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रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC में लंबे समय से खाली पड़े अध्यक्ष और सदस्यों के पदों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट समय-सीमा में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार अगले दो महीने के भीतर JPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करे। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि दो महीने में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी किए जाने की संभावना है। सरकार के इस आश्वासन के बाद अदालत ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्रवाई पूरी करने और उसकी अनुपालन रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को होगी।

यह मामला केवल JPSC के खाली पदों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर झारखंड में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया और प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन पर पड़ सकता है। JPSC राज्य की कई महत्वपूर्ण सरकारी सेवाओं में भर्ती प्रक्रिया संचालित करने वाली संवैधानिक संस्था है। ऐसे में आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद लंबे समय तक खाली रहने से भर्ती और परीक्षा से जुड़े काम प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।

हाईकोर्ट का यह निर्देश ऐसे समय आया है, जब राज्य में विभिन्न सरकारी विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों के पद खाली होने तथा भर्ती प्रक्रियाओं में देरी को लेकर अदालत पहले से ही गंभीरता दिखा रही है। अदालत ने वन विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान JPSC की स्थिति पर भी संज्ञान लिया।

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JPSC के खाली पदों पर हाईकोर्ट सख्त

झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को JPSC में अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों को लेकर सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने अदालत के सामने JPSC में नियुक्ति को लेकर सरकार की स्थिति स्पष्ट की।

सरकार की ओर से बताया गया कि JPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है और आगामी दो महीनों में यह प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। अदालत ने सरकार का पक्ष सुनने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया।

अदालत ने यह भी कहा कि सरकार को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करनी होगी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सरकार को 18 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी है और मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी।

इस आदेश के बाद अब सरकार के सामने JPSC के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की जिम्मेदारी है।

दो महीने में पूरी करनी होगी नियुक्ति प्रक्रिया

हाईकोर्ट के आदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसकी समय-सीमा है। अदालत ने सरकार को अनिश्चित समय तक नियुक्ति प्रक्रिया चलाने की अनुमति नहीं दी है, बल्कि दो महीने के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।

JPSC जैसी संस्था के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति में कई प्रशासनिक और संवैधानिक चरण होते हैं। इसलिए सरकार को अब इन सभी चरणों को निर्धारित समय में पूरा करना होगा।

अदालत के निर्देश के बाद सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक कदम उठाने होंगे और यह सुनिश्चित करना होगा कि तय समय-सीमा के भीतर प्रक्रिया आगे बढ़े। इसके बाद अदालत में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।

इस रिपोर्ट के आधार पर अदालत यह देख सकती है कि सरकार ने नियुक्ति को लेकर वास्तव में क्या कदम उठाए हैं और प्रक्रिया किस स्तर तक पहुंची है।

वन विभाग की याचिका से सामने आया JPSC का मुद्दा

JPSC में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति का यह मामला सीधे तौर पर एक अन्य महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया। झारखंड हाईकोर्ट वन विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी से जुड़े मामले पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है।

सुनवाई के दौरान राज्य में विभिन्न विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों के रिक्त पदों का मुद्दा सामने आया। विशेष रूप से वन विभाग में कई महत्वपूर्ण पदों पर पर्याप्त संख्या में अधिकारी और कर्मचारी नहीं होने की बात अदालत के सामने आई।

ऐसे में अदालत ने यह भी जानना चाहा कि जिन पदों पर नियुक्ति JPSC के माध्यम से होनी है, उनकी प्रक्रिया की स्थिति क्या है। इसी क्रम में JPSC के अध्यक्ष और सदस्यों के खाली पदों का मुद्दा महत्वपूर्ण बन गया।

अगर आयोग में शीर्ष पद ही खाली रहें तो भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में प्रशासनिक और संस्थागत परेशानी हो सकती है। इसी वजह से हाईकोर्ट ने सरकार से स्पष्ट समय-सीमा मांगी।

JPSC अध्यक्ष के पद का खाली रहना क्यों महत्वपूर्ण?

