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हुसैनाबाद, पलामू। राजकीयकृत मध्य विद्यालय हुसैनाबाद परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर हॉकी के महान खिलाड़ी और पद्मभूषण मेजर ध्यानचंद की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं और विद्यार्थियों ने मेजर ध्यानचंद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

कार्यक्रम की शुरुआत नियमित प्रार्थना, राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान से हुई। इसके बाद विद्यार्थियों ने संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया तथा विद्यालय पट्ट पर अंकित सामान्य ज्ञान की पुनरावृत्ति की। जेसीईआरटी रांची द्वारा प्रेषित न्यूज प्लस क्विज कंटेंट का भी वाचन किया गया। बाल संसद के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने ड्रिल में हिस्सा लेकर अनुशासन और टीम भावना का परिचय दिया।

ध्यानचंद के योगदान को किया याद

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने मेजर ध्यानचंद के जीवन और भारतीय हॉकी में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि हॉकी के मैदान पर ध्यानचंद के अद्वितीय कौशल, असाधारण उपलब्धियां और देश के प्रति उनका समर्पण भारतीय खेल इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा।

मेजर ध्यानचंद ने अपने शानदार खेल कौशल से भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया। तीन ओलंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम की सफलता में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनकी प्रतिभा, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण आज भी देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

बच्चों ने लिया खेल और अनुशासन का संकल्प

राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों ने खेल को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रखने का संकल्प लिया। बच्चों ने खेल को फिटनेस, अनुशासन, टीम भावना और राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाने की बात कही।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बताया गया कि खेल शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक मजबूती, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बाल संसद के नेतृत्व में आयोजित ड्रिल ने भी विद्यार्थियों में अनुशासन और सामूहिक भागीदारी की भावना को मजबूत किया।

विभिन्न खेलों में बढ़ रहा भारत का गौरव

वक्ताओं ने कहा कि आज भारतीय खिलाड़ी विभिन्न खेलों में देश का नाम रोशन कर रहे हैं। क्रिकेट के अलावा शतरंज, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, शूटिंग, बॉक्सिंग, वेटलिफ्टिंग और पैरा-स्पोर्ट्स में भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।

उन्होंने विद्यार्थियों को खेलों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने और अपनी रुचि के अनुसार किसी एक खेल में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।

वक्ताओं ने कहा कि खेलों के प्रति रुचि बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। खेल के माध्यम से बच्चों में अनुशासन, सहयोग, नेतृत्व और संघर्ष करने की क्षमता विकसित होती है।

प्रार्थना और राष्ट्रगान से हुई शुरुआत

राष्ट्रीय खेल दिवस के कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की नियमित गतिविधियों के साथ हुई। विद्यार्थियों ने प्रार्थना में हिस्सा लिया। इसके बाद राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान का आयोजन हुआ।

विद्यार्थियों ने संविधान की प्रस्तावना का वाचन भी किया। विद्यालय पट्ट पर लिखे सामान्य ज्ञान की पुनरावृत्ति कराई गई। इसके बाद जेसीईआरटी रांची की ओर से भेजे गए न्यूज प्लस क्विज कंटेंट का वाचन किया गया।

इस तरह कार्यक्रम में शिक्षा, राष्ट्रभावना, सामान्य ज्ञान, अनुशासन और खेल भावना को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया।

बाल संसद ने संभाली जिम्मेदारी

कार्यक्रम में विद्यालय की बाल संसद की भी सक्रिय भागीदारी रही। बाल संसद के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने ड्रिल में हिस्सा लिया।

विद्यालय की गतिविधियों में बाल संसद की भागीदारी से बच्चों को नेतृत्व और जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिलता है। राष्ट्रीय खेल दिवस के कार्यक्रम में भी विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से हिस्सा लेकर अनुशासन और एकजुटता का परिचय दिया।

मेजर ध्यानचंद के चित्र पर पुष्पांजलि

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिवार ने मेजर ध्यानचंद के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी।

वक्ताओं ने विद्यार्थियों से कहा कि ध्यानचंद का जीवन केवल खेल उपलब्धियों के कारण ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उनका अनुशासन, समर्पण और देश के प्रति प्रेम भी युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है।

उन्होंने बच्चों से खेलों में मेहनत और निरंतर अभ्यास को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

विद्यालय में उत्साह का माहौल

राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर विद्यालय परिसर में उत्साह का माहौल रहा। विद्यार्थियों ने कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।

प्रार्थना से लेकर ड्रिल और क्विज कंटेंट के वाचन तक बच्चों ने अनुशासन के साथ अपनी भागीदारी निभाई। शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया और उन्हें खेलों के महत्व के बारे में जानकारी दी।

कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को यह संदेश दिया गया कि पढ़ाई के साथ खेल भी उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।

खेल से विकसित होती है टीम भावना

कार्यक्रम में खेलों से होने वाले लाभों पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि खेल बच्चों को टीम के साथ मिलकर काम करना सिखाता है। मैदान पर जीत और हार दोनों का सामना करने से बच्चों में धैर्य और आत्मविश्वास विकसित होता है।

खेलों के माध्यम से बच्चों को लक्ष्य निर्धारित करने, नियमित अभ्यास करने और कठिन परिस्थितियों में प्रयास जारी रखने की सीख मिलती है।

इसी कारण राष्ट्रीय खेल दिवस जैसे अवसर विद्यालयों में बच्चों को खेलों के प्रति जागरूक करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर जोर

विद्यालय के कार्यक्रम में खेल और शिक्षा को एक-दूसरे का पूरक बताया गया। शिक्षकों ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल पढ़ाई पर्याप्त नहीं है। शारीरिक गतिविधियों और खेलों में भागीदारी भी जरूरी है।

खेल बच्चों को स्वस्थ रखने के साथ उनके व्यक्तित्व विकास में भी मदद करते हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता बढ़ती है।

राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों को इन्हीं मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में विद्यालय के एचएम कन्हैया प्रसाद, वरीय सहायक शिक्षक राजेश कुमार सिन्हा, राजेश गुप्ता, शिक्षिकाएं सुषमा पांडेय, आशा कुमारी, पूनम कुमारी और रश्मि प्रकाश मौजूद रहीं।

इसके अलावा बाल संसद के प्रधानमंत्री संतोष कुमार सहित दर्जनों विद्यार्थी कार्यक्रम में शामिल हुए। शिक्षकों और विद्यार्थियों ने मिलकर मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि दी और खेल भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

राष्ट्रीय खेल दिवस का संदेश

राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को खेलों के महत्व और मेजर ध्यानचंद के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में यह बात सामने रखी गई कि खेल केवल प्रतियोगिता का माध्यम नहीं हैं, बल्कि स्वस्थ जीवन, अनुशासन, टीम भावना और राष्ट्र निर्माण से भी जुड़े हैं।

विद्यालय के विद्यार्थियों ने खेलों को अपने जीवन का हिस्सा बनाने और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

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