराकार, मंगलरूपा, आराधिता, मोक्षदा, सर्वपूजिता, सर्व-सिद्धिदात्री, नारायणी शक्ति की हम आराधना करते हैं, वह हमारे अंदर ही अवस्थित है। इसे समझकर ही हम अपनी संकल्पित इच्छाशक्ति से उस शिवा (शिव या कल्याण को उपलब्ध कराने वाली) को अनुभव कर आगे बढ़ सकते हैं। अपनी वासनाओं पर विजय प्राप्त कर सकते हैं और कर्म के बंधन काट सकते हैं।

700 श्लोकों से युक्त ‘दुर्गा-सप्तशती’ के पाठ को हम बाह्य और आंतरिक दोनों चक्षुओं को खोल कर पढ़ें। साथ ही, इनसे जुड़ी पूजा-पाठ की पद्धतियों को वैज्ञानिकता की कसौटी पर कसने की कोशिश करें।

दुर्गा-पाठ में जब पढ़ते हैं कि माता ने धूम-राक्षस(इसे धूम्र-राक्षस न लिखें) का वध किया, तो समझें भी कि संस्कृत साहित्य में धूम या धुआँ ‘अज्ञान’ का प्रतीक है। इस तरह, ‘धूम-राक्षस’ का अर्थ हुआ– ‘अज्ञान रूपी राक्षस’। आदि-शक्ति ने इसका वध किया; अर्थात् शक्ति के जागरण से अज्ञान का अंत हुआ। ‘रक्त-बीज’ संस्कारों के वाहक हैं। लोक में अभी भी DNA अथवा जीनपूल के लिए ‘रक्त-बीज’ का प्रयोग मिलता है। लोग कहते हैं– “उसका ‘रक्तबीज’ ही ख़राब है; अर्थात् दूषित है।” ध्यान दें कि यहाँ बीज ‘वीर्य’ का पर्यायवाची है। अस्तु, इस निष्पत्ति से रक्त-बीज के वध का अर्थ है– कुसंस्कारों का अंत। आशय है कि शक्ति के जागरण से आत्मा इतनी पवित्र हो गई कि अब कुछ भी असाधु-तत्त्व संस्कारों द्वारा वहन नहीं होगा।

जब हम आचमण करें, तो ‘गंगे च यमुना चैव गोदावरी सरस्वती नर्मदा सिंधु कावेरी जलेस्मिन् सन्निधिं कुरु’ पढ़ते समय यह ध्यान रहे कि ये पवित्र नदियों के नाम हैं; जिनसे हमारी आस्था सन्नद्ध है और जो हमारे संस्कार में प्रवाहित हैं। हम इनका पवित्र जल अत्यंत अल्प मात्रा में पी रहे हैं। यह भी ध्यान रहे कि आचमन में ‘चम्’ धातु है जिसमें पीना और ‘ग़ायब होना’ दोनों शामिल है। क्या संयोग है कि ‘चम्मच’ और ‘आचमन’ दोनों का मूल एक ही है। तो, आचमन का जल इतनी मात्रा में(एक चम्मच भर) हो कि आँतों तक न पहुँच सके। यह हृदय के पास ज्ञान चक्र जाते-जाते तिरोहित हो जाए, समाविष्ट हो जाए। यह प्रतीकात्मक रूप से ज्ञान की तैयारी है।

जब अर्घ्य दें तो पता हो कि जो अर्घ(अर्पण) के योग्य है, वही अर्घ्य (अर्घ् +य) है अथवा जो बहुमूल्य है और देने के योग्य है, वही अर्घ्य है। ऐसे में, पूजा-पाठ की सामग्री के साथ अपने मन के आदर और श्रद्धाभाव को भी मिलाएँ, जिससे वह देने योग्य हो जाए।

