रांची: झारखंड में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। बंगाल की खाड़ी में बने भीषण चक्रवाती तूफान ‘अर्णब’ का असर अब राज्य के कई जिलों में देखने को मिल रहा है। राजधानी रांची समेत झारखंड के विभिन्न हिस्सों में रुक-रुककर बारिश हो रही है। कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम में आए इस बदलाव के कारण लोगों को अक्टूबर के महीने में ही ठंड का एहसास होने लगा है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 29 अक्टूबर को झारखंड के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के कई हिस्सों में बहुत भारी बारिश, गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की आशंका है। 30 अक्टूबर को भी कुछ इलाकों में गरज के साथ बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।
चक्रवात के प्रभाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। रांची, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सिमडेगा सहित प्रभावित जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई स्थगित रखने का आदेश जारी किया गया है। इसका उद्देश्य खराब मौसम के दौरान बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
राजधानी रांची में बुधवार सुबह से ही बारिश का सिलसिला जारी रहा। कई इलाकों में तेज बारिश और बादलों के कारण दिनभर मौसम बदला हुआ दिखाई दिया। सड़कों पर पानी जमा होने और तेज हवाओं के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा।
मौसम विभाग की चेतावनी के बाद प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें। बिजली के खंभों, खुले तारों और बड़े पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। विशेष रूप से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
इस समय झारखंड के लोगों की नजर मौसम विभाग के अगले अपडेट पर टिकी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार चक्रवात का सीधा प्रवेश झारखंड में नहीं हुआ है, लेकिन आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र में सक्रिय इस तूफान का प्रभाव राज्य के मौसम पर पड़ रहा है।Jagran+3
बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती तूफान अर्णब, झारखंड तक पहुंचा प्रभाव
बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ चक्रवाती तूफान अर्णब देश के कई राज्यों के मौसम को प्रभावित कर रहा है। इस तूफान ने 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट पर दस्तक दी थी। इसके बाद इसके प्रभाव से आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड के कई हिस्सों में बारिश और खराब मौसम की स्थिति बनी।
मौसम विभाग के अनुसार तूफान का प्रभाव केवल तटीय इलाकों तक सीमित नहीं रहा। इसके कारण कई राज्यों में बादल, तेज हवाएं, गरज-चमक और भारी बारिश की परिस्थितियां बनीं।
झारखंड समुद्र से दूर स्थित राज्य है, इसलिए चक्रवात का सीधा लैंडफॉल यहां नहीं हुआ। हालांकि, चक्रवाती परिसंचरण और उससे जुड़ी मौसम प्रणालियों के कारण राज्य में बारिश की गतिविधियां बढ़ गई हैं।
रांची के मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार तूफान का प्रभाव अगले कुछ समय तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में देखने को मिल सकता है। 29 अक्टूबर को इसका असर अधिक रहने की संभावना जताई गई है।
मौसम में बदलाव का प्रभाव तापमान पर भी पड़ा है। लगातार बादल छाए रहने और बारिश के कारण अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। लोगों को सुबह और शाम के समय ठंड महसूस होने लगी है।
यह मौसम परिवर्तन किसानों, आम नागरिकों, विद्यार्थियों और रोजाना काम के लिए बाहर जाने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
रांची समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 29 अक्टूबर को झारखंड के लिए बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग की ताजा जिला-स्तरीय चेतावनी के अनुसार राज्य में बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है।
रांची, खूंटी, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जैसे क्षेत्रों में चक्रवात से जुड़े मौसम परिवर्तन का प्रभाव देखने को मिला है।
कुछ जिलों में पहले ही बारिश दर्ज की गई है। वहीं, अगले कुछ घंटों में मौसम और खराब होने की संभावना को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग की 29 अक्टूबर को जारी चेतावनी के अनुसार:
- 29 अक्टूबर: बहुत भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना।
- 30 अक्टूबर: कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका।
- 31 अक्टूबर: फिलहाल कोई विशेष मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है।
- 1 नवंबर से: उपलब्ध पूर्वानुमान में विशेष चेतावनी नहीं है।
मौसम विभाग ने लोगों को बिजली गिरने के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है।Sub-Divisionwise Warning+1
रांची में सुबह से बारिश, तापमान में आई गिरावट
राजधानी रांची में चक्रवात अर्णब का प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है। बुधवार सुबह लगभग चार बजे से ही कई इलाकों में मूसलधार बारिश हुई। इसके बाद दिनभर आसमान में बादल छाए रहे और रुक-रुककर बारिश होती रही।
रांची के कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़कों पर पानी जमा होने और मौसम खराब रहने के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार रांची में बुधवार को 2.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। वहीं अधिकतम तापमान 24.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से 3.6 डिग्री कम था।
