झारखंड मौसम समाचार | 2 नवंबर 2026
रांची: झारखंड में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ का झारखंड के मौसम पर आंशिक प्रभाव पड़ने की संभावना जताई गई है। मौसम में होने वाले इस बदलाव के कारण राज्य के कई जिलों में आसमान में बादल छाए रह सकते हैं और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश भी हो सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 2 नवंबर से 4 नवंबर तक राज्य के दक्षिणी और संताल परगना क्षेत्र के कई जिलों में मौसम का मिजाज बदला हुआ रह सकता है।
हालांकि, चक्रवाती तूफान का झारखंड में व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं जताई गई है, लेकिन इसके कारण बादलों की आवाजाही बढ़ सकती है। विशेष रूप से कोल्हान, दक्षिणी झारखंड और संताल परगना के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश होने का अनुमान है। वहीं, राज्य के कुछ अन्य जिलों में आसमान में बादल छाए रहने के बावजूद मौसम शुष्क रह सकता है।
मौसम में इस बदलाव को देखते हुए किसानों, आम नागरिकों और यात्रा करने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। नवंबर की शुरुआत में झारखंड में सामान्य रूप से ठंड का असर धीरे-धीरे बढ़ने लगता है, लेकिन बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण कुछ दिनों तक तापमान और आसमान की स्थिति में बदलाव देखने को मिल सकता है।
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान का दिखेगा आंशिक असर
बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ इन दिनों मौसम विभाग की निगरानी में है। इस तूफान के कारण पूर्वी और दक्षिणी भारत के कई राज्यों में मौसम संबंधी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। तूफान के प्रभाव से समुद्र के आसपास के क्षेत्रों में तेज हवाएं, बारिश और गरज-चमक जैसी स्थितियां बन सकती हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 1 नवंबर को बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम और उससे लगे पश्चिम-मध्य हिस्से में चक्रवाती तूफान मुरासु सक्रिय था। इसके और शक्तिशाली होकर गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने तथा आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट की ओर बढ़ने का पूर्वानुमान जारी किया गया था। India Meteorological Department+1
झारखंड समुद्र से दूर स्थित राज्य है। इसलिए तूफान का सीधा प्रभाव यहां पड़ने की संभावना कम है। हालांकि, चक्रवाती परिसंचरण और उससे जुड़ी मौसम प्रणालियों के कारण राज्य के कुछ हिस्सों में बादलों की आवाजाही बढ़ सकती है। इसका असर मुख्य रूप से दक्षिणी झारखंड और संताल परगना के कुछ इलाकों में देखने को मिल सकता है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, किसी चक्रवाती तूफान का प्रभाव केवल उसके लैंडफॉल वाले क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। उसके आसपास बनने वाली हवाओं, नमी और वायुमंडलीय परिस्थितियों का असर दूर-दराज के इलाकों में भी दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणाली के दौरान झारखंड में भी बादल छाने और हल्की बारिश की संभावना जताई जा रही है।
2 नवंबर से 4 नवंबर तक बदला रह सकता है मौसम
मौसम के पूर्वानुमान के मुताबिक, 2 नवंबर से 4 नवंबर तक झारखंड के कई जिलों में आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है। इस दौरान कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। हालांकि, राज्य के सभी जिलों में बारिश होने की संभावना नहीं है।
2 नवंबर को राज्य के दक्षिणी हिस्सों में बादलों की आवाजाही अधिक देखने को मिल सकती है। रांची और आसपास के इलाकों में भी आसमान में बादल छाने की संभावना है। कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। वहीं, 3 और 4 नवंबर को भी कुछ जिलों में बादल बने रहने तथा हल्की बूंदाबांदी होने का अनुमान है।
इस दौरान बारिश की तीव्रता सामान्य रहने की संभावना है। भारी बारिश या व्यापक जलभराव जैसी स्थिति का अनुमान इस खबर में दिए गए पूर्वानुमान से नहीं लगाया जाना चाहिए। मौसम की वास्तविक स्थिति स्थानीय परिस्थितियों और मौसम विभाग के नए बुलेटिन पर निर्भर करेगी।
राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का प्रभाव भी अलग-अलग रह सकता है। कोल्हान क्षेत्र में बादलों की मौजूदगी अधिक रहने का अनुमान है, जबकि संताल परगना के कुछ जिलों में भी बादल छाने और हल्की बारिश की संभावना है। दूसरी ओर पलामू प्रमंडल के कुछ जिलों में मौसम शुष्क बना रह सकता है।
इन जिलों में छाए रह सकते हैं बादल
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, झारखंड के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक बादल छाए रहने की संभावना है। इनमें रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा, हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह, कोडरमा, देवघर, दुमका, जामताड़ा, पाकुड़, साहिबगंज और गोड्डा शामिल हैं।
