विश्वविद्यालय नागपुरी विभाग में मनाई गई डॉ. बीपी केशरी की दसवीं पुण्यतिथि
रांची। जिंदगी जिंदाबाद
Dr. B.P Keshri : झारखंड आंदोलन के प्रखर बुद्धिजीवी, नागपुरी कवि, लेखक, विचारक एवं आंदोलनकारी Dr. B.P Keshri की दसवीं पुण्यतिथि के अवसर पर शुक्रवार, 14 अगस्त को मोरहाबादी स्थित जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय के नागपुरी विभाग में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। विभाग के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश नन्द तिवारी ने कहा कि Dr. B.P Keshri केवल नागपुरी भाषा-साहित्य के विद्वान नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता और पहचान के सजग प्रहरी थे। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन को वैचारिक आधार देने में Dr. B.P Keshri का योगदान अविस्मरणीय है। उनका साहित्य और चिंतन आने वाली पीढ़ियों को अपनी भाषा, संस्कृति और पहचान के प्रति जागरूक करता रहेगा।

डॉ. बीरेन्द्र कुमार महतो ने कहा कि Dr. B.P Keshri ने झारखंड आंदोलन को केवल राजनीतिक आंदोलन के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे भाषा, संस्कृति, इतिहास और अस्मिता से जोड़कर व्यापक वैचारिक आंदोलन का स्वरूप दिया। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय डॉ. रामदयाल मुंडा के साथ मिलकर डॉ. केशरी ने झारखंड आंदोलन को बौद्धिक दिशा प्रदान की। नागपुरी भाषा-साहित्य के विकास में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
डॉ. रीझु नायक ने कहा कि Dr. B.P Keshri का व्यक्तित्व बहुआयामी था। उन्होंने लेखन और वैचारिक हस्तक्षेप के माध्यम से झारखंड की सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना को मजबूत किया। आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी उनके साहित्य और विचारों का गंभीरता से अध्ययन करे।
डॉ. मनोज कच्छप ने कहा कि Dr. B.P Keshri का जीवन संघर्ष, सृजन और सामाजिक प्रतिबद्धता का उदाहरण है। उन्होंने झारखंडी भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण तथा विकास के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। उनकी रचनाएं झारखंड की सामूहिक स्मृति और सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
वक्ताओं ने कहा कि Dr. B.P Keshri की दसवीं पुण्यतिथि केवल उन्हें स्मरण करने का अवसर नहीं, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात करने और झारखंडी भाषाओं-साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन के संकल्प का भी अवसर है।
कार्यक्रम में सेमेस्टर वन एवं सेमेस्टर फोर्थ के नीलम कुमारी, शोभा कुमारी, चन्दा देवी, प्रभा सुरिन, ऋषि, काजल कुमारी, सोहावती कुमारी, वीणा कुमारी, सीता बोदरा, रानी कुंकल, गीता पूर्ति, महावीर उरांव, राकेश रोशन उरांव सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन Dr. B.P Keshri के विचारों और योगदान को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।
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