जब हम संकल्प करें तो अपनी वासनाओं, बुराइयों पर विजय का संकल्प करें। जब हम शुद्धि करें (कर शुद्धि, पुष्प शुद्धि, मूर्ति एवं पूजाद्रव्य शुद्धि, मंत्र सिद्धि, शरीर-मन की शुद्धि) तो यह स्मरण रहे कि यह साधना है, कोई आडंबर नहीं। तदुपरांत दिव्या: कवचम्, अर्गलास्तोत्रम् , कीलकम्, वेदोक्तं रात्रिसूक्तम् से लेकर त्रयोदश अध्याय तक पाठ करते समय हमें शब्दों के महत्त्व पर विचार अवश्य कर लेना चाहिए। कील का अर्थ धुरी है। तो यहाँ दुर्गासप्तशती में ‘कील’ साधना की ‘धुरी’ है, ध्येय है। कवच अपने सद्विचारों एवं संयम का संकल्प है। जब कवच का पाठ करें तो समझें कि आध्यात्मिकता का कवच पहन रहे हैं; जिससे सांसारिक वासनाओं के अस्त्र-शस्त्र बेध न सकें। अर्गला का अर्थ किवाड़ की सिटकनी है। इस तरह चित्त और आभ्यन्तरिक भित्ति के पट पर यह अर्गला(सिटकनी) है। दूसरे शब्दों में, यह बाह्य-व्यवधानों को अंदर प्रवेश न देने का प्रण है। ध्यान करें कि इसी तरह हम जो भी पढ़ रहे हैं, उसका ऐसा ही कुछ शुभंकर अर्थ है।

अंत में क्षमा प्रार्थना, श्रीदुर्गा मानस पूजा, सिद्ध कुंजिकास्तोत्रम्, आरती आदि के पाठ के समय नित यह ध्यान रहे कि हमें अपनी ही आंतरिक शक्ति को जगाना है; अपने ही सत्त्व, रजस् और तमस् वाली त्रिगुणात्मक प्रकृति पर विजय पाना है, किसी बाहरी व्यक्ति या वस्तु पर नहीं।
अगर हम ऐसा कर सके, तो हमारी यह शक्ति नित्या (“जो नित्य हो, विनष्ट न हो), सत्या (सत्यरूपा) और शिवा (सर्वसिद्धिदात्री) हो जाएगी। हम पुलकित भाव से अपनी साधना को फलीभूत होते देख सकेंगे और हमारा सर्वविध अभ्युदय हो सकेगा।

शब्द-साधकों के लिए मंत्र है–
ते सम्मता जनपदेषु धनानि तेषां यशांसि न च सीदति धर्मवर्ग:।
धन्यास्त एव निभृतात्मजभृत्यदारा
येषां सदाभ्युदयदा भगवती प्रसन्ना।।

एक और विचारणीय बिंदु है कि विजयादशमी ‘दुर्गापूजा’ भी है और ‘दशहरा’ भी। स्मर्तव्य है कि दुर्गापूजा के रूप में यह आदि-शक्ति की महती आसुरी-शक्ति (महिषासुर) पर विजय का उल्लास है। इसी तरह, दशहरा के रूप में यह ‘जिसमें मन रमे’–उस राम की ‘गर्जना करने वाले’(रावण) पर विजय का उत्सव है।

यहाँ ठहरकर सोचें कि आपने इन नौ दिनों में क्या किया? क्या दशहरा का अर्थ 10 मनोरोगों या पापों पर विजय नहीं है? मनोवैज्ञानिक रूप से DSM-05 भी 10 रोगों की बात करता है तो वेद-उपनिषद् से लेकर मनु-स्मृति तक में 10 विकारों की चर्चा है। समीचीन है कि अंदर उठने वाले इन 10 विकारों के राव:(रु मूल), रौरव, शोर या ‘गर्जन’ को भाषा-वैज्ञानिक आधार ‘रावण’ समझा जाए। यह भी समझना चाहिए कि भाषा-वैज्ञानिक आधार पर तो रावण का अर्थ ही है– जो रौरव या शोर करे, जो लोगों का पीडन(पीड़न न लिखें) अथवा उत्पीडन करे। कह सकते हैं कि रावण वह है, जो लोगों को रुलाए।

हम जानते हैं कि रावण की हार हुई। यह हार तो हर रावण की होगी और हर युग में होगी; क्योंकि दूसरी ओर राम हैं। राम तो ‘रमन्ति रामः’ हैं। विचारणीय है कि एक तरफ़ ‘रौरव वाला रावण’ हो और दूसरी तरफ़ ‘रमण वाले राम’ तो अन्ततः जय राम की ही होगी।

