StAlbertsCollege #RanchiNews #CollegeDay #Ranchi #JharkhandNews #CollegeNews #CulturalProgram #SportsNews #SantAlbert #TribalCulture #RanchiCollege #JharkhandCulture
रांची, 29 अगस्त 2026। संत अल्बर्ट्स कॉलेज, रांची में कॉलेज दिवस समारोह श्रद्धा, सौहार्द, खेल भावना और सांस्कृतिक विविधता के रंगों के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। दिनभर चले इस विशेष समारोह में आध्यात्मिक आयोजन से लेकर खेल प्रतियोगिता और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम तक कई गतिविधियां आयोजित की गईं। समारोह में कॉलेज के प्रोफेसर, स्टाफ सदस्य, विद्यार्थी, पुरोहित, धर्म बहनें और आमंत्रित अतिथियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कॉलेज दिवस समारोह की शुरुआत पवित्र यूखरिस्तीय समारोह से हुई। इसके बाद थियोलॉजी टीम और फिलॉसफी टीम के बीच मैत्रीपूर्ण फुटबॉल मैच खेला गया। शाम के समय आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और जनजातीय विरासत की विविध झलक प्रस्तुत की। पूर्वोत्तर भारत के नृत्य, मुंडारी और खड़िया स्किट, दक्षिण भारतीय नृत्य तथा विभिन्न जनजातीय प्रस्तुतियों ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया।
पूरे आयोजन में आध्यात्मिकता, शिक्षा, खेल, संस्कृति और सामुदायिक एकता का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
पवित्र यूखरिस्तीय समारोह से हुई शुरुआत
कॉलेज दिवस समारोह का शुभारंभ पवित्र यूखरिस्तीय समारोह से किया गया। इस धार्मिक समारोह की अध्यक्षता रांची महाधर्मप्रांत के सहायक धर्माध्यक्ष बिशप आनंद डेविड खलखो ने की। उनके साथ कॉलेज के अन्य पुरोहितों ने सह-बलिदान अर्पित किया।
इस अवसर पर कॉलेज के विद्यार्थी, प्रोफेसर, स्टाफ सदस्य और आमंत्रित अतिथियों ने श्रद्धापूर्वक यूखरिस्त में भाग लिया। पूरे समारोह के दौरान आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
मिस्सा के दौरान कॉलेज के संरक्षक संत संत अल्बर्ट ऑफ ल्यूवेन (St. Albert of Louvain) का विशेष रूप से स्मरण और वंदना की गई। कॉलेज दिवस के अवसर पर संरक्षक संत के जीवन, उनकी प्रेरणा और उनके आदर्शों को याद किया गया।
बिशप आनंद डेविड खलखो ने दिया संदेश
पवित्र यूखरिस्तीय समारोह के दौरान अपने प्रवचन में बिशप आनंद डेविड खलखो ने विद्यार्थियों को जीवन में अच्छाई, सत्य और पवित्रता को अपनाने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि “हम ईश्वर के मंदिर हैं।” इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने सम्मान के साथ-साथ दूसरों के सम्मान और गरिमा की भी रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि व्यक्ति का जीवन केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें दूसरों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना भी होनी चाहिए।

बिशप ने कहा कि पवित्रता केवल भावना या आदर्श नहीं है, बल्कि यह जीवन में अच्छाई को चुनने और बुराई से दूर रहने का एक सचेत और दृढ़ निर्णय है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने दैनिक जीवन में सही और गलत के बीच अंतर समझें तथा सही मार्ग को चुनने का साहस रखें।
नबियों और संतों के जीवन से दी प्रेरणा
अपने प्रवचन के दौरान बिशप आनंद डेविड खलखो ने बाइबिल के नबियों और संतों के जीवन के उदाहरण भी विद्यार्थियों के सामने रखे।
उन्होंने यहोशू, संत पौलुस और संत पेत्रुस के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि इन लोगों ने ईश्वर के मार्ग को चुना और आवश्यकता पड़ने पर उस मार्ग पर चलते हुए दुख और कठिनाइयों को भी स्वीकार किया।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि जीवन में आने वाली चुनौतियों से घबराने के बजाय सत्य और अच्छाई के रास्ते पर दृढ़ता से आगे बढ़ना चाहिए।
बिशप ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने जीवन में सत्य, अच्छाई, पवित्रता और ईश्वर के प्रति निष्ठा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उनका संदेश समारोह में उपस्थित विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी रहा।