झारखंड लोक सेवा आयोग राज्य की महत्वपूर्ण भर्ती संस्था है। राज्य की विभिन्न सरकारी सेवाओं में अधिकारियों की नियुक्ति के लिए आयोग प्रतियोगी परीक्षाओं और चयन प्रक्रियाओं का संचालन करता है।

आयोग में अध्यक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। अध्यक्ष और सदस्यों के स्तर पर आयोग के प्रशासनिक तथा परीक्षा से जुड़े निर्णय लिए जाते हैं। ऐसे में लंबे समय तक शीर्ष पदों पर रिक्तता रहने से आयोग की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।

यही कारण है कि हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।

सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली होने के बावजूद अगर भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती है, तो इसका सीधा असर युवाओं पर पड़ता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा का कैलेंडर, विज्ञापन, आवेदन, परीक्षा, परिणाम और नियुक्ति की प्रक्रिया समय पर होना बेहद महत्वपूर्ण है।

सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं को उम्मीद

हाईकोर्ट के इस आदेश से झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के बीच उम्मीद बढ़ी है। लंबे समय से JPSC और दूसरी सरकारी भर्तियों में देरी की खबरें अभ्यर्थियों के लिए चिंता का कारण रही हैं।

आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति होने के बाद भर्ती प्रक्रिया को संस्थागत रूप से मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी लंबित परीक्षाएं तुरंत शुरू हो जाएंगी। नियुक्ति के बाद आयोग को प्रशासनिक स्तर पर कामकाज व्यवस्थित करना होगा और फिर संबंधित भर्ती प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाना होगा।

फिर भी हाईकोर्ट का आदेश इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वन विभाग की भर्ती प्रक्रिया भी चर्चा में

इस पूरे मामले में वन विभाग की भर्ती प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। सुनवाई के दौरान JPSC की ओर से अदालत को बताया गया था कि Assistant Conservator of Forest और Range Forest Officer जैसे पदों पर भर्ती प्रक्रिया से संबंधित परीक्षा आयोजित की जा चुकी थी और उससे जुड़ा परिणाम भी जारी किया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, शारीरिक दक्षता परीक्षा की तारीख भी निर्धारित की गई थी, लेकिन बाद में भर्ती प्रक्रिया पर असर पड़ा। आयोग के अध्यक्ष के इस्तीफे और अन्य परिस्थितियों के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

अदालत में यह भी बताया गया कि संबंधित वन विभाग की नियुक्ति प्रक्रिया राज्य सरकार की ओर से रद्द कर दी गई है। इस स्थिति ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर और अधिक सवाल खड़े किए।

हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान इसी व्यापक स्थिति को देखते हुए JPSC के रिक्त पदों को भरने का मुद्दा सामने आया।

JPSC में नियुक्ति होने से क्या बदलेगा?

अगर सरकार अगले दो महीने में JPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर लेती है, तो आयोग के कामकाज में स्थिरता आने की उम्मीद है।

सबसे पहले आयोग के प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी। इसके बाद लंबित भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर आयोग स्तर पर निर्णय लेने का रास्ता साफ हो सकता है।

प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित कार्यक्रम, भर्ती विज्ञापन, परीक्षा संचालन, परिणाम और अन्य प्रक्रियाओं के लिए आयोग को पूर्ण संरचना की आवश्यकता होती है।

हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने में समय लगता है। इसलिए केवल अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के बाद सभी परीक्षाओं के परिणाम तुरंत आने की उम्मीद करना सही नहीं होगा।

JPSC और अभ्यर्थियों के बीच भरोसा भी महत्वपूर्ण

JPSC से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर पिछले कुछ वर्षों में कई विवाद सामने आए हैं। ऐसे में आयोग की विश्वसनीयता और अभ्यर्थियों का भरोसा बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है।

झारखंड के हजारों युवा सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं। वे कई वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में समय और पैसा लगाते हैं।

अगर परीक्षा का आयोजन समय पर नहीं होता, परिणाम में देरी होती है या भर्ती प्रक्रिया बार-बार रुकती है, तो इसका असर अभ्यर्थियों की उम्र और करियर दोनों पर पड़ सकता है।

इसलिए आयोग के स्तर पर पारदर्शी, समयबद्ध और भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था जरूरी है।

हाईकोर्ट ने पहले भी मांगी थी समय-सीमा

इस मामले में हाईकोर्ट ने इससे पहले भी सरकार से JPSC में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट समय-सीमा मांगी थी।

3 सितंबर की पिछली सुनवाई में अदालत ने सरकार से पूछा था कि JPSC में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया कब शुरू की जाएगी और इसे कब तक पूरा किया जाएगा। अदालत ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा था।

सरकार की ओर से उस समय आवश्यक निर्देश प्राप्त कर जवाब देने के लिए समय मांगा गया था। इसके बाद 10 सितंबर की सुनवाई में सरकार ने अदालत को बताया कि अगले दो महीने में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है।

इसी आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने दो महीने की समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया।

सरकार के सामने अब क्या जिम्मेदारी है?