राम-रावण संग्राम को बाह्य-शोर (रावण)और ‘भगवत्ता में रमने की इच्छा-शक्ति’ (राम) के द्वंद्व के रूप में भी देखा जा सकता है। वस्तुतः, यह केवल बुराई के प्रतीक के रूप में रावण के किसी स्थूल पुतले में आग लगाकर उत्सव मना लेने से अच्छा है। अंदर के रावण का वध हो, यह काम्य हो।

द्रष्टव्य है कि आज के परिप्रेक्ष्य में काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह, हिंसा, स्तेय (चोरी), अनृत(झूठ), व्यभिचार और अहं रूपी 10 विकारों को ही ‘दशानन’ मानना चाहिए; जिसे ज्ञान और साधना से समूल नष्ट करने को उद्यम हो। यदि इन पर विजय हो गई हो, तभी आपके लिए विजय की दशमी (विजयादशमी) सिद्ध हुई। ”राम की रावण पर’ या ‘दुर्गा की महिषासुर पर’ विजय की गाथा से आप प्रेरणा लें, यही श्रेयस्कर है। साधक के लिए तो ‘दस विकारों का हरण’ ही दशहरा या विजयदशमी है। राम, रावण, दुर्गा, महिषासुर, दशहरा, आदि शब्दों के मूलार्थ से तो यही व्यंजित हो रहा है।

आपके सबके अंदर अवस्थित राम को प्रणाम! शुभ विजयादशमी!