आध्यात्मिकता के साथ खेल भावना का संगम
यूखरिस्तीय समारोह के बाद कॉलेज परिसर में खेल गतिविधि का आयोजन किया गया। इस दौरान थियोलॉजी टीम और फिलॉसफी टीम के बीच मैत्रीपूर्ण फुटबॉल मैच खेला गया।
कॉलेज दिवस समारोह में फुटबॉल मैच को शामिल करने का उद्देश्य विद्यार्थियों और कॉलेज परिवार के बीच भाईचारे, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और टीम भावना को बढ़ावा देना रहा।
मैच के दौरान दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने पूरे उत्साह के साथ खेल का प्रदर्शन किया। मुकाबला काफी रोमांचक रहा और दोनों टीमों ने जीत के लिए प्रयास किया।
थियोलॉजी टीम ने 3-2 से जीता मुकाबला
थियोलॉजी और फिलॉसफी टीम के बीच खेले गए मैत्रीपूर्ण फुटबॉल मुकाबले में कड़ा संघर्ष देखने को मिला। दोनों टीमों ने बेहतरीन खेल भावना का प्रदर्शन किया।
अंततः थियोलॉजी टीम ने फिलॉसफी टीम को 3-2 से हराकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।
मैच के दौरान खिलाड़ियों ने अनुशासन और टीम भावना का परिचय दिया। मुकाबले का परिणाम भले ही थियोलॉजी टीम के पक्ष में रहा, लेकिन दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने एक-दूसरे के प्रति सम्मान और खेल भावना बनाए रखी।
इस मैत्रीपूर्ण मुकाबले ने कॉलेज परिवार के बीच आपसी मेल-जोल और भाईचारे को और मजबूत किया।
खेल से मिला टीम भावना का संदेश
फुटबॉल मैच के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश भी मिला कि खेल केवल जीत और हार तक सीमित नहीं है। खेल अनुशासन, सहयोग, नेतृत्व और टीम भावना को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
मैदान पर खिलाड़ियों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर लक्ष्य हासिल करने का प्रयास किया। इससे कॉलेज दिवस समारोह में खेल भावना का एक अलग रंग जुड़ गया।
कॉलेज परिवार के सदस्यों ने भी इस मुकाबले का आनंद लिया और खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।
शाम को हुआ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम
दिनभर चले समारोह का दूसरा प्रमुख आकर्षण शाम को आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम रहा। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रांची महाधर्मप्रांत के सहायक धर्माध्यक्ष बिशप आनंद डेविड खलखो रहे। वहीं रांची जेसुइट सोसाइटी के प्रांतीय सुपीरियर फादर अजित कुमार खेस्स विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
कार्यक्रम में कॉलेज के प्रोफेसर, स्टाफ, विद्यार्थी, पुरोहित, धर्म बहनें और अन्य अतिथि भी शामिल हुए।
प्रार्थना नृत्य ने बांधा समां
सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत मनमोहक प्रार्थना नृत्य से हुई। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का सुंदर मेल प्रस्तुत किया।
प्रार्थना नृत्य के बाद कार्यक्रम आगे बढ़ा और विद्यार्थियों ने अलग-अलग क्षेत्रों की संस्कृति और परंपराओं को मंच पर जीवंत किया।
दर्शकों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों को खूब सराहा।
रेक्टर फादर अजय कुमार खलखो ने किया स्वागत
सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान कॉलेज के रेक्टर फादर अजय कुमार खलखो ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।
उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों, स्टाफ सदस्यों और विद्यार्थियों का स्वागत किया। साथ ही कॉलेज दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि कॉलेज दिवस कॉलेज परिवार के लिए एक ऐसा अवसर है, जब सभी लोग एक साथ आकर अपनी आध्यात्मिक और शैक्षणिक परंपराओं को याद करते हैं और आपसी एकता को मजबूत करते हैं।
उनके स्वागत भाषण के बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला आगे बढ़ा।
भारतीय संस्कृति की विविधता दिखी