अब राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह है कि वह नियुक्ति प्रक्रिया को सिर्फ कागजों तक सीमित न रखे, बल्कि निर्धारित समय में उसे पूरा करे।

सरकार को संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसके बाद आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।

अदालत के सामने सरकार को अपनी कार्रवाई का विवरण भी देना होगा।

18 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट और 19 नवंबर को अगली सुनवाई होने के कारण सरकार की कार्रवाई पर अब अदालत की नजर रहेगी।

19 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

इस मामले में अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। उस समय अदालत के सामने सरकार की ओर से अनुपालन रिपोर्ट पेश किए जाने की उम्मीद है।

अदालत यह देखेगी कि दो महीने में नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सरकार ने क्या कदम उठाए और प्रक्रिया किस स्थिति में पहुंची।

अगर नियुक्ति प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती है तो अदालत के सामने सरकार अपने आदेश के अनुपालन की जानकारी दे सकेगी। अगर किसी कारण से प्रक्रिया में देरी होती है तो सरकार को उसका कारण भी बताना पड़ सकता है।

इस वजह से 19 नवंबर की सुनवाई JPSC के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भर्ती परीक्षाओं पर भी पड़ेगा असर

JPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति का असर केवल आयोग के प्रशासन पर नहीं पड़ेगा, बल्कि इससे राज्य की आने वाली भर्ती परीक्षाओं पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

राज्य में कई विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों के पद खाली हैं। इन पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया जरूरी है। JPSC ऐसी कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों में भूमिका निभाता है।

अगर आयोग में पर्याप्त नेतृत्व और सदस्य उपलब्ध होते हैं तो विभिन्न परीक्षाओं और चयन प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने में सुविधा हो सकती है।

यही वजह है कि हाईकोर्ट के आदेश को सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वन विभाग में खाली पदों की समस्या

वन विभाग से संबंधित मामले में हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान का मूल कारण भी अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी है।

वन विभाग में प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा तकनीकी और क्षेत्रीय स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों की जरूरत होती है। खाली पदों के कारण विभाग के कामकाज पर असर पड़ सकता है।

वन संरक्षण, जंगलों की निगरानी, वन्यजीव संरक्षण और अवैध कटाई जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए पर्याप्त मानव संसाधन जरूरी है।

हाईकोर्ट ने इसी व्यापक स्थिति को गंभीरता से लेते हुए मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कई पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

वन और वन्यजीव संरक्षण का मुद्दा भी जुड़ा

अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार, इस मामले की शुरुआत जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा से जुड़े एक जनहित मामले से हुई थी। अदालत ने जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा को गंभीरता से लेते हुए मामले को स्वतः संज्ञान में लिया था।

सुनवाई के दौरान यह सवाल उठा कि वन विभाग में पर्याप्त अधिकारी और कर्मचारी नहीं हैं। इसके बाद सरकारी विभागों में खाली पदों और भर्ती प्रक्रिया की स्थिति पर चर्चा हुई।

जब भर्ती प्रक्रिया JPSC से जुड़ी होने की बात सामने आई, तो आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों का मुद्दा भी अदालत के सामने आया।

इस तरह वन संरक्षण से शुरू हुआ मामला अब राज्य की भर्ती व्यवस्था और JPSC के प्रशासनिक ढांचे तक पहुंच गया है।

प्रतियोगी परीक्षाओं पर क्यों पड़ता है असर?

