PCPNDT Act: कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए झारखंड में सख्ती, लिंग जांच की सूचना देने पर मिलेगा 1 लाख रुपये तक का इनामPCPNDT Act: कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए झारखंड में सख्ती, लिंग जांच की सूचना देने पर मिलेगा 1 लाख रुपये तक का इनाम

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रांची: झारखंड में कन्या भ्रूण हत्या और अवैध लिंग जांच पर प्रभावी रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और कार्रवाई को और मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड की ओर से गुरुवार को नामकुम स्थित लोक स्वास्थ्य संस्थान में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर राज्य स्तरीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में जिलों के कार्यपालक दंडाधिकारी, सिविल सर्जन-सह-जिला नोडल अधिकारी, सहायक नोडल अधिकारी, महिला पुलिस पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई के प्रमुख पदाधिकारियों को कानून, प्रशासनिक प्रक्रिया और तकनीकी निगरानी से जुड़ी जानकारी दी गई।

कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग अजय कुमार सिंह ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करने के लिए अल्ट्रासाउंड केंद्रों की कड़ी निगरानी और PCPNDT Act का शत-प्रतिशत अनुपालन जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को नियमित निरीक्षण, संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई और कानून तोड़ने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए।

वहीं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने अवैध लिंग जांच की सूचना देने वालों के लिए सरकार की मुखबिर/डिकॉय योजना की जानकारी दी। इस योजना के तहत सही सूचना के आधार पर अवैध लिंग परीक्षण करने वाले डॉक्टर, क्लीनिक या बिचौलियों तक पहुंचने में मदद करने वालों को कुल 1 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। योजना के तहत मुख्य मुखबिर को 40 हजार रुपये, डिकॉय ऑपरेशन में सहयोग करने वाली गर्भवती महिला को 40 हजार रुपये और सहयोगी को 20 हजार रुपये दिए जाने का प्रावधान बताया गया है।

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कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए कानून के प्रभावी पालन पर जोर

झारखंड सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि राज्य में कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराई पर प्रभावी नियंत्रण कायम हो। इसी क्रम में PCPNDT Act के प्रावधानों को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यशाला का उद्देश्य केवल अधिकारियों को कानून की जानकारी देना नहीं था, बल्कि उन्हें यह समझाना भी था कि किसी शिकायत या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने के बाद निरीक्षण, दस्तावेजी कार्रवाई, उपकरणों की जब्ती, क्लीनिक को सील करने और न्यायालय में मामला प्रस्तुत करने की प्रक्रिया किस प्रकार नियमों के अनुसार पूरी की जानी चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कानून का प्रभावी क्रियान्वयन तभी संभव है, जब स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन, पुलिस, विधिक विशेषज्ञ और अभियोजन अधिकारी आपसी समन्वय के साथ काम करें। इसी वजह से कार्यशाला में अलग-अलग विभागों से जुड़े अधिकारियों को एक साथ प्रशिक्षण दिया गया।

अजय कुमार सिंह ने कहा- PCPNDT Act का शत-प्रतिशत पालन जरूरी

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की जरूरत बताई।

उन्होंने कहा कि भ्रूण का लिंग बताना एक गंभीर अपराध है और इस तरह की गतिविधियों में शामिल डॉक्टर, चिकित्सा संस्थान या अन्य व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित निगरानी की जाए और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाए।

अपर मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि गैर-कानूनी तरीके से लिंग परीक्षण के लिए मशीनों की स्थापना या उनका संचालन रोकने के लिए कानून में कड़े प्रावधान हैं। इन प्रावधानों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

उनके अनुसार, केवल कानून बना देना पर्याप्त नहीं है। कानून का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब उसकी निगरानी, जांच और कार्रवाई की व्यवस्था भी मजबूत हो।

झारखंड का लिंगानुपात राष्ट्रीय औसत से बेहतर, फिर भी सतर्कता जरूरी

अजय कुमार सिंह ने कहा कि झारखंड का लिंगानुपात राष्ट्रीय औसत की तुलना में बेहतर स्थिति में है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि राज्य को इस मुद्दे पर लापरवाह हो जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि PCPNDT Act लागू होने के बाद देशभर में आंकड़ों में सुधार देखने को मिला है, लेकिन समाज में जिस व्यापक बदलाव की उम्मीद थी, वह अभी पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा है।

इसलिए उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक सोच में बदलाव लाने पर भी जोर दिया जाए। बेटियों को लेकर समाज की सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाना इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कई राज्यों के उदाहरण देकर बताया सुधार का रास्ता