लगातार बारिश और ठंडी हवाओं के कारण शहर में लोगों को मौसम में बदलाव महसूस होने लगा है। कई लोग अब सुबह और शाम गर्म कपड़ों का इस्तेमाल करने लगे हैं।
रांची के मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार चक्रवात का सीधा प्रवेश झारखंड में नहीं हो रहा है, लेकिन इसका प्रभाव राज्य के मौसम पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि अगले 24 घंटों के दौरान रांची सहित राज्य के अधिकांश जिलों में इसका असर देखने को मिल सकता है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार गुरुवार रात तक बारिश की गतिविधियां जारी रहने की आशंका जताई गई है। इसके बाद धीरे-धीरे मौसम में सुधार हो सकता है।
जमशेदपुर, चाईबासा और सरायकेला में भी बारिश का असर
चक्रवात अर्णब का असर केवल रांची तक सीमित नहीं है। कोल्हान क्षेत्र के कई जिलों में भी बारिश दर्ज की गई है।
जमशेदपुर में बुधवार को 8.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं चाईबासा में 13 मिलीमीटर और सरायकेला में 6 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई।

पूर्वी सिंहभूम के बहरागोड़ा में 5 मिलीमीटर तथा दारिसाई में 14.5 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
लगातार बारिश के कारण इन क्षेत्रों में भी तापमान में बदलाव देखने को मिला है। कई स्थानों पर आसमान में बादल छाए रहने और ठंडी हवाएं चलने से लोगों को गर्मी से राहत मिली है।
हालांकि, लगातार बारिश होने से कुछ इलाकों में जलजमाव की समस्या उत्पन्न हो सकती है। निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकानों, कमजोर छतों और बिजली के खुले तारों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।
चार जिलों में 29 अक्टूबर तक स्कूल बंद, बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रशासन का फैसला
चक्रवात अर्णब और भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए झारखंड के कई जिलों में स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
रांची, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सिमडेगा जिला प्रशासन ने 28 और 29 अक्टूबर को विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में पढ़ाई स्थगित करने के आदेश जारी किए हैं।
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य खराब मौसम के दौरान बच्चों को सुरक्षित रखना है।
रांची में सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों में केजी से लेकर 12वीं कक्षा तक विद्यार्थियों की कक्षाएं स्थगित रखने का निर्णय लिया गया है।
जिला प्रशासन ने मौसम विभाग की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को परेशानी हो सकती थी।
स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और गैर-शैक्षणिक कार्यों से संबंधित निर्देश जिले के अलग-अलग आदेशों के अनुसार लागू हैं। इसलिए विद्यार्थियों और अभिभावकों को अपने स्कूल या जिला प्रशासन की आधिकारिक सूचना देखकर ही जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
अभिभावकों से अपील की गई है कि वे बच्चों को खराब मौसम में अनावश्यक रूप से बाहर न भेजें।Careers360+3
खूंटी जिले में भी दो दिनों तक स्कूलों में पढ़ाई स्थगित
झारखंड के खूंटी जिले में भी चक्रवात अर्णब के प्रभाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं।
भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी के कारण 28 और 29 अक्टूबर को जिले के स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई स्थगित रखने का आदेश जारी किया गया है।
जिला प्रशासन के निर्देश के अनुसार सरकारी, गैर-सरकारी सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों में केजी से 12वीं कक्षा तक पढ़ाई स्थगित रखने की व्यवस्था की गई है।
यह निर्णय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 34 के तहत लिया गया है।
हालांकि, सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों को निर्धारित तिथियों में विद्यालय में उपस्थित रहकर गैर-शैक्षणिक कार्य करने का निर्देश दिया गया है। उन्हें ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए भी कहा गया है।
इस फैसले से स्पष्ट है कि प्रशासन बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।
खूंटी में रहने वाले अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की स्थिति को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।
पश्चिमी सिंहभूम और पूर्वी सिंहभूम में भी सतर्कता
कोल्हान क्षेत्र के पश्चिमी सिंहभूम और पूर्वी सिंहभूम जिलों में भी मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लिया गया है।
इन जिलों में बारिश और तेज हवाओं के कारण सामान्य गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
प्रशासन ने स्कूल बंद रखने के साथ-साथ लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि तेज हवा और बारिश के कारण पेड़ों की डालियां टूटने, बिजली के तार गिरने और कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में लोगों को स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग से संपर्क करना चाहिए।
किसानों की बढ़ी चिंता, खेतों में लगी फसलों पर पड़ सकता है असर
चक्रवात अर्णब के प्रभाव से झारखंड में हो रही बारिश ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है।
राज्य के कई ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में लगातार बारिश होने से खेतों और फसलों पर प्रभाव पड़ सकता है।
इस समय कई क्षेत्रों में खरीफ फसलों की कटाई, सुखाने और भंडारण से संबंधित गतिविधियां चल रही होती हैं। ऐसे में अचानक बारिश होने से किसानों को परेशानी हो सकती है।