सांस्कृतिक संध्या में विद्यार्थियों ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की विविध झलक प्रस्तुत की।
भारत की विशेषता उसकी विविधता में एकता है। अलग-अलग राज्यों, क्षेत्रों और समुदायों की अपनी विशिष्ट भाषा, परंपरा, नृत्य, संगीत और जीवन शैली है। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से इसी विविधता को मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया।
पूर्वोत्तर भारत के सांस्कृतिक नृत्य, दक्षिण भारतीय नृत्य और विभिन्न जनजातीय नृत्यों ने कार्यक्रम को खास बना दिया।
मुंडारी और खड़िया संस्कृति की प्रस्तुति
कार्यक्रम में मुंडारी स्किट और खड़िया स्किट विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। विद्यार्थियों ने इन प्रस्तुतियों के माध्यम से जनजातीय समाज के जीवन, संस्कृति, परंपरा और विरासत को प्रभावशाली ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया।
स्किट के माध्यम से दर्शकों को जनजातीय समाज की जीवनशैली और सांस्कृतिक मूल्यों की झलक देखने को मिली।
मुंडारी और खड़िया जैसी स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं को मंच पर स्थान मिलने से कार्यक्रम में झारखंड की पहचान और स्थानीय विरासत का रंग भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
जनजातीय नृत्यों ने दर्शकों को किया आकर्षित
सांस्कृतिक कार्यक्रम में विभिन्न जनजातीय नृत्यों की प्रस्तुति भी की गई। विद्यार्थियों ने पारंपरिक रंग और शैली के माध्यम से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
जनजातीय नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे किसी समुदाय की पहचान, इतिहास और परंपराओं को भी अभिव्यक्त करते हैं।
विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों के माध्यम से इन सांस्कृतिक परंपराओं को मंच पर जीवंत करने का प्रयास किया गया।
पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत की संस्कृति भी दिखी
कार्यक्रम में केवल झारखंड की संस्कृति ही नहीं, बल्कि भारत के अन्य क्षेत्रों की सांस्कृतिक विविधता को भी शामिल किया गया।
पूर्वोत्तर भारत के सांस्कृतिक नृत्य और दक्षिण भारतीय नृत्य ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
विद्यार्थियों ने अलग-अलग क्षेत्रों की कला और संस्कृति को मंच पर प्रस्तुत करते हुए यह संदेश दिया कि भारत की सांस्कृतिक पहचान अनेक विविध परंपराओं से मिलकर बनी है।
संस्कृति को लेकर बिशप का महत्वपूर्ण संदेश
सांस्कृतिक कार्यक्रम के अवसर पर बिशप आनंद डेविड खलखो ने संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत के महत्व पर भी अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत हमारी ऐतिहासिक पहचान और स्मृतियों को जीवित रखती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी संस्कृति पर गर्व करना चाहिए और उसे कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृति समय के साथ बदलती है। इसलिए ऐसी पिछड़ी परंपराओं को छोड़ना जरूरी है, जो समाज के विकास में बाधा बनती हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी प्रतिभा, ज्ञान और विचारों का उपयोग करते हुए भारत के सांस्कृतिक भविष्य को बेहतर बनाने का आह्वान किया।
परंपरा और आधुनिक सोच का संतुलन जरूरी
बिशप आनंद डेविड खलखो के संदेश में परंपरा के संरक्षण के साथ सकारात्मक बदलाव पर भी जोर दिया गया।
उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना जरूरी है, लेकिन समाज में समय के साथ होने वाले बदलावों को भी स्वीकार करना चाहिए।
जो परंपराएं समाज और व्यक्ति के विकास में योगदान देती हैं, उन्हें आगे बढ़ाया जाना चाहिए। वहीं ऐसी परंपराओं को पीछे छोड़ना चाहिए जो विकास और सकारात्मक सोच में बाधा बनती हैं।
विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा और ज्ञान के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विरासत को और समृद्ध बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
