रांची। जिंदगी जिंदाबाद
राजधानी रांची के ऐतिहासिक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी JPSC और जेएसएससी JSSC परीक्षाओं में धांधली तथा अनियमितताओं के विरोध में पिछले कई दिनों से जारी अभ्यर्थियों का विशाल आंदोलन अब एक नए, गंभीर और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। राज्यभर के हजारों प्रतियोगी परीक्षार्थियों के आक्रोश और लगातार बढ़ते दबाव के बीच राज्य सरकार की ओर से बातचीत की पहल की गई थी। इस पहल का स्वागत करते हुए आंदोलनकारी छात्रों ने आखिरकार सरकार के साथ बैठने की सहमति दे दी है।
JPSC-JSSC के खिलाफ आंदोलन: वार्ता के लिए रखी कड़ी शर्तें
हालांकि, इसके साथ ही छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर बेहद स्पष्ट, कड़ा और पारदर्शी रुख अपनाते हुए सरकार के समक्ष अपनी शर्तें रख दी हैं। अभ्यर्थियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वे बातचीत के लिए पूरी प्रशासनिक और तथ्यपरक तैयारी के साथ जाएंगे, लेकिन वार्ता की प्रक्रिया किसी भी स्थिति में बंद कमरे के भीतर गुप्त रूप से संचालित नहीं होगी।
JPSC-JSSC के खिलाफ आंदोलन: प्रतिनिधिमंडल की सूची जारी
आंदोलन को संगठित और दिशाबद्ध रूप देने के उद्देश्य से छात्रों ने अपने आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का गठन कर पूरी सूची सार्वजनिक कर दी है। जारी की गई रणनीति के अनुसार, सरकार के साथ होने वाली इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य रूप से आठ छात्र प्रतिनिधि ही अभ्यर्थियों की आवाज बनेंगे। इस 8-सदस्यीय छात्र दल में रविन्द्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह, रविन्द्र कुमार रवि, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, अंकित कुमार और शालू सिंह को शामिल किया गया है।

JPSC-JSSC के खिलाफ आंदोलन: 8 सदस्यीय टीम रखेगी सुझाव
आंदोलनकारी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि JPSC-JSSC परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के प्रमाण, आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल, सुधार के सुझाव और छात्रों की तमाम मांगों को केवल यही आठ अभ्यर्थी सीधे प्रशासनिक अधिकारियों और सरकार के प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत करेंगे। छात्रों का स्पष्ट मानना है कि यह लड़ाई पूरी तरह से आम अभ्यर्थियों के हक और अधिकार की है, इसलिए वार्ता की टेबल पर निर्णय लेने और पक्ष रखने का पहला और अंतिम अधिकार भी केवल छात्रों का ही होना चाहिए। इसमें किसी भी बाहरी दबाव या अन्य हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी।
JPSC-JSSC के खिलाफ आंदोलन: टीम में दो वरिष्ठ पत्रकार भी शामिल
इसी रणनीति के तहत प्रतिनिधिमंडल की संरचना में एक बेहद अनूठा और व्यावहारिक प्रयोग भी देखने को मिल रहा है। छात्रों ने अपनी टीम में राज्य के दो वरिष्ठ पत्रकारों—रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभूनाथ चौधरी और विकास वर्मा—के साथ-साथ जाने-माने कानूनविद अजीत कुमार को भी शामिल किया है। हालांकि, इनकी भूमिका को लेकर बेहद सख्त और स्पष्ट सीमाएं तय कर दी गई हैं।
छात्रों ने यह अधिकारपूर्वक घोषित किया है कि ये वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी विशेषज्ञ वार्ता के दौरान सरकार से किसी प्रकार का सीधा संवाद नहीं करेंगे और न ही मांगों के संदर्भ में अपनी बात रखेंगे। इनकी मौजूदगी केवल एक अभिभावक, नैतिक संरक्षक और बौद्धिक मार्गदर्शक के रूप में होगी, ताकि वार्ता के दौरान छात्रों को किसी प्रकार की कानूनी या रणनीतिक कठिनाई का सामना न करना पड़े।
पत्रकारों और विशेषज्ञों की उपस्थिति को लेकर JPSC-JSSC आंदोलनकारियों ने कुछ विशेष दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल में शामिल पत्रकार प्रतिनिधि बैठक स्थल के भीतर किसी भी प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण—जैसे माइक, वीडियो कैमरा, रिकॉर्डिंग डिवाइस या साउंड सिस्टम—लेकर प्रवेश नहीं कर सकेंगे। छात्रों का कहना है कि वे प्रेस क्लब के प्रतिनिधियों का सम्मान करते हैं और उनकी उपस्थिति केवल नैतिक और बौद्धिक संबल देने के लिए है, न कि वार्ता के मुख्य प्रवाह को किसी भी रूप में प्रभावित करने के लिए।
इस पूरी पृष्ठभूमि की शुरुआत बुधवार को उस वक्त हुई, जब राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) कुमार रजत स्वयं जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे थे। उन्होंने मंच पर जाकर आंदोलनकारी अभ्यर्थियों को राज्य सरकार की ओर से सकारात्मक वार्ता का आधिकारिक संदेश सौंपा था। एसडीओ ने छात्रों को अवगत कराया था कि सरकार अभ्यर्थियों की समस्याओं, मांगों और परीक्षाओं से जुड़ी शिकायतों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए पूरी तरह गंभीर है और इसके लिए 5-सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित करती है। छात्रों ने शासन के इस प्रस्ताव का सकारात्मक रुख के साथ स्वागत तो किया, लेकिन इसके साथ ही अपनी शर्तों का खाका भी खींच दिया।
JPSC-JSSC छात्रों का सबसे प्रमुख जोर इस बात पर है कि वार्ता पूरी तरह से पारदर्शी और सार्वजनिक होनी चाहिए। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह लड़ाई केवल मैदान में मौजूद कुछ सौ छात्रों की नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं और उनके परिवारों के भविष्य से सीधी जुड़ी हुई है। इसलिए, सरकार के साथ जो भी संवाद हो, वह पूरी तरह से निष्पक्ष और खुली व्यवस्था के तहत होना चाहिए।
छात्रों की मांग है कि पूरी बैठक को मीडिया कवरेज के साथ सार्वजनिक रूप से आयोजित किया जाए, ताकि राज्य का हर एक परीक्षार्थी और आम नागरिक यह देख सके कि सरकार का रवैया कितना सुधारात्मक है और छात्र किस मजबूती के साथ अपना पक्ष रख रहे हैं। अभ्यर्थियों का दृढ़ विश्वास है कि एक खुली और सीधी वार्ता से न केवल किसी भी प्रकार के राजनीतिक या प्रशासनिक भ्रम को खत्म किया जा सकेगा, बल्कि भविष्य में किसी भी विवाद या आरोप-प्रत्यारोप की संभावना भी हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी।
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