रांची: झारखंड की राजधानी रांची में कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि सामने आई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (IIAB), रांची के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए एक ऐसी मशीन विकसित की है, जिसकी मदद से रसायनों को नैनो रूप में तैयार किया जा सकेगा। खास बात यह है कि इस मशीन को किसान या किसान समूह अपने स्तर पर भी इस्तेमाल कर सकेंगे। मशीन को पेटेंट भी मिल चुका है।
5 साल की मेहनत के बाद तैयार हुई Nano Khad Machine:
IIAB रांची के वैज्ञानिक इस तकनीक पर वर्ष 2021 से काम कर रहे थे। करीब पांच साल की मेहनत के बाद तैयार हुई इस मशीन के लिए लगभग तीन साल पहले पेटेंट आवेदन किया गया था। अब इस तकनीक को पेटेंट मिलने के बाद इसके व्यावहारिक इस्तेमाल का रास्ता और मजबूत हुआ है।
इस मशीन को पायलट-स्केल वेट मिलिंग प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है। इसे IIAB के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बिल्लव सरकार के नेतृत्व में तैयार किया गया है। इस परियोजना में CRIJAF कोलकाता और NISA रांची ने भी सहयोग किया है।
क्या है Nano Khad Machine और कैसे करती है काम?
यह मशीन सामान्य रासायनिक पदार्थों और कृषि उपयोग में आने वाले पाउडर को छोटे यानी नैनो स्तर के कणों में बदलने की प्रक्रिया में मदद करती है। इसका उपयोग कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न उत्पादों को तैयार करने के लिए किया जा सकता है।
मशीन में 25 लीटर क्षमता का सिस्टम लगाया गया है। इसके अलावा इसमें स्टेनलेस स्टील बेस, 75 से 100 RPM की गति से काम करने वाला इम्पेलर Nano Khad Machine: अब किसान खुद बना सकेंगे नैनो खाद, रांची के IIAB ने बनाई सस्ती मशीन, मिला पेटेंटऔर सिरेमिक बॉल-बेयरिंग तंत्र शामिल है।
कम लागत और मजबूत डिजाइन को ध्यान में रखकर तैयार की गई इस तकनीक का उद्देश्य ऐसी प्रणाली उपलब्ध कराना है, जिसका इस्तेमाल किसान, किसान समूह और कृषि से जुड़े संस्थान कर सकें।

किसान समूह के लिए नैनो खाद मशीन से कृषि तकनीक को आसान बनाने की पहल।नैनो उर्वरक और नैनो कीटनाशक बनाने में मिलेगी मदद
IIAB द्वारा विकसित इस मशीन का इस्तेमाल केवल नैनो खाद तक सीमित नहीं रहेगा। इससे नैनो उर्वरक, नैनो खनिज और नैनो कीटनाशक जैसे कृषि उत्पाद तैयार करने में भी मदद मिल सकती है।
इस प्रणाली में रासायनिक और हरित दोनों तरीकों से पाउडर तैयार करने की संभावना है। इससे कृषि क्षेत्र में कम मात्रा में प्रभावी उत्पाद तैयार करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
किसानों को क्या होगा फायदा?
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह माना जा रहा है कि इससे किसानों को नैनो स्तर के कृषि उत्पाद तैयार करने की सुविधा स्थानीय स्तर पर मिल सकती है।
1. कम लागत में तकनीक उपलब्ध
मशीन की अनुमानित कीमत करीब 2 लाख रुपये बताई गई है। व्यक्तिगत किसान के लिए यह रकम बड़ी हो सकती है, लेकिन किसान समूह या FPO मिलकर ऐसी मशीन का इस्तेमाल कर सकते हैं।
2. कृषि उत्पादों की स्थानीय स्तर पर तैयारी
मशीन की मदद से आवश्यक कृषि उत्पादों के नैनो रूप को तैयार करने की तकनीकी क्षमता स्थानीय स्तर पर विकसित की जा सकती है। इससे किसानों और कृषि समूहों को नई तकनीक का लाभ मिल सकता है।
3. कम मात्रा में कृषि इनपुट के इस्तेमाल की संभावना
नैनो तकनीक का उद्देश्य पदार्थों को बहुत छोटे कणों के रूप में तैयार करना है। इससे कृषि उत्पादों की उपयोग दक्षता बढ़ाने और कम मात्रा में प्रभावी इस्तेमाल की संभावनाओं पर काम किया जा सकता है।
4. किसान समूहों के लिए उपयोगी
छोटे और सीमांत किसान अकेले मशीन खरीदने के बजाय किसान समूह, सहकारी संस्था या FPO के माध्यम से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे तकनीक की लागत कई किसानों के बीच साझा की जा सकती है।
Nano Khad Machine:नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में हो रहा इस्तेमाल
जानकारी के अनुसार इस मशीन का उपयोग नॉर्थ ईस्ट के कई राज्यों में किया जा रहा है। इससे पता चलता है कि तकनीक को केवल प्रयोगशाला तक सीमित रखने के बजाय कृषि क्षेत्र में इसके व्यावहारिक इस्तेमाल की दिशा में भी कदम बढ़ाए गए हैं।
अब पेटेंट मिलने के बाद इस मशीन को लेकर किसानों और कृषि संगठनों की रुचि और बढ़ सकती है।

किसान समूह के लिए नैनो खाद मशीन से कृषि तकनीक को आसान बनाने की पहल।करीब 2 लाख रुपये होगी मशीन की कीमत
वैज्ञानिकों के अनुसार इस नैनो खाद मशीन की कीमत लगभग 2 लाख रुपये के आसपास रहने की संभावना है। इच्छुक किसान या किसान समूह IIAB रांची से संपर्क कर इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
हालांकि, किसान इस मशीन से किसी भी नैनो उर्वरक या कीटनाशक का उत्पादन करने से पहले संबंधित कृषि और नियामकीय मानकों का पालन जरूर करें। मशीन उपलब्ध होना और किसी कृषि उत्पाद का व्यावसायिक रूप से उपयोग या बिक्री के लिए स्वीकृत होना अलग-अलग विषय हैं।
IIAB निदेशक ने उपलब्धि को बताया महत्वपूर्ण
IIAB रांची के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने इस उपलब्धि को संस्थान के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार यह उपलब्धि कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में कम लागत वाली अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने के संस्थान के प्रयासों को मजबूती देती है।
रांची से विकसित यह तकनीक आने वाले समय में किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। खासकर ऐसे समय में जब कृषि में कम लागत, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और आधुनिक तकनीक पर जोर दिया जा रहा है, नैनो तकनीक आधारित यह मशीन किसानों के लिए उपयोगी विकल्प बन सकती है।
क्या यह किसानों के लिए बड़ी क्रांति साबित होगी?
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मशीन हर किसान की जरूरत पूरी कर देगी। लेकिन लगभग 2 लाख रुपये की अनुमानित कीमत, 25 लीटर क्षमता और किसान समूहों के उपयोग की संभावना इसे ग्रामीण स्तर पर इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक के रूप में महत्वपूर्ण बनाती है।
यदि आने वाले समय में इस मशीन का उत्पादन बढ़ता है और इसे किसान समूहों तक आसानी से पहुंचाया जाता है, तो कृषि क्षेत्र में नैनो उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया को स्थानीय स्तर पर बढ़ावा मिल सकता है।
कुल मिलाकर, रांची के IIAB वैज्ञानिकों की यह पहल कृषि क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर आधुनिक तकनीक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पेटेंट मिलने के बाद अब इस तकनीक के व्यापक इस्तेमाल और किसानों तक इसकी पहुंच पर नजर रहेगी।