धान की फसल पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। जिन किसानों की फसल पक चुकी है और कटाई की तैयारी चल रही है, उन्हें मौसम की स्थिति के अनुसार काम करने की सलाह दी जाती है।
लगातार बारिश होने से खेतों में पानी जमा हो सकता है। इससे कटाई के बाद खेतों में रखी फसल भी प्रभावित हो सकती है।
किसानों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- कटी हुई फसल को खुले खेतों में लंबे समय तक न छोड़ें।
- अनाज को सुरक्षित और सूखे स्थान पर रखें।
- खेतों में जलनिकासी की उचित व्यवस्था करें।
- बिजली चमकने के दौरान खेतों में काम करने से बचें।
- मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार कृषि गतिविधियों की योजना बनाएं।
हालांकि, बारिश का वास्तविक प्रभाव अलग-अलग जिलों और फसलों की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।
कृषि विभाग और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर ही किसानों को आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
तेज हवाओं और बिजली गिरने का खतरा, प्रशासन ने लोगों को किया सतर्क
चक्रवाती तूफान से जुड़े मौसम में केवल बारिश ही नहीं, बल्कि तेज हवाओं और बिजली गिरने का खतरा भी रहता है।
मौसम विभाग ने झारखंड के लिए गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है।
ऐसी परिस्थितियों में लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए।
खुले मैदान में न रहें: बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान, खेत या ऊंचे स्थान पर खड़े होना खतरनाक हो सकता है।
पेड़ों के नीचे शरण न लें: तेज हवा और बिजली गिरने की स्थिति में बड़े पेड़ों के नीचे खड़ा होना जोखिम भरा है।
बिजली के खंभों से दूर रहें: टूटे हुए बिजली के तार और खंभे जानलेवा हो सकते हैं। ऐसे स्थानों से दूरी बनाए रखें।
कमजोर मकानों से सावधान रहें: तेज हवाओं के दौरान कमजोर छतों और अस्थायी निर्माणों के आसपास रहने से बचें।
अनावश्यक यात्रा से बचें: खराब मौसम में लंबी दूरी की यात्रा करने से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी जरूर लें।
मोबाइल और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखें: आपातकालीन स्थिति में परिवार के सदस्यों के संपर्क नंबर और जरूरी दस्तावेज अपने पास रखें।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लें और अफवाहों पर ध्यान न दें।India News+1
सड़कों पर जलजमाव और यातायात प्रभावित होने की आशंका
लगातार बारिश के कारण राजधानी रांची सहित कई शहरों में सड़कों पर जलजमाव की समस्या पैदा हो सकती है।
शहर के निचले इलाकों में बारिश का पानी जमा होने से पैदल चलने वाले लोगों और दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी हो सकती है।
कई बार तेज बारिश के दौरान नालियों का पानी सड़कों पर आ जाता है। इससे यातायात की गति धीमी हो जाती है और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
रांची जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में जलनिकासी की व्यवस्था एक महत्वपूर्ण विषय है। भारी बारिश के दौरान सड़कों और निचले इलाकों में पानी जमा होने से आम लोगों को काफी परेशानी होती है।
ऐसी स्थिति में नगर निगम और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
प्रशासन को जलजमाव वाले क्षेत्रों पर निगरानी रखने, नालियों की सफाई और आवश्यकतानुसार जलनिकासी की व्यवस्था करने की जरूरत है।
वाहन चालकों को भी पानी से भरी सड़कों पर तेज गति से वाहन चलाने से बचना चाहिए।
बिजली व्यवस्था और पेयजल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है प्रभाव
तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना रहती है।
कई बार पेड़ों की शाखाएं बिजली के तारों पर गिर जाती हैं। इससे बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है।
ग्रामीण इलाकों में बिजली के खंभों और तारों को नुकसान पहुंचने की स्थिति में मरम्मत कार्य में समय लग सकता है।
इसके अलावा लगातार बारिश के कारण कुछ क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।
ऐसी परिस्थितियों में लोगों को घरों में आवश्यक पेयजल सुरक्षित रखने की सलाह दी जाती है।
यदि किसी इलाके में बिजली का तार टूटकर गिर जाता है, तो उसे छूने या हटाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इसकी सूचना तुरंत बिजली विभाग या स्थानीय प्रशासन को देनी चाहिए।
चक्रवात का असर झारखंड के बाहर भी, कई राज्यों में मौसम खराब
चक्रवात अर्णब का प्रभाव केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहा है। इसके कारण देश के कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं की स्थिति बनी है।
आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में चक्रवात का सीधा असर देखने को मिला। इसके अलावा ओडिशा के कई जिलों में भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई।
पश्चिम बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी इस मौसम प्रणाली के प्रभाव से बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां दर्ज की गईं।
आंध्र प्रदेश में चक्रवात के तट से टकराने के बाद कई क्षेत्रों में तेज हवाएं चलीं और बारिश हुई।
मौसम विभाग ने अलग-अलग राज्यों के लिए उनकी भौगोलिक स्थिति और मौसम की परिस्थितियों के अनुसार चेतावनियां जारी की हैं।
झारखंड में इसका प्रभाव मुख्य रूप से बारिश, बादल और तेज हवाओं के रूप में दिखाई दे रहा है।
इसलिए राज्य के लोगों को यह समझना जरूरी है कि झारखंड में चक्रवात का सीधा लैंडफॉल नहीं हुआ है, बल्कि दूसरे क्षेत्र में सक्रिय चक्रवात से जुड़ी मौसम प्रणाली के कारण यहां बारिश हो रही है।Business Standard+3
क्या 1 नवंबर से झारखंड में मौसम सामान्य हो जाएगा?