इन जिलों में मौसम की स्थिति एक जैसी नहीं रहेगी। कुछ स्थानों पर केवल बादल छाए रह सकते हैं, जबकि कुछ इलाकों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है।
रांची में बादलों की आवाजाही के कारण धूप की तीव्रता कम हो सकती है। सुबह और शाम के समय मौसम अपेक्षाकृत सुहावना महसूस हो सकता है। खूंटी, गुमला और लोहरदगा में भी बादल छाने के कारण तापमान में हल्का बदलाव देखने को मिल सकता है।
हजारीबाग और रामगढ़ में मौसम की स्थिति में उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है। यहां कुछ समय के लिए बादल घने हो सकते हैं। बोकारो और धनबाद में भी बादलों की आवाजाही के कारण मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

गिरिडीह और कोडरमा में भी आसमान में बादल छाए रहने का अनुमान है। संताल परगना के देवघर, दुमका, जामताड़ा, पाकुड़, साहिबगंज और गोड्डा में भी मौसम का मिजाज बदला रह सकता है। इन इलाकों में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना जताई गई है।
हालांकि, इन सभी जिलों में एक साथ बारिश होगी, ऐसा जरूरी नहीं है। बारिश का प्रभाव स्थानीय मौसम परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
कोल्हान प्रमंडल में दिख सकता है मौसम का सबसे अधिक असर
झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में चक्रवाती तूफान मुरासु से जुड़ी मौसम गतिविधियों का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक दिखाई देने का अनुमान है। इस प्रमंडल में पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले आते हैं।
जमशेदपुर सहित कोल्हान के कई इलाकों में आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। बादलों की मौजूदगी के कारण दिन के समय तेज धूप से राहत मिल सकती है। कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी भी हो सकती है।
पूर्वी सिंहभूम जिले में जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों में मौसम बदलने की संभावना है। शहरी इलाकों में बादल छाने से मौसम अपेक्षाकृत सुहावना हो सकता है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी हल्की बारिश होने की स्थिति बन सकती है।
पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा और आसपास के इलाकों में भी बादलों का प्रभाव देखने को मिल सकता है। सरायकेला-खरसावां जिले में भी मौसम में बदलाव की संभावना जताई गई है।
कोल्हान क्षेत्र में रहने वाले लोगों को अगले कुछ दिनों तक मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखने की सलाह दी जाती है। खासकर खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों को अचानक मौसम बदलने की स्थिति में सावधानी बरतनी चाहिए।
संताल परगना के जिलों में भी बारिश की संभावना
झारखंड के संताल परगना क्षेत्र में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। देवघर, दुमका, जामताड़ा, पाकुड़, साहिबगंज और गोड्डा में बादल छाए रहने और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने का अनुमान है।
संताल परगना के इन जिलों में नवंबर की शुरुआत के साथ ही मौसम में बदलाव महसूस किया जा सकता है। सुबह और शाम के समय तापमान में अंतर रहने की संभावना है। बादलों की वजह से दिन के समय धूप कम निकल सकती है।
देवघर में बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को मौसम की जानकारी लेकर यात्रा करने की सलाह दी जाती है। यदि किसी स्थान पर हल्की बारिश होती है तो मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में आवाजाही के दौरान थोड़ी परेशानी हो सकती है।
दुमका और जामताड़ा में भी आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है। पाकुड़, साहिबगंज और गोड्डा के कुछ इलाकों में भी हल्की बारिश हो सकती है। हालांकि, बारिश की मात्रा और समय में स्थानीय स्तर पर अंतर संभव है।
पलामू प्रमंडल के कुछ जिलों में मौसम रह सकता है शुष्क
जहां राज्य के दक्षिणी और संताल परगना क्षेत्रों में बादल छाने तथा हल्की बारिश की संभावना जताई गई है, वहीं पलामू प्रमंडल के कुछ जिलों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है।
पलामू प्रमंडल के कुछ हिस्सों में चक्रवाती तूफान का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रह सकता है। यहां आसमान साफ रहने या सामान्य बादलों की आवाजाही के बीच बारिश की संभावना कम बताई गई है।
इसका मतलब यह है कि झारखंड के सभी क्षेत्रों में मौसम एक जैसा नहीं रहेगा। एक ही दिन में किसी जिले में बादल और हल्की बारिश हो सकती है, जबकि दूसरे जिले में धूप निकल सकती है।
इसी वजह से लोगों को केवल राज्यस्तरीय मौसम पूर्वानुमान पर निर्भर रहने के बजाय अपने जिले की मौसम संबंधी जानकारी भी देखते रहना चाहिए।
मौसम केंद्र ने क्या कहा?