ब्रदर मारियानुस और ब्रदर पेट्रुस ने किया संचालन
सांस्कृतिक कार्यक्रम का मंच संचालन ब्रदर मारियानुस और ब्रदर पेट्रुस ने किया। दोनों ने कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया और विभिन्न प्रस्तुतियों के बीच तालमेल बनाए रखा।
मंच संचालन के दौरान विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की जानकारी दर्शकों को दी गई और कार्यक्रम को क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया।
उनके सफल संचालन से सांस्कृतिक संध्या और अधिक जीवंत और आकर्षक बनी।
विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता
कॉलेज दिवस समारोह की सफलता में विद्यार्थियों की सक्रिय भूमिका रही। धार्मिक आयोजन से लेकर खेल प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रम तक विद्यार्थियों ने अलग-अलग स्तर पर भाग लिया।
विद्यार्थियों ने फुटबॉल मैच में हिस्सा लेने के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम में नृत्य और स्किट जैसी प्रस्तुतियां दीं।
उनकी सक्रिय सहभागिता ने पूरे समारोह को उत्साह और ऊर्जा से भर दिया।
कॉलेज परिवार में दिखी एकता
पूरे दिन चले कार्यक्रम में कॉलेज परिवार के विभिन्न सदस्यों की भागीदारी रही। प्रोफेसर, स्टाफ, विद्यार्थी, पुरोहित और धर्म बहनों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
धार्मिक आयोजन ने आध्यात्मिक एकता का संदेश दिया, फुटबॉल मैच ने टीम भावना को मजबूत किया और सांस्कृतिक कार्यक्रम ने विविधता में एकता का संदेश दिया।
इस तरह कॉलेज दिवस समारोह ने कॉलेज परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ आने और एक-दूसरे के साथ समय बिताने का अवसर दिया।
संत अल्बर्ट ऑफ ल्यूवेन का स्मरण
कॉलेज दिवस समारोह में कॉलेज के संरक्षक संत संत अल्बर्ट ऑफ ल्यूवेन को विशेष रूप से याद किया गया।
यूखरिस्तीय समारोह के दौरान उनकी वंदना और स्मरण किया गया। कॉलेज परिवार ने उनके जीवन से प्रेरणा लेने और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की भावना व्यक्त की।
संरक्षक संत का स्मरण कॉलेज दिवस समारोह का आध्यात्मिक केंद्र रहा।
विश्वास, सेवा और भाईचारे का संदेश
पूरे समारोह के माध्यम से विद्यार्थियों को विश्वास, सेवा, भाईचारा और मानवीय मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया गया।
धार्मिक समारोह में आध्यात्मिक मूल्यों पर जोर दिया गया, जबकि खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से आपसी सहयोग और सामुदायिक भावना को मजबूत किया गया।
इस तरह कॉलेज दिवस केवल एक उत्सव नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों के लिए मूल्यों और जिम्मेदारियों को समझने का अवसर भी बना।
विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी रहा आयोजन
कॉलेज दिवस समारोह विद्यार्थियों के लिए कई मायनों में प्रेरणादायी रहा। उन्हें धार्मिक और नैतिक मूल्यों के साथ-साथ खेल और संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिला।
बिशप आनंद डेविड खलखो के संदेश ने विद्यार्थियों को सत्य और अच्छाई के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया। वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम ने उन्हें अपनी और देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को समझने का अवसर दिया।
फुटबॉल मैच ने स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और टीम भावना की सीख दी।
सांस्कृतिक विरासत को बचाने का संदेश
कार्यक्रम में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। जनजातीय नृत्यों और मुंडारी तथा खड़िया स्किट के माध्यम से स्थानीय संस्कृति को मंच पर प्रस्तुत किया गया।
ऐसे कार्यक्रम युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विद्यार्थियों ने मंच के माध्यम से परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन का संदेश भी दिया।
भारत की विविधता का सुंदर प्रदर्शन
