मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन एवं विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन आज हूल दिवस के अवसर पर मोरहाबादी, रांची स्थित सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचकर हूल विद्रोह के महानायक अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

मौके पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि आज ऐतिहासिक दिवस है। एक ऐसा दिवस, जब शोषण के विरूद्ध जबरदस्त आवाज उठाई गई थी। देश में शोषण से निकलने के लिए किसी के पास कोई रास्ता नहीं दिख रहा था, उस समय आदिवासी समाज के वीरों ने शोषण के विरुद्ध मोर्चा खोला। परिणाम क्या होगा इसकी चिंता किए बगैर  हूल क्रांति के अमर शहीद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, वीरांगना फूलो-झानो ने देश के लोगों पर हो रहे शोषण के विरूद्ध बिगुल फूंका। उन्होंने कहा कि आज भी यह देखा जा रहा है कि कहीं-ना-कहीं  क्रांति, संघर्ष जगह-जगह पर कमजोर वर्गों के शोषण के विरुद्ध प्रतिरोध से ही शुरू होता है। आज इन वीर सपूतों पर हम सभी को गर्व है। हमारे अमर वीर सपूत देश और समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि इन वीर सपूतों की बदौलत ही झारखंड को वीरों की धरती कही जाता है। राज्य में कई ऐसे अवसर हैं, जिस दिन हम सभी लोग महापुरुषों को याद करते हैं और उनके आदर्शों पर चलने की प्रतिज्ञा लेते हैं। उन्होंने कहा कि क्रांति की आग बुझती नहीं है। बुझाई भी नहीं जा सकती। क्रांति की चिंगारी सदैव जलती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कई जगह आज भी ऐसी क्रांति के स्मारक पर निरंतर दीप जलता रहता है। उन्होंने दिल्ली के राजघाट एवं इंडिया गेट में भी दीप जलते रहने का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि वीरों की इस पावन भूमि का इतिहास स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। 

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*दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण, पत्नी श्रीमती रूपी सोरेन ने ग्रहण किया सम्मान*झारखंड की धरती के महान जननायक और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से नवाजा गया। यह सम्मान उनके दीर्घकालिक सामाजिक, राजनीतिक और आदिवासी अधिकारों के संघर्ष को मान्यता देता है। नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन  में आयोजित गरिमामय समारोह में उनकी पत्नी श्रीमती रूपी सोरेन ने यह सम्मान ग्रहण किया।शिबू सोरेन ने झारखंड आंदोलन के प्रमुख वास्तुकार होने के साथ-साथ आदिवासी समाज के हक, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और सामाजिक न्याय के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उनके योगदान ने न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश में वंचित समुदायों को सशक्त करने की राह दिखाई।सम्मान ग्रहण करते हुए रूपी सोरेन भावुक दिखीं और उन्होंने इसे पूरे झारखंड एवं आदिवासी समाज के लिए गर्व का क्षण बताया। इस अवसर पर देशभर के राजनीतिक और सामाजिक नेताओं ने दिशोम गुरु को सम्मान अर्पित करते हुए उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।सम्मान समारोह में माननीय गन्दे विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं। यह सम्मान शिबू सोरेन के संघर्षमय जीवन और उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।