रांची स्थित मौसम केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान मुरासु का झारखंड में व्यापक प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, इसके कारण राज्य के कुछ हिस्सों में बादल छाने और हल्की बारिश होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
मौसम केंद्र के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, तूफान का सबसे अधिक प्रभाव झारखंड के दक्षिणी हिस्सों में दिखाई देने का अनुमान है। विशेष रूप से पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में मौसम संबंधी गतिविधियां अधिक देखने को मिल सकती हैं।
मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दो से तीन दिनों तक राज्य के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। वहीं, पलामू प्रमंडल के कुछ जिलों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है।
मौसम विभाग लगातार बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रही मौसमी परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है। तूफान की दिशा, उसकी गति और उसकी तीव्रता के आधार पर आगे के पूर्वानुमान में बदलाव भी हो सकता है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने भी झारखंड में 31 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच कुछ स्थानों पर बारिश की संभावना का उल्लेख किया है। India Meteorological Department+1
नवंबर की शुरुआत में मौसम क्यों बदल रहा है?
नवंबर का महीना झारखंड में मौसम के बदलाव के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। अक्टूबर के बाद धीरे-धीरे मानसून का प्रभाव समाप्त होने लगता है और ठंड का मौसम दस्तक देने लगता है। इस दौरान दिन और रात के तापमान में अंतर बढ़ने लगता है।
आमतौर पर नवंबर की शुरुआत में सुबह और शाम के समय हल्की ठंड महसूस होने लगती है। दिन में धूप निकलने के कारण मौसम सामान्य बना रहता है, लेकिन रात में तापमान कम होने से ठंड का एहसास बढ़ जाता है।
इस बार बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान मुरासु के कारण मौसम की सामान्य प्रक्रिया में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है। समुद्र से आने वाली नमी और वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण राज्य के कुछ हिस्सों में बादल बन सकते हैं।
जब वातावरण में नमी बढ़ती है और अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं, तब बादलों का निर्माण होता है। इसके परिणामस्वरूप कुछ स्थानों पर हल्की बारिश भी हो सकती है।
हालांकि, केवल बादल छाने का मतलब बारिश होना नहीं है। कई बार आसमान में बादल बने रहते हैं, लेकिन पर्याप्त मौसमी परिस्थितियां नहीं बनने के कारण बारिश नहीं होती।
इसी तरह झारखंड के कुछ जिलों में बादल छाने के बावजूद मौसम शुष्क रह सकता है।
किसानों के लिए मौसम में बदलाव क्यों है महत्वपूर्ण?