आपका ही,
कमल

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*मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में 15 जून 2026 को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय :-*==================*★ पथ प्रमण्डल, राँची अंतर्गत “नामकुम से डोरण्डा पथ (MDR-002) (कुल लंबाई-6. 70 कि०मी०) के चार लेन में चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य (भू-अर्जन एवं Utility Shifting सहित)” हेतु रू० 162,82,22,100/- (एक सौ बासठ करोड़ बयासी लाख बाईस हजार एक सौ) मात्र की द्वितीय पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।**★  श्री मुरारी भगत, सेवानिवृत अभियंता प्रमुख द्वारा सेवा काल में धारित उच्चतर प्रभारी पदों के विरूद्ध वेतन एवं अन्य लाभ देय करने की स्वीकृति दी गई।**★ Widening and Reconstruction to 4 Lane/4 Lane With Service Road including structures from Pokharia More at km 47.600 (Ex. Km 50.230) to Govindpur at km 62.949 (Ex. Km 65.325) of NH-419 में अपयोजित होने वाली भूमि के एवज में धनबाद जिला अंतर्गत पूर्वी टुण्डी अंचलांतर्गत मौजा-बलारडीह में कुल रकबा-5.84 एकड़ पुरानी परती गैर आबाद भूमि क्षतिपूरक वनरोपण हेतु वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखण्ड, राँची को स्थायी हस्तांतरण की स्वीकृति दी गई।**★ राज्य सरकार के विभिन्न कार्यालयों में कम्प्यूटर ऑपरेटर के सृजित पद का वेतनमान तथा संविदा राशि भुगतान की स्वीकृति दी गई।**★ झारखण्ड सरकार के अन्तर्गत सरकारी कर्मचारियों के लिए क्रेडिट सुविधायें, अग्रिम वेतन, बीमा उत्पाद एवं अन्य मूल्यवर्धित सेवाओं की स्वीकृति दी गई।**★  Jharkhand State Wide Area Network (JharNet 2.0) परियोजना की अवधि को वित्तीय वर्ष 2023-24 (दिनांक 01.01.2024) से वित्तीय वर्ष 2026-27 (दि. 31.07.2026 तक) के लिए विस्तारित करने तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 (दि. 31.07.2026 तक) में रु. 65.50 करोड़ व्यय की स्वीकृति दी गई।**★ गोड्डा समाहरणालय एवं सम्बद्ध कार्यालय में अनियमित रूप से नियुक्त/कार्यरत 05 (पाँच) कर्मियों की सेवा नियमितीकरण की स्वीकृति दी गई।**★  झारखण्ड राज्य में जंगली जानवरों द्वारा क्षति के फलस्वरूप मुआवजा भुगतान संबंधी आदेश में संशोधन की स्वीकृति दी गई।**★ बोकारो जिला अन्तर्गत चन्दनकियारी अंचल के पर्वतपुर कोल ब्लॉक के मौजा-केन्दुलिया, डिबरदा, बिराजडीह, नावाडीह, तेलगड़िया, देवग्राम, पर्बतपुर, तिलटाँड़, अमलाबाद, करमाटाँड, नयावन, सिलफोर, फतेहपुर के रकवा-2174.52 एकड़ (880 हे०) क्षेत्र पर धारित कोयला खनिज के खनन पट्टा की स्वीकृति दी गई।**★ केन्द्र प्रायोजित मिशन शक्ति (सम्बल) के तहत् संचालित महिला हेल्पलाईन 181 के निर्बाध कार्यशीलता हेतु तत्समय के सेवा प्रदाता एजेंसी MICA Educational Comp (P) Ltd. के अनुबंध को दिनांक-31.10.2025 तक के अवधि विस्तार दिनांक-21.12.2024 के भूतलक्षी प्रभाव से निर्गमण की घटनोत्तर स्वीकृति दी गई।**★ पलामू जिलान्तर्गत अमानत बराज योजना का यथाप्रस्तावित पद्धति से क्रियान्वयन हेतु रू० 947.2671 करोड़ (रूपये नौ सौ सैंतालिस करोड़ छब्बीस लाख इकहत्तर हजार) मात्र के तृतीय पुनरीक्षित प्राक्कलन की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।**★ भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का झारखण्ड में प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण के क्रियान्वयन पर प्रतिवेदन, वर्ष 2026 की प्रतिवेदन संख्या-2 (निष्पादन लेखा परीक्षा) को झारखण्ड विधान सभा के पटल पर आगामी सत्र में उपस्थापन की स्वीकृति दी गई।**★ भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का वर्ष 2024-25 के लिए राज्य वित्त पर प्रतिवेदन, झारखण्ड सरकार, वर्ष 2026 की प्रतिवेदन संख्या 03 (राज्य वित्त लेखा परीक्षा प्रतिवेदन ) को झारखण्ड विधान सभा के पटल पर आगामी सत्र में उपस्थापन की स्वीकृति दी गई।**★ झारखण्ड सेवा नियमितीकरण नियमावली, 2015 के तहत बोकारो समाहरणालय एवं सम्बद्ध कार्यालय में अनियमित रूप से नियुक्त / कार्यरत 02 (दो) कर्मियों की सेवा नियमितीकरण की स्वीकृति दी गई।**★  बाँध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के तहत झारखण्ड राज्य में वृहद् एवं मध्यम सिंचाई योजनाओं के अंतर्गत विनिर्दिष्ठ बाँधों तथा उनके जलाशयों की स्थिति अवधारित करने के प्रयोजन के निमित विशेषज्ञों का स्वतंत्र पैनल (Independent Panel of Experts) के गठन की स्वीकृति दी गई।**★ वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अन्तर्गत कार्यों के कार्यान्वयन हेतु हाईब्रिड मॉडल (विभागीय / पीस वेजेज एवं ठेकेदार पद्धति लागू किये जाने) को अंगीकृत करने की स्वीकृति दी गई।**★ झारखण्ड राज्य के महाधिवक्ता के पद पर श्री रोहितश्य रॉय, अधिवक्ता की नियुक्ति की घटनोत्तर स्वीकृति दी गई।**★ झारखण्ड राज्य के विभिन्न विभागों द्वारा क्षतिपूरक वनरोपण के निमित्त वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखण्ड को सरकारी भूमि / गैरमजरूआ Deemed Forest (जंगल-झाड़ी, जंगल-सखुआ, जंगल-साल, जंगल इत्यादि) किस्म की भूमि के निःशुल्क स्थायी हस्तांतरण एवं इससे संबंधित सभी मामलों के निस्तार की शक्ति उपायुक्त को प्रत्यायोजित करने की स्वीकृति दी गई।**★ बोकारो जिला के चन्दनकियारी अंचल अंतर्गत सीतानाला कोल ब्लॉक के मौजा-सीतानाला, डकबेरा, पत्थरगढ़ा, शिवबाबुडीह, बनसारा, भौंरा के Cadastral Survey के अनुसार कुल रकवा-792.568 एकड़ एवं Revisional Survey के अनुसार कुल रकवा-792.1434 एकड़ तथा Georeference Cadastral Map के अनुसार कुल रकबा 316.94 हे0 क्षेत्र पर धारित कोयला खनिज के खनन पट्टा की स्वीकृति दी गई।**★ पूर्वी सिंहभूम जिलान्तर्गत हरियान, बारूनमूति, चडरीबुरू एवं गुड़ाबांधा एमराल्ड खनिज ब्लॉक के रकबा 24.47 वर्ग कि०मी० को MMDR Act, 1957 (यथा संशोधित) की धारा 17 (A) (2) के आलोक में आरक्षित करने हेतु केन्द्र सरकार का अनुमोदन प्राप्त करने की स्वीकृति दी गई।**★ गोड्डा जिला के सुन्दरपहाड़ी अंचल अन्तर्गत जीतपुर कोल ब्लॉक के रकवा 497.10 हेक्टेयर क्षेत्र पर M/s Terri Mining Pvt. Ltd. को कोयला खनन पट्टा की स्वीकृति दी गई।**★  श्री अच्युत केशव, अपर महाधिवक्ता संख्या-V, झारखण्ड उच्च न्यायालय, राँची के पद को उत्कमित करते हुए वरीय अपर महाधिवक्ता, झारखण्ड उच्च न्यायालय, राँची के पद पर नियुक्त करने की स्वीकृति दी गई।**★ माननीय उच्च न्यायालय, झारखण्ड, राँची द्वारा Cont. Case (Civil) No.-997 of 2024 ज्योति लाल महतो बनाम राज्य सरकार एवं अन्य, Cont. Case (Civil) No.-999 of 2024 अरूण कुमार दास बनाम राज्य सरकार एवं अन्य, Cont. Case (Civil) No.-977 of 2024 मृणाल कुमार राय बनाम राज्य सरकार एवं अन्य, Cont. Case (Civil) No.-1056 of 2024 अजय कुमार बनाम राज्य सरकार एवं अन्य तथा Cont. Case (Civil) No.-1076 of 2025 चन्द्र प्रकाश सिंह बनाम राज्य सरकार वादों में पारित आदेश के अनुपालन में झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग का विज्ञापन सं०-18/2016 अंतर्गत अनुशंसित अभ्यर्थियों/वादियों को मोटरयान निरीक्षक के पद पर नियुक्ति प्रदान किये जाने की स्वीकृति दी गई।**###*==============

