एन. ई. पी.(राष्ट्रीय शिक्षा नीति) की तीसरी वर्षगांठ के शुभ अवसर पर रांची सहोदया स्कूल कॉम्प्लेक्स तथा डी. ए. वी.कपिलदेव पब्लिक स्कूल, कडरू के संयुक्त तत्वावधान में कला प्रदर्शनी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में रांची के 23 सीबीएसई स्कूलों  ने भाग लिया । बच्चों में कला के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने तथा शिक्षा में कला को समेकित करने हेतु इस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर बोलते हुए डीएवी कपिलदेव के प्राचार्य श्री एमके सिन्हा ने अपने स्वागत भाषण में जी-20 की थीम वन अर्थ,वन पर्सन और वन फ्यूचर के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि  शिक्षा सीखने का नाम है। हमें रोज नई-नई चीजें सीखनी चाहिए सीखी गई विद्या  का प्रयोग सामाजिक जीवन में दिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्रिएटिविटी से सोच बढ़ती है और इससे व्यक्ति सीखता है।अपनी कार्यकुशलता को हम जितना बढ़ा सकते हैं ।उतना हमारे जीवन के लिए अच्छा होगा।  कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रांची सहोदया स्कूल कॉम्प्लेक्स के प्रेसिडेंट सह जवाहर विद्यामंदिर के प्राचार्य समरजीत जाना ने जी ट्वेंटी का अर्थ समझाया तथा बताया कि यह किस प्रकार छात्रों से जुड़ा है और किस प्रकार आज प्रासंगिक है। वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव शर्मा जी ने संविधान की प्रस्तावना को बच्चों के बीच में गाकर बतलाया कि हमारा भारत महान है । दूसरों का आदर करना और प्रणाम करना भारत की परंपरा रही है।सभी भारतवासियों में एक ही आत्मा बसती है इसलिए कोई ऊंचा और नीचा नहीं है।

रांची के वरिष्ठ पत्रकार श्री मधुकर ने एकता पर बल दिया । उन्होंने कहा कि हमें जाति, धर्म संप्रदाय के नाम पर भेदभाव से बचना चाहिए। बाद में अतिथियों  ने सामूहिक रुप से प्रदर्शनी का मुआयना किया। सभी अतिथियों का स्वागत पौधा देकर किया गया।

प्रतियोगिता के निर्णायक मंडली के सदस्य वीके पाठक ,पी सारंगी, विनीता वर्मा  और विश्वनाथ चक्रवर्ती ने प्रदर्शनी को गौर से देखा और उसकी समीक्षा की। मौके पर स्थानीय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री कपिल देव गिरि, सुरेंद्रनाथ सेंटेनरी स्कूल की प्रिंसिपल शमिता सिन्हा , डीएवी गांधीनगर के प्राचार्य एस के सिन्हा, डीएवी  बारियातू के प्रिंसिपल वी के पांडेय और डीएवी खूंटी के प्राचार्य श्री टीपी झा उपस्थित थे। इस अवसर पर आयोजित सभा का संचालन ऋषभ पांडेय, भूमिका जालान, आर्यमन साहू और आकांक्षा सिंह ने सम्मिलित रूप से किया।सभा के अंत में  सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र पूर्व आइएएस के के खंडेलवाल, प्राचार्य एम के सिन्हा और झारखंड साइको ग्राफी सोसाइटी के विकास कुमार ने सम्मिलित रुप से प्रदान किया।कार्यक्रम के दौरान dav कपिल देव की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की रंगारंग झलकियां भी प्रस्तुत कीं। उनके द्वारा प्रस्तुत है नृत्य सराहनीय रहे।

मौके पर  एस के राणा, संजय कुमार सिंह ,पशुपतिनाथ झा, अशोक कुमार सिंह,उदय नाथ झा समेत कई शिक्षक मौजूद थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

*दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण, पत्नी श्रीमती रूपी सोरेन ने ग्रहण किया सम्मान*झारखंड की धरती के महान जननायक और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से नवाजा गया। यह सम्मान उनके दीर्घकालिक सामाजिक, राजनीतिक और आदिवासी अधिकारों के संघर्ष को मान्यता देता है। नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन  में आयोजित गरिमामय समारोह में उनकी पत्नी श्रीमती रूपी सोरेन ने यह सम्मान ग्रहण किया।शिबू सोरेन ने झारखंड आंदोलन के प्रमुख वास्तुकार होने के साथ-साथ आदिवासी समाज के हक, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और सामाजिक न्याय के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उनके योगदान ने न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश में वंचित समुदायों को सशक्त करने की राह दिखाई।सम्मान ग्रहण करते हुए रूपी सोरेन भावुक दिखीं और उन्होंने इसे पूरे झारखंड एवं आदिवासी समाज के लिए गर्व का क्षण बताया। इस अवसर पर देशभर के राजनीतिक और सामाजिक नेताओं ने दिशोम गुरु को सम्मान अर्पित करते हुए उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।सम्मान समारोह में माननीय गन्दे विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं। यह सम्मान शिबू सोरेन के संघर्षमय जीवन और उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

जीआई के क्षेत्र में झारखंड ने मजबूत की अपनी उपस्थिति; राज्य के 11 नए उत्पादों को मिला जीआई टैग======*झारखंड सरकार राज्य की अनूठी कला, शिल्प, कृषि उत्पादों और पारंपरिक वस्तुओं को पहचान दिलाने, उन्हें सुरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए, जीआई रजिस्ट्री ने हाल ही में राज्य के 11 और महत्वपूर्ण उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया है।  इन पहलों का मुख्य उद्देश्य झारखंड के पारंपरिक उत्पादों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना, बाजार में उनकी पहचान बढ़ाना और उन्हें राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर स्थापित करना है।  *ये हैं जीआई क्लब में शामिल**झारखंड के ये उत्पाद हुए जीआई (GI) क्लब में शामिल*हाल ही में जिन उत्पादों को जीआई दर्जा दिया गया है, उनमें कुचाई सिल्क साड़ी और कपड़े, भगैया साड़ी और कपड़े, दुमका चादर बदोनी पुतुल (कठपुतली), झारखंड पंछी परहान पंछी साड़ी और कपड़े, झारखंड की टसर सिल्क साड़ियाँ और कपड़े, झारखंड डोकरा क्राफ्ट (धातु शिल्प)   झारखंड के आदिवासी आभूषण (Tribal Jewellery), झारखंड के बांस शिल्प (Bamboo Crafts), केसरिया कलाकंद, झारखंड बेनाम और झारखंड जादुपटुआ पेंटिंग् शामिल हैं। इन सभी नए जीआई टैगों का आधिकारिक प्रकाशन अगले कुछ दिनों में कर दिया जाएगा। वर्ष 2019 तक झारखंड के पास केवल एक जीआई-टैग उत्पाद (सोहराई और खोवर पेंटिंग) था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 12 हो गई है, जो जीआई परिदृश्य में राज्य की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।*झारक्राफ्ट की बड़ी उपलब्धि*उद्योग विभाग, झारखंड सरकार के तहत कार्यरत झारक्राफ्ट और मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड वर्ष 2019 से ही जीआई पंजीकरण गतिविधियों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहे हैं। इसी प्रयास के तहत एक उल्लेखनीय मील का पत्थर तब हासिल हुआ, जब झारक्राफ्ट ने एक साथ तीन उत्पादों झारखंड की टसर सिल्क साड़ियाँ और कपड़े, झारखंड के आदिवासी आभूषण और झारखंड के बांस शिल्प  के लिए जीआई पंजीकरण सुरक्षित किया है। ये पंजीकरण झारखंड के कारीगरों और पारंपरिक समुदायों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की दृश्यता, प्रामाणिकता और बाजार क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएंगे। *अन्य उत्पाद भी हैं कतार में*झारखंड की यह जीआई यात्रा राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान की रक्षा के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर चुकी है। इसके अतिरिक्त, कई अन्य अनूठे उत्पादों के आवेदन भी जीआई रजिस्ट्री में जमा किए गए हैं, इनमें मांदर, प्यतकर पेंटिंग, निमुचा/करनी शॉल, लाह की चूड़ियाँ, देवघर पेड़ा, रागी, रुगड़ा, धुस्का, कुसुमी लाहा, साल के बीज, महुआ का फूल और करंज के बीज शामिल हैं। राज्य में अभी भी कई और स्वदेशी उत्पादों को जीआई ढांचे के तहत लाने और राष्ट्रीय व वैश्विक बाजारों में उन्हें सही पहचान दिलाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।===========================