अपर मुख्य सचिव ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़, केरल, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, असम और तमिलनाडु जैसे राज्यों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इन राज्यों ने लिंगानुपात और कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि झारखंड को भी ऐसे राज्यों के अनुभवों से सीख लेकर अपनी निगरानी और कार्रवाई व्यवस्था को और मजबूत करना होगा।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लड़कियों को समान अधिकार और सम्मान मिलना केवल सरकारी योजना का विषय नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है। जब तक सामाजिक स्तर पर बेटियों के प्रति सोच में बदलाव नहीं आएगा, तब तक केवल कानूनी कार्रवाई से समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं किया जा सकता।

हरियाणा और पंजाब का भी किया जिक्र

अपर मुख्य सचिव ने उन राज्यों का भी उल्लेख किया जहां एक समय कन्या भ्रूण हत्या और लिंगानुपात की स्थिति गंभीर रही थी। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में कानूनी गतिविधियों को तेज किया गया और PCPNDT Act का कड़ाई से पालन कराया गया, जिसके बाद सकारात्मक परिणाम सामने आए।

उन्होंने कहा कि झारखंड में भी किसी प्रकार की अवैध गतिविधि को शुरुआती स्तर पर ही रोकना जरूरी है।

इसके लिए जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने की जरूरत बताई गई।

फर्जीवाड़े और अवैध लिंग जांच पर बढ़ेगी निगरानी

कार्यशाला में यह बात भी सामने रखी गई कि कुछ स्थानों पर अवैध तरीके से लिंग परीक्षण किए जाने की सूचनाएं अभी भी मिलती हैं। ऐसे मामलों में अधिकारियों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

अजय कुमार सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि संदिग्ध गतिविधियों की पहचान के लिए निगरानी को मजबूत किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि अवैध क्लीनिक चलाने वाले लोगों में कई ऐसे लोग हो सकते हैं जो शिक्षित होने के साथ-साथ कानून के प्रावधानों से परिचित हैं। इसके बावजूद यदि कोई व्यक्ति आर्थिक लाभ के लिए कानून का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

रांची, धनबाद और जमशेदपुर पर विशेष नजर

अपर मुख्य सचिव ने राज्य के प्रमुख शहरी क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि रांची, धनबाद और जमशेदपुर जैसे बड़े शहरों में अल्ट्रासाउंड केंद्रों और संबंधित गतिविधियों पर विशेष निगरानी की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि आर्थिक गतिविधियां बढ़ने के साथ शहरों में विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होता है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर कोई गैर-कानूनी गतिविधि न चले।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को फर्जी डॉक्टरों, बिना लाइसेंस चल रहे क्लीनिकों और नियमों का उल्लंघन करने वाले अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित जांच करने के निर्देश दिए।

नियम तोड़ने वाले संस्थानों पर होगी कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि यदि कोई संस्था निर्धारित नियमों की अनदेखी करती हुई पाई जाती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि कानून के उल्लंघन के मामलों में केवल निरीक्षण करके छोड़ देने के बजाय कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया को मजबूत बनाना होगा।

जरूरत पड़ने पर संबंधित संस्थान का लाइसेंस रद्द करने और प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। इसके साथ ही मामलों की कानूनी पैरवी मजबूत करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों, लीगल एक्सपर्ट्स और प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर्स की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

लिंग जांच की सूचना देने पर 1 लाख रुपये तक का इनाम

कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मुखबिर/डिकॉय योजना रही। अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने अवैध लिंग परीक्षण और कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के लिए इस योजना की शुरुआत की है।

योजना के तहत यदि किसी व्यक्ति को किसी संस्थान, डॉक्टर या बिचौलिए द्वारा अवैध लिंग परीक्षण किए जाने की विश्वसनीय जानकारी मिलती है और उस सूचना के आधार पर कार्रवाई होती है, तो निर्धारित प्रावधानों के अनुसार कुल 1 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

इसका उद्देश्य लोगों को अवैध गतिविधियों के खिलाफ सूचना देने के लिए प्रोत्साहित करना है।

इन तीन लोगों में बांटी जाएगी पुरस्कार राशि

योजना के तहत 1 लाख रुपये की कुल राशि को तीन श्रेणियों में बांटा गया है।

श्रेणीप्रोत्साहन राशि
मुख्य मुखबिर₹40,000
डिकॉय ऑपरेशन में सहयोग करने वाली गर्भवती महिला₹40,000
सहयोगी₹20,000
कुल₹1,00,000