झारखंड में खेती का बड़ा हिस्सा मौसम और वर्षा पर निर्भर करता है। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान कृषि कार्यों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में नवंबर की शुरुआत में मौसम में होने वाला बदलाव किसानों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
इस समय राज्य के कई हिस्सों में खरीफ फसलों की कटाई और रबी फसलों की तैयारी का काम चलता है। धान की फसल तैयार होने के बाद किसान उसकी कटाई, सुखाने और सुरक्षित भंडारण की प्रक्रिया में जुटते हैं।
यदि इस दौरान हल्की बारिश होती है तो खेतों में तैयार फसलों और कटाई के बाद खुले स्थानों पर रखे धान पर असर पड़ सकता है। विशेष रूप से जिन किसानों ने धान की कटाई कर ली है, उन्हें फसल को खुले आसमान के नीचे लंबे समय तक नहीं छोड़ना चाहिए।
धान की फसल को सुरक्षित रखने के लिए किसानों को मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्य करने की जरूरत है। यदि बारिश की संभावना हो तो कटाई के बाद फसल को सुरक्षित और ढके हुए स्थान पर रखने की व्यवस्था करनी चाहिए।
इसके अलावा खेतों में तैयार फसलों की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है। जिन किसानों की फसल अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुई है, उन्हें जल्दबाजी में कटाई करने के बजाय स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेनी चाहिए।
रबी फसलों की बुवाई करने वाले किसानों के लिए भी मौसम की जानकारी उपयोगी हो सकती है। खेतों में नमी की स्थिति को देखते हुए ही आगे की कृषि गतिविधियों की योजना बनानी चाहिए।
हालांकि, बारिश की मात्रा और उसके वास्तविक प्रभाव के बारे में जानकारी मिलने के बाद ही कृषि कार्यों से संबंधित उचित निर्णय लेना बेहतर होगा।
आम लोगों को भी बदलते मौसम में रखनी होगी सावधानी
मौसम में अचानक बदलाव होने पर आम लोगों को भी अपनी दिनचर्या में कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। खासकर उन लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है, जिन्हें रोजाना काम के सिलसिले में घर से बाहर निकलना पड़ता है।
रांची, जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद और अन्य शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बाहर निकलने से पहले मौसम की जानकारी लेनी चाहिए।
यदि किसी इलाके में बारिश होती है तो दोपहिया वाहन चलाने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। गीली सड़कों पर वाहन फिसलने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए वाहन चलाते समय गति नियंत्रित रखना जरूरी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी मौसम में बदलाव के दौरान सतर्क रहना चाहिए। खेतों में काम करने वाले किसानों को आसमान में गरज-चमक या बिजली गिरने की स्थिति में खुले स्थानों पर काम करने से बचना चाहिए।
बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े होना या खुले मैदान में रहना सुरक्षित नहीं है। ऐसे समय में किसी सुरक्षित पक्के भवन के अंदर जाना बेहतर होता है।
इसके अलावा बच्चों और बुजुर्गों को भी मौसम में होने वाले बदलाव से बचाव के लिए उचित कपड़े पहनने चाहिए।
तापमान में क्या बदलाव देखने को मिल सकता है?
बादल छाने और हल्की बारिश होने से तापमान की स्थिति में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है। सामान्य तौर पर बादल दिन के समय सूर्य की सीधी गर्मी को कुछ हद तक रोक सकते हैं। इससे दिन का मौसम अपेक्षाकृत सुहावना महसूस हो सकता है।
वहीं, रात के समय बादलों की मौजूदगी के कारण धरती की गर्मी बाहर निकलने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इस वजह से कुछ स्थानों पर रात का तापमान अपेक्षाकृत सामान्य बना रह सकता है।
हालांकि, तापमान में कितनी गिरावट या बढ़ोतरी होगी, यह स्थानीय मौसम परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
रांची, हजारीबाग, गुमला और लोहरदगा जैसे क्षेत्रों में सुबह और रात के समय हल्की ठंड महसूस होने की संभावना है। वहीं, जमशेदपुर, सरायकेला और आसपास के क्षेत्रों में दिन के समय अपेक्षाकृत गर्मी महसूस हो सकती है।
मौसम साफ होने के बाद रात के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट देखने को मिल सकती है। यही वजह है कि नवंबर के पहले सप्ताह से राज्य में ठंड का असर धीरे-धीरे बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
शहरों में रहने वाले लोगों की दिनचर्या पर पड़ सकता है असर
रांची और जमशेदपुर जैसे बड़े शहरों में मौसम का बदलाव लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।
रांची में सुबह स्कूल और कार्यालय जाने वाले लोगों को आसमान में बादल और हल्की बारिश की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। इसी तरह जमशेदपुर में औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों और बाहर काम करने वाले लोगों को मौसम की जानकारी लेकर घर से निकलना चाहिए।
बोकारो और धनबाद में भी बादलों की आवाजाही के कारण दिन के मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। इन शहरों में कामकाजी लोगों को बारिश की संभावना को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनानी चाहिए।
दूसरी ओर देवघर, दुमका और साहिबगंज जैसे जिलों में भी स्थानीय मौसम परिस्थितियों के अनुसार बादल और बूंदाबांदी हो सकती है।
हालांकि, मौसम के इस बदलाव से सामान्य जनजीवन पर बड़े स्तर पर असर पड़ने की संभावना नहीं है। हल्की बारिश होने पर कुछ समय के लिए आवाजाही प्रभावित हो सकती है, लेकिन व्यापक व्यवधान की आशंका जताने वाला कोई आधार उपलब्ध नहीं है।
पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर जाने वाले लोग रखें ध्यान
झारखंड में नवंबर का महीना पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान मौसम अपेक्षाकृत सुहावना होने के कारण लोग परिवार के साथ घूमने-फिरने की योजना बनाते हैं।
रांची के आसपास स्थित पर्यटन स्थलों, जलप्रपातों और प्राकृतिक स्थानों पर इस समय पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है।
नेतरहाट, दशम फॉल, हुंडरू फॉल, जोन्हा फॉल और अन्य पर्यटन स्थलों पर जाने वाले लोगों को मौसम की स्थिति की जानकारी लेकर यात्रा करनी चाहिए।
यदि किसी इलाके में बारिश होती है तो जलप्रपातों और नदियों के आसपास विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बारिश के बाद चट्टानें और रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं।
इसी तरह देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम और अन्य धार्मिक स्थलों पर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी मौसम के अनुसार यात्रा की तैयारी करनी चाहिए।
क्या झारखंड में भारी बारिश की संभावना है?