चक्रवात अर्णब के प्रभाव के बाद लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्य में बारिश कब रुकेगी और मौसम कब सामान्य होगा।
मौसम विभाग की 29 अक्टूबर को जारी चेतावनी के अनुसार, 29 अक्टूबर को बहुत भारी बारिश की संभावना है। वहीं 30 अक्टूबर को गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है।
31 अक्टूबर और 1 नवंबर के लिए उपलब्ध झारखंड उपखंडीय चेतावनी में कोई विशेष मौसम चेतावनी नहीं दिखाई गई है।
इससे संकेत मिलता है कि मौसम की गंभीर स्थिति धीरे-धीरे कम हो सकती है। हालांकि, किसी विशेष जिले में बारिश पूरी तरह बंद होने या तापमान सामान्य होने की गारंटी नहीं दी जा सकती।
बारिश रुकने के बाद आसमान साफ होने पर दिन के तापमान में बदलाव आ सकता है। वहीं रात के तापमान में गिरावट होने से ठंड का एहसास बढ़ सकता है।
नवंबर की शुरुआत के साथ राज्य में सर्दी का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ने की संभावना भी रहती है।
लोगों को मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।Sub-Divisionwise Warning+1
झारखंड के प्रमुख जिलों में मौसम का हाल
| जिला | मौसम की स्थिति |
|---|---|
| रांची | भारी बारिश की चेतावनी |
| खूंटी | बारिश और तेज हवाओं का प्रभाव |
| जमशेदपुर | बारिश दर्ज, मौसम बदला |
| चाईबासा | भारी बारिश दर्ज |
| सरायकेला | बारिश और बादल |
| सिमडेगा | चक्रवात से प्रभावित मौसम |
| गुमला | बारिश की संभावना |
| लोहरदगा | मौसम विभाग की चेतावनी |
| पूर्वी सिंहभूम | बारिश और तेज हवाओं का प्रभाव |
| पश्चिमी सिंहभूम | बारिश की चेतावनी |
यह सूची मौसम संबंधी रिपोर्टों पर आधारित है। हर जिले में एक जैसी बारिश या चेतावनी होना जरूरी नहीं है।
निष्कर्ष: झारखंड में मौसम को लेकर अलर्ट, लोगों से सावधानी बरतने की अपील
झारखंड में चक्रवाती तूफान अर्णब का प्रभाव राज्य के कई जिलों में देखने को मिल रहा है। राजधानी रांची से लेकर जमशेदपुर, चाईबासा, खूंटी और सिमडेगा तक बारिश और मौसम में बदलाव की स्थिति बनी हुई है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 29 अक्टूबर को बहुत भारी बारिश और गरज-चमक की चेतावनी जारी की है। वहीं 30 अक्टूबर को भी कुछ क्षेत्रों में खराब मौसम की संभावना बनी हुई है।
मौसम की गंभीरता को देखते हुए कई जिलों में स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।
किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है। वहीं शहरों में रहने वाले लोगों को जलजमाव, बिजली के तारों और तेज हवाओं से सावधान रहना चाहिए।
फिलहाल मौसम विभाग की नजर राज्य के मौसम पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है, लेकिन लोगों को आधिकारिक मौसम अपडेट का पालन करना चाहिए।
झारखंड में चक्रवात अर्णब का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। ऐसे में लोगों की सुरक्षा और प्रशासन की सतर्कता सबसे महत्वपूर्ण है।