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रांची, 13 अगस्त 2026। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड और झारखंड स्टैटिस्टिकल सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस के जन्म दिवस के अवसर पर नामकुम स्थित आरसीएच कॉन्फ्रेंस हॉल में दो दिवसीय डेटा क्वालिटी वर्कशॉप का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य विभाग में डेटा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और सटीकता को बेहतर बनाना तथा आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से जन-स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाना है।

कार्यशाला में झारखंड के विभिन्न जिलों से आए जिला डेटा मैनेजरों, सांख्यिकी अधिकारियों और झारखंड स्टैटिस्टिकल सोसाइटी के सदस्यों ने भाग लिया। इस दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में डेटा की भूमिका, डेटा विश्लेषण, रिपोर्टिंग सिस्टम, सर्वर मॉनिटरिंग और एआई आधारित तकनीकों के उपयोग को लेकर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की।

स्वास्थ्य डेटा से शोध को मिलेगा बढ़ावा

झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के कुलपति प्रो. डॉ. डी. के. सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का डेटा शोध और जन-स्वास्थ्य सुधार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के विश्लेषण में विश्वविद्यालय की सहभागिता की पेशकश करते हुए कहा कि यदि स्वास्थ्य विभाग का डेटा उपलब्ध कराया जाता है, तो विश्वविद्यालय के एमटेक और डेटा एनालिसिस के विद्यार्थी उस पर गहन अध्ययन कर सकते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि डेटा का इस्तेमाल केवल शोध और जन-स्वास्थ्य से जुड़े निर्णयों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया जाएगा। साथ ही डेटा की गोपनीयता और प्राइवेसी एंड प्रोटेक्शन का पूरी तरह ध्यान रखा जाएगा।

एआई से स्वास्थ्य क्षेत्र में नई संभावनाएं

उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से स्वास्थ्य क्षेत्र में नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। डेटा एनालिसिस के माध्यम से बीमारी के पैटर्न, स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत और विभिन्न क्षेत्रों की चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने बढ़ती तकनीकी निर्भरता के बीच ई-कचरा प्रबंधन को भी एक बड़ी चुनौती बताया।

सटीक डेटा से बेहतर होंगी स्वास्थ्य नीतियां

स्वास्थ्य डेटा से जन-स्वास्थ्य सुधार की दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए प्रो. डॉ. डी. के. सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में एआई बड़ी मात्रा में उपलब्ध आंकड़ों का तेजी से विश्लेषण कर दिशा-निर्देश और सुझाव दे सकता है। हालांकि, एआई मानव मस्तिष्क की मौलिक सोच का विकल्प नहीं बन सकता।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने डेटा की सटीकता और प्रासंगिकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में डेटा की विश्वसनीयता सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि आंकड़े गलत, अधूरे या फर्जी होंगे, तो उन्हीं आंकड़ों के आधार पर तैयार की जाने वाली नीतियां और लिए जाने वाले फैसले भी गलत साबित हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि ब्लॉक और जिला स्तर से ही डेटा संग्रह की प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाया जाना जरूरी है। सही डेटा ही स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को समझने और जरूरत के अनुसार संसाधनों की योजना बनाने में मदद करता है।

विभिन्न विभागों के डेटा को जोड़ने पर जोर

अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों के बेहतर समाधान के लिए विभिन्न विभागों के आंकड़ों को एकीकृत करने की रणनीति पर भी जोर दिया। उन्होंने भूमि, जल, बिजली, पर्यावरण और प्रदूषण जैसे क्षेत्रों से जुड़े डेटा को एक साथ जोड़कर रियल-टाइम डिसीजन लेने की आवश्यकता बताई।

उनका कहना था कि अलग-अलग विभागों के डेटा को एकीकृत करने से किसी क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को व्यापक रूप से समझने में मदद मिलेगी। इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान और उनके समाधान के लिए तेजी से निर्णय लिया जा सकेगा।

मशीन लर्निंग और एआई पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

कार्यशाला में बीआईटी मेसरा की प्रोफेसर डॉ. टीना दत्ता ने पब्लिक हेल्थ रिसर्च में अनसुपरवाइज्ड मशीन लर्निंग तकनीकों के अनुप्रयोग पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि मशीन लर्निंग तकनीकों की मदद से स्वास्थ्य क्षेत्र में उपलब्ध बड़े डेटा से महत्वपूर्ण पैटर्न और उपयोगी जानकारियां सामने लाई जा सकती हैं।

वहीं सीआईपी रांची के सांख्यिकीविद डॉ. हरनाम पचौरी ने एआई और ऑल हेल्थकेयर विषय पर अपने विचार रखे। विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग, डेटा विश्लेषण और तकनीकी नवाचार की संभावनाओं पर चर्चा की।

जिला डेटा मैनेजरों को मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण

दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान जिला डेटा मैनेजरों को डेटा सुधार, सर्वर मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य जिला और ब्लॉक स्तर पर डेटा प्रबंधन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, सटीक और प्रभावी बनाना है।

विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य डेटा से जन-स्वास्थ्य सुधार तभी संभव है, जब डेटा समय पर, सही और विश्वसनीय तरीके से उपलब्ध हो। बेहतर डेटा प्रबंधन के जरिए स्वास्थ्य विभाग योजनाओं की निगरानी, सेवाओं की समीक्षा और जरूरत के अनुसार निर्णय लेने में अधिक सक्षम हो सकता है।

कई अधिकारी और विशेषज्ञ रहे मौजूद

कार्यक्रम में एनएचएम के डायरेक्टर फाइनेंस मो. गुफरान, प्रशासी पदाधिकारी के.के. अग्रवाल, डेटा सेल के स्टेट नोडल ऑफिसर डॉ. प्रदीप कुमार सिंह, आईईसी के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. राहुल किशोर सिंह, जेएसएस से डॉ. एस.बी. सिंह, प्रो. रामेश्वर केरकेट्टा, प्रो. सौभिक चक्रवर्ती, रांची यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. ए.के. झा, सुबोध कुमार समेत स्वास्थ्य विभाग और झारखंड स्टैटिस्टिकल सोसाइटी के कई प्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।

कार्यशाला का समापन शुक्रवार को होगा। इस दो दिवसीय प्रशिक्षण के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग में डेटा की गुणवत्ता सुधारने, आधुनिक तकनीक को अपनाने और साक्ष्य आधारित स्वास्थ्य निर्णयों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।

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