सांस्कृतिक संध्या में अलग-अलग क्षेत्रों की प्रस्तुतियों ने भारत की विविधता को एक मंच पर ला दिया।
पूर्वोत्तर भारत के नृत्य से लेकर दक्षिण भारतीय नृत्य और झारखंड की जनजातीय प्रस्तुतियों तक कार्यक्रम में देश के विभिन्न सांस्कृतिक रंग देखने को मिले।
इस विविधता ने समारोह को और खास बनाया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश दिया कि अलग-अलग संस्कृति और परंपराओं के बावजूद सभी भारतीय एक साझा पहचान से जुड़े हैं।
स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और सहयोग पर जोर
फुटबॉल मैच में दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का उदाहरण पेश किया। थियोलॉजी टीम और फिलॉसफी टीम के बीच मुकाबला रोमांचक रहा।
3-2 के परिणाम के बावजूद मैच में आपसी सम्मान और भाईचारे की भावना बनी रही।
इससे विद्यार्थियों को यह संदेश मिला कि प्रतिस्पर्धा का उद्देश्य केवल जीतना नहीं, बल्कि अपनी क्षमता का प्रदर्शन करना और दूसरों के साथ मिलकर बेहतर प्रदर्शन करना भी है।
पूरे दिन रहा उत्सव का माहौल
कॉलेज परिसर में सुबह से लेकर शाम तक उत्सव का माहौल बना रहा। सुबह आध्यात्मिक कार्यक्रम के बाद खेल प्रतियोगिता और फिर शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
हर कार्यक्रम में कॉलेज परिवार के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही।
विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों और अतिथियों के संदेश ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
कॉलेज दिवस ने बढ़ाया सामुदायिक जुड़ाव
कॉलेज दिवस जैसे आयोजन कॉलेज के विद्यार्थियों और स्टाफ के बीच सामुदायिक जुड़ाव को मजबूत करते हैं। एक साथ धार्मिक आयोजन में शामिल होने, खेल खेलने और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने से आपसी संबंध और मजबूत होते हैं।
इस समारोह में भी यही भावना देखने को मिली।
समारोह ने दिया सकारात्मक संदेश
संत अल्बर्ट्स कॉलेज का कॉलेज दिवस समारोह कई सकारात्मक संदेशों के साथ संपन्न हुआ। विद्यार्थियों को सत्य, अच्छाई, अनुशासन और सेवा की भावना अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
साथ ही खेलों के माध्यम से फिटनेस और टीम भावना तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी विरासत के प्रति सम्मान का संदेश दिया गया।
निष्कर्ष
संत अल्बर्ट्स कॉलेज, रांची में आयोजित कॉलेज दिवस समारोह श्रद्धा, खेल भावना, सांस्कृतिक विविधता और सामुदायिक एकता का सुंदर संगम रहा। कार्यक्रम की शुरुआत पवित्र यूखरिस्तीय समारोह से हुई, जिसकी अध्यक्षता रांची महाधर्मप्रांत के सहायक धर्माध्यक्ष बिशप आनंद डेविड खलखो ने की।
अपने प्रवचन में उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं के साथ-साथ दूसरों की गरिमा और सम्मान की रक्षा करने तथा जीवन में सत्य, अच्छाई, पवित्रता और ईश्वर के प्रति निष्ठा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
इसके बाद थियोलॉजी और फिलॉसफी टीम के बीच मैत्रीपूर्ण फुटबॉल मैच हुआ, जिसमें थियोलॉजी टीम ने 3-2 से जीत दर्ज की। शाम को आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने प्रार्थना नृत्य, पूर्वोत्तर भारत के नृत्य, मुंडारी स्किट, खड़िया स्किट, दक्षिण भारतीय नृत्य और विभिन्न जनजातीय प्रस्तुतियों के जरिए भारत की सांस्कृतिक विविधता को मंच पर प्रस्तुत किया।
बिशप आनंद डेविड खलखो ने संस्कृति को ऐतिहासिक पहचान और स्मृतियों से जोड़ते हुए विद्यार्थियों से अपनी संस्कृति पर गर्व करने का संदेश दिया। साथ ही उन्होंने सकारात्मक बदलाव को स्वीकार करते हुए प्रतिभा, ज्ञान और विचारों के माध्यम से भारत के सांस्कृतिक भविष्य को बेहतर बनाने की बात कही।
कॉलेज दिवस समारोह ने विद्यार्थियों और पूरे कॉलेज परिवार को अपने संरक्षक संत संत अल्बर्ट ऑफ ल्यूवेन को याद करने के साथ-साथ विश्वास, सेवा, भाईचारे, खेल भावना, सांस्कृतिक गौरव और मानवीय मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करने का अवसर दिया।