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, झारखंड में चक्रवाती तूफान मुरासु का व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश और बादल छाने की स्थिति बन सकती है।
इसलिए फिलहाल इस मौसमी बदलाव को भारी बारिश या बड़े प्राकृतिक संकट के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
हालांकि, मौसम की परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं। यदि चक्रवाती तूफान की दिशा या तीव्रता में बदलाव होता है तो उसके अनुसार मौसम विभाग अपने पूर्वानुमान में संशोधन कर सकता है।
लोगों को सलाह दी जाती है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली अपुष्ट खबरों पर भरोसा करने के बजाय भारत मौसम विज्ञान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट और मौसम संबंधी बुलेटिन को प्राथमिकता दें।
4 नवंबर के बाद कैसा रह सकता है मौसम?
मौजूदा पूर्वानुमान के अनुसार, 2 से 4 नवंबर के बीच झारखंड के कुछ हिस्सों में बादल छाने और हल्की बारिश होने की संभावना है। इसके बाद मौसम की स्थिति में बदलाव आ सकता है।
यदि बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती प्रणाली का प्रभाव कमजोर पड़ता है और राज्य में मौसम सामान्य होता है तो आसमान साफ होने की संभावना है।
आसमान साफ होने के बाद सुबह और रात के तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है। इसके साथ ही राज्य के कई हिस्सों में ठंड का एहसास बढ़ सकता है।
हालांकि, 4 नवंबर के बाद मौसम पूरी तरह कैसा रहेगा, इसे लेकर मौसम विभाग के आगामी पूर्वानुमान महत्वपूर्ण होंगे।
मौसम विभाग की सलाह: ताजा अपडेट पर रखें नजर
मौसम में बदलाव को देखते हुए लोगों को अगले कुछ दिनों तक मौसम विभाग की ओर से जारी होने वाले अपडेट पर नजर रखनी चाहिए। विशेष रूप से दक्षिणी झारखंड और संताल परगना क्षेत्र के लोगों को स्थानीय मौसम की जानकारी लेते रहना चाहिए।
किसानों को अपनी फसल और कृषि कार्यों की योजना मौसम के अनुसार बनानी चाहिए। वहीं, आम लोगों को यात्रा के दौरान बारिश और खराब मौसम की स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए।
बिजली चमकने और गरज-चमक की स्थिति में खुले स्थानों पर रहने से बचना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों को बदलते मौसम में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
मौसम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट IMD मौसम विभाग पर जिलेवार मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, नवंबर की शुरुआत में झारखंड का मौसम बदलने के संकेत मिल रहे हैं। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान मुरासु के कारण राज्य के कुछ जिलों में बादल छाए रह सकते हैं और हल्की बारिश होने की संभावना है।
रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा, हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह, कोडरमा और संताल परगना के कई जिलों में मौसम का मिजाज बदला रह सकता है। वहीं, कोल्हान क्षेत्र के पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में इसका अपेक्षाकृत अधिक प्रभाव दिखाई देने का अनुमान है।
दूसरी ओर पलामू प्रमंडल के कुछ जिलों में मौसम शुष्क रह सकता है। फिलहाल राज्य में चक्रवाती तूफान के व्यापक प्रभाव की आशंका नहीं है, लेकिन अगले दो से तीन दिनों तक मौसम पर नजर रखना जरूरी होगा।