इस योजना का उद्देश्य अवैध लिंग जांच से जुड़े नेटवर्क और संस्थानों की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाना और दोषियों को कानूनी प्रक्रिया के दायरे में लाना है।

अभियान निदेशक ने कहा कि लिंग परीक्षण और लिंग निर्धारण कानून की दृष्टि से अत्यंत गंभीर अपराध हैं। इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

सूचना देने वाले की पहचान रखी जाएगी गुप्त

शशि प्रकाश झा ने आम लोगों से अपील की कि यदि उन्हें अवैध लिंग परीक्षण करने वाले किसी व्यक्ति, संस्थान या क्लीनिक की जानकारी मिलती है, तो वे तुरंत संबंधित जिला समुचित प्राधिकारी को सूचना दें।

इसके अलावा राज्य के निःशुल्क हेल्पलाइन नंबर 104 पर कॉल करके भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। इसका उद्देश्य लोगों को बिना किसी डर के अवैध गतिविधियों की जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित करना है।

104 हेल्पलाइन का इस्तेमाल स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य जानकारी और शिकायतों के लिए भी किया जा सकता है।

“बेटी बचाओ-दुनिया बचाओ” का संदेश

अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कार्यशाला के दौरान “बेटी बचाओ-दुनिया बचाओ” का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि लिंग के आधार पर भेदभाव समाज के लिए गंभीर समस्या है। भ्रूण के लिंग के आधार पर उसके जीवन को खत्म करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि सामाजिक और नैतिक दृष्टि से भी गंभीर अपराध है।

उन्होंने अधिकारियों और आम लोगों से मिलकर काम करने की अपील की, ताकि बेटियों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित हो और लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त किया जा सके।

अधिकारियों ने लिया बालिका सुरक्षा का संकल्प

कार्यशाला के दौरान बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों के प्रति प्रशासनिक तथा नैतिक प्रतिबद्धता व्यक्त करने के लिए विशेष संकल्प वृक्ष स्थापित किया गया।

इस संकल्प वृक्ष पर कार्यक्रम में शामिल अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने अपने-अपने संकल्प और प्रेरक संदेश लिखे।

इस पहल का उद्देश्य केवल अधिकारियों तक संदेश सीमित रखना नहीं था, बल्कि यह याद दिलाना भी था कि बालिकाओं की सुरक्षा और समान अधिकार के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रयास आवश्यक हैं।

कानूनी प्रक्रिया की दी गई जानकारी

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में जिला स्तर के अधिकारियों को PCPNDT Act से जुड़ी कानूनी और तकनीकी प्रक्रियाओं का विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।

झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अवर सचिव दीपक कुमार साहू ने निरीक्षण, उपकरणों की जब्ती, क्लीनिक को सील करने और न्यायालय में परिवाद दर्ज कराने से जुड़े मानक संचालन दिशा-निर्देशों की जानकारी दी।

उन्होंने अधिकारियों को बताया कि कानूनी कार्रवाई करते समय प्रक्रिया से जुड़ी किसी भी महत्वपूर्ण बात की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। सही दस्तावेजी प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों का पालन मामलों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

“गरिमा झारखंड” पोर्टल का लाइव प्रदर्शन

तकनीकी सत्र के दौरान राज्य समन्वयक राफत फरजाना ने PCPNDT Act के लिए समर्पित ऑनलाइन पोर्टल “गरिमा झारखंड” की कार्यप्रणाली का लाइव प्रदर्शन किया।

इस दौरान अधिकारियों को पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी गई। विशेष रूप से अल्ट्रासाउंड मशीनों की ऑनलाइन ट्रैकिंग और रिपोर्टिंग से जुड़ी व्यवस्था को प्रदर्शित किया गया।

डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल निगरानी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ऑनलाइन रिपोर्टिंग के जरिए संबंधित जानकारी को समय पर दर्ज करने और उसकी निगरानी करने में मदद मिल सकती है।

100 प्रतिशत ऑनलाइन रिपोर्टिंग पर जोर

कार्यशाला के समापन सत्र में राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने सभी जिलों को नियमित निरीक्षण और शत-प्रतिशत ऑनलाइन रिपोर्टिंग की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि PCPNDT Act का प्रभावी क्रियान्वयन तभी संभव होगा, जब जिला स्तर पर नियमित निरीक्षण हो, संबंधित गतिविधियों की जानकारी समय पर ऑनलाइन दर्ज हो और कानून के उल्लंघन के मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाए।

