रांची : जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय, रांची विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर नागपुरी विभाग में पदस्थापित विभागाध्यक्ष डॉ सविता केशरी के सेवनिवृत्ति उपरांत विभागीय परिसर में विदाई सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया.
टीआरएल परिवार उनके कार्यों को सदैव याद रखेगा. उनकी कुशल कार्यक्षमता व उत्कृष्ट योगदान हमारे लिए प्रेरणास्त्रोत हैं. ये सेवानिवृत्त जरूर हुई हैं, पर सेवा के दायित्वों से नहीं. इनके मार्गदर्शन की हमें हमेशा अपेक्षा रहेगी. उक्त बातें टीआरएल के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं झारखंड ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो (डॉ) त्रिवेणी नाथ साहु ने शुक्रवार को टीआरएल संकाय में आयोजित सेवानिवृत्त नागपुरी विभाग के विभागाध्यक्ष के विदाई समारोह को संबोधित करते हुए कही.

सेवानिवृत प्राध्यापक डॉ सविता केशरी ने अपने संबोधन में भावुक हो गई, कहा सेवानिवृत्त जरूर हुई हूँ पर सेवा के दायित्वों से नहीं. मैं हमेशा बच्चों के अभिभावक से उन्हें बच्चों के आगे की पढ़ाई के लिए प्रेरणा देती रहूँगी. मेरा दरवाजा हमेशा मेरे छात्रों के लिए खुला रहेगा. जब भी कोई मदद महसूस करें, नि:संकोच मैं उनके लिए उपलब्ध रहूँगी.
टीआरएल संकाय के पूर्व समन्वयक डॉ हरि उराँव ने कहा कि डॉ सविता केशरी ने अपने कार्यकाल में जिस तरह बेहतर प्रदर्शन किया. वह हमेशा अनुकरणीय है.
विषय प्रवेश एवं संचालन करते पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ उमेश नन्द तिवारी ने डॉ सविता केशरी के साथ बिताये पल को साझा करते हुए कहा कि दीदी के योगदान, स्नेह और एक अभिभावक के रूप में जो मार्गदर्शन मिला वो हमेशा याद किया जायेगा.
इस अवसर पर टीआरएल संकाय के शिक्षक शिक्षिकाओं ने उन्हें भावभीनी विदाई दी. सभी ने उन्हें पुष्पमाला पहनाकर, प्रतीक चिन्ह व शाल ओढ़ाकर उनके सेवाकाल की चर्चा की. सेवानिवृत्त हुई प्राध्यापक को सम्मानित भी किया गया.
आयोजित समारोह को कई वक्ताओं ने संबोधित करते हुए सेवानिवृत्त प्राध्यापक के विभाग में शिक्षा के प्रति ईमानदारी पूर्वक किये कार्य, मधुर स्वभाव और कर्तव्य निष्ठा का चर्चा किये. वहीं कहा कि सेवा में आने वाला का सेवानिवृत्त होना एक परंपरा है. जिसका हर किसी को पालन करना ही है. इनका शिक्षकों और छात्रों से हमेशा मधुर संबंध बना रहा. आज इनका टीआरएल से जाना हम सबों के लिए काफी दुखदायी है. सबने उनकी दीर्घायु और स्वस्थ्य जीवन की कामना किया. वहीं कईयों ने कहा कि इस मौके पर इतनी भीड़ उनके स्वभाव और कर्तव्य निष्ठा का एक उपहार है.
इस मौके पर मेजर डॉ महेश्वर सारंगी, डॉ वृन्दावन महतो, मनय मुण्डा, डॉ गीता कुमारी सिहं, डॉ कुमारी शशि, डॉ खलिक अहमद, डॉ बीरेन्द्र कुमार महतो, डॉ रीझू नायक, डॉ बीरेन्द्र कुमार सोय , तारकेश्वर सिहं मुण्डा, डॉ किशोर सुरिन, करम सिंह मुण्डा, डॉ अर्चना कुमारी, प्रेम मुर्मू, राजकुमार बास्की, सुजाता टेटे, शकुन्तला बेसरा, राज कुमार बास्की, डॉ बीरेन्द्र कुमार सोय, डॉ बन्दे खलखो, महामनी कुमारी, डॉ दमयन्ती सिंकु, डॉ सरस्वती गागराई, नरेन्द्र कुमार दास, अनुराधा मुण्डू, डॉ नकुल कुमार, जय प्रकाश उराँव, डॉ उपेन्द्र कुमार महतो, डॉ राम कुमार, आनन्द विजय, रवि कुमार, सोनू सपवार, अनुप गाड़ी, राजकुमार, प्रभा हेमरोम, बसंती मुण्डा, चन्दा देवी सहित कई शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र -छात्राएँ उपस्थित थे.