*छात्रवृत्ति वितरण को पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने के लिए एक प्रभावी मैकेनिज्म विकसित करें : चमरा लिंडा, मंत्री**छात्रवृत्ति भुगतान दिसंबर से पहले सुनिश्चित करने का निर्देश, योजनाओं की समीक्षा में मंत्री चमरा लिंडा सख्त*रांची।  माननीय मंत्री चमरा लिंडा द्वारा विभिन्न विभागीय योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में योजनाओं के क्रियान्वयन की गति और प्रभावशीलता को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।समीक्षा के दौरान मंत्री ने छात्रवृत्ति योजना पर विशेष जोर देते हुए निर्देश दिया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में प्री-मैट्रिक एवं पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति का भुगतान दिसंबर माह से पूर्व हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही छात्रवृत्ति वितरण को पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने के लिए एक प्रभावी मैकेनिज्म विकसित करने का भी निर्देश दिया गया।बैठक में आदिवासी कल्याण आयुक्त ने जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ई-कल्याण पोर्टल 15 मई से ही खोल दिया गया है, जिससे आवेदन प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है।साइकिल वितरण योजना की समीक्षा करते हुए मंत्री ने निर्देश दिया कि छात्र-छात्राओं के ड्रॉपआउट को कम करने के उद्देश्य से निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध कम से कम 50 प्रतिशत साइकिलों का वितरण अगले एक माह के भीतर सुनिश्चित किया जाए।वहीं मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना की समीक्षा के दौरान मंत्री ने इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए गहन अध्ययन कर नई रूपरेखा के साथ विकसित करने तथा नए सिरे से आवेदन आमंत्रित करने का निर्देश दिया, ताकि अधिक से अधिक बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा सके।बैठक में सचिव एवं विशेष सचिव, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, आदिवासी कल्याण आयुक्त, प्रबंध निदेशक (आदिवासी सहकारी विकास निगम), राज्य परियोजना निदेशक (JTDS) एवं परियोजना निदेशक (ITDA), रांची सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।