जिला स्तर के अधिकारियों से आने वाले समय के लिए अपनी निगरानी और अनुपालन रणनीति तैयार करने को कहा गया।

लाइव सेशन में अधिकारियों ने पूछे सवाल

कार्यशाला का समापन लाइव सेशन के साथ हुआ। इस दौरान विभिन्न जिलों से आए अधिकारियों ने PCPNDT Act के क्रियान्वयन से जुड़ी अपनी शंकाएं और व्यावहारिक समस्याएं विशेषज्ञों के सामने रखीं।

विशेषज्ञों ने अधिकारियों के सवालों का समाधान किया और उन्हें कानून तथा प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार कार्य करने के बारे में जानकारी दी।

इस तरह कार्यशाला में केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि जिला स्तर पर सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर भी चर्चा की गई।

स्वास्थ्य, प्रशासन और पुलिस के समन्वय पर जोर

PCPNDT Act का प्रभावी पालन एक बहु-विभागीय जिम्मेदारी है। इसमें स्वास्थ्य विभाग के साथ जिला प्रशासन, पुलिस, विधिक विशेषज्ञ और अभियोजन पक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी इसी समन्वित व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक प्रयास रहा।

अवैध लिंग जांच से जुड़े मामलों में शिकायत मिलने से लेकर निरीक्षण, जांच, साक्ष्य संकलन, उपकरणों से जुड़ी कार्रवाई और न्यायालयीन प्रक्रिया तक प्रत्येक स्तर पर नियमों का पालन जरूरी है।

इसी वजह से प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को कानूनी और तकनीकी दोनों पहलुओं की जानकारी दी गई।

सामाजिक सोच में बदलाव भी जरूरी

कार्यशाला में इस बात पर भी जोर दिया गया कि कन्या भ्रूण हत्या की समस्या का समाधान केवल कानून के माध्यम से नहीं हो सकता। इसके लिए सामाजिक सोच में बदलाव भी जरूरी है।

बेटी के जन्म को लेकर नकारात्मक सोच, लिंग आधारित भेदभाव और बेटे को प्राथमिकता देने जैसी मानसिकता को बदलना आवश्यक है।

सरकार की योजनाओं और कानूनी कार्रवाई के साथ समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। परिवारों को बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और समान अधिकार के प्रति जागरूक करना भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

आगे जिलों में बढ़ेगी निगरानी

राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला के बाद अब जिलों में PCPNDT Act के अनुपालन को और मजबूत करने पर जोर रहेगा। नियमित निरीक्षण, ऑनलाइन रिपोर्टिंग और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

विशेष रूप से अल्ट्रासाउंड केंद्रों की निगरानी, लाइसेंस और नियमों के पालन की जांच तथा शिकायत मिलने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई पर जोर रहेगा।

स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि राज्य में लिंग परीक्षण जैसी गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए किसी भी तरह की जगह न बचे।


निष्कर्ष: कानून के साथ जागरूकता से ही बदलेगी तस्वीर

झारखंड में कन्या भ्रूण हत्या और अवैध लिंग जांच के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला को निगरानी और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने अधिकारियों को PCPNDT Act के शत-प्रतिशत पालन, अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित निगरानी और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने मुखबिर/डिकॉय योजना के तहत सही सूचना देने पर कुल 1 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि देने की जानकारी दी है।

इस राशि में मुख्य मुखबिर को 40 हजार रुपये, डिकॉय ऑपरेशन में सहयोग करने वाली गर्भवती महिला को 40 हजार रुपये और सहयोगी को 20 हजार रुपये दिए जाएंगे। साथ ही सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखने की बात कही गई है।

स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें अवैध लिंग परीक्षण से संबंधित किसी गतिविधि की जानकारी मिलती है तो संबंधित जिला समुचित प्राधिकारी को सूचना दें या 104 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।

वहीं, “गरिमा झारखंड” पोर्टल, ऑनलाइन रिपोर्टिंग और अल्ट्रासाउंड मशीनों की ट्रैकिंग जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं के माध्यम से निगरानी को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए कानून का सख्त पालन जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी समाज की सोच में बदलाव लाना भी है। बेटियों को जन्म से पहले ही भेदभाव का सामना न करना पड़े और उन्हें समान अधिकार मिले, इसके लिए सरकार, प्रशासन, स्वास्थ्य संस्थानों और आम जनता को मिलकर काम करना होगा। यही प्रयास राज्य में बाल लिंगानुपात को बेहतर बनाने और लैंगिक समानता को मजबूत करने की दिशा में स्थायी बदलाव ला सकता है।

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