रांची: झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग JPSC और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली तथा अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का गुस्सा चरम पर है। पिछले 20 दिनों से राजधानी रांची में अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर डटे अभ्यर्थियों को समर्थन देने बुधवार को पूर्व CM रघुवर दास पहुंचे। धरना स्थल पर आंदोलनरत छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार पर कड़ा हमला बोला। रघुवर दास ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए एक सप्ताह के भीतर छात्रों की सभी मांगें पूरी करने की मोहलत दी और मांगें न माने जाने पर स्वयं अनशन पर बैठने का बड़ा ऐलान कर दिया।
JPSC-JSSC: सरकार को 7 दिनों का अल्टीमेटम और अनशन का ऐलान
रघुवर दास ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार अपनी हठधर्मिता और अहंकार को छोड़े तथा एक सप्ताह के भीतर छात्रों की जायज मांगों का समाधान निकाले। उन्होंने कहा कि सरकार को इसे अपनी प्रतिष्ठा का विषय नहीं बनाना चाहिए और तुरंत वार्ता के माध्यम से बीच का रास्ता निकालना चाहिए। उन्होंने ऐलान किया कि यदि 7 दिनों के भीतर राज्य सरकार ने ठोस निर्णय नहीं लिया, तो वे स्वयं छात्रों के साथ धरने पर बैठकर आमरण अनशन करेंगे। रघुवर दास ने कहा कि लोकतंत्र में जनता ही असली मालिक होती है; जो जनता सत्ता के शीर्ष पर बैठाना जानती है, वह समय आने पर अहंकार में डूबी सरकार को उखाड़ फेंकना भी अच्छी तरह जानती है।
JSSC CGL में सबसे बड़ा घोटाला और मुआवजे की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पिछले छह वर्षों में लगभग 10 प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, गड़बड़ी और घोटालों के गंभीर मामले उजागर हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि इनमें से सबसे बड़ा विवाद और घोटाला JSSC CGL परीक्षा को लेकर सामने आया है। सरकारी नौकरियों को बेचने और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसी स्थितियां बन चुकी हैं, जिससे अभ्यर्थियों के भीतर पूरी व्यवस्था के प्रति गहरा अविश्वास और आक्रोश व्याप्त है। इसके साथ ही, उन्होंने उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान प्रशासनिक लापरवाही के कारण जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के प्रति दुख व्यक्त किया और पीड़ित परिवारों को अविलंब उचित मुआवजा देने की मांग की।
प्रशासनिक अधिकारियों को चेतावनी: ‘सत्ता आती-जाती है’
आंदोलन दबाने की कोशिशों पर रघुवर दास ने हेमंत सोरेन सरकार के अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी आंदोलनरत छात्रों पर अनावश्यक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो पूरी तरह गैर-कानूनी और असंवैधानिक है। अधिकारियों को सख्त लहजे में आगाह करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “अधिकारी अपनी सीमा में रहकर निष्पक्ष काम करें। सत्ता कभी स्थायी नहीं होती, सरकारें आती-जाती रहती हैं; लेकिन अधिकारियों का करियर लंबा होता है।” उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे संविधान और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करें और चेतावनी दी कि यदि भविष्य में किसी भी छात्र के साथ दबाव या अन्याय करने की कोशिश की गई, तो जनता इसका मुंहतोड़ जवाब देगी।
गैर-राजनीतिक मंच से युवाओं और जनसमर्थन की अपील
छात्रों को संबोधित करते हुए रघुवर दास ने याद दिलाया कि उनका अपना राजनीतिक जीवन भी छात्र आंदोलनों की नींव पर ही खड़ा हुआ है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे छात्रों के इस पवित्र मंच से कोई राजनीतिक बयानबाजी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यह मंच केवल झारखंड के युवाओं के अधिकार और न्याय की लड़ाई का है। उन्होंने पूरे राज्य की जनता से अपील की कि वे दूर-दराज के इलाकों से आए इन अभ्यर्थियों को तन, मन और धन से पूर्ण समर्थन दें। रघुवर दास ने कहा कि ये बच्चे ही झारखंड का असली भविष्य हैं और वे एक ‘दास’ की तरह अंत तक युवाओं के साथ इस लड़ाई में मजबूती से खड़े रहेंगे।
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