JPSC के अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली होने से प्रतियोगी परीक्षाओं पर असर पड़ने की संभावना इसलिए रहती है क्योंकि आयोग को परीक्षा प्रक्रिया के कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने होते हैं।

परीक्षा का आयोजन, प्रश्नपत्र की प्रक्रिया, मूल्यांकन, परिणाम, अभ्यर्थियों से जुड़े विवाद और चयन प्रक्रिया जैसे मामलों में आयोग की भूमिका होती है।

ऐसे में आयोग का पूर्ण रूप से सक्रिय होना जरूरी है।

अगर किसी कारण से आयोग की कार्यप्रणाली बाधित होती है तो उसका सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है, जो वर्षों से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं।

पुराने विवादों के बाद चुनौती और बढ़ी

झारखंड में पिछले कुछ वर्षों में भर्ती परीक्षाओं को लेकर कई विवाद सामने आए हैं। JPSC और JSSC दोनों की परीक्षाओं को लेकर कभी पेपर लीक, कभी परिणाम और कभी नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठते रहे हैं।

ऐसे माहौल में JPSC के लिए सबसे बड़ी चुनौती पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना है।

नए अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के बाद आयोग को परीक्षा प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की जरूरत होगी।

अभ्यर्थियों की मांग भी यही रहती है कि परीक्षा का कैलेंडर स्पष्ट हो, आवेदन से लेकर नियुक्ति तक समय सीमा तय हो और किसी भी विवाद की स्थिति में उसका जल्द समाधान किया जाए।

सरकार के फैसले पर अदालत की नजर

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब यह मामला केवल सरकार के प्रशासनिक निर्णय तक सीमित नहीं है। अदालत भी इसकी प्रगति पर नजर रखेगी।

सरकार को अनुपालन रिपोर्ट के माध्यम से बताना होगा कि उसने अदालत के निर्देश के बाद क्या कार्रवाई की है।

इससे नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही भी तय होगी।

अगर सरकार समय पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करती है तो इससे JPSC को नई कार्यशील व्यवस्था मिल सकती है। वहीं अगर प्रक्रिया में देरी होती है तो 19 नवंबर की सुनवाई में अदालत इस पर सवाल कर सकती है।

अभ्यर्थियों के लिए क्या मायने रखता है?

JPSC की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए इस आदेश का सबसे बड़ा मतलब यह है कि आयोग में नेतृत्व और सदस्यों की नियुक्ति का रास्ता अब समय-सीमा के साथ आगे बढ़ेगा।

इससे आने वाले समय में नई भर्ती परीक्षाओं के विज्ञापन और लंबित प्रक्रियाओं में गति आने की संभावना है।

हालांकि अभ्यर्थियों को अभी किसी विशेष परीक्षा की तारीख या भर्ती विज्ञापन को लेकर अनुमान नहीं लगाना चाहिए। इसके लिए JPSC की आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना जरूरी होगा।

अदालत के आदेश से नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना जरूर मजबूत हुई है, लेकिन परीक्षा का वास्तविक कार्यक्रम आयोग के कामकाज संभालने और आधिकारिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

आगे क्या होगा?

अब आने वाले दो महीने JPSC के लिए महत्वपूर्ण होंगे। सरकार को अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करनी है।

इसके बाद आयोग के कामकाज को व्यवस्थित किया जाएगा। लंबित मामलों और भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा सकती है।

वन विभाग समेत दूसरे विभागों में खाली पदों पर भर्ती की जरूरत भी आयोग के सामने आ सकती है।

अगर JPSC पूरी क्षमता के साथ काम करता है तो राज्य में विभिन्न सरकारी भर्तियों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष

झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC के अध्यक्ष और सदस्यों के लंबे समय से खाली पदों को लेकर राज्य सरकार को स्पष्ट समय-सीमा दे दी है। सरकार को अब दो महीने के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करनी होगी और इसकी अनुपालन रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करनी होगी।

मामला वन विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी से जुड़े स्वतः संज्ञान वाले मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया। अदालत ने पाया कि JPSC में पद रिक्त रहने का असर सरकारी विभागों की भर्ती प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है।

सरकार की ओर से अदालत को भरोसा दिया गया कि आगामी दो महीने में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। इसके बाद हाईकोर्ट ने निर्धारित समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया।

अब सबकी नजर 19 नवंबर 2026 की अगली सुनवाई पर रहेगी। उस दिन सरकार की अनुपालन रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि JPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया किस स्तर तक पहुंची है।

अगर सरकार तय समय के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर लेती है तो JPSC के कामकाज को नई गति मिल सकती है और राज्य में लंबित तथा प्रस्तावित सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता भी साफ हो सकता है।

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