झारखंड में किसानों के लिए पारदर्शी बीज आपूर्ति व्यवस्थाझारखंड में पारदर्शी होगी बीज आपूर्ति

झारखंड में बीज आपूर्ति व्यवस्था होगी पारदर्शी:

रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। झारखंड में किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने बीज आपूर्ति व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव करने का निर्णय लिया है। राज्य में बीज की जरूरत को पूरा करने के लिए अब राज्य कृषि विश्वविद्यालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के संस्थान और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) जैसे सरकारी एवं मान्यता प्राप्त संस्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका उद्देश्य किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने के साथ-साथ बीज आपूर्ति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना है।

कृषि निदेशक निद्यानंद शर्मा पंकज की अध्यक्षता में मंगलवार को कृषि निदेशालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में बीज नीति और आपूर्ति व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में बीज की गुणवत्ता, स्रोत, आपूर्ति की उपलब्धता और किसानों तक समय पर बीज पहुंचाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। कृषि निदेशक ने अधिकारियों को व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

सरकारी संस्थानों से बीज आपूर्ति को प्राथमिकता

नई व्यवस्था के तहत राज्य में आवश्यकतानुसार बीज की आपूर्ति के लिए राज्य कृषि विश्वविद्यालय, ICAR संस्थान और कृषि विज्ञान केंद्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। इन संस्थानों के माध्यम से प्रमाणित बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

कृषि विभाग का मानना है कि किसानों को अच्छी किस्म का बीज समय पर मिलने से उत्पादन और उत्पादकता में सुधार किया जा सकता है। इसके लिए बीज की गुणवत्ता और उसके स्रोत की विश्वसनीयता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

झारखंड में बीज आपूर्ति व्यवस्था होगी पारदर्शी

दलहन मिशन के तहत होगा एमओयू

राज्य को बीज के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी पहल की जा रही है। दलहन मिशन योजना के तहत आईएआरआई, राज्य कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र सहित संबंधित संस्थानों से बीज की आपूर्ति कराने का निर्णय लिया गया है।

इसके लिए संबंधित संस्थानों के साथ एमओयू (एकरारनामा) करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है। कृषि निदेशक ने अधिकारियों से प्रस्ताव तैयार कर आगे की प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। इससे दलहन फसलों के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

हॉर्टिकल्चर पौध सामग्री के लिए मान्यता जरूरी

उद्यानिकी फसलों के लिए पौध सामग्री की आपूर्ति को लेकर भी मानक तय किए गए हैं। अब हॉर्टिकल्चर पौध सामग्री की आपूर्ति केंद्र और राज्य सरकार की निर्धारित मार्गनिर्देशिका के अनुसार ही की जाएगी।

इसके लिए सामग्री उपलब्ध कराने वाले संस्थानों का नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) से पंजीकृत होना या डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (DBT) से मान्यता प्राप्त होना जरूरी होगा। इसका उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणिक पौध सामग्री उपलब्ध कराना है।

‘साथी’ पोर्टल पर दर्ज होगा बीज का स्रोत

बीज आपूर्ति व्यवस्था में डिजिटल पारदर्शिता बढ़ाने के लिए भारत सरकार के ‘साथी’ पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। बीज आपूर्तिकर्ता संस्थाओं को पोर्टल पर आधार और प्रमाणित बीज की प्राप्ति से संबंधित आवश्यक जानकारी अपलोड करनी होगी।

कृषि निदेशक ने संबंधित संस्थानों को ‘साथी’ पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने की प्रक्रिया की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण आयोजित करने का निर्देश भी दिया है। सभी बीज आपूर्तिकर्ता संस्थानों को इस संबंध में सूचित किया जाएगा।

केवल L-1 दर पर नहीं होगी बीज की खरीद

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि बीज खरीद में केवल सबसे कम कीमत यानी L-1 दर को आधार बनाना उचित नहीं होगा। बीज की किस्म की प्रामाणिकता, स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अनुकूलता, भौतिक शुद्धता, अंकुरण क्षमता, उपलब्धता और समय पर आपूर्ति जैसे मानकों को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

आपूर्तिकर्ता संस्थानों द्वारा दी गई दरों पर आवश्यकतानुसार मोलभाव किया जाएगा। इसके साथ ही तकनीकी पहलुओं की गहन जांच के बाद ही बीज की खरीद का निर्णय लिया जाएगा।

बीज सहकारी समितियों को भी जोड़ा जाएगा

किसानों तक बेहतर किस्म के बीज समय पर पहुंचाने के लिए बहुस्तरीय बीज सहकारी समितियों को भी निर्धारित प्रक्रिया और मानकों के तहत आपूर्ति श्रृंखला में शामिल करने का निर्णय लिया गया है।

कृषि विभाग की ओर से बीज आपूर्तिकर्ताओं की सूचीबद्धता की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बरतने पर जोर दिया गया है। नई व्यवस्था के जरिए सरकार का लक्ष्य किसानों को सही गुणवत्ता का बीज सही समय पर उपलब्ध कराना और बीज आपूर्ति व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय एवं पारदर्शी बनाना है।

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