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रांची, 14 अगस्त 2026। झारखंड
झारखंड में 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं और वसूली नेटवर्क की जांच के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है। दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सीबीआई की रिमांड में पूछताछ के दौरान बिचौलिए बुध्देश्वर भगत से कथित तौर पर परीक्षा में अभ्यर्थियों से रकम लेने और वसूली के नेटवर्क से जुड़े कई अहम सवाल पूछे गए। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 14वीं JPSC में करीब 100 करोड़ रुपये की वसूली का टारगेट तय होने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंट के स्तर पर प्रत्येक अभ्यर्थी से करीब 15 लाख रुपये कमीशन तय किए जाने की बात भी जांच के दौरान सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
14वीं JPSC में 100 करोड़ के टारगेट का दावा
14वीं JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर सीबीआई जांच लगातार आगे बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, पूछताछ में सामने आया कि परीक्षा से जुड़े कुछ लोगों के माध्यम से अभ्यर्थियों तक पहुंच बनाई गई और उनसे रकम लेने की तैयारी की गई थी।

बताया गया है कि परीक्षा में सफल कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से बड़ी रकम लेने की योजना बनाई गई थी। रिपोर्ट में एजेंट के स्तर पर 15 लाख रुपये कमीशन की बात कही गई है। इसी आधार पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों से रकम जुटाने की कथित योजना का उल्लेख किया गया है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे, रकम किस माध्यम से ली गई और आगे किसे पहुंचाई जानी थी।
14वीं JPSC में 11 अभ्यर्थियों से एडवांस लेने का आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, बुध्देश्वर भगत ने कथित तौर पर 11 अभ्यर्थियों से लगभग 1.10 करोड़ रुपये एडवांस लिए जाने की जानकारी दी। बताया गया कि अभ्यर्थियों को परीक्षा में सफलता दिलाने के भरोसे के आधार पर रकम ली गई थी।
जांच के दौरान इन अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों की भी जानकारी सामने आने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीआई ने इस मामले में दस्तावेजों और लेन-देन से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू की है।
यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह 14वीं JPSC परीक्षा की पारदर्शिता और चयन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
सीबीआई को भनक लगने पर लौटाए गए प्रमाण पत्र
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जब संबंधित लोगों को सीबीआई जांच की भनक लगी, तो कुछ अभ्यर्थियों से लिए गए प्रमाण पत्र वापस करने की कोशिश की गई। कथित तौर पर अभ्यर्थियों से संपर्क कर उन्हें उनके मूल शैक्षणिक दस्तावेज लौटाए गए।
जांच एजेंसी अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि प्रमाण पत्र लेने और वापस करने के पीछे क्या उद्देश्य था तथा इस पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।
मामले से जुड़े दस्तावेज, मोबाइल संपर्क, पैसों के लेन-देन और अन्य साक्ष्यों को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
14वीं JPSC में बिचौलियों के नेटवर्क की जांच
14वीं JPSC मामले में जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू कथित बिचौलिया नेटवर्क है। रिपोर्ट के मुताबिक, अभ्यर्थियों और कथित तौर पर परीक्षा से जुड़े लोगों के बीच संपर्क स्थापित करने में कई बिचौलियों की भूमिका होने की आशंका है।
सीबीआई अब यह जानने का प्रयास कर रही है कि ऐसे कितने एजेंट या बिचौलिए सक्रिय थे और उनका नेटवर्क किन-किन जिलों तक फैला हुआ था। रिपोर्ट में सात दलालों की तलाश और पांच जिलों में छापेमारी का भी उल्लेख किया गया है।
जांच के दौरान रांची के अलावा पलामू, बोकारो, हजारीबाग और गिरिडीह जैसे जिलों से जुड़े संभावित संपर्कों की भी पड़ताल किए जाने की बात सामने आई है।
JPSC-JSSC नियुक्तियों को लेकर भी मंथन
अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट में JPSC-JSSC में नियुक्तियों की तैयारी को लेकर भी चर्चा का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, नियुक्तियों से जुड़े विषयों पर सरकार और संबंधित स्तर पर मंथन जारी है।
JPSC और JSSC में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति को लेकर भी प्रक्रिया पर चर्चा होने की बात कही गई है। इसके अलावा आयोगों में खाली पदों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी विचार-विमर्श का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है।
सरकार की ओर से आयोगों की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित करने और जरूरी पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
14वीं JPSC जांच में हाईकोर्ट से जुड़े पहलू
14वीं JPSC मामले में सीबीआई जांच के साथ-साथ न्यायिक स्तर पर भी मामला महत्वपूर्ण बना हुआ है। रिपोर्ट में सीबीआई जांच को लेकर हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल किए जाने का उल्लेख किया गया है।
परीक्षा में कथित धांधली और अनियमितताओं को लेकर उठे सवालों के बीच जांच एजेंसी द्वारा जुटाए जा रहे साक्ष्यों पर भी नजर बनी हुई है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और न्यायालय के निर्देशों पर निर्भर करेगी।
परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवाल
14वीं JPSC से जुड़े आरोपों ने राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले हजारों अभ्यर्थी निष्पक्ष और पारदर्शी चयन प्रक्रिया की उम्मीद करते हैं।
ऐसे मामलों में जांच का उद्देश्य केवल आरोपों की पुष्टि करना नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क और उसकी कार्यप्रणाली का पता लगाना भी होता है। यदि किसी स्तर पर अनियमितता साबित होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ परीक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता भी सामने आती है।
14वीं JPSC पर अभ्यर्थियों की नजर
14वीं JPSC परीक्षा से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए जांच की प्रगति बेहद महत्वपूर्ण है। अभ्यर्थी चाहते हैं कि परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष हो तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पर कठोर कार्रवाई की जाए।
फिलहाल सीबीआई जांच में सामने आ रहे तथ्यों और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर है। कथित 100 करोड़ रुपये के टारगेट और अभ्यर्थियों से एडवांस रकम लेने जैसे आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।